अनेकार्थी शब्द || हिंदी व्याकरण || Anekarthi shabd || hindi grammar

दोस्तों आज की पोस्ट में हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक में अनेकार्थी शब्दों(Anekarthi shabd ) के परीक्षा उपयोगी उदाहरण दिए जा रहें है 

अनेकार्थी शब्द(Anekarthi shabd)

अनेकार्थी शब्द का अर्थ है : ऐसे शब्द जिनसे अनेक अर्थ निकलते हो |

किसी भाषा के शब्द भंडार की संपन्नता और विविधता उस भाषा के बोलने वालों की संस्कृति की संपन्नता के साथ विकसित होती रहती है, और इस तरह शब्द भंडार बढ़ता रहता है। जीवित भाषा में शब्दों की संख्यावृद्धि एक सतत प्रक्रिया है। यदि कोई पदार्थ या विचार (प्रत्यय) विदेशों से आता है तो विदेशी शब्द साथ में आते हैं जैसे रेल, टेलीफोन, सिनेमा, टी वी रेडियो, मशीन, जर्नैल, कर्नैल, कप्तान, मेजर, तहसील, जिला, मुंसिफ, गुलाब, गुलाब जामुन, जलेबी, समोसा, बर्फी।

जिस तरह ये सब शब्द एकार्थक हैं, इसी तरह हमारे अपने (तत्सम, तद्भव और देशज) शब्द भी आरंभ में एकार्थक थे, परंतु जैसे-जैसे हमें आवश्यकता पङी, हमने वर्तमान शब्दों को नये अर्थ देकर अपना काम चला लिया। यह नहीं कि हम नये शब्द गढ़ते नहीं हैं। गढ़ते हैं। देखिए अध्याय ’बोलियाँ और आवाजें।

नये शब्द गढ़ने से एक तो भाषा पर बोझ पङता है, दूसरे ऐसे शब्दों का प्रचारित होना भी एक प्रश्न बना रहता है। उदाहरण-स्वरूप आपके पास एक मीटर भर कपङा हो तो आप उसे अँगोछे की तरह बरत लें, उसमें किताबें बाँध लें, अथवा मेज-कुर्सी की धूल झाङ लें, अथवा बच्चे को ओढ़ा दें।

इसी प्रकार आपको एक शब्द मिला ’तार’, वह धातु का हो सकता है, मकङी के जाले का हो सकता है, चीनी या गुङ की चाशनी का हो सकता है – इन सब तारों में सादृश्य है। फिर लोहे के तार द्वारा जो संदेश आया उसे भी तार कहा, और उस कागज को जिस पर संदेश लिखा था उसका नाम भी ’तार’ रखा। मतलब यह है कि शब्दों को नये-नये अर्थ देते रहना एक स्वाभाविक, युक्तिसंगत और आवश्यक प्रक्रिया है।

संस्कृत में बहुत से शब्द अनेकार्थक हैं। संस्कृत की शब्दावली धातुज है। धातुएँ प्रायः ध्वन्यात्मक या अनुकरणात्मक हैं। किसी ध्वनि का भाषण कई ढंग से किया जाता है। इसलिए प्रायः शब्दों में अनेकार्थकता आ गई है।

अनेकार्थक शब्दों के कारण भाषा की व्यंजनाशक्ति बढ़ती है। कविगण श्लेष और यमक अलंकारों की सृष्टि शब्दों के इस गुण से करते आए हैं।

कोशों में सैकङों-हजारों अनेकार्थी शब्द शब्द भरे पङे हैं।  यहाँ हम 400 से अधिक शब्द दे रहे हैं जिनके अर्थ एक से अधिक हैं।

’अ’

  • अंक – निशान, पत्रिका का नंबर, गिनती का संख्या, नाटक का अध्याय, गोद
  • अंकुश – हाथी को चलाने-रोकने का लोह का अंकुडा, नियंत्रण, दबाव
  • अंग – शरीर, शरीर का कोई अवयव, अंश, शाखा
  • अंचल – साङी का पल्लू, प्रदेश, सिरा
  • अंत – सिरा, समाप्ति, मृत्यु, भेद/रहस्य
  • अंतरंग – अंदर का/भीतरी, घनिष्ठ, गुप्त
  • अंतर् – अंतःकरण, भीतर, परस्पर
  • अंतर – भिन्नता, दूरी, फर्क, मध्यवर्ती समय
  • अँधेरा – अंधकार, उदासी: प्रकाश के बिना
  • अंबर – वस्त्र, आकाश, बादल
  • अकङना – कङा होना, घमंड करना, दुराग्रह करना
  • अकाल – दुर्भिक्ष, अभाव/कमी, असमय
  • अक्ष – चौसर का पाँसा, धुरी, आँख, कील
  • अक्षत – बिना घाव, पूरा/समूचा: कच्चा चावल
  • अक्षर – वर्ण (अकारादि), ब्रह्मा, आत्मा, नित्य, सत्य, आकाश
  • अखंड – समूचा, जिसका क्रम न टूटे, निर्विघ्न, जिसका खंडन न हो सके
  • अज – जिसका जन्म न हो (ईश्वर), ब्रह्मा, बकरा
  • अड्डा – ठिकाना, कबूतरों की छतरी, करघा, लकङी का चैखटा
  • अतिरिक्त – फालतू, अलग/भिन्न, अलावा
  • अधर – होंठ, अंतरिक्ष, तुच्छ, बिना आधार का नीचे का
  • अधिकार – स्वत्व, शक्ति, कब्जा, पूरी जानकारी
  • अध्यक्ष – विभाग का मुखिया, सभापति, इन्चार्ज
  • अनंत – अंतहीन, नित्य, बहुत अधिक, अनंत (शेष) नाग, आकाश, विष्णु, बाजूबंद
  • अनर्थ – अर्थ का अभाव, अनुचित अर्थ, अशुभ घटना, विपत्ति
  • अनुरूप – मिलता-जुलता/सदृश, अनुकूल, उपयुक्त
  • अन्न – खाद्य पदार्थ, अनाज
  • अपवाद – खंडन बदनामी, नियम की छूट, दोष
  • अपेक्षा – आशा, इच्छा, आवश्यकता, तुलना में
  • अबोध – नासमझ, मूर्ख, दुरूह, दुर्बोध
  • अब्ज – कमल, चंद्रमा, कपूर, शंख
  • अभाव – अनिस्तित्व, कमी, अप्राप्यता
  • अभिधान – नाम, पदनाम, उक्ति, शब्दकोश, नाममाला
  • अमल – मलरहित, कार्यान्वयन, नशा-पानी
  • अमृत – सुधा, जल, मुक्ति, मृत्युरहित, दूध
  • अपयुक्त – न जुङा हुआ, जो प्रयाग में न हो, अनुचित
  • अरिष्ट – कष्ट, दुर्भाग्य, विपत्ति शत्रु, ओषधियुक्त रस
  • अरुण – लालल, बालूसर्य, संध्या की लाली/सिंदूर कुंकुम
  • अर्थ – धन , अभिप्राय/मानी, निमित्त लिए कारण
  • अलग – पृथक्, न लगा हुआ, भिन्न, अछूता
  • अवतरण – उतरना, जन्म लेना, पार होना, उद्धारण
  • अवरुद्ध – रुका हुआ, ढका हुआ, बंद, गुप्त
  • अवली – पंक्ति, माला, श्रेणी, झुंड
  • अवस्था – दशा, उम्र, स्थिति
  • अवैध – गैर कानूनी, जारज
  • अशुद्ध – अपवित्र, गलत, गंदा
  • असली – वास्तविक, युद्ध, मौलिक

’आ’

  • आँख – नेत्र, दृष्टि, निगरानी
  • आँचल – साङी का पल्लू, कपङे का छोर, प्रदेश, सिरा
  • आकर – खान, कोष, स्रोत
  • आगम – आना, ज्ञान, शास्त्र
  • आचार्य – गुरु, महापंडित, प्रोफेसर, प्रिंसिपल
  • आज्ञा – आदेश, अनुमति
  • आदि – पहला, प्रारंभिक, वगैरह, आरंभ
  • आपत्ति – विपत्ति, एतराज, प्रश्न
  • आब – पानी, चमक, छवि/शोभा
  • आराम – वाटिका, विश्राम, सुविधा, राहत
  • आली – सखी, पंक्ति, मान्यवर, गीला
  • आश्रम – तपोभूमि, आश्रय-स्थान, जीवन के चार अंगों में से एक

’इ’

  • इष्ट – ध्येय, समीपी, काम्य देवता, परमात्मा

‘उ’

  • उगना – उदय होना, निकल आना, पैदा होना, प्रकट होना
  • उग्र – क्रूर, भयानक, कष्टदायक, तीव्र
  • उच्च – उठा हुआ, जोर का, बङा, श्रेष्ठ
  • उङाना – उङने में प्रवृत्त करना, तेजी से चलाना, चुराना, नष्ट करना, अपव्यय करना, फैलाना
  • उतरना – नीेचे आना, कम होना (ज्वर), जगह से खिसकना (बाँह), ठहरना (बरात), मद्धिम पङना (रंग)
  • उत्तर – ऊपर, की दिशा, बाद का (गणित में) फल
  • उत्पात – शरारत, हो-हल्ला, दंगा
  • उपस्कर – संयंत्र, सामान, अलंकार
  • ऊपरी – ऊपर की, फालतू (आमदनी), दिखावटी (शान)

’ऋ’

  • ऋण – कर्ज, दायित्व, उपकार, घटना, घटाने का चिह्न (-)

’ए’

  • एक्का – एक घोङे की सवारी, ताश का एक बूटी वाला पत्ता, एकता

’क’

  • कंटक – काँटा, कीलक, विघ्न
  • कक्ष – काँख, कमरा, कछौटा, सूखी घास, कक्षा (सूर्य की)
  • कटक – सेना, शिविर, समूह, कङा, शृंखला, चटाई
  • कट्टर – अपने मत का जिद्दी, दृढ़प्रतिज्ञ, कठोर
  • कङा – कठिन, कठोर, कंकण
  • कनक – सोना, धतूरा, गेहूँ, टेसू
  • कन्या – कुमारी, लङकी, पुत्री, एक राशि
  • कमान – धनुष, आदेश, प्राधिकारी
  • कर – हाथ, टैक्स, किरन, सूँड
  • करीब – समीप, लगभग, सगा
  • कर्तन – काटना, कतरना, कातना
  • कर्ता – करनेवाला, बनाने वाला, परिवार का मुखिया, पहला कारक
  • कल – मशीन, सुख, बीता दिन, आनेवाला दिन
  • कलम – लेखनी, कूँची, पेङ पौधों की हरी लकङी, कनपटी के बाल
  • कला – आर्ट, शरीर की धातु, अंश, कौशल
  • कलि – कलह, दुःख, पाप, चार युगों में चैथा युग
  • कलुष – कलंक, पाप, अपवित्रता, गंदगी
  • काँटा – पेङ-पौधे की नोक, कीला, मछली की हड्डी, तौलने का एक साधन
  • काटना – कटाई करना, रद्द करना, अलग करना, दाँत चुभाना, डंक मारना
  • काम – कार्य, नौकरी, कढ़ाई आदि, काम वासना, कृति
  • कायदा – नियम, तरीका, रिवाज, उर्दू का बालबोध
  • काल – समय, मौत, यमराज
  • किनारा – तट, सिरा, पार्श्व , हाशिया
  • कील – मेख, नाक का एक गहना, फोङा का अंकुर, किला, खंभा
  • कुंडली – गोल रचना, गेंडुरी इमरती
  • कुंभ – घङा, प्रयागराज का एक पर्व, हाथी के मस्तक के दोनों ओर का भाग
  • कुशल – खैरियत, चतुर, प्रशिक्षित
  • कूट – चोटी, नोक, ढेर, छल, रहस्यमय, जाली, झूठा
  • केतु – ध्वज, एक ग्रह, पुच्छल तारा।
  • केवल – एक मात्र, निरा, विशुद्ध ज्ञान
  • कैंची – कतरनी, छत का एक ढाँचा, पहलवान का एक दाँव
  • कोट – गढ़, पहनने का एक कपङा, समूह
  • कोटि – धनुष का सिरा, श्रेणी, करोङ
  • कोरा – बिलकुल नया, अप्रयुक्त, अलिखित (कागज), गुणरहित (व्यक्ति)
  • कोष्ठ – कोठा, पेट, ब्रैकेट
  • क्रिया – कर्म कार्रवाई, करम होने का द्योतक शब्द
  • क्षुद्र – नीच, कंजूस, छोटा, थोङा

’ख’

  • खंड – टुकङा, भाग, मंजिल/तल्ला, प्रदेश
  • खंडन – टुकङे करना, हिस्सों में बाँटना, प्रत्याख्यान, विरोध
  • खग – पक्षी, तारा, बाण
  • खत – पत्र, लिखाई, कनपटी के बाल
  • खर – प्रखर, दुष्ट, गधा, तिनका, एक राक्षस का नाम
  • खराब – गंदा, बुरा, बरबाद/नष्ट, न चालू
  • खल – दुष्ट, चुगलखोर, खरल, तलछट, धतूरा
  • खातिर – आतिथ्य, आदर-सम्मान, आवभगत, लिए
  • खाली – रीता, जो व्यस्त न हो, बेकार, अकेले
  • खून – रक्त, हत्या, मार-काट

’ग’

  • गंज – सिर पर बाल न होना/खल्वाट, खजाना, ढेर, मंडी
  • गंदा – मैला, अश्लील, बुरा
  • गंभीर – गहरा, घना, भारी, जटिल, चिंताजनक, शांत (व्यक्ति)
  • गठीला – गाँठोंवाला, हष्टपुष्ट, स्वस्थ
  • गण – समूह, शिव के अनुचर, दूत, पिंगल की गणना की इकाइयाँ
  • गति – चाल, हालत, मोक्ष, रफ्तार
  • गद्दी – छोटा गद्दा, महाजन की बैठकी, शिष्य परंपरा, सिंहासन
  • गला – निगलने का अंग, गरदन, घङे आदि की पकङ, आवाज
  • गहन – गहरा, घना, दुर्गम, जटिल
  • गाँठ – गिरह, फंदा, गठरी, उलझन, मनमुटाव
  • गाङना – जमीन में दबाना, धँसाना, खङा करना (झंडा)
  • गाढ़ा – घना, मोटा, दृढ़, घनिष्ठ
  • गुट्ठल – गुठली वाला, गिलटी वाला, गोल और कङा, बुद्धू
  • गुण – विशेषता, लक्षण, रस्सी
  • गुरु – अध्यापक, भारी, दीर्घ वर्ण, बृहस्पति ग्रह
  • गुलाबी – गुलाब का, गुलाब के रंग का, हलका (जाङा)
  • गो – गाय, इन्द्रिय, स्वर्ग, आँख
  • गोला – गोल पिंड, धागे का गोल पिंड, गरी, बम, पेट का वायुपिड
  • गोली – दवाई की वटिका, कंचा, बंदूक की गोली, धागे की गोली

’घ’

  • घङी – समय बताने वाला यंत्र, 24 मिनट का समय, क्षण
  • घन – बादल, बङा हथौङा, तीन का घात, जिसमें लम्बाई-चैङाई-ऊंचाई बराबर हो, घना
  • घात – चोट, दाँव, हत्या, गुणनफल
  • घुमाना – सैर कराना, मोङना, चक्कर देना, लट्टू चलाना, प्रचारित करना
  • घोङा – एक प्रसिद्ध चैपाया, बंदूक का खटका, शतरंज का एक मोहरा
  • घोर – भयानक, बहुत अधिक, बहुत बुरा, बहुत घना (बम)

’च’

  • चंचला – चंचल स्त्री, लक्ष्मी, बिजली
  • चक्र – चाक, पहिया, चक्कर, घेरा, मंडल
  • चटकना – चट-चट शब्द करना, फूटना, खिलना, रुष्ट होना
  • चपला – चंचल स्त्री, बिजली, लक्ष्मी
  • चमकना – प्रकाश देना, (व्यापार) वृद्धि पर होना, (सितारा) ऊँचा होना, बिदकना, बिगङना
  • चश्मा – ऐनक, स्रोत
  • चाप – धनुष, दबाव, परिधि का एक आधा, (आलू) टिकिया
  • चाल – गति, चलने का ढंग, आहट, रफ्तार, रिवाज, धोखा, चालाकी, मोहरों का हिलना
  • चालू – जो चल रहा हो, चालाक, जारी, बैंक का एक खाता, चलने वाली (मशीन)
  • चिकना – चिकनाहट वाला, बिलकुल समतल, सँवरा हुआ, साफ
  • चुनना – छाँटना, चुनाव करना, (दीवार) उठाना, क्रम से रखना
  • चौका – चार का समूह, चार इकट्ठी रन, रसोई, चार बूटी वाला पत्ता
  • चौकी – लकङी का आसन, कुरसी, पटरा

’छ’

  • छादन – वस्त्र, परदा, छप्पर
  • छाप – छापे का चिह्न, अँगूठी, प्रभाव
  • छींटा – बूँदें, बूँदों का निशान, हल्की वर्षा, व्यंग्य
  • छेङना – तंग करना, चिढ़ाना, बजाने के लिए (तार छूना), आरंभ करना
  • छोङना – मुक्त करना, त्याग देना, भूल से न लेना, डालना

’ज’

  • जङन – जमाना, लगाना, प्रहार करना
  • जलज – कमल, मोती, मछली, शंख, सेवार
  • जलधर – जलाशय, बादल, समुद्र
  • जलना – आग लगना, भस्म हो जाना, शरीर तपना, ईष्र्या करना
  • जलाना – आग देना, प्रज्ज्वलित करना, चुभती बातें कहना, ईष्र्या उत्पन्न करना
  • जाँच – पूछ-ताछ, खोज, परीक्षण
  • जारी – चालू, लागू प्रवाहित, निकला हुआ
  • जाल – बङी जाली, बुनावट, जमघट, फरेब
  • जाली – छोटा जाल, आम या फल में पङा तंतुजाल, झंझरी, नकली
  • जीवन – जिंदगी, प्राण, जीविका-निर्वाह, पानी
  • जुङना – जोङा जाना, मिलाना, जुटना, जोता जाना, सम्मिलित होना
  • जोङ – योग, मेल, गाँठ
  • जोङना – मिलाना, टूटे हुए को जङना, योग करना, बढ़ाना, एकत्र करना

’झ’

  • झंझरी – जाली, झरोखा, छाननी
  • झाङ – पौधों का झुरमुट, एक आतिशबाजी, गुच्छा, डाँट-फटकार
  • झाङना – झाङन से धूल हटाना, झाङ-फूंक (टोना) करना, झटकना, फटकारना
  • झोंका – वायुलहरी, वर्षा का थपेङा, थोङी नींद, झटका

’ट’

  • टाँकना – सुई से कुछ जोङना, रकम लिख रखना, (चाकू छूरी) तेज करना
  • टाँङा – चैपायों का झुंड, बंजारों का सामान, मचान, कुटुंब
  • टीका – तिलक, फलदान, व्याख्या
  • टीप – दराजें भरने का काम, तीव्र उच्चारण, सेना की टुकङी, व्याख्या, दस्तावेज, हुंडी
  • टेक – सहारा, सहारा देने की लकङी, साधुओं की अधारी, आग्रह, आदत, गीत का छोटा पद

’ठ’

  • ठस – बहुत कङा, भारी, घनी बुनावट वाला, कंजूस, आलसी, हठी
  • ठहरना – रुकना, टिकना, शांत हो जाना, पक्का होना
  • ठाकुर – देवता, ईश्वर, मालिक, क्षत्रिय, नाई

’ड’

  • डूबना – अस्त होना, पानी के नीचे जाना, नष्ट होना, समाप्त होना

’ढ’

  • ढर्रा – रूप, पद्धति, उपाय, व्यवहार
  • ढलना – ढलान की ओर जाना, साँचे में बनाया जाना, समय बीतने को होना, ह्रास की ओर बढ़ना, उँङेला जाना
  • ढीला – कम कसा हुआ, नाप से बङा, आलसी, शिथिल

’त’

  • तंग – सँकरा, पहनने में छोटा, परेशान
  • तरंग – स्वर लहरी, लहर, उमंग
  • तरी – नौका, कपङे का छोरा, तर होने की अवस्था, शोरबा
  • तलब – खोज, चाह, आवश्यकता, बुलावा, वेतन
  • तात – पिता, गुरु, भाई, मित्र
  • तारक – तारने वाला, तारा, आँख की पुतली
  • तारा – आँख की पुतली, नक्षत्र, भाग्य, बालि की स्त्री का नाम
  • ताव – गरमी/ताप, आवेश, कष्ट, कागज का पूरा टुकङा
  • तीक्ष्ण – धारदार, चरपरा, प्रचंड, उग्र, तेज
  • तीर – नदी, तट, बाण, समीप
  • तेज – तीखा, शीघ्रगामी, प्रचंड, पैना, चरपरा
  • तोङना – टुकङे करना, अलग कर देना, भंग करना (नियम), नष्ट करना

’थ’

  • थामना – पकङना, सहारा देना, रोकना

’द’

  • दंड – सजा डंडा, जहाज का मस्तूल, एक प्रकार की कसरत
  • दबना – भार के नीचे आना, रोब मानना, जमीन में गङना, हलका पङना
  • दल – छोटा पत्ता, टुकङा, सेना की टुकङी, पार्टी, झुंड
  • दस्ता – हत्था, 24-25 ताव कागज, सैनिक दल
  • दाम – धन, मूल्य, रस्सी
  • दाय- दायित्व, उत्तराधिकार में प्राप्य संपत्ति, दहेज
  • दारू – दवा, शराब, बारूद
  • देन – देने का काम, वह जो दिया, भार अंशदान
  • दोष – ऐब/बुराई, कमी, अपराध, विकार
  • द्वार – दरवाजा, अंश, साधन, शरीर के छेदवाले अंग
  • द्विज – पक्षी, ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य, दाँत।

’ध’

  • धन – संपत्ति, योग/जमा, + (योग का चिह्न)
  • धर्म – स्वभाव, प्राकृतिक गुण, कर्तव्य, संप्रदाय
  • धर्मराज – न्यायाधीश, यमराज, युधिष्ठिर
  • थवल – उजला, सफेद, साफ, निष्कलंक
  • धार – धारा, प्रवाह, पैना किनारा (चाकू का)

’न’

  • नकली – नकल में बना, बनावटी, काल्पनिक, झूठा
  • नकशा – मानचित्र, रूपरेखा, आकृति, लच्छन, नखरा
  • नग – पर्वत, साँप, नगीना, संख्या, अदद
  • नाका – प्रवेश द्वार, चैकी-थाना, सुई का छेद
  • नाग – साँप, हाथी, पर्वत, बादल
  • नायक – सेनापति, छोटा, सेनाधिकारी, मुखिया, नाटक का मुख्य पात्र
  • नाल – डंडी, डंठल, नली, अर्धचंद्राकार लोहा
  • निकलना – बाहर आना या जाना, सामने आना, प्रकाशित होना, रहस्य स्पष्ट होना, हिसाब में बाकी ठहरना
  • निकासी – निकलने का ढंग, माल बिकना, चुंगी
  • निशाचर – राक्षस, प्रेत, उल्लू, चोर
  • निशान – चिह्न, मोहर की छाप, झंडा, धब्बा, पता-ठिकाना
  • निष्कर्ष – अंतिम परिणाम, निश्चय, सारांश
  • नील – नीला रंग, एक पौधा जिससे नील मिलता है, चोट की नीली डाँङ, नीलम
  • नीलकंठ – मोर, शिव, प्रकांड विद्वान्
  • नेपथ्य – सजावट, वेशभूषा, रंगमंच का पिछला भाग
  • न्यास – धरोहर, भेंट, उपस्थित करना, त्याग, ट्रस्ट

’प’

  • पंचानन – सिंह, शिव, प्रचंड विद्वान्
  • पक्का – ईटों का बना, पुष्ट, निश्चित, स्थिर
  • पक्ष – पंख, दल-पार्टी, पार्श्व , पखवारा, ओर
  • पट – कपङा, परदा, किवाङ
  • पटना – भरा जाना, छाजन बनना, सौजन्यपूर्ण संबंध होना, ऋण चुकता होना
  • पटरी – काठ का छोटा पटरा, लिखने की तख्ती, पैदल पथ, रेलगाङी की लाइन, सौजन्यपूर्ण निर्वाह
  • पट्टी – लिखने की तख्ती, पाठ, शिक्षा, बुरी सलाह, कपङे का लंबा टुकङा, टाट, चारपाई की पाटी
  • पतंग – पतिंगा, सूर्य, पक्षी, नाव कनकौआ
  • पता – ठिकाना, सूचना, मालूम, भेद
  • पत्र – पत्ता, चिट्ठी, पंख, धातु का पत्तर, समाचार-पत्र
  • पद – कदम, स्थान, छंद, ओहदा, शब्द
  • पय – दूध, जल, अन्न
  • पयोधर – बादल, स्तन, तालाब, पर्वत
  • परचा – कागज, अखबार, प्रश्नपत्र
  • परिकर – समूह, कमरबंद, परिवार, नौकर-चाकर
  • पल्ला – आँचल, तराजू का पलङा, दिशा, किवाङ
  • पाटी – पंक्ति, रीति, तख्ती, चारपाई की पट्टी
  • पाठ – सबक, वाचन, शिक्षा, सीख
  • पात्र – बरतन, नदी का पाट, अधिकारी व्यक्ति, कहानी का व्यक्ति
  • पानी – जल, चमक, लज्जा, वर्षा, स्वाभिमान
  • पार्श्व – बगल, पंजर, क्षेत्र का अंग, हाशिया, पक्ष
  • पालन – भरण-पोषण, कर्तव्य का निर्वाह, वचन पूरा करना
  • पालि – पंक्ति, सीमा, गाँव, एक प्रसिद्ध भाषा
  • पिंगल – छंदशास्त्र, पीला, एक पक्षी, बंदर
  • पिंजर – पिंजरा, अस्थि-पंजर, सुनहरा रंग
  • पुराना – प्राचीन, ढेर सारे दिनों का, जीर्ण-शीर्ण, अनुभवी (व्यक्ति)
  • पुष्कर – तालाब, कमल, पानी मद
  • पुष्ट – पाला-पोसा, दृढ़, पक्का, सिद्ध, परिपूर्ण
  • पृष्ठ – पन्ना, पीठ, पीछे का भाग, ऊपरी सतह
  • पेशी – शरीर का पुट्ठा, तलवार की म्यान, पेश होने की अवस्था, मुकदमे की सुनवाई
  • पैदा – उत्पन्न, अर्जित, प्रकट
  • पोच – खराब, तुच्छ, हीन, निःसार, आवारा
  • प्रत्यक्ष – आँखों के समाने, साफ, सीधा
  • प्रपंच – विस्तार, झंझट, बखेङा, मिथ्या, जगत्

’फ’

  • फटकारना – झटके से हिलाना, पटक कर धोना, डाँटना
  • फल – मेवा, परिणाम, लाभ, शस्त्र का अग्रभाग
  • फूटना – छेद होना, प्रकट होना, मवाद निकलना, अंकुर निकलना, अलग हो जाना, (भाग्य) बिगङना
  • फूलना – पुष्पित होना, बहुत प्रसन्न होना, घमंड करना, रूठना, सूजना

’ब’

  • बंधन – बाँधने की चीज, कैद, बाँध, पुल
  • बचाना – रक्षा करना, खर्च से रख लेना, सामने न आने देना
  • बट्टा – पत्थर का टुकङा, तौल का बाट, (व्यापार में) काट
  • बढ़ना – और आगे चलना, उन्नत होना, अधिक होना, बुझना
  • बनाना – रचना, लाभ करना, मरम्मत करना, तैयार करना, प्रतिष्ठित करना, संबंध जोङना
  • बल – शक्ति, सेना, सहारा, चक्कर, मरोङ
  • बलि – बलिदान, चढ़ावा, उपहार, कर, राजा बलि
  • बहना – पानी का चलते रहना, हवा चलना, अधिक व्यय होना, नष्ट होना
  • बाबा – दादा, साधु, गेहूँ की लट, गेंद
  • बिंदी – बूँद, कण, शून्य, चिह्न, अनुस्वार, गद्द
  • बिजली – विद्युत्, तङित्, कान का एक गहना
  • बैठक – बैठने का कमरा, बैठने की मुद्रा, अधिवेशन, एक कसरत

’भ’

  • भगवान – ईश्वर, ऐश्वर्यशाली, महापुरुष, पूज्य, ज्ञान और वैराग्य से संपन्न
  • भाव – अस्तित्व, विचार, अभिप्राय, श्रद्धा, दर, निर्ख
  • भुनाना – भूनने का काम कराना, रेजगारी लेना
  • भूत – बीता काल, प्रेत, शरीर के पंचभूत
  • भेद – छेदन, फूट, रहस्य, अंतर
  • भोग – सुख अनुभव करना, कर्मों का फल, देवता का खाद्य पदार्थ, कब्जा, विलास

’म’

  • मंडल – वृत्त, सूर्य-चंद्रमा, का घेरा, भूखंड, डिविजन, चक्कर
  • मंत्र – वेद का श्लोक, जादू जैसा वाक्य, राय, सलाह
  • मधु – शहद, वसन्त, चैतमास, शराब, मीठा
  • मर्य – मरनेवाला, मनुष्य, शरीर
  • महावीर – बहुत बलवान, हनुमान, 24 वें जैन तीर्थंकर
  • महीधर – शेषनाग, पहाङ, एक वर्णिक छंद
  • मान – सम्मान, घमंड, रूठना, माप
  • माया – भगवान की लीला, भ्रम, दौलत, इंद्रजाल
  • मित्र – दोस्त, सहयोगी, सूर्य
  • मिलाना – मिश्रित करना, जोङना, सटाना, तुलना करना
  • मुङना – घूमना, लौटना, झुकना
  • मुद्रा – सिक्का, मोहर, अँगूठी, छापा, चिह्न, आकृति
  • मूक – गूँगा, चुप, विवश
  • मूल – जङ, कंद, पूँजी, एक नक्षत्र
  • मोहर – अशर्फी, छाप, लाख, ठप्पा

’य’

  • युक्त – जुङा हुआ, मिश्रित, नियुक्त, उचित
  • युक्ति – मिलन, तरकीब, दलील
  • योग – मेल, लगाव, मन की साधना, ध्यान, कुल जोङ, शुभकाल

’र’

  • रंग – वर्ण, शोभा, मनोविनोद, रोब, नाच-गान, ढंग, युद्धक्षेत्र
  • रक्त – लाल, खून, केसर, लाल चंदन
  • रस – निचोङ, स्वाद, आनन्द, सत्त, धातु का भस्म
  • रसाल – आम, ईख, रसीला, मीठा
  • रुख – चेहरा, रुझान, मनोभाव, शतरंज का एक मोहरा, सामने का भाग तरफ

’ल’

  • लक्ष्य – निशाना, उद्देश्य, लक्षणार्थ
  • लगना – सटना, जुङना, चिपकना, घाव/चोट करना, खर्च होना, चुभना, नियुक्त होना, आरंभ करना
  • लगाना – सटाना, जोङना, चिपकाना, मारना, खर्च कर देना, नियुक्त करना, आरंभ कराना
  • लहर – तरंग, उमंग, झोंका, झूलना

’व’

  • वन – जंगल, जल, फूलों का गुच्छा
  • वर – दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान, वरण करने योग्य
  • वर्ण – रंग, अक्षर, चातुर्वण्र्य (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र), रूप, जाति
  • वार – दिन, बारी, आक्रमण, रोक
  • विग्रह – ध्यान, राय, सलाह, मान्यता
  • विधि – तरीका, विधाता, कानून, व्यवस्था, युक्ति
  • विभूति – बहुतायत, वृद्धि, ऐश्वर्य, दिव्य शक्ति, राख, महिमामय, पुरुष
  • विलक्षण – विशिष्ट, अलग, अजीब
  • विवेचन – सत्-असत् विचार, तर्क-वितर्क, परीक्षण, निरूपण
  • विषम – असमान, भीषण, बहुत कठिन, ताक (संख्या)
  • विषय – विवेचनार्थ बात, आधार वस्तु, विलास संभोग, स्थान
  • वृत्त – गोल घेरा, वृत्तांत, चरित्र, वर्णिक छंद
  • वृत्ति – रोजी, सहायता के लिए मिलने वाला धन, स्वभाव, रुझान, पेशा
  • वेला – अवकाश, समय, समुद्र की लहर
  • व्यवहार – काम, बरताव, महाजनी, दीवानी मामला, मुकदमा

’श’

  • शक्ति – ताकत, अर्थवत्ता, अधिकार, प्रकृति, माया, दुर्गा
  • शिव – महादेव, कल्याण, भाग्यशाली
  • शुद्ध – खालिस, पवित्र, ठीक, साफ

’स’

  • संकोच – सिकुङना, लज्जा, हिचकिचाहट
  • संज्ञा – चेतना, ज्ञान, नाम, संकेत
  • संधि – जोङ, व्याकरणों में अक्षरों का मेल, युगों का मिलन, पारस्परिक, निश्चय, सेंध, नाटक के कथांश
  • संबंध – जोङ ताल्लुक, रिश्ता, मेल-जोल, व्याकरण में छठा कारक
  • संस्कार – परिशोधन, सफाई, आचार-व्यवहार, मन पर पङने वाले प्रभाव, धार्मिक कृत्य
  • सधना – (मतलब) पूरा होना, अभ्यस्त होना, ठीक जगह पर लगना (निशाना)
  • सरदार – अगुआ, छोटा, शासक, रईस, सिख
  • सरल – सीधा, ईमानदार, खरा, आसान
  • सवारी – सवार होने का काम, सवार होने का साधन, सवार होनेवाला व्यक्ति, व्यक्ति का जलूस
  • सही – ठीक, सच, प्रामाणिकता, हस्ताक्षर
  • साधन – उपाय, उपकरण, सामान, पालन, कारण
  • साधना – सिद्ध करना, मनोयोगपूर्वक आराधना, संपन्न करना, अपने वश में करना, पक्का करना
  • साफ – निर्मल, निर्दाेष, समतल, शुद्ध, स्पष्ट, निश्छल, (हिसाब) चुकता
  • सारंग – कोयल, चातक, मोर हंस, बाज, सिंह, घोङा, हाथी, एक मृग: सूर्य चंद्रमा, सोना, भौंरा, धनुष, बादल, समुद्र, शंख कामदेव
  • सार – तत्त्व, निष्कर्ष, रस, रसा, लाभ, धैर्य
  • सिद्ध – प्रमाणित, समाप्त, तैयार, योगी
  • सिरा – चोटी, अंत, समाप्ति
  • सिलसिला – क्रम, श्रेणी, परंपरा, लङी
  • सीधा – जो टेढ़ा न हो, सरल, निश्छल, भला, प्रत्यक्ष, दाहिना
  • सुरभि – सुगंध, गौ, बसंत ऋतु
  • सुवर्ण – सुनहरा, अच्छे वर्ण का, सोना
  • सूत – तागा, बढ़ई, सारथी
  • सूत्र – सूत, जनेऊ, गूढ़ अर्थ भरा संक्षिप्त वाक्य, संकेत, पता, नियम
  • सूर – सूर्य, अंधा, वीर, सूरदास
  • स्थिर – निश्चल, पक्का, धीर, निश्चित
  • स्वर – आवाज, (संगीत की) सुर, अ इ उ आदि अक्षर

’ह’

  • हंस – मराल पक्षी, जीवात्मा, मुक्त पुरुष, ईश्वर
  • हर – प्रत्येक, शिव, हरण करने वाला, भिन्न के अंश के नीचे की संख्या
  • हरकत – गति, चेष्टा नटखटपन
  • हस्ती – हाथी, अस्तित्व, हैसियत
  • हिलाना – हिलने में प्रवृत करना, खिसकाना, आदी बनाना, कँपाना
  • हीन – दीन, रहित, निकृष्ट, थोङा

हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक : 

स्वर व्यंजन , शब्द भेद,  उपसर्ग  ,कारक , क्रिया, वाच्य , समास ,मुहावरे , विराम चिन्ह

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