Ugc Net hindi answer key june 2019 || हल प्रश्न पत्र जून 2019

दोस्तों आपके द्वारा काफी दिन की मेहनत के बाद आपका एग्जाम हुआ ,हमें यही आशा है कि वाकई में आपने सच्चे मन से मेहनत की होगी तो आपका एग्जाम भी अच्छा हुआ होगा 

प्रश्न पत्र हल करने में सावधानी रखी गई है फिर भी कोई त्रुटी हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं 

अब सब के मन में एक ही सवाल होगा 

कि मेरिट कितनी रहेगी ?

तो दोस्तों आपको बता दें कि पेपर के स्तर को देखते हुए मेरिट लगभग पिछले पेपर के समान ही रहने वाली है |

हिंदी साहित्य चैनल की और से हमारे ग्रुप से जुड़े अभ्यर्थियों को अच्छे पीडीऍफ़ नोट्स और टेस्ट सीरीज ही मिली ,इसी कारण एग्जाम भी ठीक रहा है 

Ugc net hindi answer key june 2019

Ugc net hindi solved paper june 2019

नेट / जे.आर.एफ हिन्दी परीक्षा जून 2019 (हल सहित पेपर)

जो भी उत्तर आपको प्रामाणिक मिले वो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें और अपने अनुमानित मार्क्स लिखें 

 

1. ’बालि को सपूत कपिकुल पुरहूत,
रघुवीर जू को दूत भरि रूप विकराल को।’
उपर्युक्त काव्य-पंक्तियाँ किस रचनाकार की हैं ?
(अ) केशवदास
(ब) तुलसीदास
(स) सेनापति
(द) मतिराम

2. लाला श्रीनिवासदास ने निम्नलिखित में से किन-किन विधाओं में लिखा है ?
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) कविता
(घ) आलोचना
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क) और (ख)
(ब) (क), (ख) और (ग)
(स) (ख), (ग) और (घ)
(द) (क) और (ख)

3. ’जैसे पुराना चावल ही बङे आदमियों के खाने योग्य समझा जाता है वैसे ही अपने समय से कुछ पुरानी पङी हुई परम्परा के गौरव से युक्त भाषा ही पुस्तक रचने वालों के व्यवहार योग्य समझी जाती थी।’’ रामचन्द्र शुक्ल का उपर्युक्त कथन ’हिन्दी साहित्य का इतिहास’ के आदिकाल के किस प्रकरण में है ?
(अ) प्रकरण 1
(ब) प्रकरण 2
(स) प्रकरण 3
(द) प्रकरण 4

4. सुजान की उपेक्षा से विराग उत्पन्न होने के बाद रीतिकालीन कवि घनानन्द वृंदावन जाकर किस सम्प्रदाय के वैष्णव हो गए थे ?
(अ) वल्लभ संप्रदाय के
(ब) निंबार्क संप्रदाय के
(स) सखी संप्रदाय के
(द) राधावल्लभ संप्रदाय के

5. ’तीसरी कसम’ कहानी में गाङीवान् ने कौन-सा सामान न लादने की कसम नहीं खाई ?
(अ) कंपनी की औरत
(ब) दुलहिन की डोली
(स) चोर बाजारी का सामान
(द) बाँस

6. काॅलरिज की काव्य-संबंधी धारणा का प्रमुख आधार क्या है ?
(अ) साहचर्यवादी सिद्धान्त
(ब) जैववादी सिद्धान्त
(स) यांत्रिकतावादी सिद्धान्त
(द) आनंदवादी सिद्धान्त

7. आनंदवर्धन ने किसे ध्वनि की आत्मा माना है ?
(अ) वस्तु ध्वनि
(ब) अलंकार ध्वनि
(स) रस ध्वनि
(द) गुणौचित्य

 

8. ’’बैठे हुए सुखद आतप में मृग रोमंथन करते हैं,
वन के जीव विवर से बाहर हो विश्रब्ध विचरते हैं।’’
उपर्युक्त पंक्तियों में किसका वर्णन है ?
(अ) ’साकेत’ में चित्रकूट का
(ब) असाध्यवीणा में वन-प्रान्तर का
(स) रश्मिरथी में परशुराम आश्रम का
(द) ’कामायनी’ में सारस्वत्-प्रदेश का

9. ’’क्या स्त्री होना कोई पाप है ?’’
उपर्युक्त संवाद किस कहानी से सम्बद्ध है ?
(अ) दुलाईवाली
(ब) आकाशदीप
(स) लालपान की बेगम
(द) परिंदे

10. जन्म-काल के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) जायसी, सूरदास, तुलसी, रहीम
(ब) सूरदास, तुलसी, जायसी, रहीम
(स) सूरदास, जायसी, तुलसी, रहीम
(द) जायसी, तुलसी, रहीम, सूरदास

 

11. प्रकाशन-वर्ष के अनुसार निम्नलिखित संस्मरण-कृतियों का सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) स्मृतिकण, लीक-अलीक, वन तुलसी की गंध, हम-हशमत
(ब) हम-हशमत, लीक-अलीक, वन तुलसी की गंध
(स) वन तुलसी की गंध, लीक-अलीक, स्मृतिकण, हम-हशमत
(द) स्मृतिकण, हम-हशमत, लीक-अलीक, वन तुलसी की गंध

12. प्रकाशनकाल की दृष्टि से सुरेन्द्र वर्मा के नाटकों का सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) द्रौपदी, रति का कंगन, आठवाँ सर्ग, शकुन्तला की अंगूठी
(ब) आठवा सर्ग, शकुन्तला की अंगूठी, रति का कंगन
(स) द्रौपदी, आठवाँ सर्ग, शकुन्तला की अंगूठी, रति का कंगन
(द) शकुन्तला की अंगूठी, द्रौपदी, आठवाँ सर्ग, रति का कंगन
13. निम्नलिखित ग्रंथों को उनके रचयिताओं के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची – । सूची – ।।
(ग्रन्थ) (रचनाकार)
(क) पेरि इप्सुस              (1) काॅलरिज
(ख) द सेक्रेड वुड            (2) अरस्तू
(ग) पोएटिक्स               (3) टी. एस. इलियट
(घ) बाॅयोग्रेफिया लिटरेरिया (4) लोंजाइनस
(5) विलियम वड्वर्थ
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(5)
(ब) (क)-(2), (ख)-(3), (ग)-(4), (घ)-(1)
(स) (क)-(3), (ख)-(1), (ग)-(5), (घ)-(4)
(द) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(2), (घ)-(1)

 

14. जुंग के अनुसार पिता पर अधिकार जमाने के लिए लङकी की अपनी माँ से प्रतिस्पद्र्धा को किस ग्रंथि के रूप में जाना जाता है ?
(अ) परपीङन रति ग्रंथि
(ब) इलैक्ट्रा ग्रंथि
(स) आत्मपीङन रति ग्रंथि
(द) इडिपस ग्रंथि
15. ’’हिंदी रंगमंच को हिंदीभाषी प्रदेश की सांस्कृतिक पूर्तियों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना होगा, रंगों और राशियों के हमारे विवेक को व्यक्त करना होगा।’’
उपर्युक्त कथन निम्नलिखित में से किस नाटक की भूमिका से सम्बद्ध है ?
(अ) आगरा बाजार
(ब) एक और द्रोणाचार्य
(स) आषाढ़ का एक दिन
(द) चंद्रगुप्त
16. गैंग्रीन कहानी की ’मालती’ बचपन में कैसी लङकी थी ?
(क) सरल और शांत लङकी थी
(ख) उद्धत और चंचल लङकी थी
(ग) पुस्तकें पङने की शौकीन लङकी थी
(घ) चोरी से क्लास से भागने वाली लङकी
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क), (ख) और (ग)
(ब) (क) और (ख)
(स) (ख) और (घ)
(द) (ख) और (ग)

 

17. ’भीष्म साहनी के नाटकों की कौन-सी विशेषताएँ हैं ?
(क) भारतीय नारी की पीङा का प्रभावी प्रस्तुतीकरण
(ख) भारतीय संस्कृति की पुनरुत्थानवादी अभिव्यक्ति
(ग) मध्यकालीन धर्मान्धता, अनाचार तथा तानाशाही की सामयिक संगति
(घ) साम्प्रदायिक एकता और राष्ट्रीय अखण्डता की अभिव्यक्ति
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क) और (ख)
(ब) (क) और (ग)
(स) (ख) और (ग)
(द) (ग) और (घ)
18. नामवर सिंह ने ’संस्कृति और सौंदर्य’ निबन्ध में हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित ’अशोक के फूल’ की रचना का उद्देश्य निम्नलिखित में से किसे माना है ?
(अ) प्रकृति वर्णन
(ब) संस्कृति की मिश्रता को उजागर करना
(स) आर्य संस्कृति की शुद्धता के अहंकार पर चोट
(द) सामासिक संस्कृति को प्रोत्साहन
19. मन्नु भण्डारी अपनी आत्मकथा में ’आपका बंटी’ उपन्यास की विभिन्न समीक्षाओं में किस पक्ष को उपेक्षित मानती हैं?
(अ) खंडित बचपन
(ब) बच्चे के पालन-पोषण का आर्थिक पक्ष
(स) बाल-मनोवैज्ञानिक पक्ष
(द) मुख्य स्त्री पात्र-स्त्रीत्व

 

20. ’राम की शक्तिपूजा’ की रचना कब हुई ?
(अ) सन् 1934 ई.
(ब) सन् 1935 ई.
(स) सन् 1936 ई.
(द) सन् 1937 ई.
21. ’’माई न होती, बाप न होते, कम्र्म न होता काया।
हम नहिं होते, तुम नहिं होते, कौन कहाँ ते आया।।
चंद न होता, सूर न होता, पानी पवन मिलाया।
शास्त्र न होता, वेद न होता, करम कहाँ ते आया।।’’
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(अ) कबीर
(ब) नामदेव
(स) रैदास
(द) मलूकदास

22. ’’अपभ्रंश के जो नमूने हमें पद्यों में मिलते हैं वे उस काव्यभाषा के हैं जो अपने पुरानेपन के कारण बोलने की भाषा से कुछ अलग बहुत दिनों तक आदिकाल के अंत क्या उसके कुछ पीछे तक-पोथियों में चलती रही।’’
उपर्युक्त कथन किसका है ?
(अ) राहुल सांकृत्यायन
(ब) रामचन्द्र शुक्ल
(स) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(द) नामवर सिंह
23. निम्नलिखित में से कौन-सी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में है ?
(अ) नेपाली
(ब) कांगङी
(स) राजस्थानी
(द) गोंडवी
24. हिन्दी पर सामासिक संस्कृति के वहन का दायित्व संविधान के किस अनुच्छेद में निर्धारित है ?
(अ) 343
(ब) 348
(स) 349
(द) 351

25. ’’सखी नील नभस्सर से उतरा, यह हंस अहा! तरता-तरता
अब तारक मौक्तिक शेष नहीं, निकला जिनको चरता-चरता।।’’
उपर्युक्त पंक्तियों में ’हंस’ किस अलंकार से सम्बद्ध है ?
(अ) अपह्नुति
(ब) उत्प्रेक्षा
(स) रूपकातिशयोक्ति
(द) उपमा
26. ’’निराला जी पर बंग भाषा की काव्यशैली का प्रभाव, समास में गुम्फित पदवल्लरी, क्रियापद के लोप आदि में स्पष्ट झलकता है। लाक्षणिक वैलक्षण्य लाने की प्रवृत्ति इनमें उतनी नहीं पाई जाती जितनी प्रसाद और पंत में।’’
उपर्युक्त कथन किसका है ?
(अ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ब) रामचंद्र शुक्ल
(स) रामस्वरूप चतुर्वेदी
(द) नगेन्द्र

27. निम्नलिखित उपन्यासों का प्रकाशनकाल की दृष्टि से सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) मानस का हंस, टेरा कोटा, भूले बिसरे चित्र, गर्म राख
(ब) भूले बिसरे चित्र, गर्म राख, मानस का हंस, टेरा कोटा
(स) गर्म राख, भूले बिसरे चित्र, टेरा कोटा, मानस का हंस
(द) टेरा कोटा, गर्म राख, मानस का हंस, भूले बिसरे चित्र
28. निम्नलिखित में से किस उपन्यास में ’राम और काम’ का द्वन्द्व चित्रित हुआ है ?
(अ) अमृत और विष
(ब) खंजन नयन
(स) मानस का हंस
(द) नाच्यो बहुत गोपाल
29. ’नयी कविता’ के प्रथम अंक में ’निराला’ की किस कविता का अनेक कवियों द्वारा सामूहिक रूपांतर प्रकाशित हुआ था ?
(अ) वनवेला
(ब) यमुना के प्रति
(स) वह तोङती पत्थर
(द) जूही की कली
30. अभिनवगुप्त के अनुसार –
(क) मानव-मन में वासना रूप में स्थित स्थायीभाव का साधारणीकरण होता है।
(ख) साधारणीकरण के लिए भोजकत्व व्यापार अनिवार्य है।
(ग) साधारणीकरण की अवस्था में प्रेक्षक स्व-पर के बंधन से छूट जाता है।
(घ) साधारणीकरण की अवस्था में प्रेक्षक को लौकिक सम्बन्धों का बोध रहता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(अ) (क) और (ख)
(ब) (ख) और (ग)
(स) (क) और (ग)
(द) (ख) और (घ)

31. निम्नलिखित में से कौन-सी बोली राजस्थानी की नहीं है ?
(अ) मेवाती
(ब) मंडियाली
(स) मारवाङी
(द) मेवाङी
32. काव्य भाषा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सी मान्यता ’वड्र्सवर्थ’ की नहीं है ?
(अ) काव्य में ग्रामीणों की दैनिक बोलचाल की भाषा प्रयुक्त हो।
(ब) भाषा में मिथक और बिम्बों का प्रयोग होना चाहिए।
(स) भाषा में कृत्रिमता और आडंबवाद के कवियों की देन है।
(द) गद्य और काव्य की भाषा में कोई तात्त्विक भेद नहीं है।
33. निम्नलिखित रचनाओं को उनके प्रकाशनकाल से सुमेलित कीजिए:
सूची – ।                          सूची – ।।
(क) मोहन राकेश की डायरी    (1) 1940 ई.
(ख) डायरी के कुछ पन्ने        (2) 1958 ई.
(ग) मेरी काॅलेज डायरी         (3) 1972 ई.
(घ) एक कार्यकत्र्ता की डायरी  (4) 1985 ई.
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(1), (घ)-(4)
(ब) (क)-(3), (ख)-(2), (ग)-(1), (घ)-(4)
(स) (क)-(4), (ख)-(1), (ग)-(2), (घ)-(3)
(द) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(2), (घ)-(1)

34. निम्नलिखित काव्य रचनाओं को उनके प्रकाशनकाल से सुमेलित कीजिए:
सूची -।                      सूची – ।।
(काव्य रचनाएँ)           (प्रकाशनकाल)
(क) जूही की कली       (1) 1919
(ख) भारत भारती       (2) 1914
(ग) प्रिय प्रवास          (3) 1916
(घ) प्रथम रश्मि         (4) 1912
(5) 1915
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
(ब) (क)-(3), (ख)-(4,) (ग)-(2), (घ)-(1)
(स) (क)-(4), (ख)-(5), (ग)-(2), (घ)-(3)
(द) (क)-(2), (ख)-(3), (ग)-(5), (घ)-(4)
35. यशपाल के उपन्यास ’झूठा सच’ में दौलतराम आजाद किस राजनीतिक दल का सदस्य था ?
(अ) कांग्रेस
(ब) कम्युनिष्ट पार्टी
(स) मुस्लिम लीग
(द) जनसंघ
36. निम्नलिखित में से कौन-सी रचना अग्रदास की नहीं है ?
(अ) ध्यान मंजरी
(ब) कुंडलिया
(स) रामध्यान मंजरी
(द) रूप मंजरी

37. गांधीवाद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
(अ) इसके पीछे मार्क्सवाद के समान व्यवस्थित अध्ययन नहीं है।
(ब) इसका आधार तर्क नहीं सहानुभूति है।
(स) इसमें विचार-स्वातंत्र्य का अभाव है।
(द) इसके विचारों का स्रोत दैनिक साधना है।
38. ’दोनों का हठ था दुर्निवार, दोनों ही थे विश्वासहीन’
’कामायनी’ की उपर्युक्त पंक्ति से क्या आशय है ?
(अ) श्रद्धा और मनु के बीच विश्वास खंडित हो गया था।
(ब) इङा और मनु में हठधर्मिता बढ़ गई थीं
(स) देव और दानव, दोनों हठी और विश्वासहीन थें
(द) आकुलि और किलात मनु से यज्ञ के लिए दुर्निवार हठ कर रहे थे।

39. ’मैं नीर भरी दुख की बदली।’
महादेवी वर्मा का उपर्युक्त गीत उनके किस काव्य संग्रह से सम्बद्ध है ?
(अ) नीहार
(ब) रश्मि
(स) नीरजा
(द) सान्ध्यगीत
40. निम्नलिखित में से कौन-कौन-सी रचनाएँ भारतीय प्रशासन व्यवस्था पर सटीक व्यंग्य करती हैं ?
(क) भोलाराम का जीव
(ख) सिक्का बदल गया
(ग) जामुन का पेङ
(घ) पिता
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(अ) (क) और (ग)
(ब) (क), (ख) और (ग)
(स) (ख), (ग) और (घ)
(द) (क), (ग) और (घ)
41. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित रचनाओं का सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) काव्यालंकार, नाट्यशास्त्र, ध्वन्यालोक, साहित्य दर्पण
(ब) ध्वन्यालोक, नाट्यशास्त्र, काव्यालंकार, साहित्य दर्पण
(स) नाट्यशास्त्र, ध्वन्यालोक, साहित्य दर्पण, काव्यालंकार
(द) नाट्यशास्त्र, काव्यालंकार, ध्वन्यालोक, साहित्य दर्पण

42. ’’इस समय तो भारतीय पुरुष जैसे अपने मनोरंजन के लिए रंग-बिरंगे पक्षी पाल लेता है, उपयोग के लिए गाय और घोङा पाल लेता है, उसी प्रकार वह एक स्त्री को पालता है तथा पालित पशु-पक्षियों के समान ही वह उसके शरीर और मन पर अधिकार समझता है।’’
उपर्युक्त कथन किसका है ?
(अ) महादेवी वर्मा
(ब) प्रभा खेतान
(स) अनामिका
(द) मैत्रेयी पुष्पा
43. ’’जन्मना कवि, प्रकृत्या घुमक्कङ और विचारतः मूलतः मार्क्सवाद ी। कविता के लिए कोई भी विषय हो सकता है – ग ग ग ग। घुमक्कङ ऐसे कि कभी यहाँ, कभी वहाँ। मूलतः मार्क्सवाद ी किन्तु वे उसके बाहर भी झाँक लेते हैं।’’
बच्चन सिंह का उपर्युक्त कथन किस कवि के विषय में है ?
(अ) मुक्तिबोध
(ब) केदारनाथ अग्रवाल
(स) त्रिलोचन
(द) नागार्जुन
44. निम्नलिखित में से कौन-कौन-से कवि उत्तर-छायावाद से सम्बद्ध हैं ?
(क) रामनरेश त्रिपाठी
(ख) रामेश्वर शुक्ल अंचल
(ग) बालकृष्ण शर्मा नवीन
(घ) भारत भूषण अग्रवाल
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क) और (ख)
(ब) (ख) और (घ)
(स) (ख) और (ग)
(द) (ग) और (घ)
45. ’इश्क भरा है देख ले और जगत् से दूर
एक अचम्भा हमने देखा देहरी का नासूर।’
अमीर खुसरो की उपर्युक्त पहेली से क्या अभिप्राय है ?
(अ) संन्यासी
(ब) कुआँ
(स) खंडहर
(द) प्रेमी का हृदय
46. ’’जीवन मुँह चाही को नीको।
दरस परस दिन राति करति है, कान्ह पियारे पी को।’’
उपर्युक्त पंक्तियों में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने किस भाव की अभिव्यक्ति मानी है ?
(अ) निर्गुण भक्तिभाव की
(ब) सगुण भक्तिभाव की
(स) असूया भाव की
(द) दैहिक शृंगार की

47. निम्नलिखित में से कौन-सी रचनाएँ पुष्पदंत द्वारा रचित नहीं हैं ?
(क) आदिपुराण
(ख) योगसार
(ग) जसहर चरिउ
(घ) उत्तर पुराण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(अ) (क), (ख) और (ग)
(ब) (ख) और (ग)
(स) (ख), (ग) और (घ)
(द) (क) और (घ)
48. ’’विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य-साहित्य की परम्परा का प्रवर्तन नाटक से हुआ।’’
उपर्युक्त कथन किस इतिहासकार का है ?
(अ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ब) रामचन्द्र शुक्ल
(स) बच्चन सिंह
(द) रामस्वरूप चतुर्वेदी
49. ’’तुलसी की विलक्षण प्रतिभा इस बात में है कि उन्हांेने भक्त और रचनाकार की भूमिकाओं का एक साथ सफल निर्वाह किया है। भक्त मूलतः दैवी शक्ति के किसी स्वरूप में आस्था रखता है जबकि रचनाकार अपनी आस्तिकता-नास्तिकता के बाद एक मूलतः ऐहिक या कि धर्मनिरपेक्ष कर्म में प्रवृत्त होता है।’’
तुलसीदास के विषय में उपर्युक्त कथन किस साहित्येतिहासकार का है ?
(अ) रामस्वरूप चतुर्वेदी
(ब) रामशंकर शुक्ल रसाल
(स) गणपति चन्द्र गुप्त
(द) हजारी प्रसाद द्विवेदी

50. निम्नलिखित में से नुक्कङ नाटक के विषय में क्या सही नहीं है ?
(अ) राजनीतिक प्रतिबद्धता
(ब) कला के लिए कला
(स) जीवन के लिए कला
(द) ब्रेख्त के नाट्य सिद्धान्त के निकट
51. हिंदी के निम्नलिखित लोकमंचीय रूपों को प्रचलन की प्रमुखता के आधार पर प्रांतों से सुमेलित कीजिए:
सूची -।                                  सूची -।।
(लोकमंचीय रूप)                       (प्रान्त)
(क) सांग                           (1) मध्यप्रदेश
(ख) विदेसिया                     (2) राजस्थान
(ग) माच                           (3) हरियाणा
(घ) खयाल                         (4) बिहार
(5) गुजरात
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(3), (घ)-(5)
(ब) (क)-(3), (ख)-(4), (ग)-(3), (घ)-(2)
(स) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
(द) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(5), (घ)-(1)

52. ’’तोरि मानिनी तें हियो फोरि मोहिनी मान।
प्रेमदेव की छबि ही लखि भए मियाँ रसखान।।’’
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार उपर्युक्त दोहे से प्रामाणित होता है कि
(क) रसखान किसी स्त्री पर आसक्त थे।
(ख) स्त्री मानवती थी और रसखान का अनादर करती थी।
(ग) रसखान स्वयं को प्रेम का मानदंड मानते थे।
(घ) रसखान को भास हुआ कि जिस पर गोपियाँ मरती हैं उसी पर ध्यान लगाया जाए।
(ङ) रसखान मोहिनी का मान-मर्दन करना चाहते थे।
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(अ) (क), (ख) और (ग)
(ब) (क), (ख) और (घ)
(स) (ख), (ग) और (ङ)
(द) (ख), (ग), (घ) और (ङ)
53. ’’बचन सिंह सिहर-सा गया और उसके हाथों की अभ्यस्त निठुराई को जैसे किसी मानवीय कोमलता ने धीरे-से छू लिया।’’
उपर्युक्त कथन किस कहानी का है ?
(अ) अमृतसर आ गया है
(ब) सिक्का बदल गया
(स) राजा निरबंसिया
(द) उसने कहा था
54. जन्म-काल के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम क्या है ?
(अ) केशवदास, बिहारी, मतिराम, घनानंद
(ब) बिहारी, केशवदास, घनानंद, मतिराम
(स) केशवदास, मतिराम, घनानंद, बिहारी
(द) घनानंद, बिहारी, केशवदास, मतिराम

55. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ’प्रिय प्रवास’ की निम्नलिखित में से किस विशेषता का उल्लेख नहीं किया है ?
(अ) अधिकतर पदों में बङे ढंग से हिंदी अपनी चाल पर चली चलती दिखाई पङती है।
(ब) इसकी कथावस्तु एक अच्छे प्रबन्ध के लिए पर्याप्त है।
(स) यह काव्य अधिकतर भाव व्यंजनात्मक और वर्णनात्मक है।
(द) हिंदी को ’है’, ’था’ ’किया’ ’दिया’ ऐसी दो एक क्रियाओं के भीतर ही सिमट कर रह जाना
56. ’हिंसानल से शांत नहीं होता हिंसानल’
उपर्युक्त ध्येय-वाक्य का सम्बन्ध किस काव्य रचना से है ?
(अ) कुरुक्षेत्र
(ब) जयद्रथवध
(स) उन्मुक्त
(द) अशोक की चिंता
57. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची -।                 सूची – ।।
(रचनाएँ)              (रचनाकार)
(क) प्राकृत प्रकाश     (1) देवसेन
(ख) श्रावकाचार        (2) वररूचि
(ग) प्रबंध चिंतामणि   (3) जैनाचार्य मेरुतंग
(घ) कुमारपाल प्रतिबोध (4) हेमचंद्र

(5) सोमप्रभ सूरि
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(2), (ख)-(1), (ग)-(3), (घ)-(5)
(ब) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(4), (घ)-(3)
(स) (क)-(3), (ख)-(5), (ग)-(1), (घ)-(4)
(द) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
58. ’’मर्यादा मत तोङो
तोङती हुई मर्यादा
कुचले हुए अजगर-सी
गुंजलिका में कौरव वंश को लपेटकर
सूखी लकङी-सा तोङ डालेगी।’’
’अंधायुग’ का उपर्युक्त संवाद किसका है ?
(अ) भीष्म
(ब) द्रोणाचार्य
(स) कृष्ण
(द) विदुर
59. ’’अगर प्रेम खंूख्वार शेर है तो मैं उससे दूर ही रहूँगी। मैंने तो उसे गाय ही समझ रखा था। मैं प्रेम को सन्देह के ऊपर समझती हूँ। वह देह की वस्तु नहीं, आत्मा की वस्तु है। सन्देह का वहाँ जरा भी स्थान नहीं और हिंसा तो सन्देह का ही परिणाम है। वह सम्पूर्ण आत्मसमर्पण है।’’ ये पंक्तियाँ ’गोदान’ उपन्यास में किस पात्र द्वारा कही गई हैं ?
(अ) गोविन्दी
(ब) सोना
(स) सीलिया
(द) मालती
60. निम्नलिखित आचार्यों को उनके कथनों से सुमेलित कीजिए:
सूची ।                    सूची।।
(क) दंडी              (1) काव्यं शोभाया, कर्तारो धर्मागुणा
(ख) भामह             (2) शरीरं ताव दिष्टार्थव्यवछिन्न पदावली
(ग) वामन             (3) अनौचित्यादते नान्यात् रसभंगस्य कारणं
(घ) क्षेमेन्द्र            (4) शब्दार्थाै सहितौ काव्यं गद्यं पद्यं च द्विधा
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(3), (ख)-(1), (ग)-(2), (घ)-(4)
(ब) (क)-(1), (ख)-(4), (ग)-(3), (घ)-(2)
(स) (क)-(4), (ख)-(1), (ग)-(3), (घ)-(2)
(द) (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(1), (घ)-(3)

61. ’’पुनर्जागरण का भारतीय साहित्य में पहला प्रतिफलन माइकेल मधुसूदन दत्त के बांग्ला काव्य ’मेघनाथ वध’ (1861) को माना गया है।’’
उपर्युक्त कथन किस आलोचक का है ?
(अ) रामचंद्र शुक्ल
(ब) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(स) रामकुमार वर्मा
(द) रामस्वरूप चतुर्वेदी
62. निम्नलिखित में से कौन-सी रचनाएँ केशवदास की है ?
(क) रसिक प्रिया
(ख) अनुप्रास विनोद
(ग) विज्ञान गीता
(घ) रस सागर
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क) और (ग)
(ब) (क), (ख) और (ग)
(स) (ख), (ग) और (घ)
(द) (ग) और (घ)
63. ’’ये हिन्दी के प्रधान आचार्यों में माने जाते हैं और इनका ’भाषाभूषण’ अलंकार ग्रंथ एक बहुत ही प्रचलित पाठ्यगंथ कहा है।’’
रामचन्द्र शुक्ल ने उपर्युक्त बात किस रीतिकालीन कवि के विषय में कही है ?
(अ) मतिराम
(ब) देव
(स) महाराज जसवंत सिंह
(द) पद्माकर
64. आचार्य भरत ने काव्य दोषों की संख्या कितनी मानी है ?
(अ) 8
(ब) 9
(स) 5
(द) 10

65. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों से साथ सुमेलित कीजिए:
सूची – ।              सूची -।।
(रचनाएँ)           (रचनाकार)
(क) काव्य प्रकाश  (1) देव
(ख) रसराज        (2) भिखारीदास
(ग) रस विलास    (3) रसलीन
(घ) रस सारांश     (4) चिन्तामणि
(5) मतिराम
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(4), (ख)-(5), (ग)-(1), (घ)-(2)
(ब) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
(स) (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(5), (घ)-(1)
(द) (क)-(3), (ख)-(4), (ग)-(5), (घ)-(2)
66. निम्नलिखित में से क्या ’तमस’ उपन्यास में साम्प्रदायिक भावना के निर्माण में सहायक नहीं है ?
(अ) साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह
(ब) विभिन्न सम्प्रदायों का एक स्थान पर वास
(स) वर्गीय पूर्वाग्रह
(द) अतीत की गौरव-गाथाएँ।
67. ’सखि! पिया को जो मैं न देखँू,
तो कैसे काटूँ अंधेरी रतियाँ।’
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(अ) विद्यापति
(ब) नरपति नाल्ह
(स) अमीर खुसरो
(द) भट्ट केदार
68. निम्नलिखित संस्थाओं को उनके प्रवर्तकों के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची -।                            सूची-।।
(संस्थाएँ)                         (प्रवर्तक)
(क) ब्रह्म समाज                 (1) महात्मा फुले
(ख) प्रार्थना समाज               (2) एनी बेसेंट
(ग) थियोसिफिकल सोसायटी   (3) म. गो. रानाडे
(घ) सत्यशोधक समाज         (4) राजा राममोहन राय
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(2), (घ)-(1)
(ब) (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(5), (घ)-(3)
(स) (क)-(4), (ख)-(2), (ग)-(1), (घ)-(3)
(द) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(4), (घ)-(5)
69. ’’यह मेरे जीवन का केवल अर्ध सत्य है ग ग ग जहाँ तक अंतरंग जीवन का प्रश्न है, वह नितान्त मेरा अपना है – आपको उसका समभागी बनाने की उदारता मुझमें नहीं है।’’
उपर्युक्त वक्तव्य किस आत्मकथाकार का है ?
(अ) रामविलास शर्मा
(ब) नगेन्द्र
(स) शिवपूजन सहाय
(द) हरिवंश राय बच्चन

70. रामचन्द्र शुक्ल ने रहस्यवाद के मूल अर्थ में किस छायावादी कवि को सर्वाधिक प्रमुख माना है ?
(अ) पंत
(ब) प्रसाद
(स) निराला
(द) महादेवी वर्मा
71. ’’शुक्ल जी ने न तो भारत के रूढ़िवाद को स्वीकार किया, न पश्चिमी व्यक्तिवाद को।’’
उपर्युक्त कथन किस लेखक का है ?
(अ) नन्ददुलारे वाजपेयी
(ब) रामविलास शर्मा
(स) नामवर सिंह
(द) नगेन्द्र
72. ’’कहानी इतिवृत्त ही तो है। यानी उसमें स्थिति से स्थित्यंतर, अर्थात् जीवन गति होनी चाहिए। काल का कुछ स्पन्दन, कुछ तनाव अनुभव हो, वही तो कहानी का रस है।’’
कहानी के विषय में उपर्युक्त विचार किस लेखक के हैं ?
(अ) जैनेन्द्र कुमार
(ब) राजेन्द्र यादव
(स) यशपाल
(द) इलाचन्द्र जोशी
73. निम्नलिखित में से किस आलोचक का संबंध मार्क्सवाद से है ?
(अ) परशुराम चतुर्वेदी
(ब) रामस्वरूप चतुर्वेदी
(स) शिवदान सिंह चौहान
(द) नंददुलारे वाजपेयी
74. रस की प्रस्तुति के लिए ’तद्रूपतानुसंधान’ शब्द का प्रयोग किस आचार्य ने किया ?
(अ) अभिनव गुप्त
(ब) शंकुक
(स) भट्ट लोल्लट
(द) भट्ट नायक
75. ’यही सच है’ की कहानीकार कौन हैं ?
(अ) कृष्णा सोबती
(ब) उषा प्रियंवदा
(स) मन्नू भंडारी
(द) मृदुला गर्ग

76. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रवासी लेखक माॅरीशास का नहीं है ?
(अ) महेशराम जियावन
(ब) अभिमन्यु अनत
(स) रामदेव धुरंधर
(द) महातम सिंह
77. ’’और अब तो हवा भी बुझ चुकी है
और सारे इश्तहार उतार लिए गए हैं
जिनमें कल आदमी –
अकाल था।………’’
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(अ) नागार्जुन
(ब) मुक्तिबोध
(स) धूमिल
(द) लीलाधर जगूङी
78. निम्नलिखित जीवनीपरक कृतियों में से कौन-सी कृति रोमां रोला की है ?
(अ) बापू
(ब) बापू की झाँकियाँ
(स) महात्मा गाँधी: विश्व के अद्वितीय पुरुष
(द) अकाल पुरुष गांधी
79. ’तुम कनक किरण के अंतराल में
लुक-छिपकर चलते हो क्यों
……………………………………………
हे लाज भरे सौन्दर्य बता दो
मौन बने रहते हो क्यों।’
उपर्युक्त गीत-पंक्तियाँ जयशंकर प्रसाद की किस रचना से सम्बन्धित हैं ?
(अ) चन्द्रगुप्त
(ब) प्रलय की छाया
(स) कामायनी
(द) स्कन्दगुप्त

80. निम्नलिखित काव्य पंक्तियों को उनके रचनाकारों से सुमेलित कीजिए:
सूची – ।                                                  सूची -।।
(काव्य पंक्तियाँ)                                       (रचनाकार)
(क) मैं बकता नहीं हूँ कविताएँ/ईजाद करता हूँ गाली (1) धूमिल
(ख) इस वक्त जबकि कान नहीं सुनते हैं              (2) श्रीकान्त वर्मा
कविताएँ/कविता पेट से सुनी जाती है
(ग) आज फिर शुरु हुआ जीवन आज मैंने एक        (3) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
छोटी-सी सरल सी कविता पढ़ी
(घ) मैं नया कवि हूँ/इसी से जानता हूँ सत्य           (4) रघुवीर सहाय
की चोट बहुत गहरी होती है
(5) शमशेर बहादुर सिंह
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(5), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
(ब) (क)-(4), (ख)-(3), (ग)-(2), (घ)-(1)
(स) (क)-(2), (ख)-(1), (ग)-(4), (घ)-(3)
(द) (क)-(3), (ख)-(2), (ग)-(4), (घ)-(5)
81. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रहीम के बारे में कौन-सी बातें सही हैं ?
(अ) संस्कृत, अरबी और फारसी के पूर्ण विद्वान थे।
(ब) हिन्दी काव्य के उतने मर्मज्ञ कवि नहीं थे जितने फारसी के।
(स) उनकी दानशीलता हृदय की सच्ची प्रेरणा के रूप में थी।
(द) जब इनसे कोई कुछ माँगने आता तब भी उन्हें अपनी दरिद्रता का अनुभव नहीं होता था।
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क), (ख),(ग) और (घ)
(ब) (क), (ग),(ख) और (ङ)
(स) (क), (ख) और (घ)
(द) (क), (ख) और (घ)

82. ’’ किसी बात का टोटा होने पर उसे पूरा करने की इच्छा होती है, दुःख होने पर उसे मिटाना चाहते हैं। यह स्वभाव है।’’’
उपर्युक्त कथन किस निबन्ध से उद्धत है ?
(अ) प्रिया नीलकंठी (कुबेरनाथ राय)
(ब) समाज और कत्र्तव्यपालन (गुलाब राय)
(स) कछुआ धर्म (चन्द्रधर शर्मा गुलेरी)
(द) ताज (रघुवीर सहाय)
83. महावीर प्रसाद द्विवेदी की निम्नलिखित रचनाओं में से आलोचना विधा की रचनाएँ कौन-कौन-सी हैं ?
(अ) ’कालिदास की निरंकुशता’, ’कविता कलाप’
(ब) ’कविता कलाप’, ’कुमार संभव सार’
(स) ’कुमार संभव सार’, ’कविता कलाप’, ’कालिदास की निरंकुशता’
(द) ’कालिदास की निरंकुशता’, ’कालिदास और उनकी कविता’
84. हजारी प्रसाद द्विवेदी के निम्नलिखित उपन्यासों को कथास्रोत की दृष्टि से उनके समय से सुमेलित कीजिए
सूची -।                             सूची -।।
(क) अनामदास का पोथा       (1) छठी-सातवीं शताब्दी
(ख) पुनर्नवा                    (2) औपनिषदिक् काल
(ग) बाणभट्ट की आत्मकथा    (3) बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी
(घ) चारु चंद्रलेख                (4) चोथी शताब्दी
(5) पहली-दूसरी शताब्दी
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
(अ) (क)-(4), (ख)-(5), (ग)-(1), (घ)-(3)
(ब) (क)-(1), (ख)-(2), (ग)-(3), (घ)-(4)
(स) (क)-(3), (ख)-(5), (ग)-(2),(घ)-(4)
(द) (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(1), (घ)-(3)
85. निम्नलिखित में से किस कवि का संबंध नवगीत विधा से नहीं है ?
(अ) कुमार रवीन्द्र
(ब) गिरधर राठी
(स) वीरेन्द्र मिश्र
(द) माहेश्वर तिवारी

86. ’तौलिया’ मूलतः किस भाषा का शब्द है ?
(अ) उर्दू
(ब) हिन्दी
(स) पुर्तगाली
(द) तुर्की
87. ’’यदि प्रबंध काव्य एक विस्तृत वनस्थली है तो मुक्तक एक चुना हुआ गुलदस्ता है।’’
बिहारी के संबंध में उपर्युक्त कथन किस आलोचक का है ?
(अ) रामचंद्र शुक्ल
(ब) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(स) श्यामसुंदर दास
(द) नंददुलारे वाजपेयी
88. ’कलिकौतुभ’ के रचयिता कौन हैं ?
(अ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ब) प्रतापनारायण मिश्र
(स) बालकृष्ण भट्ट
(द) बालमुकुंद गुप्त
89. निम्नलिखित में से कौन-सा कवि कृष्णभक्ति धारा के कवियों में शामिल नहीं है ?
(अ) नाभादास
(ब) नंददास
(स) हरिदास
(द) ध्रुवदास

90. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): कविता केवल वस्तुओं के ही रंग रूप में सौन्दर्य की छटा नहीं दिखाती ,
प्रत्यक्ष कर्म और मनोवृत्ति के सौन्दर्य के भी अत्यन्त मार्मिक दृश्य सामने लाती है।
तर्क (त्): वह विकसित कमल के सौन्दर्य का चित्रण तो करती है पर शव नोचते कुत्तों के वीभत्स व्यापार की झलक
नहीं दिखाती क्योंकि वीभत्स व्यापार का चित्रण शास्त्रानुमोदित नहीं है।
विकल्प:
(अ) (।) सही (त्) गलत
(ब) (।) गलत (त्) गलत
(स) (।) सही (त्) सही
(द) (।) गलत (त्) सही
91. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है।
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): बिम्बवाद में शब्दों की कमखर्ची, भाषा के समासगुण, कम-से-कम शब्दों के प्रयोग से अधिकाधिक
अर्थ-व्यंजना को महत्त्व दिया गया है।
तर्क (त्): बिम्बवाद के समर्थकों का मानना था कि विषय का सपाट और प्रत्यक्ष निरूपण किया जाना चाहिए।
विकल्प:
(अ) (।) सही (त्) गलत
(ब) (।) गलत (त्) गलत
(स) (।) गलत (त्) सही
(द) (।) सही (त्) सही
92. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है।
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): यूरोपीय साहित्य मीमांसा में कल्पना को बहुत प्रधानता दी गई है।
तर्क (त्): कल्पना काव्य का अनिवार्य साध्य है।
विकल्प:
(अ) (।) सही (त्) सही
(ब) (।) गलत (त्) सही
(स) (।) सही (त्) गलत
(द) (।) गलत (त्) गलत

93. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है।
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): उन्नीसवीं शताब्दी का नवजागरण भक्तिकालीन लोकजागरण से भिन्न इस बात में है कि वह
उपनिवेशवादी दौर की उपज है।
तर्क (त्): उनकी ऐतिहासिक अन्तर्वस्तु एक समान है।
विकल्प:
(अ) (।) गलत (त्) गलत
(ब) (।) गलत (त्) सही
(स) (।) सही (त्) सही
(द) (।) सही (त्) गलत
94. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है।
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): कविता का अंतिम लक्ष्य जगत् के मार्मिक पक्षों का प्रत्यक्षीकरण करके उनके साथ मनुष्य हृदय का
सामंजस्य स्थापन है।
तर्क (त्): केवल मनोरंजन करना कविता का उद्देश्य नहीं है।
विकल्प:
(अ) (।) गलत (त्) गलत
(ब) (।) सही (त्) गलत
(स) (।) सही (त्) सही
(द) (।) गलत (त्) सही

95. निर्देश: प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (।) है।
और दूसरा तर्क (त्) है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
स्थापना (।): कला का आस्वाद युग-निरपेक्ष नहीं होता।
तर्क (त्): शाश्वतता का गुण कालजयी कलाकृतियों में सहज अन्तर्भूत नहीं होता।
विकल्प:
(अ) (।) सही (त्) गलत
(ब) (।) गलत (त्) गलत
(स) (।) गलत (त्) सही
(द) (।) सही (त्) सही

96. भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है। काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुआंे की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूमि पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता। राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश रहता है। अतएव असुंदर या अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है। यह उपदेश निषेध रूप में ही होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि की प्रासंगिता समाप्त नहीं हुई है। वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?

(अ) काव्य में सुंदर के साथ असुंदर का समावेश रहता है
(ब) काव्य का मूल प्रयोज सत्य के रूप में ही अभिव्यक्त होता है
(स) कवि क्योंकि लोक की यात्रा करता है, इसलिए सुंदर के साथ असंुदर का चित्रण संभव नहीं
(द) अशिव का चित्रण शिव के चित्रण के लिए अनिवार्य है।
97. भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है। काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुआंे की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूमि पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता। राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश रहता है। अतएव असुंदर या अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है। यह उपदेश निषेध रूप में ही होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि की प्रासंगिता समाप्त नहीं हुई है। वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?

(अ) काव्य का सत्य अनिवार्य रूप से मानव-कल्याण का साधन नहीं है ?
(ब) काव्य का सत्य तथ्यात्मक होता है
(स) काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से अभिन्न होता है
(द) काव्य का सत्य अनुभूतिपरक है
98. भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है। काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुआंे की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूमि पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता। राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश रहता है। अतएव असुंदर या अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है। यह उपदेश निषेध रूप में ही होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि की प्रासंगिता समाप्त नहीं हुई है। वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में काव्य-मनीषियों की दृष्टि से समन्वयात्मक होने का आधार क्या है ?

(अ) उसका मनोवैज्ञानिक यथार्थ से जुङा होना
(ब) मनोवैज्ञानिक यथार्थ और आदर्शवाद से जुङा होना
(स) प्रगतिवाद के सैद्धान्तिक आधार को अपनाना
(द) आदर्शवादी दार्शनिकता से जुङा होना
99. भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है। काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुआंे की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूमि पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता। राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश रहता है। अतएव असुंदर या अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है। यह उपदेश निषेध रूप में ही होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि की प्रासंगिता समाप्त नहीं हुई है। वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार काव्य-मनीषियों की प्रगतिशील दृष्टि का आधार क्या है ?

(अ) काव्य को तथ्यात्मक रूप में चित्रित करना
(ब) समन्वयात्मक दृष्टि को अपनाना
(स) काव्य में अशिव और संुदर को प्रमुखता देना
(द) कल्पना को काव्य का आधार बनाना
100. भारतीय काव्य-मनीषियों ने काव्य की वस्तु के साथ ही उसके अर्थ की सीमा का अन्वेषण भी किया है। काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानवलोक में होती है। काव्य का संबंध उस अर्थ से है जिसमें कल्पना और सौंदर्य का आधार होता है। राजशेखर ने कल्पना को स्वीकार करते हुए कहा है कि काव्य के कर्ताओं को वस्तुओं का स्वरूप जैसा प्रतिभासित होता है उसका वर्णन वे उसी रूप में करते हैं। काव्य और दर्शन तथा काव्य और विज्ञान में भी अंतर होता है। काव्य का सत्य विज्ञान के सत्य से भिन्न है क्योंकि काव्य का सत्य तथ्यात्मक नहीं अनुभूत्यात्मक होता है और यह अनिवार्य रूप से मानवकल्याण का साधन भी है। काव्य में असत्य नामक वस्तु की कोई सत्ता संभव नहीं है बल्कि उसमें वर्णित वस्तुआंे की अपनी एक विशिष्ट सत्ता होती है। काव्य की वस्तु कवि की निजी अनुभूमि पर आधारित है। वस्तुतः काव्य में सत्याभास के समान प्रतीत अर्थवाद ही होता है जिसके आधार पर काव्य की वस्तु को असत्य नहीं कहा जा सकता। राजशेखर के अनुसार काव्य में शिव के साथ अशिव के समावेश का कारण यह है कि कवि लोक की यात्रा करता है और सुंदर के साथ असुंदर का चित्रण सुंदर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही करता है। काव्य में सुंदर के साथ असुंदर, शिव के साथ अशिव और सत्य के साथ असत्य का समावेश रहता है। अतएव असुंदर या अशिव का चित्रण सुंदर और शिव के संप्रेषण के लिए अनिवार्य है। यह उपदेश निषेध रूप में ही होता है, विधेय रूप में नहीं, क्योंकि काव्य का मूल प्रयोजन सुंदर और शिव में अंतर्भूत है जो सत्य के रूप में ही व्यक्त होता है। आधुनिक काव्य में सौंदर्यबोध के नए व्यापक धरातल में सुंदर और असुंदर का समावेश किया गया है। प्राचीन काव्यशास्त्र में अर्थभिन्नता की दृष्टि से इसकी स्वीकृति इस तथ्य का प्रमाण है कि बदले हुए समसामयिक संदर्भ में भी इस काव्यदृष्टि की प्रासंगिता समाप्त नहीं हुई है। वस्तुतः काव्यमनीषियों की दृष्टि एकांगी न होकर समन्वयात्मक रही है जो उसकी प्रगतिशील दृष्टि का ही प्रतीक है। यह सत्य है कि इस दृष्टि का कारण मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद न होकर आदर्शवादी दार्शनिकता ही है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?

(अ) काव्य की अर्थव्याप्ति समूचे मानव-लोक में होती है
(ब) काव्य के अर्थ का आधार कल्पना और सौन्दर्य है
(स) काव्य के कर्ता वस्तुओं का वर्णन उसी रूप में नहीं करते जैसा उन्हें प्रतिभासित होता है
(द) भारतीय काव्य-मनीषा के अर्थ की सीमा का भी अन्वेषण किया है

 

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