अव्यय के बारे मे जानें || hindi vyakaran

अव्यय की परिभाषा, भेद और उदाहरण

दोस्तो आज हम आपके लिए नया विषय ले कर आए है आज हम जानेगे कि हिन्दी व्याकरण मे अव्यय क्या होता है आज आप अच्छे से अव्यय के बारे मे जान पाएंगे 

अव्यय क्या होता है :-

अव्यय का शाब्दिक अर्थ होता है – जिन शब्दों के रूप में लिंग , वचन , पुरुष , कारक , काल आदि की वजह से कोई परिवर्तन नहीं होता उसे अव्यय शब्द कहते हैं। अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं। इन शब्दों को अविकारी शब्द भी कहा जाता है।

          जैसे :- जब , तब , अभी ,अगर , वह, वहाँ , यहाँ , इधर , उधर , किन्तु , परन्तु , बल्कि , इसलिए , अतएव , अवश्य , तेज , कल , धीरे , लेकिन , चूँकि , क्योंकि आदि।

अव्यय के भेद :-
1. क्रिया-विशेषण अव्यय
2. संबंधबोधक अव्यय
3. समुच्चयबोधक अव्यय
4. विस्मयादिबोधक अव्यय
5. निपात अव्यय

1. क्रिया-विशेषण अव्यय :- जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उसे क्रिया -विशेषण कहते हैं। जहाँ पर यहाँ , तेज , अब , रात , धीरे-धीरे , प्रतिदिन , सुंदर , वहाँ , तक , जल्दी , अभी , बहुत आते हैं वहाँ पर क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

  जैसे :- (i) वह यहाँ से चला गया।
(ii) घोडा तेज दौड़ता है।
(iii) अब पढना बंद करो।
(iv) बच्चे धीरे-धीरे चल रहे थे।
(v) वे लोग रात को पहुँचे।
(vi) सुधा प्रतिदिन पढती है।
(vii) वह यहाँ आता है।
(viii) रमेश प्रतिदिन पढ़ता है।
(ix) सुमन सुंदर लिखती है।
(x) मैं बहुत थक गया हूं।

क्रिया -विशेषण अव्यय के भेद :-

1. कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय

1. कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के होने का पता चले उसे कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर आजकल , अभी , तुरंत , रातभर , दिन , भर , हर बार , कई बार , नित्य , कब , यदा , कदा , जब , तब , हमेशा , तभी , तत्काल , निरंतर , शीघ्र पूर्व , बाद , पीछे , घड़ी-घड़ी , अब , तत्पश्चात , तदनन्तर , कल , फिर , कभी , प्रतिदिन , दिनभर , आज , परसों , सायं , पहले , सदा , लगातार आदि आते है वहाँ पर कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

जैसे :- (i) वह नित्य टहलता है।
(ii) वे कब गए।
(iii) सीता कल जाएगी।
(iv) वह प्रतिदिन पढ़ता है।
(v) दिन भर वर्षा होती है।
(vi) कृष्ण कल जायेगा।

2. स्थान क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के होने के स्थान का पता चले उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर यहाँ , वहाँ , भीतर , बाहर , इधर , उधर , दाएँ , बाएँ , कहाँ , किधर , जहाँ , पास , दूर , अन्यत्र , इस ओर , उस ओर , ऊपर , नीचे , सामने , आगे , पीछे , आमने आते है वहाँ पर स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मैं कहाँ जाऊं ?
(ii) तारा कहाँ अवम किधर गई ?
(iii) सुनील नीचे बैठा है।
(iv) इधर -उधर मत देखो।
(v) वह आगे चला गया।
(vi) उधर मत जाओ।

3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के परिणाम का पता चलता है उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं। जिन अव्यय शब्दों से नाप-तोल का पता चलता है।

जहाँ पर थोडा , काफी , ठीक , ठाक , बहुत , कम , अत्यंत , अतिशय , बहुधा , थोडा -थोडा , अधिक , अल्प , कुछ , पर्याप्त , प्रभूत , न्यून , बूंद-बूंद , स्वल्प , केवल , प्राय: , अनुमानत: , सर्वथा , उतना , जितना , खूब , तेज , अति , जरा , कितना , बड़ा , भारी , अत्यंत , लगभग , बस , इतना , क्रमश: आदि आते हैं वहाँ पर परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) मैं बहुत घबरा रहा हूँ।
(ii) वह अतिशय व्यथित होने पर भी मौन है।
(iii) उतना बोलो जितना जरूरी हो।
(iv) रमेश खूब पढ़ता है।
(v) तेज गाड़ी चल रही है।
(vi) सविता बहुत बोलती है।
(vii) कम खाओ।

4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार की रीति या विधि का पता चलता है उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर ऐसे , वैसे , अचानक , इसलिए , कदाचित , यथासंभव , सहज , धीरे , सहसा , एकाएक , झटपट , आप ही , ध्यानपूर्वक , धडाधड , यथा , ठीक , सचमुच , अवश्य , वास्तव में , निस्संदेह , बेशक , शायद , संभव है , हाँ , सच , जरुर , जी , अतएव , क्योंकि , नहीं , न , मत , कभी नहीं , कदापि नहीं , फटाफट , शीघ्रता , भली-भांति , ऐसे , तेज , कैसे , ज्यों , त्यों आदि आते हैं वहाँ पर रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) जरा , सहज एवं धीरे चलिए।
(ii) हमारे सामने शेर अचानक आ गया।
(iii) कपिल ने अपना कार्य फटाफट कर दिया।
(iv) मोहन शीघ्रता से चला गया।
(v) वह पैदल चलता है।

2. संबंधबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों के कारण संज्ञा के बाद आने पर दूसरे शब्दों से उसका संबंध बताते हैं उन शब्दों को संबंधबोधक शब्द कहते हैं। ये शब्द संज्ञा से पहले भी आ जाते हैं।

जहाँ पर बाद , भर , के ऊपर , की और , कारण , ऊपर , नीचे , बाहर , भीतर , बिना , सहित , पीछे , से पहले , से लेकर , तक , के अनुसार , की खातिर , के लिए आते हैं वहाँ पर संबंधबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मैं विद्यालय तक गया।
(ii) स्कूल के समीप मैदान है।
(iii) धन के बिना व्यवसाय चलाना कठिन है।
(iv) सुशील के भरोसे यह काम बिगड़ गया।
(v) मैं पूजा से पहले स्नान करता हूँ।
(vi) मैंने घर के सामने कुछ पेड़ लगाये हैं।
(vii) उसका साथ छोड़ दीजिये।
(viii) छत पर कबूतर बैठा है।
(ix) राम भोजन के बाद जायेगा।
(x) मोहन दिन भर खेलता है।
(xi) छत के ऊपर राम खड़ा है।
(xii) रमेश घर के बाहर पुस्तक रख रहा था।
(xiii) पाठशाला के पास मेरा घर है।
(xiv) विद्या के बिना मनुष्य पशु है।

प्रयोग की पुष्टि से संबंधबोधक अव्यय के भेद :-
1. सविभक्तिक
2. निर्विभक्तिक
3. उभय विभक्ति

1. सविभक्तिक :- जो अव्यय शब्द विभक्ति के साथ संज्ञा या सर्वनाम के बाद लगते हैं उन्हें सविभक्तिक कहते हैं। जहाँ पर आगे , पीछे , समीप , दूर , ओर , पहले आते हैं वहाँ पर सविभक्तिक होता है।

जैसे :- (i) घर के आगे स्कूल है।
(ii) उत्तर की ओर पर्वत हैं।
(iii) लक्ष्मण ने पहले किसी से युद्ध नहीं किया था।

2. निर्विभक्तिक :- जो शब्द विभक्ति के बिना संज्ञा के बाद प्रयोग होते हैं उन्हें निर्विभक्तिक कहते हैं। जहाँ पर भर , तक , समेत , पर्यन्त आते हैं वहाँ पर निर्विभक्तिक होता है।

जैसे :- (i) वह रात तक लौट आया।
(ii) वह जीवन पर्यन्त ब्रह्मचारी रहा।
(iii) वह बाल बच्चों समेत यहाँ आया।

3. उभय विभक्ति :- जो अव्यय शब्द विभक्ति रहित और विभक्ति सहित दोनों प्रकार से आते हैं उन्हें उभय विभक्ति कहते हैं। जहाँ पर द्वारा , रहित , बिना , अनुसार आते हैं वहाँ पर उभय विभक्ति होता है।

जैसे :- (i) पत्रों के द्वारा संदेश भेजे जाते हैं।
(ii) रीति के अनुसार काम होना है।

3. समुच्चयबोधक अव्यय :- जो शब्द दो शब्दों , वाक्यों और वाक्यांशों को जोड़ते हैं उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। इन्हें योजक भी कहा जाता है। ये शब्द दो वाक्यों को परस्पर जोड़ते हैं।

जहाँ पर और , तथा , लेकिन , मगर , व , किन्तु , परन्तु , इसलिए , इस कारण , अत: , क्योंकि , ताकि , या , अथवा , चाहे , यदि , कि , मानो , आदि , यानि , तथापि आते हैं वहाँ पर समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) सूरज निकला और पक्षी बोलने लगे।
(ii) छुट्टी हुई और बच्चे भागने लगे।
(iii) किरन और मधु पढने चली गईं।
(iv) मंजुला पढने में तो तेज है परन्तु शरीर से कमजोर है।
(v) तुम जाओगे कि मैं जाऊं।
(vi) माता जी और पिताजी।
(vii) मैं पटना आना चाहता था लेकिन आ न सका।
(viii) तुम जाओगे या वह आयेगा।
(ix) सुनील निकम्मा है इसलिए सब उससे घर्णा करते हैं।
(x) गीता गाती है और मीरा नाचती है।
(xi) यदि तुम मेहनत करते तो अवश्य सफल होगे।

समुच्चयबोधक अव्यय के भेद :-

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय :- जिन शब्दों से समान अधिकार के अंशों के जुड़ने का पता चलता है उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर किन्तु , और , या , अथवा , तथा , परन्तु , व , लेकिन , इसलिए , अत: , एवं आते है वहाँ पर समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) कविता और गीता एक कक्षा में पढ़ते हैं।
(ii) मैं और मेरी पुत्री एवं मेरे साथी सभी साथ थे।

अव्यय के बारे मे जानें

2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों में एक शब्द को मुख्य माना जाता है और एक को गौण। गौण वाक्य मुख्य वाक्य को एक या अधिक उपवाक्यों को जोड़ने का काम करता है। जहाँ पर चूँकि , इसलिए , यद्यपि , तथापि , कि , मानो , क्योंकि , यहाँ , तक कि , जिससे कि , ताकि , यदि , तो , यानि आते हैं वहाँ पर व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मोहन बीमार है इसलिए वह आज नहीं आएगा।
(ii) यदि तुम अपनी भलाई चाहते हो तो यहाँ से चले जाओ।
(iii) मैंने दिन में ही अपना काम पूरा कर लिया ताकि मैं शाम को जागरण में जा सकूं।

4. विस्मयादिबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से हर्ष , शोक , विस्मय , ग्लानी , लज्जा , घर्णा , दुःख , आश्चर्य आदि के भाव का पता चलता है उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। इनका संबंध किसी पद से नहीं होता है। इसे घोतक भी कहा जाता है। विस्मयादिबोधक अव्यय में (!) चिन्ह लगाया जाता है।

जैसे :- (i) वाह! क्या बात है।
(ii) हाय! वह चल बसा।
(iii) आह! क्या स्वाद है।
(iv) अरे! तुम यहाँ कैसे।
(v) छि:छि:! यह गंदगी।
(vi) वाह! वाह! तुमने तो कमाल कर दिया।
(vii) अहो! क्या बात है।
(viii) अहा! क्या मौसम हैं।
(ix) अरे! आप आ गये।
(x) हाय! अब मैं क्या करूँ।
(xi) अरे! पीछे हो जाओ , गिर जाओगे।
(xii) हाय! राम यह क्या हो गया।

भाव के आधार पर विस्मयादिबोधक अव्यय के भेद :-
(1) हर्षबोधक
(2) शोकबोधक
(3) विस्मयादिबोधक
(4) तिरस्कारबोधक
(5) स्वीकृतिबोधक
(6) संबोधनबोधक
(7) आशिर्वादबोधक

(1) हर्षबोधक :- जहाँ पर अहा! , धन्य! , वाह-वाह! , ओह! , वाह! , शाबाश! आते हैं वहाँ पर हर्षबोधक होता है।

(2) शोकबोधक :- जहाँ पर आह! , हाय! , हाय-हाय! , हा, त्राहि-त्राहि! , बाप रे! आते हैं वहाँ पर शोकबोधक आता है।

(3) विस्मयादिबोधक :- जहाँ पर हैं! , ऐं! , ओहो! , अरे वाह! आते हैं वहाँ पर विस्मयादिबोधक होता है।

(4) तिरस्कारबोधक :- जहाँ पर छि:! , हट! , धिक्! , धत! , छि:छि:! , चुप! आते हैं वहाँ पर तिरस्कारबोधक होता है।

(5) स्वीकृतिबोधक :- जहाँ पर हाँ-हाँ! , अच्छा! , ठीक! , जी हाँ! , बहुत अच्छा! आते हैं वहाँ पर स्वीकृतिबोधक होता है।

(6) संबोधनबोधक :- जहाँ पर रे! , री! , अरे! , अरी! , ओ! , अजी! , हैलो! आते हैं वहाँ पर संबोधनबोधक होता है।

(7) आशीर्वादबोधक :- जहाँ पर दीर्घायु हो! , जीते रहो! आते हैं वहाँ पर आशिर्वादबोधक होता है।

5. निपात अव्यय :- जो वाक्य में नवीनता या चमत्कार उत्पन्न करते हैं उन्हें निपात अव्यय कहते हैं। जो अव्यय शब्द किसी शब्द या पद के पीछे लगकर उसके अर्थ में विशेष बल लाते हैं उन्हें निपात अव्यय कहते हैं। इसे अवधारक शब्द भी कहते हैं। जहाँ पर ही , भी , तो , तक ,मात्र , भर , मत , सा , जी , केवल आते हैं वहाँ पर निपात अव्यय होता है।

जैसे :- (i) प्रशांत को ही करना होगा यह काम।
(ii) सुहाना भी जाएगी।
(iii) तुम तो सनम डूबोगे ही , सब को डुबाओगे।
(iv) वह तुमसे बोली तक नहीं।
(v) पढाई मात्र से ही सब कुछ नहीं मिल जाता।
(vi) तुम उसे जानता भर हो।
(vii) राम ने ही रावण को मारा था।
(viii) रमेश भी दिल्ली जाएगा।(ix) तुम तो कल जयपुर जाने वाले थे।
(x) राम ही लिख रहा है।

क्रिया -विशेषण और संबंधबोधक अव्यय में अंतर :-

जब अव्यय शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम के साथ किया जाता है तब ये संबंधबोधक होते हैं और जब अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं तब ये क्रिया -विशेषण होते हैं।

जैसे :- (i) बाहर जाओ।
(ii) घर से बाहर जाओ।
(iii) उनके सामने बैठो।
(iv) मोहन भीतर है।
(v) घर के भीतर सुरेश है।
(vi) बाहर चले जाओ।

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avyay kee paribhaasha, antar aur udaaharan
dosto aaj ham aapake lie nae vishay le kar aae hai aaj ham jaanege ki hindee vyaakaran me avyay kya hota hai aaj aap achchhe se avyay ke baare me jaan lenge

avyay kya hota hai: –
avyay ka shaabdik arth hota hai – jin shabdon ke roop mein ling, vachan, purush, kaarak, kaal aadi kee vajah se koee parivartan nahin hota use avyay shabd kahate hain. avyay shabd har sthiti mein apane mool roop mein rahata hai. in shabdon ko avikaaree shabd bhee kaha jaata hai.

jaise: – jab, tab, abhee, agar, vah, vahaan, idhar, udhar, udhar, kintu, balki, isalie, atev, nishchay, tej, kal, dheere, lekin, choonki, kyonki aadi.

avyay ke sanrakshan: –
1. kriya-vishesh avyay
2. sambandhabodhak avyay
3. samuchchayabodhak avyay
4. vismayaadibodhak avyay
5. nipaat avyavastha

1. kriya-visheshan avyay: – jin shabdon se kriya kee visheshata ka pata chalata hai use kriya -visheshan kahate hain. jahaan par yahaan, te, ab, raat, dheere-dheere, pratidin, sundar, vahaan, jaldee, abhee, bahut aate hain vahaan par kriyaavisheshan avyay hota hai.

jaise: – (i) vah yahaan se chala gaya.
(ii) ghoda tej daudata hai.
(iii) ab padhana band karo.
(iv) bachche dheere-dheere chal rahe the.
(v) ve log raat ko pahunche.
(vi) sudha pratidin padhatee hai.
(vii) vah yahaan aata hai.
(viii) ramesh pratidin padhata hai.
(ix) suman sundar likhatee hai.
(x) main bahut thak gaya hoon.

kriya -visheshan avyay ke bhed: –
1. kaalavaachak kriyaavisheshan avyay
2. sthaanavaachak kriyaavisheshan avyay
3. parimaanavaachak kriyaavisheshan avyay
4. reetivaachak kriyaavisheshan avyay

1. kaalavaachak kriyaavisheshan avyay: – jin avyay shabdon se kaary ke vyaapaar ke hone ka pata chala use kaalavaachak kriyaavisheshan avyay kahate hain.

jahaan par, abhee, turant, raat ka din, din, bhar, har baar, kaee baar, nity, kab, yada, samay, kab, hamesha, tabhee, tatkaal, nirantar, sheeghr poorv, baad, peechhe, ghadee-ghadee , ab, tatpashchaat, tadanantar, kal, phir, kabhee, pratidin, dinabhar, aaj, parason, saay, pahale, sada, lagaataar aadi aata hai vahaan par kaalavaachak kriyaavisheshan avyay hota hai.

jaise: – (i) vah nity tahalata hai.
(ii) ve kab gae.
(iii) seeta kal hoga.
(iv) vah pratidin padhata hai.
(v) din bhar varsha hotee hai.
(vi) krshn kal karenge.

2. sthaan kriyaavisheshan avyay: – jin avyay shabdon se kaary ke vyaapaar ke hone ke sthaan ka pata chala unhen sthaanavaachak kriyaavisheshan avyay kahate hain.

jahaan par yahaan, vahaan, bheetar, baahar, idhar, udhar, mein, jahaan, kidhar, jahaan, paas, door, anyatr, is or, us or, oopar, neeche, saamane, aage, peechhe, aamane aate hain par sthaanavaachak kriyaavisheshan avyay hota hai.

jaise: – (i) main kahaan jaoon?
(ii) taara kahaan avam kidhar gaee?
(iii) suneel neeche baitha hai.
(iv) idhar -udhar mat dekho.
(v) vah aage chala gaya.
(vi) udhar mat jao.

3. parimaanavaachak kriyaavisheshan avyay: – jin avyay shabdon se kaary ke vyaapaar ke parinaam ka pata chalata hai use parimaanavaachak kriyaavisheshan avyay kahate hain. jin avyay shabdon se naap-tol ka pata chalata hai.

jahaan par thoda, kaaphee, theek, thaak, bahut, kam, atyant, atishay, bahudha, thoda-kaithoda, adhik, alp, kuchh, paryaapt, prabal, laghu, boond-boond, svalp, keval, sambhaavana:, anumaan:, sarvatha, samaan, jaisa, su, tej, ati, jara, kyon, bada, bhaaree, atyant, lagabhag, bas, itana, kramashah: aadi aate hain vahaan par parimaanavaachak kriyaavisheshan avyay kahate hain.

jaise: – (i) main bahut ghabara raha hoon.
(ii) vah atishay vyathit hone par bhee maun hai.
(iii) samaan bolo jitana jarooree ho.
(iv) ramesh khandata hai.
(v) tej gaadee chal rahee hai.
(vi) savita bahut bolatee hai.
(vii) kam khao.

4. reetivaachak kriyaavisheshan avyay: – jin avyay shabdon se kaary ke vyaapaar kee reeti ya vidhi ka pata chalata hai unhen unamen reetivaachak kriyaavisheshan avyay kahate hain.

jahaan par aisa, jaise, achaanak, isalie, sanchit,,, sahaj, dheere, sahasa, ek ek, jhapatta, aap hee, dhyaanapoorvak, dhadhaad, yatha, theek, vaastav mein, nishchit roop se, vaastav mein, nissandeh, nishchit roop se, shaayad, sambhav hai , haan, sach, jarur, jee, atev, kyonki, nahin, na, mat, kabhee nahin, kad sthaan nahin, phataphat, sheeghrata, bhalee-bhaanti, aise, tej, kaise, jyon, tyon aadi aate hain vahaan par reetivaachak kriyaavish preshit avyay kahate hain.

jaise: – (i) jara, sahaj aur dheere chal raha hai.
(ii) hamaare saamane sher achaanak aa gaya.
(iii) kapil ne apana kaary phataaphat kar diya.
(iv) mohan sheeghrata se chala gaya.
(v) vah paidal chalata hai.

2. sambandhabodhak avyay: – jin avyay shabdon ke kaaran sangya ke baad aane par doosare shabdon se usake sambandh mein bataate hain ki un shabdon ko sambandhabodhak shabd kahate hain. ye shabd sangya se pahale bhee aa jaate hain.

jahaan par baad mein, bhar, ke oopar, kee aur, kaaran, oopar, neeche, baahar, bheetar, bina, sahit, peechhe, se pahale, se lekar, tak, ke anusaar, ke khaatir, ke lie aate hain vahaan par sambandhabodhak avyay hota hai.

jaise: – (i) main vidyaalay tak gaya.
(ii) skool ke sameep maidaan hai.
(iii) dhan ke bina vyavasaay chalaane ke lie kathin hai.
(iv) susheel ke bharose yah kaam bigad gaya.
(v) main pooja se pahale snaan karata hoon.
(vi) mainne ghar ke saamane kuchh ped lagaaye hain.
(vii) usaka saath chhod den.
(viii) chhat par kabootar baitha hai.
(ix) raam bhojan ke baad jaega.
(x) mohan din bhar khelata hai.
(xi) chhat ke oopar raam nirmit hai.
(xii) ramesh ghar ke baahar pustak rakhane ja raha tha.
(xiii) paathashaala ke paas mera ghar hai.
(xiv) vidya ke bina manushy pashu hai.

prayog kee pushti se sambandhabodhak avyay ke bhed: –
1. savibhaktik
2. nirbhaktik
3. ubhayaanubhav

1. savibhaktik: – jo avyay shabd vibhakti ke saath sangya ya sarvanaam ke baad lagate hain unhen savibhakt kahate hain. jahaan par aage, peechhe, sameep, door or, pahale aate hain vahaan par savibhaktik hota hai.

jaise: – (i) ghar ke aage skool hai.
(ii) uttar kee or parvat hain.
(iii) lakshman ne pahale kisee se yuddh nahin kiya tha.

2. nirvibhaktik: – jo shabd vibhakti ke bina sangya ke baad prayog hote hain unhen nirvibhakt kahate hain. jahaan par bhara, tak, sahit, sthirant aate hain par nirvibhaktik hota hai.

jaise: – (i) vah raat tak laut aaya tha.
(ii) vah jeevan paryant brahmachaaree raha.
(iii) vah baal bachchon sahit yahaan aaya tha.

3. ubhay vibhakti: – jo avyay shabd vibhakti rahit aur vibhakti sahit donon prakaar se aate hain unhen ubhay vibhakti kahate hain. jahaan par, dvaara, rahit, bina, tadanusaar aate hain vahaan par ubhay vibhakti hotee hai.

jaise: – (i) patr ke dvaara sandesh bheje jaate hain.
(ii) reeti ke anusaar kaary hona hai.

3. samuchchayabodhak avyay: – jo shabd do shabdon, vaakyon aur vaakyaanshon ko jodate hain unhen samuchchayabodhak avyay kahate hain. unhen yojak bhee kaha jaata hai. ye shabd do vaakyon ko paraspar jodate hain.

jahaan par aur, lekin, lekin, lekin, va, ki, lekin, isalie, is kaaran, at:, kyonki, ya, ya, chaahe, agar, agar,,, maano, aadi, yaani, haalaanki aate hain vahaan par samuchchayabodhak hain avyay hota hai.

jaise: – (i) sooraj nikala aur pakshee bolane lage.
(ii) chhuttee huee aur bachche daudane lage.
(iii) kiran aur madhu padhane gae.
(iv) manjula padhane mein to tej hai lekin shareer se kamajor hai.
(v) tum jaoge ki main jaoon.
(vi) maata-pita aur pitaajee.
(vii) main patana aana chaahata tha lekin aa na ho gaya.
(viii) aap getage ya vah aayega.
(ix) suneel nikamma hai isalie sab usase gharna karate hain.
(x) geeta gaatee hai aur meera naachatee hai.
(xi) yadi aap kadee mehanat karate hain to avashy saphal hatyaare.

samuchchayabodhak avyay ke bhed: –

1. samaanaadhikaran samuchchayabodhak avyay
2. vyadhikaran samuchchayabodhak avyay

1. samaanaadhikaran samuchchayabodhak avyay: – jin shabdon se samaan adhikaar ke anshon ke judane ka pata chalata hai unhen samaanaadhikaran samuchchayabodhak avyay kahate hain.

jahaan par kintu, aur, ya, ya,,,,, lekin, isalie, at:, aur, vahaan hai par samaanaadhikaran samuchchayabodhak avyay hota hai.

jaise: – (i) kavita aur geeta ek kaksha mein padhate hain.
(ii) main aur meree putree aur mere saathee sabhee saath the.

avyay ke baare mein me jaanen

2. vyadhikaran samuchchayabodhak avyay: – jin avyay shabdon mein ek shabd ko mukhy maana jaata hai aur ek ko gau. gaun vaaky mukhy vaaky ko ek ya adhik upavaakyon ko jodane ka kaam karata hai. jahaan par choonki, isalie, yadyapi, yadyapi, maano, kyonki, yahaan, yahaan tak, ki, jisase, ki, yadi, to, yaani aate hain vahaan par vaishyaran samuchchayabodhak avyay hota hai.

jaise: – (i) mohan beemaar hai isalie vah aaj nahin chalegee.
(ii) yadi aap apanee bhalaee chaahate ho to yahaan se chale jao.
(iii) mainne din mein hee apana kaam poora kar liya taaki main shaam ko jaagaran mein ja sakoon.

4. vismayaadibodhak avyay: – jin avyay shabdon se hash, shok, vismay, glaanee, lajja, gharna, duhkh, aashchary aadi ke bhaav ka pata chalata hai unhen vismayaadibodhak avyay kahate hain. inaka sambandh kisee pad se nahin hota hai. ise ghotak bhee kaha jaata hai. vismayaadibodhak avyay mein (!) chinh lagaaya jaata hai.

jaise: – (i) vaah! kya baat hai
(ii) haay! vah baasa ja raha hai
(iii) aah! kya svaad hai?
(iv) are! tum yahaan kaise.
(v) paas: paas:! yah gandh.
(vi) vaah! vaah! aapane to kamaal kar diya.
(vii) aho! kya baat hai
(viii) aha! kya hain?
(ix) are! aap chale gae.
(x) haay! ab main kya karoon.
(xi) are! peechhe ho jao, gir jaoge.
(xii) haay! raam yah kya ho gaya hai.]

bhaav ke aadhaar par vismayaadibodhak avyay ke bhed: –
(1) harshabodhak
(2) shokabodhak
(3) vismayaadibodhak
(4) tiraskaarabodhak
(5) sveekrtibodhak
(6) sambodhanabodhak
(() aachaaryabodhak

(1) harshabodhak: – jahaan par aha! , aasheervaad! , va-vaah! , oh! , vaah! , shaabaash! aate hain vahaan par harshabodhak hota hai.

(2) shokabodhak: – jahaan par aah! , haay! , haay-haay! , ha, traahi-traahi! , baap re! aate hain vahaan par kombodhak aata hai.

(3) vismayaadibodhak: – jahaan par hain! , ain! , oho! , are vaah! aate hain vismayaadibodhak hota hai.

(4) tiraskaarabodhak: – jahaan par paas:! , het! , dhik! , dhat! , pas: pas:! , chup! aate hain par tiraskaarabodhak hota hai.

(5) sveekrtibodhak: – jahaan par haan-haan! , achchha! , theek hai! , jee haan! , bahut achchha! aate hain par sveekrtibodhak hota hai.

(6) sambodhanabodhak: – jahaan par re! , ree! , are! , aree! , o! , jaaj! , hel! aate hain vahaan par sambodhanabodhak hota hai.

(() aasheervaadabodhak: – jahaan par deerghaayu ho! , jeet raho! aate hain vahaan par aashirvaadabodhak hota hai.

5. nipaat avyay: – jo vaaky mein dosh ya chamatkaar utpann karate hain unhen nipaat avyay kahate hain. jo avyay shabd kisee shabd ya pad ke peechhe lagakar usake arth mein vishesh bal laate hain unhen nipaat avyay kahate hain. yah avadhaarak shabd bhee kahata hai. jahaan par hee, bhee, to, tak, maatr, bhar, mat, sa, jee, keval aate hain par nipaat avyay hota hai.]

jaise: – (i) prashaant ko hee karana hoga.
(ii) suhaana bhee karegee.
(iii) aap to sanam dooboge hee, sab ko dubaoge.
(iv) vah bolee tak nahin।
(v) padhaee maatr se hee sab kuchh nahin mil jaata hai.
(vi) aap use jaanate hain.
(vii) raam ne hee raavan ko maara tha.
(viii) ramesh bhee dillee jaega. (ix) aap to kal jayapur jaane vaale the.
(x) raam hee likh raha hai.

kriya -visheshan aur sambandhabodhak avyay mein antar: –
jab avyay shabdon ka prayog sangya ya sarvanaam ke saath kiya jaata hai tab ye sambandhabodhak hote hain aur jab avyay shabd kriya kee visheshata prakat karate hain tab ye kriya -visheshan hote hain.

jaise: – (i) baahar jaana.
(ii) ghar se baahar jaana.
(iii) unaka morcha baitho.
(iv) mohan bheetar hai.
(v) ghar ke bheetar suresh hai.
(vi) baahar chale jao.

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