हिंदी साहित्य का इतिहास-Hindi Sahitya ka Itihas

प्रिय हिंदी पाठको का इस साहित्य मंच पर स्वागत है मित्रो इस मंच का उद्देश्य हिंदी सहभागियों को हिंदी साहित्य का इतिहास (Hindi Sahitya ka Itihas) की बेहतर पाठ्यसामग्री उपलब्ध करवाना है ।

Hindi Sahitya

हिन्दी साहित्य से सम्बन्धित नवीन पाठ्यसामग्री शेयर होती रहेगी, जो किसी भी एग्जाम में आपके लिए वरदान साबित होगी, हम पूरी कोशिश करेंगे कि आप हमारी सेवाओं से संतुष्ट होंगे ।

हिंदी साहित्य का इतिहास (Hindi Sahitya)

हिंदी साहित्य चैनल

इस वैबसाइट पर आपको हिन्दी साहित्य का इतिहास की , नीचे दिये Tab।e के अनुसार पाठ्य सामग्री मिलेगी ,जिस पर आप क्लिक करके पढ़ सकते हो ।

Hindi Sahitya ka Itihas

[/su_tabs]
hindi sahitya channel
Hindi Sahitya Channe।

हमें बहुत खुशी है कि आप हमारी वैबसाइट पर पढ़ रहे हो, तो कुछ सीख कर ही जाएँगे ।

दोस्तो हिन्दी साहित्य का अथाह सागर जिसमे आप अगर डुबकी लगाना चाहते हो तो इसे प्यार करो, आपकी सफलता मे अच्छा मार्गदर्शन ही सहायक होगा। आप निरंतर मेहनत करिएगा ,जल्द आपको कामयाबी मिलेगी ।

हिंदी साहित्य का इतिहास

 

1. आदिकाल 1000 ई. से 1350 ई. तक
2. भक्तिकाल 1350 ई. से 1650 ई. तक
3. रीतिकाल 1650 ई. से 1850 ई. तक
4. आधुनिककाल1850 ई. से अब तक

  • पुनर्जागरण काल (भारतेन्दु युग) 1850 ई. से 1900 ई. तक
  • जागरणसुधार काल (द्विवेदी युग) 1900 ई. से 1920 ई. तक
  • छायावाद काल (प्रसाद-पंत-निराला युग) 1920 ई. से 1936 ई. तक
  • प्रगतिवाद काल (साम्यवादी युग) 1936 ई. से 1943 ई. तक
  • प्रयोगवाद काल (तारसप्तक/अज्ञेय युग) 1943 ई. से 1953 ई. तक
  • नवलेखन काल (नयी कविता युग) 1953 ई. से अब तक

हिंदी साहित्य का इतिहास

रामचंद्र शुक्ल का इतिहास (ramchandra shuk। ka Itihas)

सच्चे अर्थों में हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की परम्परा का विकास आचार्य रामचंद्र शुक्ल के द्वारा ही किया गया।

  • रचना – हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • प्रकाशक – नागरी प्रचारिणी सभा, काशी
  • प्रकाशन वर्ष – 1929 ई.


नोटः- जनवरी, 1929 ई. में यह पुस्तक ’नागरी प्रचारिणी सभा, काशी’ द्वारा प्रकाशित ग्रंथ ’हिन्दी शब्द सागर’ की भूमिका के रूप में प्रकाशित हुई थी। इसी वर्ष के मध्य में उस भूमिका के आरम्भ एवं अंत में बहुत सी बातें बढ़ाकर आचार्य शुक्ल ने इसे स्वतंत्र पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया। 1940 ई. इसका परिवर्द्धित एवं संशोधित संस्करण प्रकाशित करवाया गया।


ध्यातव्य:- ’हिन्दी शब्दसागर’ के निर्माण में निम्न तीन विद्वानों का योगदान महत्त्वपूर्ण माना जाता हैः-
1. बाबू श्यामसुंदर दास 2. आचार्य रामचंद्र शुक्ल 3. रामचंद्र वर्मा


प्रमुख विशेषताएँ:


1. इस पुस्तक में लगभग 1000 कवियों के जीवन चरित्र का विवेचन किया गया है।
2. कवियों की संख्या की अपेक्षा उनके साहित्यिक मूल्यांकन को महत्त्व प्रदान किया गया है अर्थात् हिन्दी साहित्य के विकास में विशेष योगदान देने वाले कवियों को ही इसमें शामिल किया गया है। कम महत्त्व वाले कवियों को इसमें जगह नहीं मिली है।
3. कवियों के काव्य निरुपण में आधुनिक समालोचनात्मक दृष्टिकोण को अपनाया गया है।
4. कवियों एवं लेखकों की रचना शैली का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।


5. इसमें प्रत्येक काल या शाखा की सामान्य प्रवृत्तियों का वर्णन कर लेने के बाद उससे संबद्ध प्रमुख कवियों का वर्णन किया गया है। उस युग में आने वाले अन्य कवियों का विवरण उसके बाद फुटकल भाग में दिया गया है।
6. केदारनाथ पाठक ने इस रचना के लेखन में शुक्ल जी को अपूर्व सहयोग प्रदान किया था।
7. इस रचना के लेखन में शुक्ल जी ने निम्न रचनाओं से विशेष साहित्य सामग्री ग्रहण की थी –
(।) मिश्रबन्धु विनोद – मिश्रबंधु (।। ) हिन्दी कोविद् रत्नमाला – श्यामसुंदरदास
(।।। ) कविता कौमुदी – रामनरेश त्रिपाठी (।V) ब्रजमाधुरी सार – वियोगी हरि

 

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

  • जन्म काल – 1907
  • जन्म स्थान – ग्राम – छपरा, जिला – बलिया (उ.प्र.)
  • मृत्युकाल – 1979 ई. (19 मई, 1979 ई.)


प्रमुख रचनाएँ –

  • हिन्दी साहित्य: उद्भव एवं विकास (1952 ई.)
  • ⇒हिन्दी साहित्य की भूमिका – 1940 ई.
  • हिन्दी साहित्य का आदिकाल – 1953 ई.


विशेष तथ्य:-


1. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी आचार्य शुक्ल के सबसे बङे आलोचक माने जाते हैं। डाॅ. गणपति चन्द्र गुप्त के शब्दों में ’’संभवतः द्विवेदीजी सबसे पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने आचार्य शुक्ल की अनेक धारणाओं और स्थापनाओं को चुनौती देते हुए उन्हें सबल प्रमाणों के आधार पर खण्डित किया है।’’
2. इन्होंने शुक्ल के वीरगाथाकाल को ’आदिकाल’ कहकर पुकारा है।
3. इन्होंने आदिकाल को ’अत्यधिक विरोधों एवं व्याघातों का युग’ भी कहा है।


4. ’काशी हिन्दू वि.वि.’ में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष, ’नागरी प्रचारिणी पत्रिका’ के संपादक और ’उत्तर प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी’ के अध्यक्ष रूप में इनकी सेवाएँ सराहनीय रही हैं।
5. इनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर ’लखनऊ विश्वविद्यालय’ ने इन्हें डी.लिट्. की उपाधि प्रदान की तथा भारत सरकार ने ’पद्म भूषण’ अलंकरण से सम्मानित किया।
6. प्रसिद्ध कथन – ’’भारत का लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय करें।’’ (तुलसीदास की समन्वय भावना पर)

डाॅ. नगेन्द्र


जन्मकाल – 1915 मृत्युकाल – 27 अक्टूबर, 1999


रचनाएँ –


1. हिन्दी साहित्य का वृहद् इतिहास (दस भाग) – 1973 ई.
2. हिन्दी साहित्य का इतिहास 3. रीतिकाव्य की भूमिका
विशेष तथ्य:- इन्होंने 1948 ई. में ’रीतिकाव्य की भूमिका और महाकवि देव’ विषय पर शोध उपाधि प्राप्त की थी।


डाॅ. रामकुमार वर्मा

  • जन्मकाल – 15 सितम्बर, 1905 मृत्युकाल – 1990
  • जन्मस्थान – सागर, जिला – म.प्र.
  • रचना – हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास
  • प्रकाशन वर्ष – 1938 ई.


विशेष तथ्य –


1. इस रचना में 693 ई. से 1693 ई. तक की कालावधि का ही वर्णन किया गया है। अर्थात् यह एक अधूरी रचना है। जिसमें केवल आदिकाल एवं भक्तिकाल का ही उल्लेख किया गया है।
2. इन्होंने शुक्ल के वीरगाथाकाल को चारणकाल एवं उससे पूर्व के काल को संधिकाल कहकर पुकारा है। संधिकाल में अपभ्रंश की रचनाओं का समावेश किया गया है।


3. अपभ्रंश की बहुत सारी सामग्री समेट लेने के कारण ये अपभ्रंश के पहले कवि ’स्वयंभू’ को ही हिन्दी का पहला कवि मानने के भूल कर बैठे हैं।
4. इन्होंने भक्तिकाल की निर्गुणी ज्ञानाश्रयी काव्य धारा को ’संतकाव्य’ एवं प्रेमाश्रयी काव्य धारा को ’सूफीकाव्य’ कहकर पुकारा है।
5. इन्होंने अपनी पहली कविता मात्र सत्रह वर्ष की अल्पायु में ’देशसेवा’ शीर्षक से लिखी थी, जिस पर इन्हें 51 रुपये का पुरस्कार भी मिला था।


डाॅ. रामशंकर शुक्ल ’रसाल’


रचना – हिन्दी साहित्य का इतिहास
प्रकाशन वर्ष – 1931 ई.


विशेष तथ्य –
1. इन्होंने आदिकाल को ’जयकाव्यकाल’ एवं रीतिकाल की ’कलाकाल’ कहकर पुकारा है।
2. इसमें कवियों एवं लेखकों की कृतियों के उदाहरण नहीं दिये गये हैं।
3. अन्य रचनाएँ – (। ) साहित्य प्रकाश (1931 ई.) (।। ) साहित्य परिचय (1931 ई.)

 

डाॅ. गणपति चन्द्र गुप्त


जन्मकाल – 15 जुलाई, 1928 ई.
रचना – हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास (दो खंड)
प्रकाशन वर्ष – 1965 ई.


विशेष तथ्य –


1. इनके द्वारा भक्तिकालीन साहित्य (पूर्व मध्य काल) को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया हैं:-
(। ) धर्माश्रित काव्य (।। ) राज्याश्रित काव्य (।।। ) लोकश्रित काव्य
2. ये जैनकवि ’शालिभद्रसूरि’ को हिन्दी साहित्य का पहला कवि मानते हैं।
अन्य प्रसिद्ध प्रकाशित रचनाएँ –
1. रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन – 1971 ई. 2. महादेवी: नया मूल्यांकन
3. भारतीय एवं पाश्चात्य काव्य सिद्धान्त 4. हिन्दी साहित्य का विकास
5. आदिकाल की प्रामाणिक रचनाएँ

 

 

हिंदी साहित्य के इतिहास ग्रन्थ  (Hindi Sahitya ke Itihas Granth)

  • गार्सा द तासी – इस्तवार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई ए ऐन्दुस्तानी
  • डाॅ. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय – हिन्दई साहित्य का इतिहास(1953 ई.)
  • ठाकुर शिवसिंह सेंगर – शिवसिंह सरोज
  • जाॅर्ज ग्रियर्सन – द माॅडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर आॅव नाॅर्दन हिन्दुस्तान(1888 ई.)
  • डॉ. किशारीलाल गुप्त – हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास(1957 ई.)
  • मिश्रबन्धु – मिश्रबन्धु विनोद
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल – हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • डाॅ. विजयेन्द्र स्नातक – हिन्दी साहित्य का इतिहास (1996 ई.)
  • ⇒डाॅ. नलिन विलोचन शर्मा – हिन्दी साहित्य का इतिहास दर्शन
  • डाॅ. लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय – आधुनिक हिन्दी साहित्य (1941 ई.)
  • ⇒डाॅ. श्री कृष्णलाल – आधुनिक हिन्दी साहित्य का विकास (1942 ई.)
  • डाॅ. धीरेन्द्र वर्मा – हिेन्दी साहित्य
  • ⇒डाॅ. भगीरथ मिश्र – हिन्दी काव्य शास्त्र का इतिहास
  • डाॅ. टीकम सिंह तोमर – हिन्दी वीर काव्य
  • ⇒डाॅ. रामस्वरूप चतुर्वेदी – हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास
  • डाॅ. माताप्रसाद गुप्त -हिन्दी पुस्तक साहित्य (आधुनिक साहित्य संपत्ति का बीजक-1945 ई.)
  • मोतीलाल मेनारिया – राजस्थानी साहित्य की रूपरेखा (1939 ई.)
  • विश्वनाथ प्रसाद मिश्र – हिन्दी साहित्य का अतीत

हिंदी साहित्य का इतिहास

  • ब्रज रत्नदास – खङी बोली हिन्दी साहित्य का इतिहास (1941 ई.)
  • प्रभुदयाल मीतल – चैतन्य सम्प्रदाय और उसका साहित्य
  • परशुराम चतुर्वेदी – उत्तरी भारत की संत परंपरा
  • पं. रामनरेश त्रिपाठी – कविता कौमुदी (दो भाग)
  • डाॅ. विजयेन्द्र स्नातक – राधाबल्लभ संप्रदाय: सिद्धांत और साहित्य
  • श्री चंद्रकांत बाली – पंजाब प्रांतीय हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • मोतीलाल मेनारिया – राजस्थानी भाषा और साहित्य
  • मोतीलाल मेनारिया – राजस्थानी पिंगल साहित्य
  • सूर्यकान्त शास्त्री – हिन्दी साहित्य का विवेचनात्मक इतिहास (1930 ई.)
  • डाॅ. बच्चन सिंह – हिन्दी साहित्य का दूसरा साहित्य (1996 ई.)
  • कृपाशंकर शुक्ल – आधुनिक हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • प्रभाकर माचवे – हिन्दी साहित्य की कहानी (1957 ई.)
  • प्रो. महेन्द्र कुमार – हिन्दी साहित्य का उत्तर मध्य काल
  • नामवर सिंह – आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ
  • राममूर्ति त्रिपाठी – हिन्दी साहित्य का इतिहास

हिंदी साहित्य का इतिहास

  • सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन. अज्ञेय- हिन्दी साहित्य का आधुनिक इतिहास
  • अयोध्या सिंह उपाध्याय – हिन्दी भाषा और उसके साहित्य का विकास
  • आचार्य चतुरसेन शास्त्री – हिन्दी भाषा और साहित्य का इतिहास
  • उदय नारायण तिवारी – हिन्दी भाषा का उद्भव और विकास
  • गंगा प्रसाद सिंह – हिन्दी के मुसलमान कवि (1926 ई.)
  • एफ.ई.के. – ए हिस्ट्री आॅव् हिन्दी लिटरेचर (1910 ई.)
  • पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – हिन्दी साहित्य विमर्श (1923 ई. )
  • रमाशंकर प्रसाद – हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास (1930 ई.)
  • गोविंद राम शर्मा – हिन्दी साहित्य और उसकी प्रमुख प्रवृत्तियाँ (1931 ई.)
  • रामलाल अग्रवाल – हिन्दी साहित्य (1935 ई.)
  • गंगा राम शर्मा – हिन्दी साहित्य की ऐतिहासिक चर्चा (1948 ई.)
  • गया प्रसाद शुक्ल ’सनेही’ – हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त परिचय (1951 ई.)
  • प्रेमलता अग्रवाल ’सरस्वती’ – हिन्दी साहित्य और उसका विकास (1952 ई.)
  • शंकुन्तला अग्रवाल – हिन्दी साहित्य का इतिहास (1957 ई.)
  • शीलावती गुप्त – हिन्दी भाषा और साहित्य का इतिहास (1970 ई.)
  • मोहन अवस्थी – हिन्दी साहित्य का आद्यतन इतिहास (1970 ई.)
  • सोमनाथ भट्ट ’आदर्श’ – हिन्दी साहित्य का इतिहास दिग्दर्शन (1965 ई.)
  • शिव मूर्ति शर्मा – हिन्दी साहित्य का प्रवृत्यात्मक इतिहास (1972 ई.)
  • रामप्रसाद मिश्र – हिन्दी साहित्य का प्रवृत्यात्मक इतिहास (1987 ई.)
  • सभापति मिश्र – हिन्दी साहित्य का प्रवृत्तिपरक इतिहास (2000 ई.)
  • रमेश चन्द्र शर्मा – हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास (1990 ई.)
  • नामदेव उतरकर – हिन्दी साहित्य की युगीन प्रवृत्तियाँ (2002 ई.)
  • गोपीनाथ – हिन्दी साहित्य का विकास (1950 ई.)
  • रामखिलावन पाण्डेय -हिन्दी साहित्य का नया इतिहास:एक संरचनात्मक पुनर्विचार (1969 ई)
  • कृष्ण नारायण प्रसाद ’माधव’ – हिन्दी साहित्य: युग और धारा (1965 ई.)
  • एडविन ग्रीस – ’ए स्कैच आॅव् हिन्दी लिटरेचर’ (1917 ई.)
  • श्री महेश दत्त शुक्ल – भाषा काव्य संग्रह (1873 ई.)
  • वियोगी हरि – ब्रजमाधुरी सार (1923 ई.)
  • श्री गोरीशंकर द्विवेदी – सुकवि सरोज (1927 ई.)
  • श्री कृष्णशंकर शुक्ल – आधुनिक हिन्दी साहित्य का इतिहास (1934 ई.)
  • श्री रामनरेश त्रिपाठी – हिन्दी का संक्षिप्त इतिहास (1923 ई.)
  • नन्दुलारे वाजपेयी – हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास (1931 ई)
  • राहुल सांकृत्यायन – पुरातत्त्व निबंधावली (1937 ई.)
  • हिन्दी काव्य धारा
  • हिन्दी के प्राचीन कवि और उनकी कविताएँ
  • इन्द्रनाथ मदान – माॅडर्न हिन्दी लिट्रेचर (1939 ई.)
  • सुमन राजे – हिन्दी साहित्य का आधा इतिहास (2003)
  • नीलाभ – हिन्दी साहित्य का मौखिक इतिहास
  • डाॅ. मैनेजर पाण्डेय – साहित्य और इतिहास दृष्टि
  • नीरजा माधव – हिन्दी साहित्य का ओझल नारी इतिहास

आपका हिंदी मित्र ….. केवल कृष्ण घोड़ेला

हिंदी साहित्य का इतिहास

ये भी अच्छे से जानें

Hindi Sahitya

Hindi sahitya ka Itihas