Sumitranandan Pant#सुमित्रानंदन पंत कवि परिचय

सुमित्रानंदन पंत कवि परिचय(Introduction to Sumitranandan Pant)

📚साहित्य विशेष

सुमित्रानन्दन पन्त —
【1900-1977】

★मूलनाम – गोसाईदत्त

★उपनाम –
● शब्द शिल्पी
● छायावाद का विष्णु
● प्रकृति का सुकुमार कवि
●नारी मुक्ति का प्रबल समर्थक कवि

★नन्ददुलारे वाजपेयी पन्त को छायावाद का प्रवर्तक मानते है  ।

★शुक्ल के अनुसार “छायावाद के प्रतिनिधि कवि”।

★प्रथम रचना – गिरजे का घण्टा(1916)

★अंतिम रचना -लोकायतन (1964)

★प्रथम छायावादी रचना – उच्छवास

★अंतिम छायावादी रचना -गुंजन

★छायावाद का अंत और प्रगतिवाद के उदय वाली रचना – युगांत

★गांधी और मार्क्स से प्रभावित रचना – युगवाणी

★ सौन्दर्य बोध की रचना – उतरा

★पन्त एव बच्चन द्वारा मिलकरलिखी रचना – खादी के फूल

★छायावाद का मेनिफेस्टो/घोषणापत्र – पल्लव

★प्रकृति की चित्रशाला- पल्लव

★चिदम्बरा काव्य पर -ज्ञानपीठ पुरस्कार 1968(हिंदी साहित्य का प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला)

★कला और बूढ़ा चाँद -साहित्य अकादमी पुरस्कार (1960)

★लोकायतन रचना पर – सोवियत लैंड परस्कार।

सुमित्रानंदन पंत कवि परिचय

★इनकी छायावादी रचनाएँ (tricks: उग्र वीणा पल भर गूंजती हैं)
● उच्छवास 1920
●ग्रन्थि 1920
●वीणा 1927
●पल्लव 1928
●गुंजन 1932

★प्रगतिवाद का प्रवर्तन पन्त ने किया था।

प्रगतिवादी रचना

●युगवाणी
● ग्राम्या
● युगांत

★ पन्त जी अरविन्द दर्शन से प्रभावित है  ।

अरविन्द दर्शन से प्रभावित रचनाएँ

●स्वर्ण किरण
●स्वर्णधुलि
●उतरा
●वाणी

मानवतावादी रचनाएँ

●लोकायतन ( महात्मा गाँधी पर)
●चिदम्बरा
●शशि की तरी

★पन्त ने ” परिवर्तन” शीर्षक से लंबी कविता की रचना की थी।

★अपनी रचनाओं में रोला छंद का सर्वाधिक प्रयोग लिया।

★पन्त जी कोमल कल्पना के लिए भी जाने जाते है ।

★इनकी “मौन निमंत्रण” कविता में रहस्यवादी प्रवृति है ।

पन्तजी के प्रमुख नाटक

●रजत शिखर
●शिल्पी
●युगपुरुष
●अंतिमा
●ज्योत्स्ना
●सत्यकाम

★पन्त द्वारा लिखित कहानी – पानवाला

प्रमुख आलोचना ग्रन्थ

● गद्य पद्य शिल्प और दर्शन
●छायावाद- पुन:मूल्याकन
●पल्लव की भूमिका

★पन्त की आत्मकथा-” साठ वर्ष एक रेखांकन”

★शान्ति जोशी ने इनकी जीवनी लिखी।” सुमित्रानन्दन पन्त : जीवनी और साहित्य “

काव्य पंक्तिया

” खुल गए छंद के बंध, प्रास के रजत पाश।

“”वियोगी होगा पहला कवि,आह से उपजा होगा ज्ञान।निकल कर आँखों से चुपचाप,भी होगी कविता अनजान।।

छोड़ द्रुमो की मधु छाया ,तोड़ प्रकृति से भी माया।
सुन्दर ह विहग सुमन सुन्दर ,मानव तुम सबसे सुंदरतम ।———-$$$——-

बाले! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?
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छोड़ द्रुमों की मृदु छाया,
तोड़ प्रकृति से भी माया,
बाले! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?
भूल अभी से इस जग को!
तज कर तरल तरंगों को,
इन्द्रधनुष के रंगों को,
तेरे भ्रू भ्रंगों से कैसे बिधवा दूँ निज मृग सा मन?
भूल अभी से इस जग को!
कोयल का वह कोमल बोल,
मधुकर की वीणा अनमोल,
कह तब तेरे ही प्रिय स्वर से कैसे भर लूँ, सजनि, श्रवण?
भूल अभी से इस जग को!
ऊषा-सस्मित किसलय-दल,
सुधा-रश्मि से उतरा जल,
ना, अधरामृत ही के मद में कैसे बहला दूँ जीवन?

छोड़ द्रुमों की मृदु छाया / सुमित्रानंदन पंत

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6 Comments

  • प्रेमा

    काफी अच्‍छा संकलन ि‍किया है आपने
    आप अभी ि‍किस पद है और आपकी कॉचिंग ि‍किस शहर मे चलती है
    क्‍या आप हमे ऑनलाईन टेस्‍ट करवा सकते है ि‍हिन्‍दी व्‍याख्‍याता के ि‍लिए
    आपके उतर की प्रतिक्षा में

    • केवल कृष्ण घोड़ेला

      जी धन्यवाद ,कॉन्टेक्ट व्हाटसअप नम्बर 9929735474

  • Jitendra kumar mishra

    आप द्वारा उपलब्ध हिंदी साहित्य से सम्बंधित सामग्री का अध्ययन किया जो अपने आप में बहुत उत्कृष्ट कार्य है, इससे साहित्य का बहुत कुछ सहज तरीके से जाना जा सकता है।

  • Harikrishan Lodhi pichhor shivpuri mp

    गागर मे सागर

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