अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
जब दो शब्द पास-पास आते हैं, तो कई बार पहले शब्द की आख़िरी ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर बदल जाती हैं। जैसे विद्या + आलय मिलकर विद्यालय बन जाता है। ध्वनियों के इसी मेल से होने वाले परिवर्तन को संधि कहते हैं। इस लेख में संधि का अर्थ, परिभाषा और उसके तीनों भेद (स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि) उनके नियमों और उदाहरणों के साथ आसान भाषा में समझाए गए हैं। अंत में REET, CTET, TGT, PGT और RPSC जैसी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न भी दिए गए हैं।
संधि – Sandhi
Table of Contents
हिंदी में संधि का शाब्दिक अर्थ है – योग अथवा मेल।

संधि किसे कहते है – Sandhi Kise Kahate Hain
दो ध्वनियों या दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार/ परिवर्तन को ही संधि(Sandhi) कहते हैं।

संधि की परिभाषा – Sandhi ki Paribhasha
जब दो वर्ण पास-पास आते हैं या मिलते हैं तो उनमें विकार उत्पन्न होता है अर्थात् वर्ण में परिवर्तन हो जाता है। यह विकार युक्त मेल ही संधि(SANDHI) कहलाता है।
कामताप्रसाद गुरु के अनुसार, ’’दो निर्दिष्ट अक्षरों के आस-पास आने के कारण उनके मेल से जो विकार होता है, उसे संधि कहते हैं।’
श्री किशोरीदास वाजपेयी के अनुसार, ’’जब दो या अधिक वर्ण पास-पास आते हैं तो कभी-कभी उनमें रूपान्तर होता है। इसी रूपान्तर को संधि कहते हैं।’
संधि -विच्छेद क्या होता है ?
संधि -विच्छेद – शब्दों के मेल से उत्पन्न ध्वनि परिवर्तन को ही संधि कहते हैं। परिणाम स्वरूप उच्चारण एवं लेखन दोनों ही स्तरों पर अपने मूल रूप से भिन्नता आ जाती है। अतः उन शब्दों को पुनः मूल रूप में लाना ही संधि विच्छेद कहलाता है।
जैसे –
दो शब्द वर्ण का मेल = संधि युक्त शब्द
महा + ईश आ + ई = महेश
यहाँ (आ + ई) दो वर्णों के मेल से विकार स्वरूप ’ए’ ध्वनि उत्पन्न हुई ।
संधि विच्छेद के लिए पुनः मूल रूप में लिखना होगा।
संधि युक्त शब्द – संधि विच्छेद
जैसे –
| महेश | महा + ईश |
| मनोबल | मनः + बल |
| गणेश | गण + ईश |
संधि के कितने भेद होते है – Sandhi ke kitne bhed hote hain
संधि के तीन भेद हैं –
संधि के भेद – Sandhi ke bhed

- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
स्वर संधि किसे कहते हैं – Swar sandhi kise kahate hain

स्वर संधि की परिभाषा – Swar Sandhi ki Paribhasha
स्वर संधि के कितने भेद होते है – Swar sandhi ke kitne bhed hote hain
स्वर संधि के पाँच भेद हैं –
स्वर संधि के भेद – Swar Sandhi ke bhed
- दीर्घ संधि
- गुण संधि
- वृद्धि संधि
- यण् संधि
- अयादि संधि
दीर्घ संधि किसे कहतें है – Dirgha sandhi kise kahate hain
दीर्घ संधि की परिभाषा – Dirgh Sandhi ki Paribhasha
दो समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। यदि ‘अ’ ‘आ’, ‘इ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’ के बाद सजातीय लघु या दीर्घ स्वर आएँ तो दोनों मिलकर क्रमशः ‘आ’ ‘ई’ ‘ऊ’ हो जाते हैं ।
- अ + अ = आ
- अ + आ = आ
- आ + अ = आ
- आ + आ = आ
- इ + इ = ई
- ई + इ = ई
- इ + ई = ई
- ई + ई = ई
- उ + उ = ऊ
- उ + ऊ = ऊ
- ऊ + उ = ऊ
- ऊ + ऊ = ऊ
दीर्घ संधि के उदाहरण – Dirgh Sandhi ke Udaharan
| अ + अ = आ | अन्न + अभाव = अन्नाभाव |
| अ + आ = आ | भोजन + आलय = भोजनालय |
| आ + अ = आ | विद्या + अर्थी = विद्यार्थी |
| आ + आ = आ | महा + आत्मा = महात्मा |
| इ + इ = ई | गिरि + इंद्र = गिरींद्र |
| ई + इ = ई | मही + इंद्र = महींद्र |
| इ + ई = ई | गिरि + ईश = गिरीश |
| ई + ई = ई | रजनी + ईश = रजनीश |
| उ + उ = ऊ | भानु + उदय = भानूदय |
| उ + ऊ = ऊ | अंबु + ऊर्मि = अंबूर्मि |
| ऊ + उ = ऊ | वधू + उत्सव = वधूत्सव |
| ऊ + ऊ = ऊ | भू + ऊर्जा = भूर्जा |
गुण संधि किसे कहतें है – Gun Sandhi kise kahate hain
गुण संधि की परिभाषा – Gun Sandhi ki Paribhasha
यदि ’अ’ या ’आ’ के बाद ’इ’ या ’ई’ ’उ’ या ’ऊ’, ’ऋ’ आए तो दोनों मिलकर क्रमशः ’ए’,’ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं ।
गुण संधि के उदाहरण – Dirgh Sandhi ke Udaharan
| अ + इ = ए | देव + इंद्र = देवेंद्र |
| अ + ई = ए | गण + ईश = गणेश |
| आ + इ = ए | यथा + इष्ट = यथेष्ट |
| आ + ई = ए | रमा + ईश = रमेश |
| अ + उ = ओ | वीर + उचित = वीरोचित |
| अ + ऊ – ओ | जल + ऊर्मि = जलोर्मि |
| आ + उ = ओ | महा + उत्सव = महोत्सव |
| आ + ऊ = ओ | गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि |
| अ + ऋ = अर् | कण्व + ऋषि = कण्वर्षि |
| आ + ऋ = अर् | महा + ऋषि = महर्षि |
वृद्धि संधि किसे कहतें है – Vridhi sandhi kise kahate hain
वृद्धि संधि की परिभाषा – Vriddhi Sandhi ki Paribhasha
जब अ या आ के बाद ए , ऐ या ओ,औ हो तो ए , ऐ के मेल से ’ऐ’ तथा यदि ’ओ’ या ’औ’ के मेल से दोनों के स्थान पर ’औ’ हो जाता है |
वृद्धि संधि के उदाहरण – Vriddhi Sandhi ke Udaharan
| अ + ए = ऐ | एक + एक = एकैक |
| अ + ऐ = ऐ | परम + ऐश्वर्य = परमैश्वर्य |
| आ + ए = ऐ | सदा + एव = सदैव |
| आ + ऐ = ऐ | महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य |
| अ + ओ = औ | परम + ओज = परमौज |
| आ + ओ = औ | महा + ओजस्वी = महौजस्वी |
| अ + ओ = औ | वन + औषध = वनौषध |
| आ + औ = औ | महा + औषध = महौषध |
यण संधि किसे कहतें है – Yan sandhi kise kahate hain
यण संधि की परिभाषा – Yan Sandhi ki Paribhasha
यदि इ, ई, उ,ऊ तथा ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आये, तो ’इ-ई’ का ’य्’ ’उ’ ’ऊ’ का ’व्’ और ’ऋ’ का ’र्’ हो जाता है, साथ ही बाद वाले शब्द के पहले स्वर की मात्रा य्, व्, र् में लग जाती है।
| इ, ई + भिन्न स्वर | य /या |
| उ,ऊ+ भिन्न स्वर | व/वा |
यण संधि के उदाहरण – Yan Sandhi ke Udaharan
| इ + अ = य | अति + अधिक = अत्यधिक |
| इ + आ = या | इति + आदि = इत्यादि |
| ई + आ = या | नदी + आगम = नद्यागम |
| इ + उ = यु | अति + उत्तम = अत्युत्तम |
| इ + ऊ = यू | अति + ऊष्म = अल्यूष्म |
| इ + ए = ये | प्रति + एक = प्रत्येक |
| उ + अ = व | सु + अच्छ = स्वच्छ |
| उ + आ = वा | सु + आगत = स्वागत |
| उ + ए = वे | अनु + एषण = अन्वेषण |
| उ + इ = वि | अनु + इति = अन्विति |
| ऋ + आ = रा | पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा |
अयादि संधि किसे कहतें है – Ayadi Sandhi kise kahate hain
अयादि संधि की परिभाषा – Ayadi Sandhi ki Paribhasha
यदि ’ए’ या ’ऐ’ ’ओ’ या ’औ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ’ए’ का ’अय’, ऐ का ’आय’ हो जाता है तथा ’ओ’ का ’अव’ और ’औ’ हो जाता है |
अयादि संधि के उदाहरण – Ayadi Sandhi ke Udaharan
| ए + अ = अय | ने + अन = नयन |
| ऐ + अ = आय | नै + अक = नायक |
| ओ + अ = अव | पो + अने = पवन |
| औ + अ = आव | पौ + अक = पावक |
व्यंजन संधि किसे कहतें है – Vyanjan sandhi kise kahate hain

व्यंजन संधि की परिभाषा – Vyanjan Sandhi ki Paribhasha
जब पास आने वाले दो वर्णों में से पहला वर्ण व्यंजन हो और दूसरा स्वर अथवा व्यंजन कुछ भी हो तो उनमें होने वाली संधि को ’व्यंजन-संधि ’(Vyanjan Sandhi) कहते हैं। व्यंजन संधि संबंधी कुछ प्रमुख नियम यहाँ दिये गए हैं –
sandhi hindi grammar
1. यदि प्रत्येक वर्ग के पहले वर्ण अर्थात ’क्’, ’च’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’ के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य, र, ल, व, या कोई स्वर आये तो ’क्’, ’च’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’ के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण अर्थात् ’ग्’, ’ज्’, ’ङ्’, ’द्’, ’ब्’, हो जाता है |
व्यंजन संधि के उदाहरण – Vyanjan Sandhi ke Udaharan
| वाक्+ईश | वागीश |
| दिक्+गज | दिग्गज |
| वाक्+दान | वाग्दान |
| सत्+वाणी | सद्वाणी |
| अच्+अंत | अजंत |
| अप्+इंधन | अबिंधन |
| तत्+रूप | तद्रूप |
| जगत्+आनंद | जगदानंद |
| शप्+द | शब्द |
2. यदि प्रत्येक वर्ग के पहले वर्ण अर्थात् ’क्’, ’च्’, ’ट्’, ’त्’, ’प्’, के आद ’न’ या ’म’ आये तो ’क्’ ’च्’ ’ट्’ ’त्’ ’प्’ अपने वर्ग के पंचम वर्ण अर्थात ङ्, ञ्, ण, म् में बदल जाते हैं |
जैसे –
| वाक्+मय | वाङ्मय |
| षट्+मास | षण्मास |
| जगत्+नाथ | जगन्नाथ |
| अप्+मय | अम्मय |
3. यदि ’म्’ के बाद कोई स्पर्श व्यंजन तो ’म’ जुङने वाले वर्ण का पंचम वर्ण या अनुस्वार हो जाता है |
जैसे –
| अहम्+कार | अहंकार |
| किम्+चित् | किंचित् |
| सम्+गम | संगम |
| सम्+तोष | संतोष |
4. यदि म् के बाद य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मेल हो तो ’म’ के स्थान पर अनुस्वार ही लगेगा |
जैसे –
| सम्+योग | संयोग |
| सम्+रचना | संरचना |
| सम्+वाद | संवाद |
| सम्+हार | संहार |
| सम्+रक्षण | संरक्षण |
| सम्+लग्न | संलग्न |
| सम्+वत् | संवत् |
| सम्+सार | संसार |
5. यदि त् या द् के बाद ’ल’ रहे तो ’त्’ या ’द्’ ल् में बदल जाता है |
जैसे –
| उत्+लास | उल्लास |
| उत्+लेख | उल्लेख |
6. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’ज’ या ’झ’ हो तो ’त्’ या ’द्’ ’ज्’ में बदल जाता है |
जैसे –
| सत्+जन | सज्जन |
| उत्+झटिका | उज्झटिका |
7. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’श’ हो तो ’त्’ या ’द्’ का ’च्’ और ’श्’ का ’छ्’ हो जाता है |
जैसे –
| उत्+श्वास | उच्छ्वास |
| उत्+शिष्ट | उच्छिष्ट |
| सत्+शास्त्र | सच्छास्त्र |
8. यदि ’त्’ या ’द्’ के बाद ’च’ या ’छ’ हो तो ’त्’ या ’द्’ का ’च्’ हो जाता है |
sandhi hindi grammar
जैसे –
| उत्+चारण | उच्चारण |
| सत्+चरित्र | सच्चरित्र |
9. ’त्’ या ’द्’ के बाद यदि ’ह’ हो तो त्/द् के स्थान पर ’द्’ और ’ह’ के स्थान पर ’ध’ हो जाता है|
जैसे –
| तत्+हित | तद्धित |
| उत्+हार | उद्धार |
10. जब पहले पद के अंत में स्वर हो और आगे के पद का पहला वर्ण ’छ’ हो तो ’छ’ के स्थान पर ’च्छ’ हो जाता है |
जैसे –
| अनु + छेद | अनुच्छेद |
| परि + छेद | परिच्छेद |
| आ + छादन | आच्छादन |
11. यदि किसी शब्द के अंत में अ या आ को छोङकर कोई अन्य स्वर आये एवं दूसरे शब्द के आरंभ में ’स’ हो तो ’स’ के स्थान पर ष हो जाता है |
जैसे –
| अभि+सेक | अभिषेक |
| वि+सम | विषम |
| नि+सिद्ध | निषिद्ध |
| सु+सुप्ति | सुषुप्ति |
12. ऋ, र, ष के बाद जब कोई स्वर कोई क वर्गीय या प वर्गीय वर्ण अनुस्वार अथवा य, व, ह में से कोई वर्ण आये तो अंत में आने वाला ’न’, ’ण’ हो जाता है |
जैसे –
| भर्+अन | भरण |
| भूष्+अन | भूषण |
| राम+अयन | रामायण |
| प्र+मान | प्रमाण |
विसर्ग संधि किसे कहतें है – Visarg sandhi kise kahate hain

विसर्ग संधि की परिभाषा – Visarg Sandhi ki Paribhasha
विसर्ग (: ) के साथ स्वर या व्यंजन के मेल में जो विकार होता है, उसे ’विसर्ग संधि ’ कहते हैं।
विसर्ग संधि संबंधी कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार हैं –
जैसे –प्रातःकाल, प्रायः, दुःख
यदि किसी शब्द के अन्त में विसर्ग ध्वनि आती है तथा उसमें बाद में आने वाले शब्द के स्वर अथवा व्यंजन का मेल होने के कारण जो ध्वनि विकार उत्पन्न होता है वहीं विसर्ग संधि है।
(। ) यदि विसर्ग के पूर्व ’अ’ हो और बाद में ’अ’ हो तो दोनों का विकार ‘ओ’ में बदल जाता है।
विसर्ग संधि के उदाहरण – Visarg sandhi ke udaharan
| मनः+अविराम | मनोविराम |
| यशः+अभिलाषा | यशोभिलाषा |
| मनः+अनुकूल | मनोनुकूल |
(।। ) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ हो और बाद वाले शब्द के पहले ’अ’ के अतिरिक्त अन्य कोई भी अक्षर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है।
जैसे –
| अतः+एव | अतएव |
| यशः+इच्छा | यशइच्छा |
(।।। ) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ हो तथा बाद में किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा वर्ण अथवा य, र, ल, व व्यंजन आते हैं तो विसर्ग ’ओ’ में बदल जाता है।
जैसे –
| तपः+वन | तपोवन |
| अधः+गामी | अधोगामी |
| वयः+वृद्व | वयोवृद्व |
| अन्ततः+ गत्वा | अन्ततोगत्वा |
| मनः+विज्ञान | मनोविज्ञान |
जैसे –
| आयुः+वेद | आयुर्वेद |
| ज्योतिः+मय | ज्योतिर्मय |
| चतुः+दिशि | चतुर्दिशि |
| आशीः+वचन | आशीर्वचन |
| धनुः+धारी | धनुर्धारी |
(v) यदि विसर्ग के बाद ’च’ तालव्य ’श’ आता है तो विसर्ग ’श्’ हो जाता है |
जैसे –
| पुनः+च | पुनश्च |
| तपः+चर्या | तपश्चर्या |
| यशः+शरीर | यशश्शरीर |
(v।।) यदि विसर्ग के पहले ’अ’ या ’आ’ हो तथा बाद में ’त’ या दन्त्य ’स’ आता है तो विसर्ग ’स्’ (अर्द्धाक्षर ) हो जाता है |
जैसे –
| पुरः+सर | पुनस्सर |
| नमः+ते | नमस्ते |
| मनः+ताप | मनस्ताप |
(v।।) यदि विसर्ग के पहले ’इ’ या ’उ’ स्वर हो और उसके बाद ’क’ ’ख’ ’प’ ’म’ वर्ण आये विसर्ग मूर्धन्य ’ष्’(अर्द्धाक्षर) हो जाता है|
जैसे –
| आविः+कार | आविष्कार |
| चतुः+पाद | चतुष्पाद |
| चतुः+पथ | चतुष्पथ |
| बहिः+कार | बहिष्कार |
sandhi hindi grammar
विसर्ग संधि के 87 उदाहरण और ‘में कौन सी संधि है?’ के उत्तर
मुख्य नियम: जब विसर्ग (ः) से पहले ‘अ’ हो और बाद में किसी वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ण अथवा य, र, ल, व, ह हो, तब ‘अः’ का ‘ओ’ हो जाता है। जैसे: मनः + रंजन = मनोरंजन, सरः + ज = सरोज, तपः + बल = तपोबल।
जब विसर्ग से पहले ‘इ’ या ‘उ’ हो और बाद में च/छ या त/थ हो, तो विसर्ग का क्रमशः ‘श्’ या ‘स्’ हो जाता है। जैसे: निः + चल = निश्चल, दुः + तर = दुस्तर।
नीचे इन उदाहरणों को शब्द-समूह के अनुसार रखा गया है। जिस समूह को देखना हो, उस पर क्लिक कीजिए।
➕ 👉 मनः + … से बने 28 शब्द (मनो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| मनोनिग्रह | मनः + निग्रह | विसर्ग संधि |
| मनोभावना | मनः + भावना | विसर्ग संधि |
| मनोरोग | मनः + रोग | विसर्ग संधि |
| मनोवांछा | मनः + वांछा | विसर्ग संधि |
| मनोविनोद | मनः + विनोद | विसर्ग संधि |
| मनोमंथन | मनः + मंथन | विसर्ग संधि |
| मनोग्राह्य | मनः + ग्राह्य | विसर्ग संधि |
| मनोमय | मनः + मय | विसर्ग संधि |
| मनोहारी | मनः + हारी | विसर्ग संधि |
| मनोनीत | मनः + नीत | विसर्ग संधि |
| मनोभव | मनः + भव | विसर्ग संधि |
| मनोवेग | मनः + वेग | विसर्ग संधि |
| मनोव्यथा | मनः + व्यथा | विसर्ग संधि |
| मनोयोग | मनः + योग | विसर्ग संधि |
| मनोविचार | मनः + विचार | विसर्ग संधि |
| मनोज्ञ | मनः + ज्ञ | विसर्ग संधि |
| मनोज | मनः + ज | विसर्ग संधि |
| मनोमालिन्य | मनः + मालिन्य | विसर्ग संधि |
| मनोनयन | मनः + नयन | विसर्ग संधि |
| मनोगत | मनः + गत | विसर्ग संधि |
| मनोरंजन | मनः + रंजन | विसर्ग संधि |
| मनोविकार | मनः + विकार | विसर्ग संधि |
| मनोवृत्ति | मनः + वृत्ति | विसर्ग संधि |
| मनोविज्ञान | मनः + विज्ञान | विसर्ग संधि |
| मनोहर | मनः + हर | विसर्ग संधि |
| मनोरथ | मनः + रथ | विसर्ग संधि |
| मनोदशा | मनः + दशा | विसर्ग संधि |
| मनोबल | मनः + बल | विसर्ग संधि |
➕ 👉 यशः + … से बने 7 शब्द (यशो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| यशोभूमि | यशः + भूमि | विसर्ग संधि |
| यशोवर्धन | यशः + वर्धन | विसर्ग संधि |
| यशोधरा | यशः + धरा | विसर्ग संधि |
| यशोगान | यशः + गान | विसर्ग संधि |
| यशोवर्मा | यशः + वर्मा | विसर्ग संधि |
| यशोदा | यशः + दा | विसर्ग संधि |
| यशोगाथा | यशः + गाथा | विसर्ग संधि |
➕ 👉 अधः + … से बने 7 शब्द (अधो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| अधोभूमि | अधः + भूमि | विसर्ग संधि |
| अधोगामी | अधः + गामी | विसर्ग संधि |
| अधोमुख | अधः + मुख | विसर्ग संधि |
| अधोहस्ताक्षरकर्ता | अधः + हस्ताक्षरकर्ता | विसर्ग संधि |
| अधोभाग | अधः + भाग | विसर्ग संधि |
| अधोलिखित | अधः + लिखित | विसर्ग संधि |
| अधोवस्त्र | अधः + वस्त्र | विसर्ग संधि |
➕ 👉 तपः + … से बने 5 शब्द (तपो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| तपोभूमि | तपः + भूमि | विसर्ग संधि |
| तपोमय | तपः + मय | विसर्ग संधि |
| तपोधन | तपः + धन | विसर्ग संधि |
| तपोबल | तपः + बल | विसर्ग संधि |
| तपोवन | तपः + वन | विसर्ग संधि |
➕ 👉 तिरः + … से बने 5 शब्द (तिरो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| तिरोधान | तिरः + धान | विसर्ग संधि |
| तिरोभाव | तिरः + भाव | विसर्ग संधि |
| तिरोगुण | तिरः + गुण | विसर्ग संधि |
| तिरोभूत | तिरः + भूत | विसर्ग संधि |
| तिरोहित | तिरः + हित | विसर्ग संधि |
➕ 👉 शिरः + … से बने 5 शब्द (शिरो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| शिरोमणि | शिरः + मणि | विसर्ग संधि |
| शिरोभाग | शिरः + भाग | विसर्ग संधि |
| शिरोभूषण | शिरः + भूषण | विसर्ग संधि |
| शिरोरेखा | शिरः + रेखा | विसर्ग संधि |
| शिरोधार्य | शिरः + धार्य | विसर्ग संधि |
➕ 👉 तेजः + … से बने 4 शब्द (तेजो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| तेजोमूर्ती | तेजः + मूर्ति | विसर्ग संधि |
| तेजोमय | तेजः + मय | विसर्ग संधि |
| तेजोरूप | तेजः + रूप | विसर्ग संधि |
| तेजोराशि | तेजः + राशि | विसर्ग संधि |
➕ 👉 पयः + … से बने 4 शब्द (पयो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| पयोज | पयः + ज | विसर्ग संधि |
| पयोनिधि | पयः + निधि | विसर्ग संधि |
| पयोद | पयः + द | विसर्ग संधि |
| पयोधि | पयः + धि | विसर्ग संधि |
➕ 👉 सरः + … से बने 3 शब्द (सरो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| सरोरूह | सरः + रूह | विसर्ग संधि |
| सरोवर | सरः + वर | विसर्ग संधि |
| सरोज | सरः + ज | विसर्ग संधि |
➕ 👉 पुरः + … से बने 3 शब्द (पुरो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| पुरोगामी | पुरः + गामी | विसर्ग संधि |
| पुरोहित | पुरः + हित | विसर्ग संधि |
| पुरोधा | पुरः + धा | विसर्ग संधि |
➕ 👉 रजः + … से बने 3 शब्द (रजो…) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| रजोदर्शन | रजः + दर्शन | विसर्ग संधि |
| रजोमय | रजः + मय | विसर्ग संधि |
| रजोगुण | रजः + गुण | विसर्ग संधि |
➕ 👉 अन्य 7 शब्द (अंततः, वक्षः, दिवः, नभः, वयः, तमः, सर्वतः) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि भेद |
|---|---|---|
| अंततोगत्वा | अंततः + गत्वा | विसर्ग संधि |
| वक्षोज | वक्षः + ज | विसर्ग संधि |
| दिवोज्योति | दिवः + ज्योति | विसर्ग संधि |
| नभोमंडल | नभः + मंडल | विसर्ग संधि |
| वयोवृद्ध | वयः + वृद्ध | विसर्ग संधि |
| तमोगुण | तमः + गुण | विसर्ग संधि |
| सर्वतोमुखी | सर्वतः + मुखी | विसर्ग संधि |
➕ 👉 निः / दुः से बने 4 शब्द (विसर्ग का श् या स् होना) (क्लिक करें)
| शब्द | संधि विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| दुस्तर | दुः + तर | दुः + त → दुस्त (विसर्ग का स्) |
| निश्चित | निः + चित | निः + च → निश्च (विसर्ग का श्) |
| निस्तार | निः + तार | निः + त → निस्त (विसर्ग का स्) |
| निश्चल | निः + चल | निः + च → निश्च (विसर्ग का श्) |
- युधिष्ठिर = युधि + स्थिर। यह विसर्ग संधि की सूचियों में दिया जाता है, पर कुछ पुस्तकों में इसे व्यंजन संधि (षत्व) भी माना गया है।
- सरोकार = सर + ओ + कार। यह मूलतः फ़ारसी का शब्द माना जाता है। कुछ सूचियों में इसे विसर्ग संधि का उदाहरण भी दिखाया जाता है, इसलिए प्रश्न में यही विकल्प हो तो वही उत्तर चुनें।
संधि अभ्यास प्रश्न (Sandhi ke prashn)
- ये भी अच्छे से जानें ⇓⇓
- समास क्या होता है ?
- परीक्षा में आने वाले मुहावरे
- सर्वनाम व उसके भेद
- महत्वपूर्ण विलोम शब्द देखें
- विराम चिन्ह क्या है ?
- परीक्षा में आने वाले ही शब्द युग्म ही पढ़ें
- साहित्य के शानदार वीडियो यहाँ देखें


