अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026
अरस्तु (Aristotle) यूनान के महान दार्शनिक थे। उनका जन्म 384 ई.पू. में स्टेगिरा में हुआ, वे प्लेटो के शिष्य थे और उनकी काव्यशास्त्रीय कृति पेरिपोएतिकेस (Poetics) पश्चिमी काव्यशास्त्र की आधारशिला मानी जाती है। इसके प्रमुख सिद्धांत हैं अनुकरण (Mimesis) और विरेचन (Catharsis)। हिंदी में भी इन्हीं के आधार पर पाश्चात्य काव्य-चिंतन पढ़ाया जाता है।
परीक्षा में अरस्तु से दो तरह के प्रश्न आते हैं: जीवन से जुड़े तथ्य (गुरु, शिष्य, ग्रंथ) और काव्यशास्त्र की अवधारणाएँ (अनुकरण, त्रासदी, विरेचन)। नीचे दोनों को क्रम से रखा है।
🧑🏫 अरस्तु का जीवन-परिचय
Table of Contents
- जन्म 384 ई.पू. में यूनान के स्टेगिरा नगर में हुआ। पिता निकोमाकस मैसिडोनिया के राजदरबार में चिकित्सक थे।
- लगभग 17-18 वर्ष की आयु में एथेंस जाकर प्लेटो की अकादमी में पढ़ाई की और वहाँ लगभग बीस वर्ष रहे।
- सिकंदर महान के शिक्षक रहे। बाद में एथेंस में अपना विद्यालय लाइसियम खोला।
- निधन 322 ई.पू. में हुआ।
- दर्शन, तर्कशास्त्र, राजनीति, नीतिशास्त्र, जीवविज्ञान और काव्यशास्त्र, सभी पर लिखा।

📖 पेरिपोएतिकेस (Poetics) क्या है?
- अरस्तु की काव्यशास्त्रीय कृति का यूनानी नाम पेरिपोएतिकेस है, जिसका अंग्रेज़ी रूप Poetics है। हिंदी में इसे “काव्यशास्त्र” या “पोएटिक्स” भी कहा जाता है।
- इसमें लगभग 26 अध्याय माने जाते हैं और मुख्य चर्चा त्रासदी और महाकाव्य की है।
- परंपरा में माना जाता है कि इसका दूसरा भाग, जिसमें हास्य (कॉमेडी) पर विचार था, उपलब्ध नहीं है।
- यह ग्रंथ प्रायः ई.पू. चौथी शताब्दी में रचा माना जाता है।
- यह प्लेटो के उस मत का उत्तर भी माना जाता है जिसमें कला को सत्य से दो कदम दूर कहा गया था।
🎭 अनुकरण सिद्धांत (Mimesis)
अरस्तु के अनुसार कविता जीवन की नकल मात्र नहीं, बल्कि उसका पुनर्सृजन है। कवि वस्तु को जैसी है, वैसी नहीं, बल्कि जैसी हो सकती है या होनी चाहिए, वैसी प्रस्तुत करता है। इसी कारण अरस्तु ने काव्य को इतिहास से अधिक दार्शनिक कहा। विस्तार से पढ़ें: अरस्तू का अनुकरण सिद्धान्त।
😢 त्रासदी और उसके छह तत्व
| तत्व | यूनानी / अर्थ |
|---|---|
| कथानक | Mythos, त्रासदी की आत्मा |
| चरित्र | Ethos |
| पद-रचना (भाषा) | Lexis |
| विचार | Dianoia |
| दृश्य-विधान | Opsis |
| गीत | Melos |
अरस्तु ने कथानक को त्रासदी का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व माना। कथानक में तीन बातें आती हैं: पेरिपेतिया (भाग्य का उलटाव), अनागनोरिसिस (पहचान या ज्ञान) और हेमार्शिया (नायक की भूल या दोष)।
✨ विरेचन सिद्धांत (Catharsis)
अरस्तु के अनुसार त्रासदी करुणा और भय जैसे भावों को जगाकर उनका शोधन या विरेचन करती है। दर्शक मन से हल्का और शुद्ध होकर लौटता है। “कैथार्सिस” शब्द की व्याख्या पर विद्वानों में मतभेद है। यह समझने के लिए पढ़ें: अरस्तू का विरेचन सिद्धांत।
🗂️ अरस्तु की अन्य कृतियाँ
- रेटरिक (भाषण कला या वाक्कला पर), जिसमें अभिव्यक्ति के तरीकों पर विचार है।
- पॉलिटिक्स और निकोमाकियन एथिक्स (राजनीति और नीतिशास्त्र)।
- ऑर्गनन (तर्कशास्त्र पर लेखों का संग्रह)।
- मेटाफिज़िक्स (तत्त्वमीमांसा)।
पाश्चात्य काव्यशास्त्र की आगे की कड़ी जानने के लिए पढ़ें: पाश्चात्य काव्यशास्त्र पार्ट 2 और क्रोचे का अभिव्यंजनावाद।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) स्पार्टा
(3) स्टेगिरा
(4) कोरिंथ
👉 उत्तर देखें
अरस्तु का जन्म 384 ई.पू. में स्टेगिरा में हुआ।
(A) अरस्तु प्लेटो के शिष्य थे।
(B) पेरिपोएतिकेस में लगभग 26 अध्याय माने जाते हैं।
(C) विरेचन का संबंध करुणा और भय से है।
(D) हास्य पर लिखा गया पेरिपोएतिकेस का दूसरा भाग आज उपलब्ध है।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है। हास्य पर विचार वाला दूसरा भाग उपलब्ध नहीं माना जाता।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) Mimesis | (I) अनुकरण |
| (B) Catharsis | (II) विरेचन |
| (C) Peripeteia | (III) पहचान या ज्ञान |
| (D) Anagnorisis | (IV) भाग्य का उलटाव |
(2) A-II, B-I, C-IV, D-III
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-II, B-I, C-III, D-IV
👉 उत्तर देखें
Mimesis = अनुकरण, Catharsis = विरेचन, Peripeteia = भाग्य का उलटाव, Anagnorisis = पहचान।
कारण (R): उनके अनुसार कथानक त्रासदी की आत्मा है।
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
अरस्तु ने कथानक (Mythos) को त्रासदी की आत्मा कहा है।
(A) अरस्तु (B) सुकरात (C) प्लेटो (D) सिकंदर
(2) C, B, A, D
(3) B, A, C, D
(4) A, B, C, D
👉 उत्तर देखें
सुकरात → प्लेटो → अरस्तु → सिकंदर।
कथन II: अरस्तु ने कथानक की जगह दृश्य-विधान को त्रासदी का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व माना।
(2) कथन I सही, कथन II गलत
(3) कथन I गलत, कथन II सही
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
कथन II गलत है, क्योंकि अरस्तु ने कथानक को सर्वोपरि माना।
❓ अरस्तु पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।


