आचार्य शुक्ल के कथन आदिकाल

आचार्य शुक्ल के कथन आदिकाल

*आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के महत्वपूर्ण कथन* पार्ट -2 आचार्य शुक्ल के कथन आदिकाल *आदिकाल के सम्बन्ध में*👉🏼”हिन्दी साहित्य का आदिकाल संवत् 1050 से लेकर संवत् 1375 तक अर्थात महाराज भोज के समय से लेकर हम्मीरदेव के समय के कुछ पीछे तक माना जा सकता है।” 👉🏼”जब तक भाषा बोलचाल में

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आदिकाल प्रश्नोतरी 251 से 300

आदिकाल प्रश्नोतरी 251 से 300 251.उलटवासियों का पूर्व रूप हमें किन की भाषा में मिलता है~~ सिद्धों के 252.गेय पदों की परंपरा किसने प्रचलित की थी~~ सिद्धों ने 253.आचार्य शुक्ल ने विद्यापति को किस प्रकार का कवि माना है~~ शुद्ध श्रंगारी 254.रास परंपरा की प्रथम रचना~~ भरतेश्वर बाहुबली रास 255.हिंदी

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आदिकाल टेस्ट सीरीज 201 से 250 तक

आदिकाल टेस्ट सीरीज 201 से 250 तक

आदिकाल टेस्ट सीरीज 201 से 250 तक:- हिन्दी साहित्य के बेहतरीन वीडियो के लिए यहाँ क्लिक करें  201.बीसलदेव रासो का प्रधान रस~~ श्रृंगार रस 202.पृथ्वीराज रासो के वृहद रुपांतरण में कुल कितने सर्ग है~~69 203.’गोरखबानी’ के संपादक ~~पीतांबर दत्त बड़थ्वाल 204.नारी निंदा किस संप्रदाय में मिलती है~~ नाथपंथ में 205.नाथ

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आदिकाल सुपर 100 सीरीज़ -1

आदिकाल सुपर महत्वपूर्ण 100 सीरीज़ -1

आदिकाल सुपर 100 सीरीज़ -1 आदिकाल सुपर 100 सीरीज़ -1 1.आचार्य शुक्ल ने आदिकाल में देशभाषा काव्य में कितनी पुस्तकों की संख्या मानी है~~82.” जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब ही साहित्य हैं “यह माना है~~ शुक्ल3.” भाषा सर्वेक्षण “के रचयिता है~~ जॉर्ज ग्रियर्सन4. पृथ्वीराज रासो कितने प्रकार के छंदों

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