केवल कृष्ण घोड़ेला

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Net Jrf Hindi december 2019 Modal Test Paper उत्तरमाला सहित

Net JRF HINDI

Net Jrf Hindi december 2019 Modal Test Paper दोस्तो  आपके हिंदी नेट जेआरएफ एग्जाम नजदीक है ,आपने अच्छे से तैयारी कर ली होगी …हमारी वेबसाइट के इसी पेज पर दिनांक 3-12-2019 को रात्रि 9 बजे  सम्पूर्ण कोर्स से एक फाइनल हुआ  ,आपकी तैयारी के  मुल्यांकन के लिए ही हिंदी साहित्य चैनल  द्वारा आपका टेस्ट करवाया […]

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प्रियप्रवास (Priyapravaas): कथावस्तु, 17 सर्ग और विशेषताएँ | हिंदी साहित्य

प्रियप्रवास (Priyapravaas): हिंदी का प्रथम महाकाव्य – परिभाषा, कथावस्तु, सर्ग और विशेषताएँ यदि आप हिंदी साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, और बोर्ड परीक्षाएँ) के अंतर्गत अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की रचना प्रियप्रवास की संपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है। आधुनिक हिंदी साहित्य के

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अनेकार्थी शब्द – ANEKARTHI SHABD | हिंदी व्याकरण | HINDI GRAMMAR

अनेकार्थी शब्द

दोस्तों आज की पोस्ट में हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक में अनेकार्थी शब्द(Anekarthi shabd ) के परीक्षा उपयोगी उदाहरण व महत्त्वपूर्ण प्रश्न दिए जा रहें है  अनेकार्थी शब्द – ANEKARTHI SHABD अनेकार्थी शब्द का अर्थ है : ऐसे शब्द जिनसे अनेक अर्थ निकलते हो | किसी भाषा के शब्द भंडार की संपन्नता और विविधता उस

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हिंदी रिपोर्ताज का विकास, जनक और प्रमुख रचनाएँ | Hindi Reportage

हिंदी रिपोर्ताज का विकास

हिंदी रिपोर्ताज का विकास और प्रमुख रचनाएँ: संपूर्ण अध्ययन नोट्स हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास अपने भीतर कई महत्वपूर्ण विधाओं और परिवर्तनों को समेटे हुए है। इन सभी विधाओं में ‘रिपोर्ताज’ एक ऐसी आधुनिक और जीवंत विधा है, जिसने पत्रकारिता और साहित्य का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौर से उपजी

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भारतेन्दु युग पार्ट 1

भारतेन्दु युग(bhartendu yug)   आज हम भारतेन्दु युग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी ले कर आए है  1. भारतेंदु की राजभक्ति परक कविता *भारत शिक्षा* है 2.सर सैयद अहमद खां ने हिंदी को गंवारू बोली कहकर उर्दू की हिमायत की 3.रीतिकाल का अंतिम चरण सन 1843 ईस्वी और भारतेन्दु के आगमन 1868 ईस्वी के बीच

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रीतिकाल काव्यधारा: नामकरण, वर्गीकरण और प्रमुख कवि | Ritikaal Kavydhara

Ritikaal Kavydhara

रीतिकाल काव्यधारा: नामकरण, वर्गीकरण, प्रमुख कवि और आचार्यत्व (Ritikaal Kavydhara Notes) हिंदी साहित्य के इतिहास में रीतिकाल (1700-1900 ई.) का कालखंड कला, शृंगार और शास्त्रीय विवेचन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से रीतिकाल की काव्यधारा,

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hindi sahitya || हिंदी साहित्य की प्रमुख पंक्तियाँ|| hindi literature

हिंदी साहित्य की प्रमुख पंक्तियाँ(hindi sahitya kee pramukh panktiyaan) हिंदी मित्रो आज की  पोस्ट में हिंदी साहित्य(hindi sahitya) की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ शामिल की गयी है इसमें से हर परीक्षा में एक दो पंक्तियाँ आपको जरूर मिलेगी। hindi sahitya || हिंदी साहित्य की प्रमुख पंक्तियाँ|| hindi literature   1. मो सम कौन कुटिल खलकामी सूरदास 2.

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सार्वनामिक विशेषण – Sarvanamik Visheshan | परिभाषा, उदाहरण

Sarvanamik Visheshan

ऐसे सर्वनाम शब्द जो संज्ञा से पहले जुड़कर उस संज्ञा शब्द की विशेषण की तरह विशेषता बताते हैं, वे शब्द सार्वनामिक विशेषण(Sarvanamik Visheshan) कहलाते हैं। ये शब्द संज्ञा के लिए विशेषण का काम करते हैं,अर्थात संज्ञा सहित सर्वनाम हो तो सार्वनिक विशेषण होगा और संज्ञा रहित सर्वनाम हो तो सर्वनाम होता है उदाहरण ― मेरी

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भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है – निबंध सारांश और मूल पाठ | Bharatvarshonnti Kaise Ho Sakti Hai

भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है

भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है: निबंध का सार, मूल पाठ और महत्वपूर्ण विश्लेषण (Bharatvarshonnti Kaise Ho Sakti Hai) हिंदी गद्य साहित्य और भारतेंदु युग के इतिहास में भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित और उद्बोधित निबंध/भाषण ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी

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Varn Viched || वर्ण-विच्छेद क्या होता है ?

Varn Viched

आज के आर्टिकल में हम वर्ण-विच्छेद(Varn Viched) के बारे में पढेंगे ,इसके तहत हम वर्ण-विच्छेद का अर्थ(Varn Viched ka Arth) , वर्ण – विच्छेद किसे कहते हैं(Varn Viched kise kahate Hain) वर्ण-विच्छेद के नियम(Varn Viched ke Niyam) , वर्ण-विच्छेद के उदाहरणों(Varn Viched ke Udaharan), Varn Viched in Hindi को विस्तार से पढेंगे । वर्ण-विच्छेद का

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