हिंदी रिपोर्ताज का विकास, जनक और प्रमुख रचनाएँ | Hindi Reportage

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026

हिंदी रिपोर्ताज का विकास और प्रमुख रचनाएँ: संपूर्ण अध्ययन नोट्स

हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास अपने भीतर कई महत्वपूर्ण विधाओं और परिवर्तनों को समेटे हुए है। इन सभी विधाओं में ‘रिपोर्ताज’ एक ऐसी आधुनिक और जीवंत विधा है, जिसने पत्रकारिता और साहित्य का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौर से उपजी यह विधा आज न केवल गद्य का एक प्रमुख अंग बन चुकी है, बल्कि UGC NET, TGT, PGT, और RPSC जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप भी हिंदी साहित्य की परीक्षाओं में सफलता हासिल करना चाहते हैं, तो ‘हिंदी रिपोर्ताज के विकास’ और इसके प्रमुख रचनाकारों का यह संपूर्ण अध्ययन आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि हिंदी में रिपोर्ताज लेखन की शुरुआत कैसे हुई और इसके प्रमुख मील के पत्थर कौन-से हैं।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. हिंदी रिपोर्ताज का परिचय और उद्भव

  2. रिपोर्ताज के जनक (विश्व और हिंदी संदर्भ)

  3. हिंदी के प्रमुख रिपोर्ताज और उनके रचनाकार

  4. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण निष्कर्ष

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1. हिंदी रिपोर्ताज का परिचय और उद्भव

  • शब्द की उत्पत्ति: ‘रिपोर्ताज’ मूल रूप से एक फ्रांसीसी शब्द है।

  • आविर्भाव: गद्य विधा के एक स्वतंत्र रूप में इसका आविर्भाव द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास हुआ था।

  • विश्व में जनक: ‘रिपोर्ताज’ विधा के जनक के रूप में रूसी साहित्यकार इलिया एहरेनवर्ग को स्वीकार किया जाता है।

  • प्रारंभिक रचना: रिपोर्ताज शैली में चंडी प्रसाद सिंह द्वारा लिखित ‘युवराज की यात्रा’ (1897) प्रिंस ऑफ़ वेल्स की भारत यात्रा का विस्तृत और व्यौरेवार वर्णन है।

2. हिंदी में रिपोर्ताज का आरंभ

  • हिंदी में जनक: हिंदी में रिपोर्ताज लेखन का जनक शिवदान सिंह चौहान को माना जाता है।

  • प्रथम रिपोर्ताज: सुमित्रानंदन पंत द्वारा संपादित ‘रूपाभ’ पत्रिका के दिसंबर 1938 अंक में प्रकाशित शिवदान सिंह चौहान का ‘लक्ष्मीपुरा’ हिंदी का प्रथम रिपोर्ताज माना जाता है।

3. हिंदी के प्रमुख रिपोर्ताज और लेखक

परीक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण रिपोर्ताज और उनके रचनाकारों की सूची नीचे दी गई है:

लेखक / रचनाकारप्रमुख रिपोर्ताज
शिवदान सिंह चौहान(1) लक्ष्मीपुरा, (2) मौत के खिलाफ जिन्दगी की लड़ाई
रांगेय राघवतूफानों के बीच (1941)
प्रकाश चन्द्र गुप्त(1) स्वराज्य भवन, (2) अल्मोड़े का बाजार, (3) बंगाल का अकाल
उपेन्द्रनाथ अश्कपहाड़ों में प्रेममय संगीत
रामनारायण उपाध्याय(1) गरीब और अमीर पुस्तकें (1958), (2) नववर्षांक समारोह में
भदन्त आनन्द कौशल्यायनदेश की मिट्टी बुलाती है
शिवसागर मिश्रवे लड़ेंगे हजार साल (1966)
धर्मवीर भारतीयुद्ध यात्रा (1972)
कन्हैयालाल मिश्र ’प्रभाकर’क्षण बोले कण मुस्काए
शमशेर बहादुर सिंहप्लाट का मोर्चा (1952)
फणीश्वरनाथ रेणु

(1) ऋणजल धन जल (1977), (2) नेपाली क्रांति कथा (1978),

 

(3) श्रुत-अश्रुत पूर्व (1984), (4) एकलव्य के नोट्स

विवेकी राय(1) जुलूस रुका है (1977), (2) बाढ़! बाढ़!! बाढ़!!!
डाॅ. भगवतशरण उपाध्यायखून के छींटे
रामकुमार वर्मापेरिस के नोट्स
कैलाश नारदधरती के लिए
जगदीश प्रसाद चतुर्वेदीचीनियों द्वारा निर्मित काठमाण्डू-ल्हासा सड़क
निर्मल वर्माप्राग: एक स्वप्न
सती कुमारक्या हमने कोई षड्यंत्र रचा था?
श्रीकांत वर्मामुक्ति फौज
कमलेश्वरक्रान्ति करते हुए आदमी को देखना
चंडी प्रसाद सिंहयुवराज की यात्रा (1897)

निष्कर्ष: हिंदी साहित्य की इस आधुनिक गद्य विधा से प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC NET/JRF, TGT, PGT और RPSC) में क्रमानुसार सजाने, प्रथम रिपोर्ताज या रचनाकार से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इन तथ्यों को अच्छी तरह तैयार कर लें।

  • 🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि

    क्र.सं.लेखक / कवि का नाममुख्य विशेषता / कालइंटरनल लिंक (URL)
    1.भारतेंदु हरिश्चंद्रआधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युगलिंक देखें(उदाहरण यूआरएल)
    2.महावीर प्रसाद द्विवेदीद्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकारलिंक देखें
    3.जयशंकर प्रसादछायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककारलिंक देखें
    4.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेतालिंक देखें
    5.सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि / छायावादलिंक देखें
    6.महादेवी वर्माआधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्रीलिंक देखें
    7.प्रेमचंद (धनपत राय)उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुषलिंक देखें
    8.अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तकलिंक देखें
    9.रामधारी सिंह ‘दिनकर’राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कविलिंक देखें
    10.कृष्णा सोबतीआधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षरलिंक देखें

ये भी अच्छे से जानें ⇓⇓

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