अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026
दलित कविता वह कविता है जो दलित जीवन की पीड़ा, अपमान, संघर्ष और आत्मसम्मान को स्वर देती है। हिंदी में पहली दलित कविता के रूप में प्रायः हीरा डोम की “अछूत की शिकायत” (भोजपुरी, सरस्वती, सितंबर 1914) का नाम लिया जाता है। कुछ विद्वान स्वामी अछूतानंद “हरिहर” को पहला दलित कवि मानते हैं, और कुछ रैदास को। प्रमुख आधुनिक कवि हैं ओमप्रकाश वाल्मीकि, मलखान सिंह, जयप्रकाश कर्दम, सुशीला टाकभौरे और कंवल भारती।

हिंदी साहित्य के इतिहास में दलित साहित्य अपेक्षाकृत नया विमर्श है, पर उसकी जड़ें पुरानी हैं। परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि “पहली दलित कविता कौन-सी है”, “किस कवि की कौन-सी रचना है” और “दलित साहित्य की मूल अवधारणा क्या है”। इन तीनों पर यहाँ क्रम से बात करते हैं।
🌱 दलित साहित्य की शुरुआत
Table of Contents
- आधुनिक अर्थ में दलित साहित्य पहले मराठी में एक साहित्यिक आंदोलन के रूप में उभरा। “दलित साहित्य” पद का प्रयोग 1958 में मुंबई में हुए महाराष्ट्र दलित साहित्य संघ के पहले सम्मेलन में मिलता है। पाठ्यपुस्तकों में प्रायः “1960 के आसपास” की बात कही जाती है।
- इस आंदोलन पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और बाद में दलित पैंथर आंदोलन का गहरा असर रहा।
- हिंदी में यह धारा बाद में फैली, पर हिंदी के पुराने साहित्य में भी दलित स्वर के सूत्र मिलते हैं, जैसे रैदास के पदों में।

❓ पहला दलित कवि कौन? तीन मत
इस सवाल का एक सीधा जवाब नहीं है। परीक्षा में आमतौर पर इन तीन में से किसी एक के बारे में पूछा जाता है, इसलिए तीनों मत याद रखें।
| मत | कौन | आधार |
|---|---|---|
| पहला | रैदास | रैदास का जन्म दलित परिवार में माना जाता है, इसलिए कुछ विद्वान उन्हें पहला दलित कवि कहना तर्कसंगत मानते हैं |
| दूसरा | हीरा डोम | “अछूत की शिकायत” (भोजपुरी) सरस्वती पत्रिका में सितंबर 1914 में छपी। इसके संपादक महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। इसे अनेक आलोचक पहली दलित कविता मानते हैं |
| तीसरा | स्वामी अछूतानंद “हरिहर” | कुछ विद्वान उनकी कविताओं (लगभग 1910 से 1927) के आधार पर उन्हें पहला दलित कवि मानते हैं |
हीरा डोम के जीवन के बारे में बहुत कम पता है। उनकी कविता भगवान और अंग्रेज़ “पादरी साहब” को संबोधित है और बेगार, छुआछूत और जातिगत शोषण का सवाल उठाती है।
स्वामी अछूतानंद का जन्म फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हीरालाल नाम से हुआ। जन्म-तिथि पर मतभेद है, पर 1879 को व्यापक रूप से माना जाता है। वे आर्य समाज से जुड़े, फिर उसे छोड़कर आदि हिंदू आंदोलन के प्रमुख नेता बने। निधन 1933 में हुआ। उनका उपलब्ध काव्य-संग्रह “आदिवंश का डंका” है।
📚 प्रमुख दलित कवि और उनकी रचनाएँ
| कवि | रचनाएँ |
|---|---|
| हीरा डोम | अछूत की शिकायत (1914) |
| स्वामी अछूतानंद “हरिहर” | आदिवंश का डंका |
| बिहारी लाल हरित | अछूतों का पैगंबर, चमार हूँ मैं |
| ओमप्रकाश वाल्मीकि | सदियों का संताप (1989), बस्स! बहुत हो चुका (1997), अब और नहीं (2009); “ठाकुर का कुआँ” उनकी चर्चित कविता है |
| मंसाराम विद्रोही | दलित पचासा |
| मलखान सिंह | सुनो ब्राह्मण |
| जयप्रकाश कर्दम | गूंगा नहीं था मैं, आज का रैदास |
| सुशीला टाकभौरे | स्वाति बूँद और खारे मोती, तुमने उसे कब पहचाना, आज की खुद्दार औरत |
| श्यौराज सिंह बेचैन | नई फसल |
| कुसुम वियोगी | टुकड़े-टुकड़े दंश, व्यवस्था के विषधर |
| दयानंद बटोही | अंधेरे के विरुद्ध |
| सी. बी. भारती | आक्रोश, रूढ़ियाँ, सियासत |
| सूरजपाल चौहान | प्रयास, क्यों विश्वास करूँ |
| कंवल भारती | घर की चौखट से बाहर, मुक्ति संग्राम अभी बाकी है, तब तुम्हारी निष्ठा क्या होगी |
| कोदूराम “दलित” | सियानी गोठ (छत्तीसगढ़ी) |
ध्यान दें: ओमप्रकाश वाल्मीकि की तीन कविता-पुस्तकों के साल (1989, 1997, 2009) मैंने जाँचे हैं। बाकी नामों को पाठ्यपुस्तकों में दी जाने वाली सूचियों के अनुसार रखा है, इसलिए परीक्षा से पहले अपने पाठ्यक्रम की सूची से एक बार मिला लें। कोदूराम “दलित” छत्तीसगढ़ी के हास्य-व्यंग्य कवि थे; “दलित” उनका उपनाम है, इसलिए उन्हें दलित-विमर्श की धारा से सीधे जोड़ने में सावधानी रखें।
🧩 दलित कविता की मुख्य विशेषताएँ
- पीड़ा और अपमान का सच्चा चित्रण: छुआछूत, गरीबी, शोषण और भेदभाव।
- प्रतिरोध और अस्वीकार: पुरानी व्यवस्था को चुनौती, स्वाभिमान की माँग।
- अंबेडकरी चेतना: शिक्षा, संगठन और संघर्ष पर ज़ोर।
- सहज और सीधी भाषा: बनावटी अलंकारों की जगह रोज़मर्रा की भाषा।
- स्वानुभूति बनाम सहानुभूति: दलित लेखन में लंबी बहस रही है कि प्रामाणिक अभिव्यक्ति किसकी मानी जाए। एक पक्ष का मत रहा कि जिसने पीड़ा भोगी है, वही उसे सच्चाई से कह सकता है (स्वानुभूति), जबकि दूसरे पक्ष ने गैर-दलित लेखकों की संवेदना (सहानुभूति) को भी स्थान दिया।
इसे जोड़कर पढ़ें: सरस्वती पत्रिका, महावीर प्रसाद द्विवेदी, द्विवेदी युग की काव्य प्रवृत्तियाँ, रमणिका गुप्ता और आधुनिक काल का इतिहास।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) हीरा डोम
(3) ओमप्रकाश वाल्मीकि
(4) मलखान सिंह
👉 उत्तर देखें
यह भोजपुरी कविता सरस्वती पत्रिका के सितंबर 1914 के अंक में छपी थी।
(A) “अछूत की शिकायत” 1914 में सरस्वती में प्रकाशित हुई।
(B) यह कविता भोजपुरी में लिखी गई थी।
(C) दलित साहित्य आंदोलन के रूप में पहले मराठी में उभरा।
(D) “आदिवंश का डंका” हीरा डोम की रचना है।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है। “आदिवंश का डंका” स्वामी अछूतानंद का काव्य-संग्रह है।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) ओमप्रकाश वाल्मीकि | (I) सदियों का संताप |
| (B) जयप्रकाश कर्दम | (II) गूंगा नहीं था मैं |
| (C) स्वामी अछूतानंद | (III) आदिवंश का डंका |
| (D) हीरा डोम | (IV) अछूत की शिकायत |
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-III, B-II, C-I, D-IV
👉 उत्तर देखें
वाल्मीकि → सदियों का संताप; कर्दम → गूंगा नहीं था मैं; अछूतानंद → आदिवंश का डंका; हीरा डोम → अछूत की शिकायत।
कारण (R): दलित लेखकों के एक पक्ष का मत है कि जिसने पीड़ा भोगी हो, वही उसे प्रामाणिक रूप से अभिव्यक्त कर सकता है।
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
स्वानुभूति की धारणा इसी तर्क पर टिकी है।
(A) सदियों का संताप
(B) बस्स! बहुत हो चुका
(C) अब और नहीं
(2) B, A, C
(3) A, C, B
(4) C, B, A
👉 उत्तर देखें
सदियों का संताप (1989), बस्स! बहुत हो चुका (1997), अब और नहीं (2009)।
कथन II: हीरा डोम की कविता सरस्वती में छपी थी।
(2) कथन I सही, कथन II गलत
(3) कथन I गलत, कथन II सही
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
दोनों सही हैं। द्विवेदी जी ने सरस्वती का संपादन किया और 1914 में हीरा डोम की कविता वहीं छपी।
❓ दलित कविता पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
