नागार्जुन कवि परिचय

📜साहित्य विशेष 📜
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★केेवल कृष्ण घोड़ेला &संजय धौलपुरिया
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नागार्जुन
【1911-1998】

★मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र

★’आधुनिक युग का कबीर’

★मैथिली भाषा ने “यात्री” नाम से लिखते थे।

★बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद “नागार्जुन” नाम पड़ा।

★अंधविश्वास के कारण इनको “ढक्कन “भी कहा जाता ह।

★प्रगतिवादी काव्य के सशक्त हस्ताक्षर।

★दीपक पत्रिका के संपादक रहे ।

“मजदूरों के हिमायती कवि ।”

★पत्रहीन नगनगाछ(मैथिली) रचना पर साहित्य अकादमी पुरस्कार

★इन्होंने मैथिली साहित्यकार के रूप में रूस की यात्रा की।

★इंदिरा गांधी की राजनीति को केंद्र बनाकर उन पर आरोप लगाकर
काव्य सर्जन किया।

★स्वतंत्रता के बाद केवल कविताओं के लिए जेल जाने वाले हिंदी कवियों म सिर्फ “नागार्जुन ” ही ह ।

★व्यंग्यपरक रचनाओं के कुशल शिल्पी
माने जाते ह ।

★कबीर के उपरान्त जनविरोधी शक्ति को सर्वाधिक खुली चुनोती देने वाले साहित्यकार नागार्जुन ही ह ।

★प्रथम हिंदी कविता -राम के प्रति (1935 विश्वबन्धु पत्रिका में )

नागार्जुन कवि परिचय

★प्रथम मैथिली कविता -वैदेह

★भूमिजा- इनकी लम्बी कविता ह ।

★बांगला काव्य – मिलिट्री का बूढ़ा घोडा

★प्रमुख कृतियां-
● युगधारा
●सतरंगे पँखो वाली
●प्यासी पथराई आँखे
●भस्मान्कुर
●तुमने कहा था।

★प्रसिद्ध कविताये:
●प्रेत का बयान
●अकाल और उसके बाद
●कालीमाई

★उपन्यास:
●रतिनाथ की चाची
●वरुण के बेटे
●बलचनमा
(बलचनामा उपन्यास “मैला आँचल” से पूर्व प्रकाशित हुआ था ,इसमें आंचलिकता की कमी नही फिर भी इसे प्रथम आँचलिक उपन्यास नही माना गया।)

★नागार्जुन की जीवनी – बाबूजी
(शोभाकांत ने लिखी)

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