रामवृक्ष बेनीपुरी – लेखक परिचय || Rambriksh Benipuri

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026

रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन परिचय, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान (Rambriksh Benipuri Biography in Hindi)

विवरणतथ्य / विवरण
नामरामवृक्ष बेनीपुरी
जन्म-तिथि23 दिसम्बर, 1899 ई.
जन्म-स्थानबेनीपुर, मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार)
मृत्यु7 सितंबर, 1968 ई.
पिता का नामश्री फूलचन्द्र
उपाधि“कलम का जादूगर”
व्यवसायस्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, संपादक, निबंधकार, नाटककार
भाषा / शैलीखड़ी बोली, हिंदी, ओजपूर्ण और संवादात्मक शैली
प्रमुख उपन्यासपतितों के देश में, आम्रपाली
प्रमुख रेखाचित्र / निबंधमाटी की मूरते, लाल तारा, कैदी की पत्नी, गेहूँ और गुलाब, जंजीरें और दीवारें, चिता के फूल

हिंदी साहित्य जगत में अपने ओजस्वी व्यक्तित्व, बेबाक पत्रकारिता और अनूठे रेखाचित्रों के लिए जाने जाने वाले रामवृक्ष बेनीपुरी एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे। आधुनिक हिंदी गद्य साहित्य में उन्हें ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन परिचय, उनकी रचनाएँ और पत्रकारिता से जुड़े तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

📌 प्रारंभिक जीवन, शिक्षा और पालन-पोषण

रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसंबर 1899 ई. को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत बेनीपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री फूलचन्द्र था।

  • जन्म के कुछ समय पश्चात ही इनकी माता का देहांत हो गया, जिसके कारण इनका बचपन अपने मामा के घर बंदखेड़ा गाँव में बीता।

  • पिता के देहांत के बाद यह अपनी मौसी के साथ मुजफ्फरपुर आ गए, जहाँ इनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हुई।

  • इनका नामांकन मुजफ्फरपुर के “भूमिहार ब्राह्मण कॉलेजिएट” स्कूल में करवाया गया।

साहित्यिक पदार्पण:

स्कूल में ही हिंदी साहित्य के महान साधक पंडित मथुरा प्रसाद दीक्षित अध्यापक के तौर पर नियुक्त थे, जिनकी नजर रामवृक्ष की प्रतिभा पर पड़ी। दीक्षित जी ने बेनीपुरी को प्रोत्साहित करना शुरू किया। परिणामस्वरूप, आठवीं कक्षा में पढ़ते हुए ही रामवृक्ष ने ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’ से परीक्षा पास की। इनकी पहली कविता वर्ष 1916 में ‘प्रताप’ पत्र में छपी, तब बेनीपुरी जी की आयु मात्र 17 वर्ष थी।

📰 पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

रामवृक्ष बेनीपुरी एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार थे। उन्होंने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया:

  • 1921: मुजफ्फरपुर से ‘किसान’ साप्ताहिक पत्र का संपादन शुरू किया जिसके संपादक स्वयं बेनीपुरी थे।

  • इसके बाद अध्यापक दीक्षित जी ने पटना से ‘तरुण भारत’ पत्रिका का संपादन किया तो उन्होंने बेनीपुरी को वहाँ बुला लिया।

  • 1926: ‘बालक’ मासिक पत्रिका का संपादन किया।

  • 1929: ‘युवक पत्र’ का संपादन किया। ‘युवक पत्रिका’ के ‘बलिदान अंक’ के संपादक के रूप में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

  • जेल के दिनों में इन्होंने हस्तलिखित पत्र ‘कैदी’ का संपादन किया। जेल से छूटने के बाद 1935 में ‘लोकसंग्रह’ नामक पत्र का संपादन किया।

  • 1934 में हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रभारी बनाए गए।

  • इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी के साथ प्रसिद्ध पत्रिका ‘कर्मवीर’ में भी कार्य किया।

📚 रामवृक्ष बेनीपुरी का रचना-संसार (Rachnaye)

बेनीपुरी जी की संपूर्ण साहित्य रचना ‘आठ खंडों’ में ‘बेनीपुरी ग्रंथावली’ के रूप में संकलित है। उनके विभिन्न विधाओं के अंतर्गत प्रमुख ग्रंथ निम्नलिखित हैं:

1. कहानी संग्रह

  • चिता के फूल: यह बेनीपुरी जी का एकमात्र कहानी संग्रह है, जिसमें कुल 7 कहानियाँ हैं। यह 1929 से 1930 के बीच लिखा गया तथा उनके जीवन पर आधारित है। इस कहानी में स्वाधीनता की वेदी पर स्वयं को भेंट करने वाले एक ग्रामीण युवक के शहीद होने का वृत्तांत है।

  • अन्य प्रमुख कहानियाँ:

    • भिखारिन की थाती: इसमें बृजेश एक हिंदी दैनिक का सहकारी संपादक है।

    • जीवन तरु: यह कहानी दो उद्देश्यों को प्रकट करती है—एक ओर नायक हाकीम सिंह का अपनी बेटी के प्रति कोमल बाप का प्रेम, दूसरी ओर दमनकारियों के प्रति घृणा का भाव।

    • कहीं धूप कहीं छाया: यह इनकी कालजयी रचना है जिसमें मखना और बाबू साहब के रूप में दो वर्गों का चित्रण किया गया है।

    • उस दिन झोपड़ी रोई: यह कहानी रोमानीपन लिए हुए है।

2. रेखाचित्र एवं संस्मरण

  • लाल तारा: यह इनका पहला रेखाचित्र संग्रह है, जिसमें भारतीय कृषक जीवन का मार्मिक चित्रण किया गया है। इसके अंतर्गत ‘नायक गरभू’ इस बात को लेकर परेशान है कि उसने जो उपजाया है, उसका अधिकांश भाग महाजन ले जाने वाला है। इस संग्रह में ‘हलवाहा’, ‘यह और वह’, ‘हँसिया और हथौड़ा’ तथा ‘कुदाल’ रेखाचित्रों के अतिरिक्त भगत सिंह की शहादत पर लिखा गया लेख ‘इंकलाब जिंदाबाद’ भी शामिल है। (‘डुगडुगी’ नामक एकांकी इसी में संग्रहित है।)

  • माटी की मूरतें: इसमें कुल 11 प्रसिद्ध रेखाचित्र हैं, जिनका प्रारंभ ‘रजिया’ से और अंत ‘बुधिया’ से होता है। अन्य प्रसिद्ध रेखाचित्र जैसे ‘बालगोबिन भगत’, ‘सूरज भैया’ इसी संग्रह से हैं।

  • गेहूँ और गुलाब: इसमें 31 रचनाएँ शामिल हैं। ‘गेहूँ और गुलाब’ के अंतर्गत जीवन-संघर्ष (भूख और श्रम) के बीच सौंदर्य और संस्कृति की अनिवार्यता को दर्शाया गया है।

3. उपन्यास

  • पतितों के देश में (1932): यह एक कैदी की कहानी है जो सत्य घटना पर आधारित है। इसका मुख्य भाग लेखक ने जेल में ही लिखा था। मनोहर नामक नायक अपने ही गाँव की एक लड़की ‘पियरिया’ से प्रेम करता है, जो परिवार वालों को नागवार गुजरती है। वे मनोहर को झूठे बलात्कार के केस में फँसा देते हैं।

  • कैदी की पत्नी (1940): इसकी प्रेरणा लेखक को उनकी पत्नी उमारानी से मिली। जब लेखक जेल में थे, तब वे उनसे मिलने आईं, किंतु जेल प्रशासन ने मिलने नहीं दिया। इस भावनात्मक घटना से प्रेरित होकर बेनीपुरी जी ने यह उपन्यास लिख डाला।

4. नाटक और एकांकी

  • आम्रपाली: 1940 के दशक में लिखा गया यह नाटक उनके प्रसिद्ध नाटकों में है, जिसमें दीन-हीन भारतीय नारी को विराट अस्तित्व प्रदान किया गया है।

  • अन्य नाटक: चंद्रगुप्त मौर्य, विजेता।

  • तथागत: यह बेनीपुरी जी का पहला रेडियो नाटक है।

  • नेत्रदान और संघमित्रा: मौर्य साम्राज्य पर लिखे गए प्रसिद्ध नाटक हैं।

  • सीता की माँ: यह एक प्रयोगात्मक रूपक है।

  • अमर ज्योति और गाँव का देवता: ये जीवनी पर आधारित एकांकी हैं। ‘अमर ज्योति’ एक रेडियो रूपक है जिसमें महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों को दर्शाया गया है।

5. ललित निबंध एवं यात्रा-वृत्तांत

  • सतरंगा इंद्रधनुष: 10 ललित निबंधों का यह संग्रह बेनीपुरी जी की विशिष्ट शैली का प्रतिनिधित्व करता है।

  • गांधी नामा (1937): यह बेनीपुरी जी का अद्वितीय स्मृति-चित्र है। जेल में रहते हुए अपने दिवंगत पुत्र (सुरेंद्र, जिसे परिवार में प्यार से ‘गांधी’ कहा जाता था) की याद में उन्होंने यह लिखा। इसकी तुलना अक्सर निराला की ‘सरोज स्मृति’ से की जाती है।

  • वन्दे वाणी विनायको: यह एक उत्कृष्ट ललित गद्य है।

  • यात्रा-वृत्तांत: ‘पैरों में पंख बाँधकर’ और ‘उड़ते चलो, उड़ते चलो’

🌟 साहित्य-जगत से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • बेनीपुरी जी ने साहित्य-जगत की शुरुआत कविता से की थी, किंतु आगे चलकर उन्होंने मुख्य रूप से गद्य विधा में अपनी लेखनी चलाई।

  • ‘नया आदमी’ (1950): यह बेनीपुरी जी द्वारा लिखित एक लंबी कविता है। ऐसा माना जाता है कि हिंदी में लंबी कविता का जो रास्ता आगे चलकर मुक्तिबोध आदि ने अपनाया, उसकी शुरुआत वास्तव में रामवृक्ष बेनीपुरी जी ने ही की थी।

  • उन्होंने बिहारी सतसई पर टीका निकाली तथा विद्यापति की पदावली का संपादन भी किया।

  • 🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि

    क्र.सं.लेखक / कवि का नाममुख्य विशेषता / कालइंटरनल लिंक (URL)
    1.भारतेंदु हरिश्चंद्रआधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युगलिंक देखें(उदाहरण यूआरएल)
    2.महावीर प्रसाद द्विवेदीद्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकारलिंक देखें
    3.जयशंकर प्रसादछायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककारलिंक देखें
    4.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेतालिंक देखें
    5.सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि / छायावादलिंक देखें
    6.महादेवी वर्माआधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्रीलिंक देखें
    7.प्रेमचंद (धनपत राय)उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुषलिंक देखें
    8.अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तकलिंक देखें
    9.रामधारी सिंह ‘दिनकर’राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कविलिंक देखें
    10.कृष्णा सोबतीआधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षरलिंक देखें

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