संधि || हिंदी व्याकरण || sandhi hindi grammar ||

संधि का शाब्दिक अर्थ है – योग अथवा मेल। अर्थात् दो ध्वनियों या दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को ही संधि(sandhi hindi grammar) कहते हैं।

हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक : 

स्वर व्यंजन , शब्द भेद,  उपसर्ग  ,कारक , क्रिया, वाच्य , समास ,मुहावरे , विराम चिन्ह

संधि(sandhi)

संधि की परिभाषा –

जब दो वर्ण पास-पास आते हैं या मिलते हैं तो उनमें विकार उत्पन्न होता है अर्थात् वर्ण में परिवर्तन हो जाता है। यह विकार युक्त मेल ही संधि कहलाता है।

कामताप्रसाद गुरु के अनुसार, ’’दो निर्दिष्ट अक्षरों के आस-पास आने के कारण उनके मेल से जो विकार होता है, उसे संधि कहते हैं।’

श्री किशोरीदास वाजपेयी के अनुसार, ’’जब दो या अधिक वर्ण पास-पास आते हैं तो कभी-कभी उनमें रूपान्तर होता है। इसी रूपान्तर को संधि कहते हैं।’

संधि -विच्छेद क्या होता है ?

 

संधि -विच्छेद – शब्दों के मेल से उत्पन्न ध्वनि परिवर्तन को ही संधि कहते हैं। परिणाम स्वरूप उच्चारण एवं लेखन दोनों ही स्तरों पर अपने मूल रूप से भिन्नता आ जाती है। अतः उन शब्दों को पुनः मूल रूप में लाना ही संधि विच्छेद कहलाता है।

जैसे –

दो शब्द           वर्ण =  मेल    =    संधि युक्त शब्द
महा + ईश       आ + ई       =     महेश

यहाँ (आ + ई) दो वर्णों के मेल से विकार स्वरूप ’ए’ ध्वनि उत्पन्न हुई और संधि का जन्म हुआ।

संधि विच्छेद के लिए पुनः मूल रूप में लिखना होगा।

संधि युक्त शब्द संधि विच्छेद

जैसे –

महेश       –    महा +  ईश
मनोबल    –    मनः + बल
गणेश      –    गण + ईश

संधि के तीन भेद हैं –

संधि के भेद(sandhi ke bhed)

 

  • स्वर संधि
  • व्यंजन संधि
  • विसर्ग संधि

(अ) स्वर संधि (swar sandhi)

दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार स्वर संधि कहलाता है। स्वर संधि के पाँच भेद हैं –

1. दीर्घ संधि(deergh sandhi)

दो समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। यदि ’अ’ ’आ’, ’इ’, ’ई’, ’उ’, ’ऊ’ के बाद वे ही लघु या दीर्घ स्वर आएँ तो दोनों मिलकर क्रमशः ’आ’ ’ई’ ’ऊ’ हो जाते हैं |

दीर्घ संधि के उदाहरण:

अ + अ = आ                    अन्न + अभाव = अन्नाभाव

अ + आ = आ                   भोजन + आलय = भोजनालय

आ + अ = आ                   विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
आ + आ = आ                  महा + आत्मा = महात्मा
इ + इ = ई                      गिरि + इंद्र = गिरींद्र
ई + इ = ई                      मही + इंद्र = महींद्र
इ + ई = ई                      गिरि + ईश = गिरीश
ई + ई = ई                      रजनी + ईश = रजनीश
उ + उ = ऊ                     भानु + उदय = भानूदय
उ + ऊ = ऊ                     अंबु + ऊर्मि = अंबूर्मि
ऊ + उ = ऊ                     वधू + उत्सव = वधूत्सव
ऊ + ऊ = ऊ                     भू + ऊर्जा = भूर्जा

2. गुण संधि(gun sandhi)

यदि ’अ’ या ’आ’ के बाद ’इ’ या ’ई’ ’उ’ या ’ऊ’, ’ऋ’ आएँ तो दोनों मिलकर क्रमशः ’ए’ और ’अर्’ हो जाते हैं |

गुण  संधि के उदाहरण :

अ + इ = ए                   देव + इंद्र = देवेंद्र
अ + ई = ए                   गण + ईश = गणेश
आ + इ = ए                  यथा + इष्ट = यथेष्ट
आ + ई = ए                  रमा + ईश = रमेश
अ + उ = ओ                  वीर + उचित = वीरोचित
अ + ऊ – ओ                  जल + ऊर्मि = जलोर्मि
आ + उ = ओ                 महा + उत्सव = महोत्सव
आ + ऊ = ओ                 गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
अ + ऋ = अर्                 कण्व + ऋषि = कण्वर्षि
आ + ऋ = अर्                महा + ऋषि = महर्षि

3. वृद्धि संधि(vardhi sandhi)

जब अ या आ के बाद ए या ऐ हो तो दोनों के मेल से ’ऐ’ तथा यदि ’ओ’ या ’औ’ हो तो दोनों के स्थान पर ’औ’ हो जाता है |

वृद्धि संधि के उदाहरण:

अ + ए = ऐ                         एक + एक = एकैक
अ + ऐ = ऐ                         परम + ऐश्वर्य = परमैश्वर्य
आ + ए = ऐ                        सदा + एव = सदैव
आ + ऐ = ऐ                        महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ + ओ = औ                      परम + ओज = परमौज
आ + ओ = औ                     महा + ओजस्वी = महौजस्वी
अ + ओ = औ                      वन + औषध = वनौषध
आ + औ = औ                     महा + औषध = महौषध

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4. यण् संधि(yan sandhi)

यदि ’इ’ या ’ई’, ’उ’ या ’ऊ’ तथा ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आये, तो ’इ-ई’ का ’य्’ ’उ’ ’ऊ’ का ’व्’ और ’ऋ’ का ’र्’ हो जाता है, साथ ही बाद वाले शब्द के पहले स्वर की मात्रा य्, व्, र् में लग जाती है।

यण संधि के उदाहरण:

इ + अ = य                       अति + अधिक = अत्यधिक
इ + आ = या                      इति + आदि = इत्यादि
ई + आ = या                      नदी + आगम = नद्यागम
इ + उ = यु                        अति + उत्तम = अत्युत्तम
इ + ऊ = यू                        अति + ऊष्म = अल्यूष्म
इ + ए = ये                        प्रति + एक = प्रत्येक
उ + अ = व                        सु + अच्छ = स्वच्छ
उ + आ = वा                       सु + आगत = स्वागत
उ + ए = वे                         अनु + एषण = अन्वेषण
उ + इ = वि                        अनु + इति = अन्विति
ऋ + आ = रा                       पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

5. अयादि संधि(ayadi sandhi)

यदि ’ए’ या ’ऐ’ ’ओ’ या ’औ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ’ए’ का ’अय’, ऐ का ’आय’ हो जाता है तथा ’ओ’ का ’अव’ और ’औ’ हो जाता है |

 अयादि संधि के उदाहरण:

ए + अ = अय                      ने + अन = नयन
ऐ + अ = आय                     नै + अक = नायक
ओ + अ = अव                     पो + अने = पवन
औ + अ = आव                    पौ + अक = पावक

(ब) व्यंजन संन्धि (vyanjan sandhi)

जब पास आने वाले दो वर्णों में से पहला वर्ण व्यंजन हो और दूसरा स्वर अथवा व्यंजन कुछ भी हो तो उनमें होने वाली संधि को ’व्यंजन-संधि ’ कहते हैं। व्यंजन संधि संबंधी कुछ प्रमुख नियम यहाँ दिये गए हैं –

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1. यदि प्रत्येक वर्ग के पहले वर्ण अर्थात ’क्’, ’च’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’ के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य, र, ल, व, या कोई स्वर आये तो ’क्’, ’च’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’ के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण अर्थात् ’ग्’, ’ज्’, ’ङ्’, ’द्’, ’ब्’, हो जाता है |

व्यंजन संधि के उदाहरण:

वाक्    +      ईश       =      वागीश
दिक्    +     गज       =      दिग्गज
वाक्    +     दान       =      वाग्दान
सत्     +    वाणी       =      सद्वाणी
अच्     +    अंत        =      अजंत
अप्     +    इंधन       =     अबिंधन
तत्     +     रूप        =     तद्रूप
जगत्   +     आनंद     =     जगदानंद
शप्     +      द         =      शब्द

2. यदि प्रत्येक वर्ग के पहले वर्ण अर्थात् ’क्’, ’च्’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’, के आद ’न’ या ’म’ आये तो ’क्’ ’च्’ ’ट्’ ’त्’ ’प्’ अपने वर्ग के पंचम वर्ण अर्थात ङ्, ञ्, ण, म् में बदल जाते हैं |

जैसे –

वाक्      +     मय      =      वाङ्मय
षट्       +     मास      =      षण्मास
जगत्    +     नाथ       =      जगन्नाथ
अप्      +      मय       =       अम्मय

3. यदि ’म्’ के बाद कोई स्पर्श व्यंजन तो ’म’ जुङने वाले वर्ण का पंचम वर्ण या अनुस्वार हो जाता है |

जैसे –

अहम्        +      कार      =     अहंकार
किम्         +      चित्     =     किंचित्
सम्          +      गम      =     संगम
सम्          +       तोष     =     संतोष

 

4. यदि म् के बाद य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मेल हो तो ’म’ के स्थान पर अनुस्वार ही लगेगा |

जैसे –

सम्      +      योग       =      संयोग
सम्      +      रचना      =      संरचना
सम्      +      वाद        =      संवाद
सम्      +      हार         =     संहार
सम्      +      रक्षण       =     संरक्षण
सम्      +      लग्न        =    संलग्न
सम्      +      वत्          =    संवत्
सम्      +      सार         =     संसार

5. यदि त् या द् के बाद ’ल’ रहे तो ’त्’ या ’द्’ ल् में बदल जाता है |

जैसे –

उत्     +     लास     =     उल्लास
उत्     +     लेख      =     उल्लेख

6. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’ज’ या ’झ’ हो तो ’त्’ या ’द्’ ’ज्’ में बदल जाता है |

जैसे –

सत्       +    जन         =     सज्जन
उत्       +     झटिका    =      उज्झटिका

7. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’श’ हो तो ’त्’ या ’द्’ का ’च्’ और ’श्’ का ’छ्’ हो जाता है |

जैसे –

उत्      +     श्वास      =     उच्छ्वास
उत्      +      शिष्ट     =     उच्छिष्ट
सत्      +      शास्त्र     =     सच्छास्त्र

8. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’च’ या ’छ’ हो तो ’त्’ या ’द्’ का ’च्’ हो जाता है |

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जैसे –

उत्      +    चारण     =     उच्चारण
सत्     +     चरित्र     =     सच्चरित्र

9. ’त्’ या ’द्’ के बाद यदि ’ह’ हो तो त्/द् के स्थान पर ’द्’ और ’ह’ के स्थान पर ’ध’ हो जाता है|

जैसे –

तत्      +     हित     =     तद्धित
उत्      +     हार      =     उद्धार

10. जब पहले पद के अंत में स्वर हो और आगे के पद का पहला वर्ण ’छ’ हो तो ’छ’ के स्थान पर ’च्छ’ हो जाता है |

जैसे –

अनु      +     छेद      =     अनुच्छेद
परि      +     छेद      =     परिच्छेद
आ       +     छादन   =      आच्छादन

11. यदि किसी शब्द के अंत में अ या आ को छोङकर कोई अन्य स्वर आये एवं दूसरे शब्द के आरंभ में ’स’ हो तो ’स’ के स्थान पर ष हो जाता है |

जैसे –

अभि      +      सेक     =     अभिषेक
वि        +      सम      =     विषम
नि        +     सिद्ध      =     निषिद्ध
सु         +     सुप्ति    =      सुषुप्ति

12. ऋ, र, ष के बाद जब कोई स्वर कोई क वर्गीय या प वर्गीय वर्ण अनुस्वार अथवा य, व, ह में से कोई वर्ण आये तो अंत में आने वाला ’न’, ’ण’ हो जाता है |

जैसे –

भर्       +     अन      =    भरण
भूष्       +     अन      =    भूषण
राम       +     अयन    =    रामायण
प्र         +      मान     =    प्रमाण

(स) विसर्ग संधि (visrag sandhi)

विसर्ग (: ) के साथ स्वर या व्यंजन के मेल में जो विकार होता है, उसे ’विसर्ग संधि ’ कहते हैं। विसर्ग संधि संबंधी कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार हैं –

जैसे –

प्रातःकाल,     प्रायः,     दुःख

यदि किसी शब्द के अन्त में विसर्ग ध्वनि आती है तथा उसमें बाद में आने वाले शब्द के स्वर अथवा व्यंजन का मेल होने के कारण जो ध्वनि विकार उत्पन्न होता है वहीं विसर्ग संधि है।

(। ) यदि विसर्ग के पूर्व ’अ’ हो और बाद में ’अ’ हो तो दोनों का विकार ओ में बदल जाता है।

विसर्ग संधि के उदाहरण:

मनः     +     अविराम       =     मनोविराम
यशः     +     अभिलाषा     =     यशोभिलाषा
मनः     +     अनुकूल       =     मनोनुकूल

(।। ) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ हो और बाद वाले शब्द का पहला अक्षर ’अ’ हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। ’अ’ के अतिरिक्त अन्य कोई भी अक्षर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है।

⇒जैसे –

अतः    +     एव       =     अतएव
यशः     +     इच्छा    =     यशइच्छा

(।।। ) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ हो तथा बाद में किसी भी वर्ग का तीसरा, चैथा वर्ण अथवा य, र, ल, व व्यंजन आते हैं तो विसर्ग ’ओ’ में बदल जाता है।

जैसे –

तपः       +     वन       =     तपोवन
अधः      +     गामी     =     अधोगामी
वयः       +     वृद्व     =      वयोवृद्व
अन्ततः   +     गत्वा    =      अन्ततोगत्वा
मनः      +      विज्ञान  =     मनोविज्ञान 

[lv] यदि विसर्ग के बाद अ के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर अथवा किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण हो या ’य’ ’र’ ’ल’ ’व’ ’ह’ हो तो विसर्ग के स्थान में ’र्’ हो जाता है ,

⇒जैसे –

आयुः       +     वेद       =     आयुर्वेद
ज्योतिः     +     मय      =     ज्योतिर्मय
चतुः         +     दिशि    =     चतुर्दिशि
आशीः       +     वचन    =     आशीर्वचन
धनुः         +      धारी    =     धनुर्धारी

(v) यदि विसर्ग के बाद ’च’ तालव्य ’श’ आता है तो विसर्ग ’श्’ हो जाता है |

जैसे –

पुनः      +     च       =     पुनश्च
तपः      +     चर्या     =     तपश्चर्या
यशः      +     शरीर    =     यशश्शरीर

(v।।) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ या ’आ’ हो तथा बाद में ’त’ या दन्त्य ’स’ आता है तो विसर्ग ’स्’ हो जाता है |

⇒जैसे –

पुरः     +    सर     =     पुनस्सर
नमः    +     ते     =      नमस्ते
मनः    +    ताप    =      मनस्ताप

(v।।) यदि विसर्ग के पहले ’इ’ या ’उ’ स्वर हो और उसके बाद ’क’ ’ख’ ’प’ ’म’ वर्ण आये विसर्ग मूर्धन्य ’ष्’ हो जाता है|

जैसे –

आविः      +     कार     =     आविष्कार
चतुः       +      पाद     =      चतुष्पाद
चतुः       +      पथ      =      चतुष्पथ
बहिः       +      कार     =      बहिष्कार

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संधि के टॉपिक को पढ़कर निम्न प्रश्नों का भी अभ्यास करें 

प्रश्‍न 1 – निम्‍नलिखित में से अयोगवाह है।
(a) विसर्ग
(b) महाप्राण
(c) संयुक्‍त व्‍यंजन
(d) अल्‍पप्राण
उत्‍तर – विसर्ग ।

प्रश्‍न 2 – किस क्रमांक में ‘’ ई ‘’ स्‍वर का सही उच्‍चारण स्‍थान है।
(a) कण्‍ठ
(b) तालु
(c) ओष्‍ठ
(d) मूर्धा
उत्‍तर – तालु ।

प्रश्‍न 3 – व्‍यंजन वर्गीकरण की दृष्टि से ‘ ल ‘ व्‍यंजन किस वर्ण भेद में रखा जायेगा ।
(a) मूर्धन्‍य
(b) वत्‍स्‍र्य
(c) कंठ्य
(d) दंत्‍य
उत्‍तर – वत्‍स्‍र्य ।

प्रश्‍न 4 – ‘क्ष’ वर्ण किसके योग से बना है।
(a) क् + ष
(b) क् + च
(c) क् + छ
(d) क् + श
उत्‍तर – क् + ष ।

प्रश्‍न 5 – नि‍म्‍नलिखित में से कौन सा वर्ण उच्‍चारण की दृष्टि से दंत्‍य नहीं है।
(a) त
(b) न
(c) द
(d) ट
उत्‍तर – ट ।

प्रश्‍न 6 – हिंदी शब्‍द कोश में ‘क्ष’ का क्रम किस वर्ण के बाद आता है।
(a) क
(b) छ
(c) त्र
(d) ज्ञ
उत्‍तर – क ।

प्रश्‍न 7 – यदि नीचे का होठ पूरी तरह काट दिया जाए तो किस ध्‍वनि के उच्‍चारण में कठिनाई होगी ।
(a) ल
(b) ब
(c) ध
(d) ख
उत्‍तर – ब ।

प्रश्‍न 8 – किस क्रमांक में अघोष व्‍यंजन है।
(a) य, र
(b) व, ह
(c) ड, ण
(d) श, स
उत्‍तर – श, स ।

प्रश्‍न 9 – किस व्‍यंजन के उच्‍चारण में जिव्‍हा तालु से नही टकराती है।
(a) च
(b) य
(c) घ
(d) श
उत्‍तर – घ ।

प्रश्‍न 10 – किस क्रमांक में अंतस्‍थ व्‍यंजन है।
(a) ग, घ
(b) द, ध
(c) ड, ढ
(d) य, व
उत्‍तर – य, व ।

प्रश्‍न 11 – ‘न’ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान है।
(a) मूर्धा और नासिका
(b) वत्‍स्‍र्य और नासिका
(c) ओष्‍ठ और नासिका
(d) कंठ और नासिका
उत्‍तर – वत्‍स्‍र्य और नासिका ।

प्रश्‍न 12 – वर्णमाला में कुल वर्ण है।
(a) 33
(b) 42
(c) 52
(d) 35
उत्‍तर – 52 ।

प्रश्‍न 13 – इनमें से कौन वृत्‍तमुखी स्‍वर है।
(a) आ
(b) ऊ
(c) ओ
(d) औ
उत्‍तर – आ ।

प्रश्‍न 14 – किस क्रम में पश्‍च स्‍वर है।
(a) ई
(b) उ
(c) ए
(d) ऐ
उत्‍तर – उ ।

प्रश्‍न 15 – ‘ क्ष , त्र , ज्ञ ‘ है।
(a) मूल स्‍वर
(b) अनुस्‍वार
(c) संयुक्‍त स्‍वर
(d) संयुक्‍त व्‍यंजन
उत्‍तर – संयुक्‍त व्‍यंजन ।

प्रश्‍न 16 – किस क्रम में स्‍पर्श – संघर्षी व्‍यंजन है।
(a) छ
(b) क
(c) ख
(d) ड
उत्‍तर – छ ।

प्रश्‍न 17 – किस क्रम में पार्श्विक व्‍यंजन है।
(a) ट
(b) ठ
(c) ल
(d) च
उत्‍तर – ल ।

प्रश्‍न 18 – किस क्रम में तालव्‍य व्‍यंजन नहीं है।
(a) च
(b) घ
(c) श
(d) य
उत्‍तर – घ ।

प्रश्‍न 19 – जिन स्‍वरों के उच्‍चारण में मुँह सबसे कम खुलता है। उसे कहते है।
(a) संवृत स्‍वर
(b) विवृत स्‍वर
(c) पश्‍च स्‍वर
(d) अग्र स्‍वर
उत्‍तर – संवृत स्‍वर ।

प्रश्‍न 20 – ‘ न ‘ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान है।
(a) मूर्धा और नासिका
(b) वर्त्‍स और नासिका
(c) ओष्‍ठा और नासिका
(d) कंठ और नासिका
उत्‍तर – वर्त्‍स और नासिका ।

प्रश्‍न 21 – ‘पुरोधा’ शब्‍द में संधि है।
(a) गुण
(b) व्‍यंजन
(c) यण
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 22 – इनमें से कौन सा शब्‍द स‍ंधि का उदाहरण नही है।
(a) संसार
(b) अत्‍यंत
(c) सदाचार
(d) सामाजिक
उत्‍तर – सामाजिक

प्रश्‍न 23 – किस समूह में यण संधि रहित शब्‍द है।
(a) अन्वित, सख्‍युचित, न्‍यून
(b) पित्रनुमति, य‍द्यपि, षडानन
(c) मात्रानंद, नद्यपर्णण, देव्‍यागम
(d) देव्‍यैश्‍वर्य, प्रत्‍युपकार, नद्युर्मि
उत्‍तर – पित्रनुमति, यद्यपि, षडानन

प्रश्‍न 24 – निम्‍नलिखित में से कौन से शब्‍द में विसर्ग संधि नही है।
(a) अत्‍यधिक
(b) मनोनुकूल
(c) उत्‍तम
(d) तन्‍मय
उत्‍तर – मनोनुकूल

प्रश्‍न 25 – निम्‍नलिखित में से कौन सा शब्‍द व्‍यंजन संधि का है।
(a) स्‍वागत
(b) उच्‍छ्वास
(c) सरोवर
(d) सरोज
उत्‍तर – उच्‍छवास

प्रश्‍न 26 – निम्‍नांकित में से सही संधियुक्‍त शब्‍द कौन सा है।
(a) गति + अवरोध = गत्‍यावरोध
(b) अभि + ईप्‍सा = अभिप्‍सा
(c) गुरू + उपदेश = गुरोपदेश
(d) लघु + उत्‍तर = लघूत्‍तर
उत्‍तर – लघूत्‍तर

प्रश्‍न 27 – इनमें से सही संधि विच्‍छेद का उदाहरण है।
(a) तथैव = तथा + ऐव
(b) स्‍वच्छ = स्‍व + च्‍छ
(c) महर्षि = महा + ऋषि
(d) अन्‍वेषण = अनु + ऐषण
उत्‍तर – महर्षि = महा + ऋषि

प्रश्‍न 28 – उपर्युक्‍त शब्‍द का सही संधि विच्‍छेद होगा –
(a) उपरि + युक्‍त
(b) उपर + उक्‍त
(c) ऊपर + युक्‍त
(d) उपरि + युक्‍त
उत्‍तर – उपरि + युक्‍त

प्रश्‍न 29 – इनमें से किस शब्‍द में गलत संधि विच्‍छेद हुआ है।
(a) संसद = सम् + सद्
(b) षडानन = षड + आनन
(c) विच्‍छेद = वि + छेद
(d) दिग्‍दर्शन = दिक् + दर्शन
उत्‍तर – षडानन = षड + आनन

प्रश्‍न 30 – किस समूह में सभी शब्‍द संधियुक्‍त है।
(a) नीमड़ी, दुर्जन, निश्‍चल
(b) साकार, सरोज, मयूर
(c) देवेन्‍द्र, निशीथ, संकुल
(d) मनोज, नरेश, देवर्षि
उत्‍तर – मनोज, नरेश, देवर्षि

प्रश्‍न 21 – ‘पुरोधा’ शब्‍द में संधि है।
(a) गुण
(b) व्‍यंजन
(c) यण
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 22 – इनमें से कौन सा शब्‍द स‍ंधि का उदाहरण नही है।
(a) संसार
(b) अत्‍यंत
(c) सदाचार
(d) सामाजिक
उत्‍तर – सामाजिक

प्रश्‍न 23 – किस समूह में यण संधि रहित शब्‍द है।
(a) अन्वित, सख्‍युचित, न्‍यून
(b) पित्रनुमति, य‍द्यपि, षडानन
(c) मात्रानंद, नद्यपर्णण, देव्‍यागम
(d) देव्‍यैश्‍वर्य, प्रत्‍युपकार, नद्युर्मि
उत्‍तर – पित्रनुमति, यद्यपि, षडानन

प्रश्‍न 24 – निम्‍नलिखित में से कौन से शब्‍द में विसर्ग संधि नही है।
(a) अत्‍यधिक
(b) मनोनुकूल
(c) उत्‍तम
(d) तन्‍मय
उत्‍तर – मनोनुकूल

प्रश्‍न 25 – निम्‍नलिखित में से कौन सा शब्‍द व्‍यंजन संधि का है।
(a) स्‍वागत
(b) उच्‍छ्वास
(c) सरोवर
(d) सरोज
उत्‍तर – उच्‍छवास

प्रश्‍न 26 – निम्‍नांकित में से सही संधियुक्‍त शब्‍द कौन सा है।
(a) गति + अवरोध = गत्‍यावरोध
(b) अभि + ईप्‍सा = अभिप्‍सा
(c) गुरू + उपदेश = गुरोपदेश
(d) लघु + उत्‍तर = लघूत्‍तर
उत्‍तर – लघूत्‍तर

प्रश्‍न 27 – इनमें से सही संधि विच्‍छेद का उदाहरण है।
(a) तथैव = तथा + ऐव
(b) स्‍वच्छ = स्‍व + च्‍छ
(c) महर्षि = महा + ऋषि
(d) अन्‍वेषण = अनु + ऐषण
उत्‍तर – महर्षि = महा + ऋषि

प्रश्‍न 28 – उपर्युक्‍त शब्‍द का सही संधि विच्‍छेद होगा –
(a) उपरि + युक्‍त
(b) उपर + उक्‍त
(c) ऊपर + युक्‍त
(d) उपरि + युक्‍त
उत्‍तर – उपरि + युक्‍त

प्रश्‍न 29 – इनमें से किस शब्‍द में गलत संधि विच्‍छेद हुआ है।
(a) संसद = सम् + सद्
(b) षडानन = षड + आनन
(c) विच्‍छेद = वि + छेद
(d) दिग्‍दर्शन = दिक् + दर्शन
उत्‍तर – षडानन = षड + आनन

प्रश्‍न 30 – किस समूह में सभी शब्‍द संधियुक्‍त है।
(a) नीमड़ी, दुर्जन, निश्‍चल
(b) साकार, सरोज, मयूर
(c) देवेन्‍द्र, निशीथ, संकुल
(d) मनोज, नरेश, देवर्षि
उत्‍तर – मनोज, नरेश, देवर्षि

प्रश्‍न 31 – किस शब्‍द में सही संधि नियम का पालन नही हुआ है।
(a) नीरव
(b) तदैव
(c) प्रतीप
(d) सञ्जीव
उत्‍तर – प्रतीप

प्रश्‍न 32 – संधि का सही प्रयोग किस शब्‍द में हुआ है।
(a) नीरोग
(b) निनाद
(c) विनोद
(d) निचोड़
उत्‍तर – नीरोग

प्रश्‍न 33 – किस शब्‍द में संधि नही है।
(a) अतएव
(b) सज्‍जन
(c) जलौक
(d) काजल
उत्‍तर – काजल

प्रश्‍न 34 – किस क्रमांक में सही संधि का उदाहरण नही है।
(a) मृद + मय = मृण्‍मय
(b) प्र + ऊढ़ = प्रौढ़
(c) अप् + जात = अब्‍जात
(d) मन: + प्रसाद = मनोप्रसाद
उत्‍तर – मन: + प्रसाद = मनोप्रसाद

प्रश्‍न 35 – अभ्‍यार्थी का संधि विच्‍छेद होगा।
(a) अभि + अर्थी
(b) अभ्‍य + अर्थी
(c) अथ + यर्थी
(d) अभ्‍या + अर्थी
उत्‍तर – अभि + अर्थी

प्रश्‍न 36 – किस क्रमांक संरचना में शब्‍दगत संरचना में संधि नियम का अपवाद है।
(a) प्रबोधिनी
(b) नीरोग
(c) अ‍क्षौहिणी
(d) अपरान्‍ह
उत्‍तर – अक्षौहिणी

प्रश्‍न 37 – घुड़दौड़ का सही संधि विच्‍छेद है।
(a) घुड़ + दौड़
(b) घोड़ + दौड़
(c) घोड़ा + दौड़
(d) इनमें से कोई नही
उत्‍तर – घोड़ा + दौड़

प्रश्‍न 38 – ‘पावक’ में कौन सी संधि है।
(a) यण् संधि
(b) अयादि संधि
(c) विसर्ग संधि
(d) व्‍यंजन संधि
उत्‍तर – अयादि संधि

प्रश्‍न 39 – ‘विपज्‍जाल’ में कौन सही संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) वृद्धि संधि
(c) दीर्घ संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – व्‍यंजन संधि

प्रश्‍न 40 – ‘प्रत्‍युपकार’ में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) विसर्ग संधि
(c) गुण संधि
(d) यण् संधि
उत्‍तर – यण संधि

प्रश्‍न 41 – ‘नयन’ में कौन सी संधि है।
(a) अयादि
(b) गुण
(c) वृद्धि
(d) यण्
उत्‍तर – अयादि

प्रश्‍न 42 – ‘धनुष्‍टकार’ में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) व्‍यंजन
(c) दीर्घ
(d) यण
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 43 – ‘परस्‍पर’ में कौन सी संधि है।
(a) वृद्धि
(b) व्‍यंजन
(c) अयादि
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 44 – ‘दिग्‍दर्शक’ में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) वृद्धि
(c) अयादि
(d) व्‍यंजन
उत्‍तर – व्‍यंजन

प्रश्‍न 45 – यद्यपि में कौन सी संधि है।
(a) यण्
(b) व्‍यंजन
(c) विसर्ग
(d) दीर्घ
उत्‍तर – यण्

प्रश्‍न 46 – ‘गिरीश’ में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) दीर्घ
(c) वृद्धि
(d) यण्
उत्‍तर – दीर्घ

प्रश्‍न 47 – ‘भानूदय’ में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) अयादि
(c) यण्
(d) दीर्घ
उत्‍तर – दीर्घ

प्रश्‍न 48 – ‘बहिरंग’ में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन
(b) दीर्घ
(c) विसर्ग
(d) गुण
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 49 – ‘अनुष्‍ठान’ का संधि विच्‍छेद होगा।
(a) अनु + ठान
(b) अनु + स्‍थान
(c) अनु + ठान
(d) अनु: + ठान
उत्‍तर – अनु + स्‍थान

प्रश्‍न 50 – किस क्रम में गुण संधि नही है।
(a) हितेच्‍छा
(b) प्रेषिति
(c) मानवेतर
(d) भूर्ध्‍व
उत्‍तर – भूर्ध्‍व

प्रश्‍न 51 – पुरोधा शब्‍द में सन्धि है।
(a) गुण
(b) व्‍यंजन
(c) यण
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग ।

प्रश्‍न 52 – इनमें से कौन सा शब्‍द सन्धि का उदहारण नही है।
(a) संसार
(b) अत्‍यंत
(c) सदाचार
(d) सामाजिक
उत्‍तर – सामाजिक ।

प्रश्‍न 53 – निम्‍नलिखित में से कौन से शब्‍द में विसर्ग सन्धि है।
(a) अत्‍यधिक
(b) मनोनुकूल
(c) उत्‍तम
(d) तन्‍मय
उत्‍तर – मनोनुकूल ।

प्रश्‍न 54 – अहोरात्र शब्‍द का सन्धि विच्‍छेद है।
(a) अहा + रात्र
(b) अहो + रात्र
(c) अहन् + रात्रि
(d) अहा + रात्रि
उत्‍तर – अहन् + रात्रि ।

प्रश्‍न 55 – निम्‍नलिखित में से किस शब्‍द में सही संधि हुई है।
(a) स्‍वा + छंद = स्‍वछंद
(b) माह + ऋषि = महर्षि
(c) गति + अवरोध = गत्‍यावरोध
(d) मत + ऐक्‍य = मतैक्‍य
उत्‍तर – मत + ऐक्‍य = मतैक्‍य ।

प्रश्‍न 56 – निम्‍नलिखित में से कौन सा शब्‍द व्‍यंजन संधि का है।
(a) स्‍वागत
(b) उच्‍छ्वास
(c) सरोवर
(d) सरोज
उत्‍तर – उच्‍छ्वास ।

प्रश्‍न 57 – इनमें से सही संधि विच्‍छेद का उदहारण है।
(a) तथैव = तथा + ऐव
(b) स्‍वच्‍द = स्‍व + च्‍छ
(c) महर्षि = महा + ऋषि
(d) अन्‍वेषण = अनु + ऐषण
उत्‍तर – महर्षि = महा + ऋषि ।

प्रश्‍न 58 – पावन में कौन सी संधि है।
(a) यण्‍ संधि
(b) अयाधि संधि
(c) विसर्ग संधि
(d) व्‍यंजन संधि
उत्‍तर – अयाधि संधि ।

प्रश्‍न 59 – विपज्‍जाल में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) वृद्धि संधि
(c) दीर्घ संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – व्‍यंजन संधि ।

प्रश्‍न 60 – प्रत्‍युपकार में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) विसर्ग संधि
(c) गुण संधि
(d) यण्‍ संधि
उत्‍तर – यण्‍ संधि ।

प्रश्‍न 61 – नयन में कौन सी संधि है।
(a) अयादि
(b) गुण
(c) वृद्धि
(d) यण्‍
उत्‍तर – अयादि ।

प्रश्‍न 62 – धनुष्‍टकार में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) व्‍यंजन
(c) दीर्घ
(d) यण्‍
उत्‍तर – विसर्ग ।

प्रश्‍न 63 – परस्‍पर में कौन सी संधि है।
(a) वृद्धि संधि
(b) व्‍यंजन संधि
(c) विसर्ग संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – विसर्ग संधि ।

प्रश्‍न 64 – गिरीश में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) दीर्घ
(c) वृद्धि
(d) यण्‍
उत्‍तर – दीर्घ ।

प्रश्‍न 65 – परिच्‍छेद में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन
(b) दीर्घ
(c) गुण
(d) अयादि
उत्‍तर – व्‍यंजन ।

प्रश्‍न 66 – भानूदय में कौन सी सन्धि है।
(a) गुण्‍
(b) अयादि
(c) यण्‍
(d) दीर्घ
उत्‍तर – दीर्घ ।

प्रश्‍न 67 – अनुष्‍ठान का संधि विच्‍छेद होगा ।
(a) अनु + ठान
(b) अनु + स्‍थान
(c) अनु + थान
(d) अनु: + ठान
उत्‍तर – अनु + स्‍थान ।

प्रश्‍न 68 – वृद्धि संधि का उदहारण नही है।
(a) अभ्‍यागत
(b) एकैक
(c) जलौध
(d) महौषध
उत्‍तर – अभ्‍यागत ।

प्रश्‍न 69 – साध्‍वाचरण का सही संधि विच्‍छेद होगा ।
(a) साध + चरण
(b) साधव + चरण
(c) साधु + आचरण
(d) साध + आचरण
उत्‍तर – साधु + आचरण ।

प्रश्‍न 70 – निम्‍न में से किसमें वृद्धि संधि नही है।
(a) स्‍व + ऐच्छिक = स्‍वैच्छिक
(b) महा + ऊर्जा = महोर्जा
(c) जल + ओक = जलौक
(d) वसुधा + एव = वसुधैव
उत्‍तर – महा + ऊर्जा ।

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