Month: May 2018

हिन्दी में निबन्धों के प्रकार

हिन्दी में निबन्धों के प्रकार आइए  आज निबन्धों के प्रकार के बारे में जानतें है प्रत्येक हिन्दी मित्र के लिए यह जानना अति आवश्यक है   हिन्दी निबन्धों के प्रकार डाॅ. गणपति चन्द्र गुप्त ने निबन्ध के पांच प्रकार (भेद) बताए हैंः 1. विचारात्मक निबन्ध 2. भावात्मक निबन्ध 3. वर्णनात्मक निबन्ध 4. विवरणात्मक निबन्ध 5. […]

सूरदास का जीवन परिचय और रचनाएँ

सूरदास का जीवन परिचय और रचनाएँ आज हम जानेंगे सूरदास का जीवन परिचय और रचनाएँ हिंदी-साहित्य में कृष्णभक्ति की अजस्र धारा को प्रवाहित करने वाले भक्त कवियों में सूरदास का स्थान मूर्द्धन्य उनका जीवनवृत्त उनकी अपनी कृतियों से आंशिक रूप में और बाह्य साक्ष्य के आधार पर अधिक उपलब्ध होता है। इसके लिए ’भक्तमाल’ (नाभादास), […]

विद्यापति का संक्षिप्त परिचय

विद्यापति का संक्षिप्त परिचय विद्यापति (1360-1448 ई.) मिथिला के राजा कीर्तिसिंह और शिवसिंह के दरबारी कवि थे, वे संस्कृत, अपभं्रश और मैथिली भाषा के विद्वान् थे, उनकी रचनाओं में ’कीर्तिलता’, ’कीर्तिपताका’ और ’पदावली’ उल्लेखनीय हैं, इनमें प्रथम दो रचनाएं अपभ्रंश/अवहट्ठ में हैं तथा ’पदावली’ देश भाषा में, डाॅ. बच्चन सिंह ने ’पदावली’ को देश भाषा […]

आदिकाल टेस्ट सीरीज 201 से 250 तक

आदिकाल टेस्ट सीरीज 201 से 250 तक:- हिन्दी साहित्य के बेहतरीन वीडियो के लिए यहाँ क्लिक करें  201.बीसलदेव रासो का प्रधान रस~~ श्रृंगार रस 202.पृथ्वीराज रासो के वृहद रुपांतरण में कुल कितने सर्ग है~~69 203.’गोरखबानी’ के संपादक ~~पीतांबर दत्त बड़थ्वाल 204.नारी निंदा किस संप्रदाय में मिलती है~~ नाथपंथ में 205.नाथ संप्रदाय की सबसे बड़ी कमजोरी […]

प्रेमचन्द पूर्व हिन्दी उपन्यास यात्रा 

प्रेमचन्द पूर्व हिन्दी उपन्यास यात्रा                   हिन्दी मित्रो आज हम बात करेंगे प्रेमचन्द पूर्व हिन्दी उपन्यास यात्रा  की ***1882 से लगभग 1916 ई. तक के युग को हिन्दी उपन्यास में प्रेमचन्द पूर्व युग के नाम से जाना जाता है। यह हिन्दी उपन्यास के विकास का आरम्भिक काल है। प्रेमचन्द […]

आधुनिक काल में भारतेन्दु मंडल के चर्चित लेखकगण

आधुनिक काल में भारतेन्दु मंडल के चर्चित लेखकगण भारतेंदु हरिश्चंद्रः– कविवर हरिश्चंद्र (1850-1885) इतिहासप्रसिद्ध सेठ अमीचंद की वंश-पंरपरा में उत्पन्न हुए थे। उनके पिता बाबू गोपालचंद्र ’गिरिधरदास’ भी अपने समय के प्रसिद्ध कवि थे। हरिश्चंद्र ने बाल्यावस्था में ही काव्य-रचना आंरम्भ कर दी थी और अल्पायु में कवित्व प्रतिभा और सर्वतोमुखी रचना क्षमता का ऐसा […]

भक्तिकाल में सूफीकाव्य धारा की विशेषताएं

भक्तिकाल में सूफीकाव्य धारा की विशेषताएं भक्तिकाल में सूफीकाव्य धारा की विशेषताएं सूफी काव्यधारा की विशेषताएँः- (क) भावगत विशेषताएँ- * सूफी दर्शन ने इस्लाम की पारम्परिक धारणा में संशोधन करते हुए ’’तसत्वुफ’’ के दर्शन को मान्यता दी।  *मानवीय प्रेम को जीवन के आधारभूत मूल्य के रूप में स्थापित किया । * इस धारा के […]

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