महावीर प्रसाद द्विवेदी

महावीर प्रसाद द्विवेदी (Mahavir Prasad Dwivedi) दोस्तो आज की इस पोस्ट मे हम  महावीर प्रसाद द्विवेदी  जी के बारे मे विस्तार से जानेंगे  इसलिए (Therefore) आप इस पोस्ट को अच्छे से पढ़िएगा ⇒जन्मकाल – 1864 ई. ⇒ जन्मस्थान – ग्राम – दौलतपुर, जिला – रायबरेली (उ.प्र.) ⇒ मृत्युकाल – 21 दिसम्बर, 1938 ई. (रायबरेली Read more…

डॉ. नगेन्द्र सम्पूर्ण लेखक परिचय

दोस्तो आज हम जानेंगे हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक डॉक्टर नगेन्द्र जी के बारे में डॉ. नगेन्द्र सम्पूर्ण लेखक परिचयइनका जन्म-9 मार्च, 1915 को अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश में हुआ था इनका निधन 27 अक्टूबर, 1999 को हुआ पुरस्कार -साहित्य अकादमी पुरस्कार (‘रस-सिद्धांत’ के लिए 1965 में)– इन्होंने 1948 ईस्वी में रीतिकाव्य की भूमिका Read more…

राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद

दोस्तों आज हम राजा शिवप्रसाद सितारे ‘हिंद ‘के बारे में जानेंगे इनका जन्म 1824 ईसवी में हुआ था दोस्तों प्रारंभिक खड़ी बोली के विकास में योगदान की बात होती है तो राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद को याद किया जाता है उन्होंने खड़ी बोली व नागरी लिपि के अस्तित्व की लड़ाई Read more…

भारतेन्दु हरिश्चंद्र जीवन परिचय

भारतेन्दु हरिश्चंद्र जन्मकाल – 9 सितम्बर 1850 ई. (1907 वि.) जन्मस्थान – काशी (एक सम्पन्न वैश्य परिवार में ) मृत्युकाल – 6 जनवरी 1885 ई. (1942 वि.) नोट:- मात्र 35 वर्ष की अल्पायु में इनका निधन हो गया था। पिता का नाम – बाबू गोपालचन्द्र गिरिधरदास (ये इतिहास प्रसिद्ध सेठ Read more…

कृष्णा सोबती जीवन परिचय

कृष्णासोबती जीवन परिचय जन्म – 18 फरवरी 1925 ई० जन्म स्थान – गुजरात ( अब पाकिस्तान में ) मृत्यु -25 जनवरी 2019 संयमित अभिव्यक्ति और सुथरी रचनात्मकता से अपने लेखन का सृजन करने वाली कृष्णा सोबती का जन्म पाकिस्तान के गुजरात प्रांत में 18 फरवरी 1925 ई० को हुआ था Read more…

विद्यानिवास मिश्र जीवन -परिचय

विद्यानिवास मिश्र जन्म -28 जनवरी, 1926 जन्म भूमि- गोरखपुर, उत्तर प्रदेश मृत्यु -14 फ़रवरी, 2005 कर्म भूमि- भारत कर्म-क्षेत्र – निबन्ध लेखन। भाषा -हिन्दी विद्यालय -‘इलाहाबाद विश्वविद्यालय’ प्रसिद्धि – ललित निबन्ध लेखक। विशेष योगदान- विद्यानिवास हिन्दी की प्रतिष्ठा हेतु सदैव संघर्षरत रहे, मॉरीशस से सूरीनाम तक अनेकों हिन्दी सम्मेलनों में Read more…

रामचन्द्र शुक्ल महत्वपूर्ण कथन

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के महत्वपूर्ण कथन ​आचार्य रामचंद्र शुक्ल के रीतिकालीन कवियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण कथन- “इनकी भाषा ललित और सानुप्रास होती थी”- चिंतामणि त्रिपाठी के लिए “भाषा चलती होने पर भी अनुप्रासयुक्त होती थी”- बेनी के लिए “इस ग्रंथ को इन्होंने वास्तव में आचार्य के रूप में लिखा Read more…

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