समास: परिभाषा, भेद और 600+ उदाहरण (विग्रह सहित) | Samas in Hindi

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026

समास हिंदी व्याकरण का ऐसा टॉपिक है जिससे लगभग हर परीक्षा में प्रश्न आता है, चाहे वह बोर्ड परीक्षा हो या REET, CTET, TGT, PGT, RPSC और UGC NET जैसी प्रतियोगी परीक्षाएँ। इस लेख में समास की परिभाषा, उसके छह भेद, हर भेद की पहचान और हर भेद के ढेरों उदाहरण विग्रह सहित एक ही जगह दिए गए हैं।

इस लेख में: समास की परिभाषा | समास और संधि में अंतर | समास के भेद | अव्ययीभाव | तत्पुरुष | कर्मधारय | द्विगु | द्वन्द्व | बहुव्रीहि | समासों में अंतर | महत्वपूर्ण प्रश्न

समास किसे कहते हैं? (समास की परिभाषा)

Table of Contents

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर, उनके बीच के विभक्ति-चिह्न या योजक शब्द हटाकर, एक नया और छोटा सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।

samas

“समास” शब्द सम् + आस से बना है, जिसका अर्थ है “पास-पास बैठाना” या “संक्षिप्त करना”। समास से कम शब्दों में अधिक अर्थ कहा जा सकता है। जैसे “रसोई के लिए घर” को हम एक शब्द में “रसोईघर” कह देते हैं। यहाँ “के लिए” हट गया और दो शब्द मिलकर एक हो गए।

समस्त पद, पूर्वपद, उत्तरपद और समास-विग्रह

  • समस्त पद (सामासिक पद): समास के नियमों से बना नया शब्द। जैसे: पाठशाला।
  • पूर्वपद: समस्त पद का पहला शब्द। जैसे: पाठ।
  • उत्तरपद: समस्त पद का दूसरा शब्द। जैसे: शाला।
  • समास-विग्रह: समस्त पद को तोड़कर उसके शब्दों को फिर से हटे हुए चिह्नों के साथ लिखना। जैसे: पाठ के लिए शाला।
समस्त पदपूर्वपदउत्तरपदविग्रहसमास
पाठशालापाठशालापाठ के लिए शालातत्पुरुष
नीलकमलनीलकमलनीला है जो कमलकर्मधारय
दाल-रोटीदालरोटीदाल और रोटीद्वन्द्व
नवरत्ननवरत्ननौ रत्नों का समूहद्विगु
दशाननदशआननदश हैं आनन जिसके (रावण)बहुव्रीहि
यथाशक्तियथाशक्तिशक्ति के अनुसारअव्ययीभाव
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समास और संधि में अंतर

छात्र अक्सर समास और संधि को एक समझ लेते हैं। दोनों में शब्द जुड़ते हैं, पर जुड़ने का तरीका अलग है:

संधिसमास
दो वर्णों (ध्वनियों) का मेल होता है।दो या अधिक शब्दों (पदों) का मेल होता है।
मेल के समय ध्वनि में परिवर्तन होता है। जैसे: विद्या + आलय = विद्यालय।शब्दों के बीच के विभक्ति-चिह्न हट जाते हैं। जैसे: विद्या के लिए आलय = विद्यालय।
तोड़ने की प्रक्रिया को संधि-विच्छेद कहते हैं।तोड़ने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।

कुछ शब्दों में संधि और समास दोनों होते हैं। जैसे “विद्यालय” में संधि-विच्छेद है विद्या + आलय और समास-विग्रह है विद्या के लिए आलय।

समास के कितने भेद होते हैं?

समास के छह भेद होते हैं। किस पद की प्रधानता है, इससे समास पहचानना आसान हो जाता है:

समासकौन-सा पद प्रधानपहचानउदाहरण
अव्ययीभावपूर्वपदपहला पद अव्यय या उपसर्ग (यथा, प्रति, आ, नि, बे आदि); पूरा शब्द अव्यय की तरह प्रयोग होता हैयथाशक्ति, प्रतिदिन
तत्पुरुषउत्तरपदबीच के कारक-चिह्न (को, से, के लिए, का, में, पर) का लोपराजपुत्र, विद्यालय
कर्मधारयउत्तरपदविशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंधनीलकमल, कमलनयन
द्विगुउत्तरपदपहला पद संख्यावाचक; समूह या समाहार का बोधत्रिलोक, सप्ताह
द्वन्द्वदोनों पदविग्रह में और, या, आदि लगता है; प्रायः योजक-चिह्न (-)माता-पिता, दो-चार
बहुव्रीहिकोई नहीं (अन्य पद)दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध कराते हैंदशानन, लम्बोदर

Samas ke kitne bhed hote hain

1. अव्ययीभाव समास: परिभाषा और उदाहरण

जिस समास में पहला पद (पूर्वपद) प्रधान हो और अव्यय या उपसर्ग हो, तथा पूरा समस्त पद वाक्य में अव्यय की तरह प्रयोग हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

पहचान: शब्द प्रायः यथा, प्रति, आ, नि/निर्, बे, बा, स, भर, अनु जैसे शब्दों से शुरू होते हैं; या एक ही शब्द दोहराया जाता है, जैसे हाथोंहाथ, रातोंरात, घर-घर। ऐसे दोहराए शब्दों को द्वन्द्व समझने की भूल न करें।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
आजीवनजीवन पर्यन्त
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
भरपेटपेट भरकर
निडरबिना डर के
आमरणमरण पर्यन्त
हाथोंहाथहाथ ही हाथ में
बेईमानबिना ईमान के
➕ 👉 अव्ययीभाव के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अतिरिक्तरिक्त से अधिक
अतिवृष्टिवृष्टि की अति
अत्याधुनिकआधुनिक से भी अधिक
अत्यावश्यकआवश्यक से भी अधिक
अध्यात्मआत्मा से सम्बन्धित
अनजानेबिना जाने हुए
अनुकृतिकृति के अनुरूप
अनुगमनगमन के पीछे
अनुगुणगुण के अनुसार
अनुदिनदिन-दिन (प्रतिदिन)
अनुरूपरूप के योग्य
अनुसन्धानसन्धान के पीछे
अनुसरणसरण (चलने) के पीछे
अनुस्मारकस्मरण के पीछे (फिर से स्मरण कराने वाला)
अवसरानुसारअवसर के अनुसार
आकण्ठकण्ठ पर्यन्त
आजन्मजन्म से लेकर
आजानुबाहुजानु (घुटनों) तक बाहु
टिप्पणी: कई पुस्तकों में बहुव्रीहि (घुटनों तक बाहु हैं जिसकी — राम)।
आपादमस्तकपाद से मस्तक तक
आयुपर्यन्तआयु के अन्त तक
इच्छानुसारइच्छा के अनुसार
एकाएकएक के बाद एक (अचानक)
घड़ी-घड़ीहर घड़ी
घर-घरहर घर
चलाचलीचलने का क्रम
जीवनभरपूरे जीवन
दरअसलअसल में
दिनभरपूरे दिन
दिनानुदिनदिन के बाद दिन
दिनों-दिनदिन पर दिन
धीरे-धीरेबहुत धीरे
निगोड़ाबिना गोड़ (आधार) के
निधड़कबिना धड़क के
निरामिषआमिष (मांस) के बिना
निर्जलबिना जल के
निर्देशानुसारनिर्देश के अनुसार
निर्विकारबिना विकार के
निर्विवादविवाद के बिना
नीरंध्ररंध्र (छिद्र) के बिना
नीरवरव (शब्द) के बिना
नीरोगरोग के बिना
परोक्षअक्षि (आँखों) के परे
प्रतिक्षणप्रत्येक क्षण
प्रतिद्वन्द्वद्वन्द्व के बदले द्वन्द्व
प्रतिध्वनिध्वनि के बदले ध्वनि
प्रतिनियुक्तिनियुक्ति के बदले नियुक्ति
प्रतिवर्षप्रत्येक वर्ष
प्रतिशतप्रत्येक शत (सौ) पर
प्रतिहिंसाहिंसा के बदले हिंसा
प्रत्यक्षअक्षि (आँखों) के सामने
प्रत्येकएक-एक
प्रयत्नपूर्वकप्रयत्न के साथ
फूटमफूटफूट ही फूट
बख़ूबीख़ूबी के साथ
बाअदबअदब के साथ
बाइज़्ज़तइज़्ज़त के साथ
बाक़ायदाक़ायदे के साथ
बार-बारहर बार
बीचों-बीचठीक बीच में
बेखटकेबिना खटके के
बेगैरतबिना गैरत के
बेचैनबिना चैन के
बेजानबिना जान के
बेफ़ायदाबिना फ़ायदे के
बेमुरव्वतबिना मुरव्वत के
बेरहमबिना रहम के
बेहयाबिना हया के
बेहिसाबबिना हिसाब के
भरसकसक (शक्ति) भर
भागमभागभागने के बाद भागना
मन्द-मन्दबहुत मन्द
मरणोपरान्तमरण के उपरान्त
मारामारीमार के बाद मार
यथाक्रमक्रम के अनुसार
यथागतिगति के अनुसार
यथामतिमति के अनुसार
यथायोग्ययोग्यता के अनुसार
यथार्थअर्थ के अनुसार
यथाविधिविधि के अनुसार
यथाशीघ्रजितना शीघ्र हो सके
यथासमयसमय के अनुसार
यथासम्भवजहाँ तक सम्भव हो
यथास्थानस्थान के अनुसार
यथास्थितिस्थिति के अनुसार
यथोचितजितना उचित हो
यावज्जीवनजब तक जीवन है
योग्यतानुसारयोग्यता के अनुसार
रातोंरातरात ही रात में
लाजवाबजिसका जवाब न हो
लूटमलूटलूट ही लूट
विवाहोपरांतविवाह के उपरान्त
विशुद्धपूर्णतः शुद्ध
विश्वासपूर्वकविश्वास के साथ
सपरिवारपरिवार के साथ
सप्रमाणप्रमाण के साथ
समक्षअक्षि (आँखों) के सामने
सशक्तशक्ति के साथ
सशर्तशर्त के साथ
सानंदआनंद के साथ
साफ़-साफ़बिल्कुल साफ़
सार्थकअर्थ के साथ
सुनासुनीसुनने के बाद सुनना
सेवोपरान्तसेवा के उपरान्त
हरवर्षप्रत्येक वर्ष

2. तत्पुरुष समास: परिभाषा, भेद और उदाहरण

जिस समास में उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान हो और दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न (विभक्ति) लुप्त हो जाए, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे “राजा का पुत्र” से “राजपुत्र”। तत्पुरुष के भेद उसी कारक के नाम पर होते हैं, जिसका चिह्न लुप्त होता है।

तत्पुरुष का भेदलुप्त चिह्नउदाहरण
कर्म तत्पुरुषकोस्वर्गप्राप्त (स्वर्ग को प्राप्त)
करण तत्पुरुषसे, के द्वाराहस्तलिखित (हस्त से लिखित)
सम्प्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघर (रसोई के लिए घर)
अपादान तत्पुरुषसे (अलग होने के अर्थ में)पथभ्रष्ट (पथ से भ्रष्ट)
संबंध तत्पुरुषका, के, कीराजपुत्र (राजा का पुत्र)
अधिकरण तत्पुरुषमें, परवनवास (वन में वास)

करण और अपादान दोनों में “से” आता है। अंतर यह है कि करण में “से” का अर्थ साधन (किसके द्वारा) होता है, जबकि अपादान में अलग होना। हस्तलिखित = हाथ के द्वारा लिखा (करण); पथभ्रष्ट = पथ से अलग (अपादान)।

कर्म तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें कर्म कारक के चिह्न “को” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
गगनचुम्बीगगन को चूमने वाला
शरणागतशरण को आगत
मनोहरमन को हरने वाला
सर्वज्ञसब को जानने वाला
चित्तचोरचित्त को चुराने वाला
➕ 👉 कर्म तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अग्निभक्षीअग्नि को भक्षण करने वाला
कमरतोड़कमर को तोड़ने वाला
गिरहकटगिरह को काटने वाला
गृहागतगृह को आगत
ग्रामगतग्राम को गया हुआ
चिड़ीमारचिड़ियों को मारने वाला
जलधरजल को धारण करने वाला
जीभरजी को भरकर
टिप्पणी: वर्गीकरण पर मतभेद; कुछ पुस्तकें अव्ययीभाव मानती हैं।
दुःखददुःख को देने वाला
धनुर्धरधनुष को धारण करने वाला
नरभक्षीनर को भक्षण करने वाला
मांसभक्षीमांस को खाने वाला
मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वाला
मुक्तिप्राप्तमुक्ति को प्राप्त
यशप्राप्तयश को प्राप्त
रोज़गारोन्मुखरोज़गार को उन्मुख
वनगमनवन को गमन
विकासोन्मुखविकास को उन्मुख
विदेशगमनविदेश को गमन
विद्याधरविद्या को धारण करने वाला
शक्तिवर्धकशक्ति को बढ़ाने वाला
शत्रुघ्नशत्रु को मारने वाला
सुखदायकसुख को देने वाला
हस्तगतहस्त को गत (हाथ में आया हुआ)

करण तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें करण कारक के चिह्न “से” या “के द्वारा” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
हस्तलिखितहस्त (हाथ) से लिखित
तुलसीकृततुलसी द्वारा कृत
रेखांकितरेखा से अंकित
शोकाकुलशोक से आकुल
मनगढ़ंतमन से गढ़ा हुआ
अश्रुपूर्णअश्रुओं से पूर्ण
➕ 👉 करण तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
आकाशवृत्तिआकाश से (अनिश्चित साधन से) वृत्ति
आचारकुशलआचार से कुशल
ईश्वरप्रदत्तईश्वर द्वारा प्रदत्त
गुणयुक्तगुणों से युक्त
चिन्ताग्रस्तचिन्ता से ग्रस्त
जलावृतजल से आवृत (घिरा)
ज्ञानयुक्तज्ञान से युक्त
तारोंभरीतारों से भरी
देवविरचितदेव द्वारा विरचित
धर्मयुक्तधर्म से युक्त
नीतियुक्तनीति से युक्त
पददलितपद (पैरों) से दलित
फलावेष्टितफलों से आवेष्टित
बाणाहतबाण से आहत
भड़भूँजाभाड़ में भूनने वाला
मदमत्तमद से मत्त
मदान्धमद से अन्धा
महिमामण्डितमहिमा से मण्डित
मेघाच्छन्नमेघों से आच्छन्न
रत्नजड़ितरत्नों से जड़ित
रसभरीरस से भरी
रससिक्तरस से सिक्त
रेलयात्रारेल द्वारा यात्रा
वाग्युद्धवाक् (वाणी) से युद्ध
विधिप्रदत्तविधि (विधाता) द्वारा प्रदत्त
शराहतशर से आहत
श्रमजीवीश्रम से जीने वाला
श्रमसाध्यश्रम से साध्य

सम्प्रदान तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें सम्प्रदान कारक के चिह्न “के लिए” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
रसोईघररसोई के लिए घर
विद्यालयविद्या के लिए आलय
गुरुदक्षिणागुरु के लिए दक्षिणा
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
गोशालागायों के लिए शाला
पुस्तकालयपुस्तकों के लिए आलय
➕ 👉 सम्प्रदान तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
आवेदन-पत्रआवेदन के लिए पत्र
कन्याविद्यालयकन्याओं के लिए विद्यालय
कारावासकारा के लिए वास
टिप्पणी: कई पुस्तकों में अधिकरण तत्पुरुष (कारा में वास)।
छात्रावासछात्रों के लिए आवास
डाकगाड़ीडाक के लिए गाड़ी
देवालयदेव के लिए आलय
धर्मशालाधर्म के लिए शाला
न्यायालयन्याय के लिए आलय
पुत्रशोकपुत्र के लिए शोक
प्रयोगशालाप्रयोग के लिए शाला
फलाकांक्षीफल के लिए आकांक्षी
भिक्षाटनभिक्षा के लिए अटन (भ्रमण)
भूतबलिभूतों के लिए बलि
भोजनालयभोजन के लिए आलय
मंत्रालयमंत्री के लिए आलय
महँगाईभत्तामहँगाई के लिए भत्ता
मार्गव्ययमार्ग के लिए व्यय
मालगोदाममाल के लिए गोदाम
यज्ञवेदीयज्ञ के लिए वेदी
रणभूमिरण के लिए भूमि
रनिवासरानी के लिए निवास
राहखर्चराह के लिए खर्च
लोकसभालोक के लिए सभा
विधानसभाविधान के लिए सभा
शिवार्पणशिव के लिए अर्पण
सचिवालयसचिवों के लिए आलय
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
सभाभवनसभा के लिए भवन
सभामण्डपसभा के लिए मण्डप
स्नानघरस्नान के लिए घर
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
हवन-सामग्रीहवन के लिए सामग्री

अपादान तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें अलग होने के अर्थ वाले “से” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
भयभीतभय से भीत
पदच्युतपद से च्युत
जन्मान्धजन्म से अंधा
आकाशपतितआकाश से पतित
➕ 👉 अपादान तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
आशातीतआशा से अतीत (परे)
इन्द्रियातीतइन्द्रियों से अतीत
कामचोरकाम से जी चुराने वाला
क्रियाहीनक्रिया से हीन
गर्वशून्यगर्व से शून्य
जलरिक्तजल से रिक्त
जलशून्यजल से शून्य
जातिभ्रष्टजाति से भ्रष्ट
दूरागतदूर से आगत
देशनिकालादेश से निकाला
दोषमुक्तदोष से मुक्त
धनरहितधन से रहित
धर्मविमुखधर्म से विमुख
नेत्रहीननेत्रों से हीन
पापमुक्तपाप से मुक्त
बन्धनमुक्तबन्धन से मुक्त
मायारिक्तमाया से रिक्त
मृत्युभयमृत्यु से भय
रणविमुखरण से विमुख
रसहीनरस से हीन
लक्ष्यभ्रष्टलक्ष्य से भ्रष्ट
लोकोत्तरलोक से उत्तर (परे)
विद्याहीनविद्या से हीन
व्ययमुक्तव्यय से मुक्त
श्रमरहितश्रम से रहित
सत्ताच्युतसत्ता से च्युत
सेवानिवृत्तसेवा से निवृत्त
सेवामुक्तसेवा से मुक्त
हतभाग्यभाग्य से हत
टिप्पणी: कई पुस्तकों में बहुव्रीहि (हत है भाग्य जिसका)।
हतश्रीश्री से हत (रहित)

संबंध (षष्ठी) तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें संबंध कारक के चिह्न “का, के, की” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
गंगाजलगंगा का जल
हिमालयहिम का आलय
टिप्पणी: “पर्वतराज” अर्थ में कुछ पुस्तकें बहुव्रीहि मानती हैं।
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति
सेनाध्यक्षसेना का अध्यक्ष
देशवासीदेश का वासी
➕ 👉 संबंध तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अन्नदानअन्न का दान
आनंदमठआनंद का मठ
उल्कापातउल्का का पात
ऋषिकन्याऋषि की कन्या
कन्यादानकन्या का दान
गोदानगो (गाय) का दान
घुड़दौड़घोड़ों की दौड़
दीपशिखादीप की शिखा
नगरसेठनगर का सेठ
पराधीनपर (दूसरे) के अधीन
पाणिग्रहणपाणि का ग्रहण
भारतरत्नभारत का रत्न
भूदानभू का दान
राजदरबारराजा का दरबार
राजमाताराजा की माता
रामचरितराम का चरित
लोकनायकलोक का नायक
सभापतिसभा का पति
स्वर्णपात्रस्वर्ण का पात्र

अधिकरण तत्पुरुष के उदाहरण

इसमें अधिकरण कारक के चिह्न “में” या “पर” का लोप होता है।

समस्त पदविग्रह
वनवासवन में वास
ध्यानमग्नध्यान में मग्न
आपबीतीआप पर बीती
घुड़सवारघोड़े पर सवार
नरोत्तमनरों में उत्तम
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
➕ 👉 अधिकरण तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
आत्मनिर्भरआत्म (स्वयं) पर निर्भर
कविराजकवियों में राजा
डिब्बाबन्दडिब्बे में बन्द
पुरुषसिंहपुरुषों में सिंह
फलासक्तफल में आसक्त
विद्याप्रवीणविद्या में प्रवीण
शोकमग्नशोक में मग्न
स्नेहमग्नस्नेह में मग्न

नञ् तत्पुरुष

जिस समस्त पद का पहला पद निषेध (न, अ, अन) का अर्थ दे, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं।

समस्त पदविग्रह
अज्ञानन ज्ञान
अधर्मन धर्म
अनपढ़न पढ़ा हुआ
अनाथन नाथ
असंभवन संभव
असत्यन सत्य

मध्यमपदलोपी और अन्य तत्पुरुष

कुछ समस्त पदों में विग्रह करते समय बीच का एक पूरा शब्द (“वाला”, “डूबा हुआ”, “मिला हुआ” आदि) लुप्त रहता है। जैसे “दही में डूबा हुआ बड़ा” से “दहीबड़ा”। कुछ विद्वान इन्हें कर्मधारय का भेद भी मानते हैं।

समस्त पदविग्रह
अश्रुगैसअश्रु लाने वाली गैस (मध्यमपदलोपी)
गीदड़ भभकीगीदड़ की भभकी
गुड़धानीगुड़ मिली हुई धानी (मध्यमपदलोपी)
गुरुभाईगुरु के संबंध से भाई (मध्यमपदलोपी)
घृतान्नघृत में पका हुआ अन्न (मध्यमपदलोपी)
दहीबड़ादही में डूबा हुआ बड़ा (मध्यमपदलोपी)
➕ 👉 मध्यमपदलोपी तत्पुरुष के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
बंदर घुड़कीबंदर की घुड़की
बैलगाड़ीबैलों से चलने वाली गाड़ी (मध्यमपदलोपी)
मालगाड़ीमाल ढोने वाली गाड़ी (मध्यमपदलोपी)
रेलगाड़ीरेल (पटरी) पर चलने वाली गाड़ी (मध्यमपदलोपी)
वायुयानवायु में चलने वाला यान (मध्यमपदलोपी)

3. कर्मधारय समास: परिभाषा और उदाहरण

जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो और दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

  • विशेषण-विशेष्य: विग्रह में “है जो” आता है। जैसे नीलकमल = नीला है जो कमल।
  • उपमान-उपमेय: विग्रह में “के समान” या “रूपी” आता है। जैसे कमलनयन = कमल के समान नयन; करकमल = कर रूपी कमल।

कर्मधारय समास के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
नीलकमलनीला है जो कमल
महात्मामहान है जो आत्मा
सज्जनसत् है जो जन
चन्द्रमुखचन्द्रमा के समान मुख
कमलनयनकमल के समान नयन
लौहपुरुषलौह के समान (दृढ़) पुरुष
करकमलकर रूपी कमल
पीताम्बरपीत है जो अम्बर (पीला वस्त्र)
टिप्पणी: अर्थ के अनुसार कर्मधारय (पीला वस्त्र) या बहुव्रीहि (श्रीकृष्ण)।
➕ 👉 कर्मधारय के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अरविन्दलोचनअरविन्द के समान लोचन
अल्पाहारअल्प है जो आहार
उड़नखटोलाउड़ने वाला है जो खटोला
उड़नतश्तरीउड़ने वाली है जो तश्तरी
कदाचारकुत्सित है जो आचार
कमलाक्षकमल के समान अक्ष (आँखें)
कापुरुषकायर है जो पुरुष
कालीमिर्चकाली है जो मिर्च
कीर्तिलताकीर्ति रूपी लता
कुदृष्टिकुत्सित है जो दृष्टि
कुपुत्रकु (बुरा) है जो पुत्र
कुसुमकोमलकुसुम के समान कोमल
खाद्यान्नखाद्य है जो अन्न
चंद्रवदनचन्द्रमा के समान वदन (मुख)
चरणकमलचरण रूपी कमल
चरणारविंदचरण रूपी अरविन्द
चरमसीमाचरम है जो सीमा
ज्वालामुखीज्वाला है मुख में जिसके (पर्वत)
टिप्पणी: कई पुस्तकों में बहुव्रीहि।
तुषारधवलतुषार के समान धवल
दुष्कर्मदूषित है जो कर्म
देहलतादेह रूपी लता
नराधमनरों में है जो अधम
नवोढ़ानई है जो ऊढ़ा (विवाहिता)
नीलगायनीली है जो गाय
नीलाकाशनीला है जो आकाश
नीलोत्पलनीला है जो उत्पल (कमल)
परमात्मापरम है जो आत्मा
परमायुपरम है जो आयु
पाषाणहृदयपाषाण के समान हृदय
पीला-ज़र्दपीला है जो ज़र्द
पुरुषरत्नपुरुष रूपी रत्न
पूर्णावतारपूर्ण है जो अवतार
प्रधानमंत्रीमंत्रियों में प्रधान है जो
प्रभुदयालप्रभु है जो दयालु
टिप्पणी: व्यक्तिवाचक नाम; पुस्तकों में दुर्लभ उदाहरण।
प्रियजनप्रिय है जो जन
भुजदंडभुजा रूपी दण्ड
मधुहासमधु के समान हास
महर्षिमहान है जो ऋषि
महाकालमहान है जो काल
महाकाव्यमहान है जो काव्य
महादेवमहान है जो देव
टिप्पणी: “शिव” अर्थ में बहुव्रीहि भी।
महादेवीमहान है जो देवी
महापुरुषमहान है जो पुरुष
महाभोजमहान है जो भोज
महामात्यमहान है जो अमात्य
महाराजामहान है जो राजा
महावीरमहान है जो वीर
टिप्पणी: अर्थ के अनुसार कर्मधारय भी, बहुव्रीहि भी।
महोत्सवमहान है जो उत्सव
मुखकमलमुख रूपी कमल
मुखचंद्रमुख रूपी चन्द्र
मुखारविंदमुख रूपी अरविन्द
मुनिवरवर (श्रेष्ठ) है जो मुनि
मोटा-ताज़ामोटा है जो ताज़ा भी
टिप्पणी: कई पुस्तकों में द्वन्द्व।
रक्तकमलरक्त (लाल) है जो कमल
राजीवलोचनराजीव (कमल) के समान लोचन
लाल-पीलालाल है जो पीला भी
टिप्पणी: कई पुस्तकों में द्वन्द्व; “क्रोधित” अर्थ में बहुव्रीहि।
लाल-सुर्खलाल है जो सुर्ख
वज्रदेहवज्र के समान देह
वीरबालावीर है जो बाला
शिवदयालशिव है जो दयालु
टिप्पणी: व्यक्तिवाचक नाम; पुस्तकों में दुर्लभ उदाहरण।
शीतोष्णशीत है जो उष्ण भी
टिप्पणी: कई पुस्तकों में द्वन्द्व (शीत और उष्ण)।
शुभागमनशुभ है जो आगमन
श्यामसुन्दरश्याम है जो सुन्दर
श्वेताम्बरश्वेत है जो अम्बर
सत्पुरुषसत् है जो पुरुष
सदाचारसत् है जो आचार
सदाशयसत् है जो आशय
सद्गुणसत् है जो गुण
सुबोधसुन्दर है जो बोध
हस्तारविंदहस्त रूपी अरविन्द

4. द्विगु समास: परिभाषा और उदाहरण

जिस समास का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और पूरा पद किसी समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। इसका विग्रह प्रायः “…का समूह” या “…का समाहार” से होता है।

द्विगु समास के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
त्रिलोकतीन लोकों का समूह
चौराहाचार राहों का समूह
नवरत्ननौ रत्नों का समूह
सप्ताहसात दिनों का समूह
शताब्दीशत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समूह
पंचवटीपाँच वटों का समूह
➕ 👉 द्विगु के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
अष्टाध्यायीआठ अध्यायों का समूह
चौपाईचार पदों का समूह
टिप्पणी: कुछ पुस्तकों में बहुव्रीहि (छंद-विशेष के अर्थ में)।
चौमासाचार मासों का समूह
त्रिदोषतीन दोषों का समूह
त्रिफलातीन फलों का समूह
त्रिभुवनतीन भुवनों का समूह
त्रिवेणीतीन वेणियों (धाराओं) का समाहार
टिप्पणी: “प्रयाग” अर्थ में कुछ पुस्तकें बहुव्रीहि मानती हैं।
नवग्रहनौ ग्रहों का समूह
पंचपात्रपाँच पात्रों का समूह
पक्षद्वयदो पक्षों का समूह
षड्रसछह रसों का समूह
सतसईसात सौ पद्यों का समूह
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूह
सप्तसिन्धुसात सिन्धुओं का समूह

5. द्वन्द्व समास: परिभाषा, भेद और उदाहरण

जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करते समय बीच में “और”, “या”, “आदि” जैसे शब्द लगें, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। समस्त पद में प्रायः योजक-चिह्न (-) लगता है। इसके तीन भेद हैं:

  • इतरेतर द्वन्द्व: विग्रह में “और” लगता है। जैसे माता-पिता = माता और पिता।
  • वैकल्पिक द्वन्द्व: विग्रह में “या/अथवा” लगता है। जैसे दो-चार = दो या चार।
  • समाहार द्वन्द्व: विग्रह में “आदि” लगता है और कहे गए शब्दों के अलावा उसी तरह की दूसरी चीज़ों का भी बोध होता है। जैसे कपड़ा-लत्ता = कपड़ा-लत्ता आदि।

इतरेतर द्वन्द्व के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
अगल-बगलअगल और बगल
अन्न-जलअन्न और जल
आज-कलआज और कल
आन-बान-शानआन, बान और शान
आय-व्ययआय और व्यय
आस-पासआस और पास
इक्यासीएक और अस्सी
ऊँच-नीचऊँच और नीच
➕ 👉 इतरेतर द्वन्द्व के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रह
कंकर-पत्थरकंकर और पत्थर
कंद-मूल-फलकंद, मूल और फल
कील-कांटाकील और कांटा
गाय-भैंसगाय और भैंस
गौरीशंकरगौरी और शंकर
चल-अचलचल और अचल
चाय-पानीचाय और पानी
चौसठचार और साठ
छियासीछह और अस्सी
छोटा-बड़ाछोटा और बड़ा
जन्म-मरणजन्म और मरण
जल-थलजल और थल
जी-जानजी और जान
जीव-जन्तुजीव और जन्तु
जीवन-मरणजीवन और मरण
तन-बदनतन और बदन
तन-मन-धनतन, मन और धन
तिरानवेतीन और नब्बे
तेईसतीन और बीस
दाल-रोटीदाल और रोटी
दूध-दहीदूध और दही
दूध-रोटीदूध और रोटी
देश-विदेशदेश और विदेश
धनी-निर्धनधनी और निर्धन
नर-नारीनर और नारी
पच्चीसपाँच और बीस
पशु-पक्षीपशु और पक्षी
पान-तम्बाकूपान और तम्बाकू
पाप-पुण्यपाप और पुण्य
पूर्व-पश्चिमपूर्व और पश्चिम
पूर्वापरपूर्व और अपर
पेड़-पौधेपेड़ और पौधे
पैंतालीसपाँच और चालीस
बड़ा-छोटाबड़ा और छोटा
बाल-बच्चाबाल और बच्चा
भला-बुराभला और बुरा
भाई-बहनभाई और बहन
भूत-प्रेतभूत और प्रेत
भूल-चूकभूल और चूक
माता-पितामाता और पिता
मोल-तोलमोल और तोल
यश-अपयशयश और अपयश
राग-विरागराग और विराग
राजा-रंकराजा और रंक
राजा-रानीराजा और रानी
रात-दिनरात और दिन
राधा-कृष्णराधा और कृष्ण
राम-कृष्णराम और कृष्ण
राम-बलरामराम और बलराम
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मण
रुपया-पैसारुपया और पैसा
रोटी-कपड़ा-मकानरोटी, कपड़ा और मकान
लाभ-हानिलाभ और हानि
लाल-पाल-बाललाला लाजपत राय, बिपिन चन्द्र पाल और बाल गंगाधर तिलक
वेद-पुराणवेद और पुराण
शादी-गमीशादी और गमी
सीता-रामसीता और राम
सुख-दुःखसुख और दुःख
सोलहछह और दस
स्त्री-पुरुषस्त्री और पुरुष
हरि-हरहरि और हर
हाथी-घोड़ाहाथी और घोड़ा
हाथी-घोड़ा-पालकीहाथी, घोड़ा और पालकी
हार-जीतहार और जीत

वैकल्पिक द्वन्द्व के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
दस-बीसदस या बीस
दो-चारदो या चार
धर्माधर्मधर्म या अधर्म
पाँच-दसपाँच या दस
बीस-तीसबीस या तीस
लाख-दो लाखलाख या दो लाख
सौ-दो सौसौ या दो सौ

समाहार द्वन्द्व के उदाहरण

समस्त पदविग्रह
कपड़ा-लत्ताकपड़ा आदि
काम-काजकाम आदि
कीड़ा-मकोड़ाकीड़ा आदि
खाना-वानाखाना आदि
चाय-वायचाय आदि
धन-दौलतधन-दौलत आदि
पानी-वानीपानी आदि

6. बहुव्रीहि समास: परिभाषा और उदाहरण

जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। इसके विग्रह में प्रायः “है जिसका”, “है जिसके”, “है जो” जैसे शब्द आते हैं। जैसे दशानन = दश हैं आनन जिसके, अर्थात् रावण।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समस्त पदविग्रहअर्थ (विशेष)
दशाननदश हैं आनन जिसकेरावण
पीताम्बरपीत है अम्बर जिसका
टिप्पणी: अर्थ के अनुसार कर्मधारय (पीला वस्त्र) या बहुव्रीहि (श्रीकृष्ण)।
श्रीकृष्ण
लम्बोदरलम्बा है उदर जिसकागणेश
चतुर्भुजचार हैं भुजाएँ जिसकीविष्णु
नीलकण्ठनीला है कण्ठ जिसकाशिव
गिरिधरगिरि को धारण करता है जोश्रीकृष्ण
चक्रपाणिचक्र है पाणि में जिसकेविष्णु
चन्द्रशेखरचन्द्र है शेखर (मस्तक) पर जिसकेशिव
➕ 👉 बहुव्रीहि के और उदाहरण देखें (क्लिक करें)
समस्त पदविग्रहअर्थ (विशेष)
अंगराजअंग (देश) का राजा है जोकर्ण
अंजनिसुतअंजनि का सुत है जोहनुमान
अंशुमालीअंशु (किरणें) हैं माला जिसकीसूर्य
अनंगनहीं है अंग जिसकाकामदेव
अन्नपूर्णाअन्न से पूर्ण करती है जोपार्वती/दुर्गा
आशुतोषआशु (शीघ्र) प्रसन्न होते हैं जोशिव
उदयपुरउदय (सिंह) का पुर है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में षष्ठी तत्पुरुष।
एक नगर
एकदन्तएक है दन्त जिसकागणेश
कंसारिकंस का अरि है जोश्रीकृष्ण
कपीश्वरकपियों का ईश्वर है जोहनुमान
कुसुमशरकुसुम हैं शर जिसकेकामदेव
गणपतिगणों का पति है जोगणेश
गरुड़ध्वजगरुड़ है ध्वज पर जिसकेविष्णु
गांडीवधारीगांडीव को धारण करता है जोअर्जुन
गिरिजागिरि से जन्मी है जोपार्वती
गिरिजानन्दनगिरिजा का नन्दन है जोगणेश
घनश्यामघन के समान श्याम है जोश्रीकृष्ण
चक्षुश्रवाचक्षु ही हैं श्रवा (कान) जिसकेसाँप
चतुराननचार हैं आनन जिसकेब्रह्मा
चतुर्मुखचार हैं मुख जिसकेब्रह्मा
चन्द्रचूड़चन्द्र है चूड़ा (मस्तक) पर जिसकेशिव
चन्द्रमौलिचन्द्र है मौलि (मस्तक) पर जिसकेशिव
चौकन्नाचारों ओर हैं कान जिसकेसतर्क व्यक्ति
छत्तीसगढ़छत्तीस हैं गढ़ जिसमेंएक राज्य
जनकनंदिनीजनक की नंदिनी है जोसीता
जमशेदपुरजमशेद का पुर है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में षष्ठी तत्पुरुष।
एक नगर
जयपुरजय का पुर है जो
टिप्पणी: नगरों के नाम कई पुस्तकों में षष्ठी तत्पुरुष माने जाते हैं।
एक नगर
जितेंद्रियजीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने
टिप्पणी: कुछ पुस्तकों में कर्म तत्पुरुष।
संयमी व्यक्ति
जोधपुरजोधा का पुर है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में षष्ठी तत्पुरुष।
एक नगर
तुगलकाबादतुगलक द्वारा आबाद है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में तत्पुरुष।
एक स्थान
त्रिलोचनतीन हैं लोचन जिसकेशिव
दशमुखदश हैं मुख जिसकेरावण
दशरथनंदनदशरथ का नंदन है जोराम
दामोदरदाम (रस्सी) है उदर पर जिसकेश्रीकृष्ण
दुर्वासाबुरे हैं वस्त्र जिसकेएक ऋषि
देवराजदेवों का राजा है जोइन्द्र
धनंजयधन को जीतता है जोअर्जुन
नंदनंदननंद का नंदन है जोश्रीकृष्ण
नाकपतिनाक (स्वर्ग) का पति है जोइन्द्र
पंचशरपाँच हैं शर जिसकेकामदेव
पंचाननपाँच हैं आनन जिसकेशिव
पंजाबपाँच आब (नदियाँ) हैं जिसमेंएक प्रदेश
पद्मनाभपद्म है नाभि में जिसकेविष्णु
पद्मासनापद्म है आसन जिसकालक्ष्मी
पशुपतिपशुओं का पति है जोशिव
पुंडरीकाक्षपुंडरीक (कमल) के समान अक्ष हैं जिसकेविष्णु
बाघाम्बरबाघ (की खाल) है अम्बर जिसकाशिव
बारहसिंगाबारह हैं सींग जिसकेएक हिरण
बीकानेरबीका का नगर है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में षष्ठी तत्पुरुष।
एक नगर
ब्रजवल्लभब्रज का वल्लभ है जोश्रीकृष्ण
भूमिजाभूमि से जन्मी है जोसीता
मकरध्वजमकर है ध्वज पर जिसकेकामदेव
मधुरिपुमधु का रिपु है जोविष्णु
मधुसूदनमधु (दैत्य) का सूदन करता है जोविष्णु/श्रीकृष्ण
मनसिजमन में जन्मा है जोकामदेव
मनोजमन से जन्मा है जोकामदेव
मन्दोदरीमन्द (पतला) है उदर जिसकारावण की पत्नी
मयूरवाहनमयूर है वाहन जिसकाकार्तिकेय
मरुतसुतमरुत (पवन) का सुत है जोहनुमान
महावीरमहान वीर है जो
टिप्पणी: अर्थ के अनुसार कर्मधारय भी, बहुव्रीहि भी।
हनुमान
महीपालमही का पालन करता है जोराजा
मुरारिमुर का अरि (शत्रु) है जोश्रीकृष्ण
मोदकप्रियमोदक प्रिय है जिसेगणेश
युधिष्ठिरयुद्ध में स्थिर रहता है जोयुधिष्ठिर (पांडव)
रघुनाथरघु (कुल) का नाथ है जोराम
रघुपतिरघु (कुल) का पति है जोराम
रतिकांतरति का कांत है जोकामदेव
रत्नगर्भारत्न हैं गर्भ में जिसकेपृथ्वी
राकेशराका (पूर्णिमा) का ईश है जोचन्द्रमा
रामप्रियाराम की प्रिया है जोसीता
राष्ट्रपिताराष्ट्र का पिता है जोमहात्मा गांधी
रेवतीरमणरेवती का रमण है जोबलराम
रोहिणीनंदनरोहिणी का नंदन है जोबलराम
लोहागढ़लोहे के समान (दृढ़) है गढ़ जोभरतपुर का किला
वक्रतुण्डवक्र है तुण्ड (सूँड़) जिसकीगणेश
वक्षोजवक्ष से जन्मे हैं जोस्तन
वज्रपाणिवज्र है पाणि में जिसकेइन्द्र
वज्रांगवज्र के समान अंग हैं जिसकेहनुमान
वज्रायुधवज्र है आयुध जिसकाइन्द्र
वाग्देवीवाक् (वाणी) की देवी है जोसरस्वती
वाचस्पतिवाचः (वाणी) का पति है जोबृहस्पति
विश्वंभरविश्व का भरण करता है जोविष्णु
विषधरविष को धारण करता है जोसाँप
वीणापाणिवीणा है पाणि में जिसकेसरस्वती
शचीपतिशची का पति है जोइन्द्र
शाखामृगशाखाओं पर विचरण करने वाला मृग (पशु)बंदर
शिवसुतवाहनशिव के सुत (गणेश) का वाहन है जोचूहा
शूलपाणिशूल है पाणि में जिसकेशिव
शेषशायीशेष पर शयन करता है जोविष्णु
शैलजाशैल से जन्मी है जोपार्वती
शैलनंदिनीशैल की नंदिनी है जोपार्वती
श्रीशश्री (लक्ष्मी) का ईश है जोविष्णु
षडाननछह हैं आनन जिसकेकार्तिकेय
षण्मुखछह हैं मुख जिसकेकार्तिकेय
सफ़ेदपोशसफ़ेद है पोशाक जिसकीभद्र व्यक्ति
सहस्राक्षसहस्र हैं अक्ष (आँखें) जिसकीइन्द्र
सिंहवाहिनीसिंह है वाहन जिसकादुर्गा
सुग्रीवसुन्दर है ग्रीवा जिसकीवानरराज सुग्रीव
सूतपुत्रसूत का पुत्र है जोकर्ण
सूरदाससूर (अंधा) है जो दास
टिप्पणी: वर्गीकरण पर मतभेद।
नेत्रहीन व्यक्ति
हंसासिनीहंस पर आसीन है जोसरस्वती
हलधरहल को धारण करता है जोबलराम
हिमसुताहिम (हिमालय) की सुता है जोपार्वती
हिरण्यगर्भहिरण्य है गर्भ में जिसकेब्रह्मा
हृषीकेशहृषीक (इन्द्रियों) का ईश है जोविष्णु
हैदराबादहैदर द्वारा आबाद है जो
टिप्पणी: कई पुस्तकों में तत्पुरुष।
एक नगर

समासों में अंतर: परीक्षा में सबसे ज़्यादा भ्रम यहीं होता है

कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर

कर्मधारय में शब्द अपना सामान्य अर्थ देता है, जबकि बहुव्रीहि में वह किसी तीसरे की ओर संकेत करता है। इसलिए एक ही शब्द अर्थ के अनुसार दोनों हो सकता है:

शब्दकर्मधारयबहुव्रीहि
पीताम्बरपीला है जो अम्बर (पीला वस्त्र)पीत है अम्बर जिसका (श्रीकृष्ण)
नीलकण्ठनीला है जो कण्ठनीला है कण्ठ जिसका (शिव)
महावीरमहान है जो वीरमहान वीर है जो (हनुमान)

द्विगु और बहुव्रीहि में अंतर

द्विगु में संख्या वाला शब्द किसी समूह का बोध कराता है, जबकि बहुव्रीहि में वही शब्द किसी तीसरे की ओर संकेत करता है। जैसे चौराहा = चार राहों का समूह (द्विगु), पर चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी, अर्थात् विष्णु (बहुव्रीहि)। ज्यामिति में “चार भुजाओं वाली आकृति” के अर्थ में चतुर्भुज को द्विगु भी माना जाता है।

द्वन्द्व और अव्ययीभाव में अंतर

दोनों में शब्द प्रायः योजक-चिह्न से जुड़े दिखते हैं। अगर दोनों शब्द अलग-अलग हों (माता-पिता, रात-दिन), तो द्वन्द्व; अगर एक ही शब्द दोहराया गया हो (घर-घर, धीरे-धीरे, बार-बार), तो अव्ययीभाव।

🎯 परीक्षा के लिए याद रखने योग्य बातें

  • 📌 पहला पद प्रधान = अव्ययीभाव; दूसरा पद प्रधान = तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु; दोनों पद प्रधान = द्वन्द्व; कोई पद प्रधान नहीं = बहुव्रीहि।
  • 📌 विग्रह में “है जो” = कर्मधारय; “है जिसका/जिसके” = बहुव्रीहि; “का समूह” = द्विगु।
  • 📌 एक ही शब्द दोहराया जाए (हाथोंहाथ, बार-बार) तो अव्ययीभाव, द्वन्द्व नहीं।
  • 📌 विकल्पों में अगर कर्मधारय और बहुव्रीहि दोनों हों, तो देखें कि प्रश्न में शब्द किसी व्यक्ति/देवता के नाम के रूप में आया है या नहीं। आया है तो बहुव्रीहि चुनें।
  • 📌 “शताब्दी”, “नवरत्न”, “त्रिलोक” जैसे समूह-बोधक शब्द द्विगु के पक्के उदाहरण हैं।

समास के महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न पिछली प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न पर आधारित हैं। हर प्रश्न के नीचे “उत्तर देखें” पर क्लिक करके सही उत्तर देखें।

1. ’महासागर’ सामासिक शब्द का विग्रह है-
(अ) बड़ा सागर
(ब) महान है जो सागर
(स) प्रशान्त महासागर
(द) सबसे बड़ा है जो सागर

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) महान है जो सागर

2. ’लाख-दो लाख’ सामासिक पद के विग्रह में उचित समुच्चयबोधक शब्द होगा-
(अ) या
(ब) एवं
(स) आदि
(द) और

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (अ) या

3. ’धन-दौलत’ समस्त पद के विग्रह में समुच्चयबोधक शब्द आएगा-
(अ) या
(ब) आदि
(स) और
(द) अथवा

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) आदि

4. जिस समास के दोनों पद प्रधान हों, वह है-
(अ) द्विगु
(ब) द्वन्द्व
(स) बहुव्रीहि
(द) तत्पुरुष

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) द्वन्द्व

5. जिस समास का प्रथम पद प्रधान होता है, वह है-
(अ) द्वन्द्व
(ब) द्विगु
(स) अव्ययीभाव
(द) कोई नहीं

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) अव्ययीभाव

6. अन्य पद प्रधान होता है-
(अ) बहुव्रीहि में
(ब) कर्मधारय में
(स) तत्पुरुष में
(द) द्वन्द्व में

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (अ) बहुव्रीहि में

7. ’रघुपति’ शब्द उदाहरण है-
(अ) द्विगु
(ब) द्वन्द्व
(स) बहुव्रीहि
(द) कर्मधारय

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) बहुव्रीहि

8. ’एकदन्त’ पद का समास-विग्रह है-
(अ) एक दाँत
(ब) एक है दाँत जिसका (गणेश)
(स) एक दाँत का समूह
(द) एक जोड़ी दाँत

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) एक है दाँत जिसका (गणेश)

9. ’द्विगु’ सामासिक पद का विग्रह है-
(अ) दो पैरों वाला
(ब) दो गायों वाला
(स) दो गायों का समाहार
(द) दो गाय हैं जो

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) दो गायों का समाहार

10. ’शताब्दी’ शब्द में समास है-
(अ) द्विगु
(ब) द्वन्द्व
(स) कर्मधारय
(द) बहुव्रीहि

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (अ) द्विगु

11. ’धीरे-धीरे’ समस्त पद में समास है-
(अ) द्वन्द्व
(ब) द्विगु
(स) बहुव्रीहि
(द) अव्ययीभाव

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (द) अव्ययीभाव

12. ’जो पूर्व में न हुआ हो’ विग्रह का समस्त पद होगा-
(अ) पूर्ववत
(ब) अभूतपूर्व
(स) पूर्वरूप
(द) पूर्वभूत

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) अभूतपूर्व

13. ’नरेश’ शब्द का समास-विग्रह होगा-
(अ) नरों में ईश
(ब) नरों का ईश
(स) नरों द्वारा ईश
(द) नरों से ईश

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) नरों का ईश

14. ’रेलगाड़ी’ शब्द का सही समास-विग्रह है-
(अ) रेल और गाड़ी
(ब) पटरी पर चलने वाली रेलगाड़ी
(स) रेल से चलने वाली गाड़ी
(द) रेल पर चलने वाली गाड़ी

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (द) रेल पर चलने वाली गाड़ी

15. ’स्वर्णघट’ का विग्रह है-
(अ) स्वर्ण में घट
(ब) घट में स्वर्ण
(स) स्वर्ण का घट
(द) घट के लिए स्वर्ण

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) स्वर्ण का घट

16. विशेषण और विशेष्य के योग से कौन-सा समास बनता है?
(अ) द्विगु
(ब) द्वन्द्व
(स) कर्मधारय
(द) तत्पुरुष

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) कर्मधारय

17. ’पुत्ररत्न’ का विग्रह होगा-
(अ) पुत्र का रत्न
(ब) पुत्र और रत्न
(स) पुत्र के लिए रत्न
(द) पुत्र रूपी रत्न

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (द) पुत्र रूपी रत्न

18. ’विद्यामंदिर’ का विग्रह होगा-
(अ) विद्या का मंदिर
(ब) विद्या के लिए मंदिर
(स) विद्या और मंदिर
(द) विद्या के समान मंदिर

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (ब) विद्या के लिए मंदिर

19. ’यथाशक्ति’ का सही विग्रह क्या होगा?
(अ) जैसी शक्ति
(ब) जितनी शक्ति
(स) शक्ति के अनुसार
(द) यथा जो शक्ति

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) शक्ति के अनुसार

20. ’त्रिफला’ में कौन-सा समास है?
(अ) अव्ययीभाव
(ब) द्वन्द्व
(स) द्विगु
(द) कर्मधारय

➕ ✅ उत्तर देखें (क्लिक करें)
सही उत्तर: (स) द्विगु

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें:

➕ ❓ समास किसे कहते हैं?
दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर, उनके बीच के विभक्ति-चिह्न या योजक शब्द हटाकर, एक नया और छोटा सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। जैसे: रसोई के लिए घर = रसोईघर।
➕ ❓ समास के कितने भेद होते हैं?
समास के छह भेद होते हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वन्द्व और बहुव्रीहि। कई व्याकरणाचार्य कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष का ही उपभेद मानते हैं, इसलिए कुछ पुस्तकों में चार भेद भी मिलते हैं।
➕ ❓ समास-विग्रह किसे कहते हैं?
समस्त पद को तोड़कर उसके शब्दों को हटे हुए विभक्ति-चिह्नों के साथ फिर से लिखना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे: राजपुत्र का विग्रह है “राजा का पुत्र”।
➕ ❓ समास और संधि में क्या अंतर है?
संधि में दो वर्णों (ध्वनियों) का मेल होता है और ध्वनि बदलती है, जबकि समास में दो शब्दों का मेल होता है और बीच के विभक्ति-चिह्न हट जाते हैं। संधि को तोड़ना संधि-विच्छेद और समास को तोड़ना समास-विग्रह कहलाता है।
➕ ❓ कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में क्या अंतर है?
कर्मधारय में शब्द अपना सामान्य अर्थ देता है (नीलकण्ठ = नीला है जो कण्ठ), जबकि बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं (नीलकण्ठ = नीला है कण्ठ जिसका, अर्थात् शिव)।
➕ ❓ दशानन में कौन-सा समास है?
दशानन में बहुव्रीहि समास है। इसका विग्रह है: दश हैं आनन जिसके, अर्थात् रावण।
➕ ❓ राजपुत्र में कौन-सा समास है?
राजपुत्र में तत्पुरुष समास (संबंध तत्पुरुष) है। इसका विग्रह है: राजा का पुत्र।

समास के हर भेद को और विस्तार से पढ़ें: अव्ययीभाव समास | तत्पुरुष समास | कर्मधारय समास | द्विगु समास | द्वन्द्व समास | बहुव्रीहि समास

3 thoughts on “समास: परिभाषा, भेद और 600+ उदाहरण (विग्रह सहित) | Samas in Hindi”

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