केवल कृष्ण घोड़ेला

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अरस्तु – Arstu || दार्शनिक

अरस्तु

⚡ संक्षिप्त उत्तरअरस्तु (Aristotle) यूनान के महान दार्शनिक थे। उनका जन्म 384 ई.पू. में स्टेगिरा में हुआ, वे प्लेटो के शिष्य थे और उनकी काव्यशास्त्रीय कृति पेरिपोएतिकेस (Poetics) पश्चिमी काव्यशास्त्र की आधारशिला मानी जाती है। इसके प्रमुख सिद्धांत हैं अनुकरण (Mimesis) और विरेचन (Catharsis)। हिंदी में भी इन्हीं के आधार पर पाश्चात्य काव्य-चिंतन पढ़ाया जाता […]

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कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियाँ -हिंदी साहित्य का इतिहास || भक्तिकाल

कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियाँ

आज के आर्टिकल हम भक्तिकाल में ’कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियाँ’ पढ़ेंगे। जो परीक्षा के लिए उपयोगी साबित होगा। कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियाँ राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन- कृष्ण भक्त कवियों ने अपने काव्य में राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन विशेष रूप से किया है। श्रीकृष्ण के बाल रूप व प्रेम लीला के मधुर रूप की

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Kahani Or Upnyas Me Anter – कहानी और उपन्यास में अंतर

Kahani Or Upnyas Me Anter

आज के आर्टिकल में हम कहानी व उपन्यास में अंतर (Kahani Or Upnyas Me Anter) को पढेंगे । कहानी और उपन्यास में अंतर संरचना की दृष्टि से उपन्यास और कहानी में यह अन्तर है कि उपन्यास घटना-प्रधान होता है और कहानी व्यंजना-प्रधान। कहानी के तथ्यों का वर्णन उपन्यास की भांति विस्तृत नहीं होता, कथित नहीं

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Kahani Ke Tatva – कहानी के तत्त्व | हिंदी साहित्य

Kahani Ke Tatva

इस आर्टिकल में हम हिंदी कहानी के तत्वों (Kahani Ke Tatva) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे । कहानी में तत्वों का ढांचा कितना उपयोगी होता है, इसके बारे में जानेंगे। कहानी के तत्त्व – Kahani Ke Tatva एक श्रेष्ठ सफल कहानी के लिए निम्नलिखित आठ तत्त्व अपेक्षित हैं – 1. शीर्षक 2. कथावस्तु

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पारिभाषिक शब्दावली – Paribhashik Shabdavali

Paribhashik Shabdavali

पारिभाषिक शब्दावली (Paribhashik Shabdavali) उन्हें कहते हैं जिनका प्रयोग किसी विशिष्ट प्रयोजन या किसी विशेष उद्देश्य  के लिए किया जाता है । पारिभाषिक शब्द हमारे दैनिक जीवन के शब्द न होकर गणित, भौतिकी,अर्थशास्त्र, रसायन, दर्शन, इंजीनियरी, विधि, वाणिज्य आदि ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट शब्द होते हैं और जिनकी अर्थ सीमा  परिभाषित होती है।

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प्रमुख उपन्यासों के पात्र -हिंदी साहित्य का इतिहास – NTA NET JRF Hindi

प्रमुख उपन्यासों के पात्र

आज के आर्टिकल में हिंदी साहित्य के अंतर्गत प्रमुख उपन्यासों के पात्र को बताया गया है ,जो  कि परीक्षा के लिए उपयोगी होंगे । प्रमुख उपन्यासों के पात्र उपन्यास (लेखक) प्रमुख पात्र देवरानी जेठानी की कहानी (पं. गौरीदत्त) पार्वती, सुखदेई, दौलतराम, छोटे परीक्षागुरु (श्रीनिवास दास) लाला मदनमोहन, ब्रजकिशोर चंद्रकांता (देवकीनंदन खत्री) राजकुमार वीरेंद्र सिंह, चंद्रकांता, क्रूरसिंह,

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रमणिका गुप्ता का जीवन परिचय, रचनाएँ और आत्मकथा | Ramnika Gupta

Ramnika Gupta

प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता रमणिका गुप्ता का जीवन परिचय, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान (Ramnika Gupta ka Jivan Parichay) हिंदी साहित्य जगत में दलित, आदिवासी और स्त्री विमर्श को अपनी मुखर एवं सशक्त आवाज़ देने वाली बहुमुखी प्रतिभा की धनी लेखिका, राजनीतिक चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता रमणिका गुप्ता (Ramnika Gupta) का व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यंत

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सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय – Subhadra Kumari Chauhan ka Jivan Parichay

Subhadra Kumari Chauhan

आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के चर्चित कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra Kumari Chauhan ka Jivan Parichay) के जीवन परिचय को पढेंगे ,आप इस आर्टिकल को अच्छे से पढ़ें। सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय ,जयंती ,की जीवनी ,इतिहास ,कहानी ,कविताएँ ,बेटा ,पति ,अवार्ड – Subhadra Kumari Chauhan Biography In Hindi, history, Rachnaye,

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रामभक्ति शाखा – भक्तिकाल – Hindi Sahitya ka Itihas

रामभक्ति शाखा

आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के इतिहास के अंतर्गत भक्तिकाल में रामभक्ति शाखा (Rambhakti Shakha)  को पढेंगे ,इससे जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्य समझेंगे । हिन्दी साहित्य का आदिकाल समसामयिक राजनीतिक एवं सामाजिक वातावरण की दृष्टि से रामकाव्य की रचना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त काल था। इस युग में कविगण मर्यादापुरुषोत्तम राम की शौर्य शक्ति

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क्रोचे का अभिव्यंजनावाद – काव्यशास्त्र – Hindi Sahitya

क्रोचे का अभिव्यंजनावाद

आज के इस आर्टिकल में क्रोचे का अभिव्यंजनावाद (kroche ka abhivyanjnavad) और इसके संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपके साथ शेयर की जा रही है। आप इस टाॅपिक को अच्छे से पढ़े। क्रोचे का अभिव्यंजनावाद  अभिव्यंजनावाद का प्रारम्भ पाश्चात्य देशों में हुआ है। शैली को प्रभावित प्रदान करने वाले यूरोप में दो वाद प्रचलित हुए-एक तो अभिव्यंजनावाद

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