केवल कृष्ण घोड़ेला

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Hindi Sahitya Question paper 13 || Hindi sahitya ka itihas

Hindi Sahitya Question paper

दोस्तो आज की पोस्ट में साहित्य के महत्वपूर्ण विषय आधुनिक काल और कहानी विद्या Hindi Sahitya Question paper 13 का test दिया जा रहा है ,आप अपना मुल्यांकन करें ,पोस्ट को शेयर जरुर करिएगा,अगर आप हमारी मेहनत को लाइक करते है तो  | टेस्ट -14 आधुनिक काल और कहानी विद्या  1. भारतेन्दुयुगीन गद्य को ’हँसमुख […]

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कुंभनदास का जीवन परिचय, रचनाएँ और इतिहास | Kumbhandas Jivan Parichay

कुंभनदास

कृष्ण भक्त कवि कुंभनदास का जीवन परिचय, रचनाएँ और महत्वपूर्ण तथ्य (Kumbhandas Jivan Parichay) हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की ‘कृष्णभक्ति शाखा’ (अष्टछाप के कवियों) के आदि कवि और महान संत कुंभनदास (Kumbhandas) का हिंदी साहित्य में अत्यंत विशिष्ट और आदरणीय स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से

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नंददास का जीवन परिचय, रचनाएँ और काव्यगत विशेषताएँ | Nanddas Jivan Parichay

नंददास

कृष्ण भक्त कवि नंददास का जीवन परिचय, रचनाएँ और काव्यगत विशेषताएँ (Nanddas Jivan Parichay) हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की ‘कृष्णभक्ति शाखा’ (अष्टछाप के कवियों) में महाकवि सूरदास के बाद यदि किसी अन्य कवि की काव्य-प्रतिभा, पाण्डित्य और शब्दाधिकार का सबसे अधिक लोहा माना गया है, तो वे हैं— कवि नंददास (Nanddas)। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET,

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दुष्यंत कुमार का जीवन परिचय – Dushyant Kumar ka Jivan Parichay

Dushyant Kumar ka Jivan Parichay

आज की पोस्ट में हम हिंदी के चर्चित कवि दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar ka Jivan Parichay)जो कि ‘परदेशी ‘ उपनाम से कविताएँ लिखते थे ,इनके लेखन परिचय के बारे में जानेंगे  दुष्यंत कुमार – Dushyant Kumar ka Jivan Parichay जन्म – सन् 1933 ई. मृत्यु – सन् 1975 ई. (भोपाल) जन्म स्थान – बिजनौर जिले

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Ritibadhy kavi tricks || रीतिबद्ध कवि ट्रिक्स || हिंदी साहित्य

रीतिबद्ध कवि ट्रिक्स

दोस्तो आज आपके लिए हिंदी साहित्य में रीतिबद्ध कवियों की ट्रिक्स(Ritibadhy kavi tricks) तैयार की है जो कि आपको इन कवियों के जन्मकाल के सन याद करवा देगी ,अगर आपको हमारी कोशिश अच्छी लगे तो शेयर जरुर करें ,जल्द ही नई ट्रिक्स ले कर आते रहेंगे आप जानते होंगे कि रीतिकाल को तीन भागो में

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नाख़ून क्यों बढ़ते है || निबंध || हजारी प्रसाद द्विवेदी || हिंदी साहित्य

नाख़ून क्यों बढ़ते है

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की मानवातावादी को अखण्ड बनाए रखने का सराहनीय प्रयास किया है।आज हम इनके निबंध नाख़ून क्यों बढ़ते है पर चर्चा करेंगे | हजारी प्रसाद द्विवेदी  – नाखून क्योें बढते हैं (Nakhun kyu badhte hai) उन्होंने भारतीय और धर्म का विवेचन किया। रामायण,महाभारत,लौकिक,बौद्ध साहित्य,संत साहित्य की

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चिंतामणि आचार्य रामचंद्र शुक्ल – निबंध संग्रह और महत्वपूर्ण तथ्य | Chintamani Ramchandra Shukla

चिंतामणि रामचंद्र शुक्ल

चिंतामणि (आचार्य रामचंद्र शुक्ल): निबंध संग्रह, भाग और महत्वपूर्ण तथ्य (Chintamani Ramchandra Shukla Notes) हिंदी गद्य साहित्य और आलोचना जगत में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध संग्रह ‘चिंतामणि’ का सर्वोपरि स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से आचार्य शुक्ल और उनके

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श्लेष अलंकार – परिभाषा, उदाहरण || Shlesh Alankar

श्लेष अलंकार परिभाषा व उदाहरण

आज की पोस्ट में हम अलंकार के अंतर्गत श्लेष अलंकार की परिभाषा व उदाहरण(shlesh alankar ke paribhasha udaharan) पढेंगे  ,आप इसे अच्छे से पढ़ें श्लेष अलंकार की परिभाषा – Shlesh Alankar ki pribhahsa ⇒ श्लेष अलंकार – जब किसी पद में प्रयुक्त एक ही शब्द के अलग-अलग सन्दर्भ के अनुसार अलग-अलग अर्थ प्रयुक्त हो जाते

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द्विवेदीयुगीन काव्य प्रवृत्तियां || आधुनिक काल || Hindi sahiya

दोस्तो आज की पोस्ट में हम आधुनिककाल के अंतर्गत द्विवेदीयुगीन काव्य प्रवृत्तियां पढेंगे ,जिससे हमें इस काल की प्रमुख काव्य प्रवृत्तियों का ज्ञान होगा | द्विवेदीयुगीन काव्य प्रवृत्तियां द्विवेदी युग की प्रमुख काव्य प्रवृत्तियां इस प्रकार है- 1. राष्ट्रीयता की भावना- द्विवेदी युग में  देशप्रेम, अतीत गौरव, स्वदेशाभिमान की अभिव्यक्ति हुई है। 2. इतिवृत्तात्मकता –

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ध्वनि सिद्धान्त || Dhavni Siddhant || kaavyshastr || Hindi Sahitya

ध्वनि _सिद्धांत_काव्यशास्त्र

दोस्तों आज आप काव्यशास्त्र के अंतर्गत महत्वपूर्ण टॉपिक ध्वनि सिद्धान्त (Dhavni Siddhant)को पढेंगे ,इस विषयवस्तु को विस्तार से समझाया गया है           ध्वनि सिद्धांत: अवधारणा, भेद एवं प्रमुख तथ्य 1. ध्वनि की परिभाषा एवं स्वरूप ध्वनि संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य आनंदवर्धन ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘ध्वन्यालोक’ में ध्वनि को काव्य का सर्वोत्कृष्ट

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