कृष्णकाव्य धारा और रामकाव्य धारा प्रश्नोतरी

*रामकाव्य और कृष्णकाव्य*
केवल कृष्ण घोड़ेला

महत्वपूर्ण पंक्तियाँ

1.गोद लिए हुलसी फिरे तुलसी सो सुत होय,
पंक्ति किसकी हे?
~~~रहीम~~~
2~ज्ञान भक्ति का विसद् विवेचन रामचरितमानस
के किस कांड में हे?
~~~उत्तर कांड~~
3~तुलसी की भक्ति किस प्रकार की है?
~~~दास्य भाव~~~
4~वृंदावन में मीरा बाई जी की भेंट किस
कृष्ण भक्त से हुई?
~~~जीव् गोस्वामी
5.तुलसीदास ने सबसे पहले रामचरितमानस
किसको सुनाया?
~~~रसखान~~~
6~सर्वाधिक तर्कशील गोपिया किस कवि की है?
~~~नन्ददास~~~
7~सूरदास ने कृष्ण के किस रूप का
चित्रण किया?
~~~लोकरंजक~~~
8~इन मुसलमान हरिजन पै कोटिन हिन्दू वारिए,
भारतेंदु जी ने यह पंक्ति किस कवि के लिए की?
~~~रसखान~~~
9~सूरसागर का काव्य रूप क्या है?
~~~प्रबन्ध काव्य~~~~
10~ मोरपखा सिर ऊपर राखिहो गूंज की माल
गरे पहिरोगी, यह पंक्ति किस कवि की है?
~~~रसखान~~~

रामायण से सम्बंधित रचनाएं:-

~बरवै रामायण- तुलसीदास
~रामायण महानाटक-प्राणचंद चौहान
~अध्यात्म रामायण-माधवदास चारण
~पौरुषेय रामायण- नरहरि बारहट
~सूर रामायण-सूरदास
~कृष्ण रामायण-धनारंग दुबे

*दृष्टकूट*
ऐसी कविता को कहते हैं जिसका अर्थ केवल शब्दों के वाचकार्थ से न समझा जा सके बल्कि प्रसंग या रूढ़ अर्थों से जान जाय।

*उदाहरण*
-हरिसुत पावक प्रगट भयो री।मारुत सुत भ्राता पितु प्रोहित ता प्रतिपालन छाँड़ि गयो री।हरसुत वाहन ता रिपु भोजन सों लागत अँग अनल भयो री।मृगमद स्वाद मोद नहिं भावत दधिसुत भानु समान भयो री।वारिधि सुतपति क्रोध कियो सखि मेटि धकार सकार लयो री।सूरदास प्रभु सिंधुसुता बिनु कोपि समर कर चाप लयो री। — (सूरदास)

पहेली को भी दृष्टकूट कहा जाता है।

व्याख्या

शब्द, संस्कृत के “दृष्ट’ तथा “कूट’ शब्दों से बना है, जिसका साहित्यिक अर्थ है ‘जो सहज रूप से देखने सुनने पर समझा न जा सके’। तिल की ओट पहाड़, दृष्टिछलन इत्यादि, अर्थात्‌ साहित्य के समर्थक अंग श्लेषादि शब्दालंकारों से आवृत ऐसे अनेकार्थवाची शब्दों की योजना, जिनका अर्थ उसके शब्दों की अपेक्षा रूढ़ि वा प्रसंग से जाना जा सके। वस्तुत: इस यौगिक शब्द “दृष्टकूट’ की अर्थगूढ़ता तथा जटिलता ही उसकी विशेषता है, जो अक्षरों में उलझी होने के कारण दुर्बोध तथा तद्गत शब्दों की भूलभुलइयों में छिपी रहती है।

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1.अवध विलास रचना है
👉लालदास
2. सत्यनारायण कविरत्न की किस रचना में माता यशोदा को भारत माता के रूप में चित्रित किया गया है?
👉 भ्रमरदूत
3.तुलसी चरित किसकी रचना है?
👉रघुवरदास
4. रामचरितमानस की सबसे बड़ी विशेषता है
👉कवि द्वारा कथा के मार्मिक स्थलों की पहचान करना
5. “भारतीय जनता का प्रतिनिधि कवि यदि किसी को कह सकते हैं तो तुलसीदास को यह कथन किसका है?
👉आचार्य रामचंद्र शुक्ल
6. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास का जन्म स्थान माना है?
👉राजापुर
7.पौरुषेय रामायण किसकी रचना है?
👉नरहरि वापट
8.”जा पर दीनानाथ ढरै” पंक्ति किसकी है?
👉सूरदास
9. सूरदास के काव्य की मौलिक विशेषता है
👉नवीन प्रसंगों की उद्भावना
10.गोविंद भाष्य की रचना किसने की ?

👉बलदेव विद्याभूषण

आदिकाल विशेष ट्रिक

बृजभूषण जी
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11. विरहणी बावरी सी भाई- 👉मीरा बाई
12 .तुलसीदास ने सर्वप्रथम राम चरित मानस रसखान जी को सुनाई ऐसा – मुल गोसाई चरित मैं विदित है
13.शुक्ल जी के अनुसार, मीरा के पूछने पर तुलसीदास जी ने मीरा को विनयपत्रिका का एक पद भेजा था- जाके प्रिय न राम वेदेही , तजहिं ताहि कोटि वेरी सम जदिप परम सनेही।
14. ब्रज काव्य मैं सूरदास के बाद नंबर 2 कवि –
👉नंददास
15 सूरदास ने श्रृंगारी एवं कूट पदों की रचना की
👉विद्यापति की पद्यति पर की।
16. राधा कृष्ण को माली न मलिन के रूप में किस बुक मैं – 👉प्रेम वाटिका
17. सुर ने खुद को चंद्रवरदाई का वंसज किस में माना?
👉 साहित्य लहरी
18. कृष्ण भक्त कवियों मैं किसके सबसे अधिक ग्रन्थ-
👉 ध्रुवदास
19. तत्त्वदीप निबंध रचना किसकी है?
👉 बल्लभाचार्य
20. तुलसी से पूर्व राम भक्त कवियों मैं प्रमुख है
👉 विष्णुदास।

 

कृष्णकाव्य धारा और रामकाव्य धारा प्रश्नोतरी

डॉ मीनाक्षी दुबे – – –
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21 तुलसी की प्रथम रचना –
👉वैराग्य संदीपनी
22 तुलसी की अंतिम रचना –
👉कवितावली
23-रामचरित मानस की रचना
👉2साल 7महीने26दिन
24-तुलसी के समकालीन कवि – 👉रहीम , रसखान , नाभादास
25 द्वादशयश रचना – ‘
👉चतुर्भुज दास

प्रियंका जी खण्डेलवाल
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26.🌞विनय पत्रिका- अंतिम पत्रिका (तुलसी दास जी)
27.🌞 अकबर के शासन काल के समकालीन कहे जाते है
28.🌞रामबोला से तुलसीराम नाम …अंनतानंद ने रखा
29.🌞एनसाइकलोपिडिया ऑफ रिलीजन एंड एंथिस में ग्रियर्सन ने तुलसी जी की 12 रचनाओ का उल्लेख किया है
30.🌞रामचरितमानस मे राम को विष्णु का अवतार माना गया है
31🌞राजापुर के मंदिर में अयोध्याकांड की प्रति लिखी थी
प्रवीण कुमार द्विवेदी
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32 सूरसागर रचना शिल्प की दृष्टि से किस प्रकार का काव्य है
👉गेय मुक्तक काव्य
33 रामायण महानाटक ‘ के रचनाकार
👉प्राणचंद चौहान
34 रामचरितमानस’ के पहले टीकाकार
👉 रामचरण दास
35 भरत मिलाप और अंगद फैज के रचनाकार
👉 ईश्वरदास
36 श्याम सगाई, सिद्धांत पंचाध्यायी के रचनाकार
👉 नंददास
**************कृष्णकाव्य धारा और रामकाव्य धारा प्रश्नोतरी
मनोज कुमार जी
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37.  भक्ति काल में गीति काव्य परंपरा की शुरुआत की गयी
👉 जयदेव और विद्यापति

38. कृष्ण-काव्य-धारा के मुख्य प्रवर्तक हैं
👉 वल्लभाचार्य

39.  पुष्टिमार्ग का प्रचार-प्रसार किया
👉 वल्लभाचार्य ने

40. पुष्टिमार्ग का अर्थ
👉 भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से उनकी कृपा और अनुग्रह की प्राप्ति करना।

41. बल्लभ सम्प्रदाय का सिद्धांत पक्ष शुद्धाव्दैत और साधना पक्ष को ‘पुष्ट मार्ग’ कहा जाता है | पुष्ट शब्द भागवत पुराण के ‘पोषणम् तद्नुग्रह’ से लिया गया है | भगवत या अनुग्रह कृपा को पुष्ट कहा जाता है |

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गोपी जी
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_*रामभक्ति शाखा से जुड़े विशेष तथ्य*_

42.कलिकाल का वाल्मीकि *नाभादास* ने तुलसीदास को कहा

43.महात्मा बुद्ध के बाद सबसे बड़ा लोकनायक :- *जॉर्ज ग्रियर्सन*

44.मुगल काल का सबसे बड़ा आदमी :- *विंसेंट स्मिथ*

45.लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय की विराट चेष्टा लेकर आया हो :- *हजारी प्रसाद द्विवेदी*

46.हिंदी साहित्य के इतिहास में सबसे बड़ा और शिरोमणि कवि तुलसीदास है :- *आचार्य रामचंद्र शुक्ल*

47.निर्गुण धारा के संतों की वाणी में किस प्रकार लोग धर्म की अवहेलना हुई हैं सगुण धारा में कबीर दादू आदि के लोग धर्म विरोधी स्वरूप को आदि किसी ने पहचाना तो गोस्वामी जी ने *आचार्य रामचंद्र शुक्ल*
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48.*राम काव्य धारा और कृष्ण काव्य धारा में अंतर*
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1⃣राम काव्यधारा
प्रबंधात्मक धारा
1⃣कृष्ण काव्यधारा
मुक्तक काव्यधारा

1⃣राम काव्यधारा
अवधी भाषा की प्रधानता
1⃣कृष्ण काव्यधारा
ब्रजभाषा की प्रधानता

1⃣राम काव्यधारा
राम भक्ति सवर्णो को स्थान प्रदान करती है
1⃣कृष्ण काव्यधारा
कृष्ण काव्यधारा अवर्णों को स्थान प्रदान करती है

1⃣राम काव्यधारा
राम का रूप लोकहितकारी है
1⃣कृष्ण काव्यधारा
कृष्ण का रूप लोकरंजनकारी है

_48.कृष्ण का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद के आठवें मंडल के आठवें सूक्त के रचयिता के रूप में मिलता हैं_

_49.संस्कृत काव्य धारा में कृष्ण लीला का उल्लेख अश्वघोष की ब्रह्मचरित्र में हैं_

_50.षट्ट संदर्भ ग्रंथ :- इसमें सनातन गोस्वामी ने श्री कृष्ण लीलाओं को साहित्यशास्त्र की रस परिपाटी में प्रतिष्ठित किया गया_

*पुष्टिमार्ग (वल्लभाचार्य )*

_51.*वल्लभाचार्य के अनुसार पुष्टि के तीन मार्ग हैं*_

1 मर्यादा मार्ग (भक्ति के विधि निषेध का पालन करना)

2 प्रवाह मार्ग (ग्रहस्थ होता है सांसारिक कार्यों के साथ-साथ भक्ति)

3 पुष्टिमार्ग (सर्वस्व भगवान पर निर्भर)

52.*वल्लभ संप्रदाय में कृष्ण लीलाओं का वर्णन करने का प्रयोजन क्या था*

स्वयं लीला ही कृष्ण लीला का प्रयोजन था

सवांत सुखाय हेतु भक्ति करना

53.पुष्टिमार्ग को रागानुराग भक्ति कहा जाता है

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हेमसिंह जी
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तुलसीदास जी के बारे में कथन
54.भक्तिकाल का सुमेरु -👉नाभादास
54.कलिकाल का वाल्मीकि -👉नाभादास
55.मानस का हंस –
👉अमृतलाल नागर
56.जातीय कवि -रामविलास शर्मा
57.कविता करके तुलसी न लसे, कविता ही लसी पा तुलसी की कला –
👉हरिऔध

रामकाव्य
58.खेती न किसान को भिखारी को न भीख –
👉कवितावली
59.जाके प्रिय न राम वैदेही
👉-विनयपत्रिका
60.बंदउ गुरू पद पदुम परागा -👉रामचरितमानस
61.गोरख जगायो जोग ,भगति भगायो भोग –
👉कवितावली
62.नाम रूप दुइ ईस उपाधी
👉-रामचरितमानस
63.रामराम भयो सगुन, राजा राम जगत् विजयी हैं –
👉विनयपत्रिका
64.ईश्वर अंश जीव अविनासी
👉-रामचरितमानस

विशेष*****

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20 रामलला , 64 पर्वत चढ़े ।
216 जानकी , 69 बरै।
कृष्ण गीता में 61 पद रचे।
330 गीत 7खंडों में बजे।
44 हनुमान पर 183 कविता बने।

*तुलसी के ग्रंथों में छंदों की संख्या*
रामलाल नहछू – 20 छंद
पार्वती मंगल – 64 छंद
जानकी मंगल – 216छंद
बरवै रामायण — 69 छंद
कृष्ण गीतावली –61 छंद
गीतावली — 330 छंद (7)खंड
कवितावली – 183 छंद
हनुमान बाहुक — 44 छंद
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