जयशंकर प्रसाद का प्रथम काव्य संग्रह चित्राधार: परिचय एवं विशेषताएँ | Chitradhar Notes

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 3, 2026

आज के इस आलेख में हम हिंदी साहित्य के महान छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) द्वारा रचित उनके प्रथम महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह ‘चित्राधार’ (Chitradhar) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

चित्राधार – Chitradhar का परिचय

जयशंकर प्रसाद जी का प्रथम काव्य-संग्रह ‘चित्राधार’ है, जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अनूठा परिचय मिलता है। इस कविता-संग्रह का प्रथम प्रकाशन 1918 ई. में हुआ था। हालाँकि, इसमें संकलित विभिन्न रचनाएँ सन् 1909 से ही ‘इन्दु’ पत्रिका के अंकों में प्रकाशित होकर पाठकों के बीच गहरी पहचान बना चुकी थीं।

इसके प्रथम संस्करण में ब्रजभाषा और खड़ी-बोली दोनों शैलियों में काव्य रचनाएँ मिलती हैं, जबकि इसके द्वितीय संस्करण (1928 ई.) में केवल ब्रजभाषा की रचनाओं को संकलित किया गया। इस संग्रह में कवि की 20 वर्ष की आयु तक की प्रायः सभी शुरुआती कृतियाँ समाहित हैं।

विशेष : चित्रधारा संग्रह में ब्रजभाषा और खड़ी बोली में कविता, कहानी, नाटक, निबन्धों का संकलन किया गया है।

इस संग्रह में तीन लंबी कविताएँ, 22 छोटी कविताएँ, तथा 40 कवित्त, सवैया एवं पद शामिल हैं। कथा-रूप में निबद्ध ‘उर्वशी’ और ‘बभ्रुवाहन’ तथा नाट्य रूप से रचित ‘प्रायश्चित्त’ और ‘सज्जन’ के बीच-बीच में कवि ने अनेक दोहों, सवैयों एवं पदों की योजना की है। इस रचना में भाव पक्ष के साथ-साथ कल्पनाओं का सौंदर्य भी प्रसाद जी की काव्य-रचनाओं को सशक्त बनाता है।

चित्राधार काव्य संग्रह: संस्करणवार सूचियाँ

1. प्रथम संस्करण (1918 ई.)

  • कानन कुसुम

  • महाराणा का महत्त्व

  • प्रेम पथिक

  • राज्यश्री

  • छाया

  • सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य

  • उर्वशी

  • कल्याणी परिणय

  • करुणालय

  • प्रायश्चित्त

2. द्वितीय संस्करण (1928 ई.)

  • अयोध्या का उद्धार

  • उर्वशी

  • विस्मृत प्रेम

  • बभ्रुवाहन

  • वन मिलन

  • प्रायश्चित्त

  • सज्जन

  • प्रेम राज्य

  • संध्या-तारा

  • ब्रह्मर्षि

  • प्रकृति सौंदर्य

  • सरोज

  • विदाई

  • पंचायत

  • भक्ति

  • शारदीय शोभा

  • भारतेंदु प्रकाश

  • मानस

  • नीरव प्रेम

  • प्रभात-कुसुम

  • रसाल

  • कल्पना-सुख

  • वर्षा में नदी-कूल

  • उद्यान-लता

  • अष्टमूर्ति

  • विनय

  • शारदीय महापूजन

  • विभा

  • चन्द्रोदय

  • रसाल-मंजरी

  • नीरद

  • शरद-पूर्णिमा

  • विसर्जन

  • इंद्र-धनुष

विशेष : ‘चित्राधार’ संग्रह में संकलित कथामूलक भाव वाली 3 कविताएँ हैं –

  • वन मिलन

  • अयोध्या का उद्धार

  • प्रेम राज्य

निष्कर्ष

निष्कर्षतः, जयशंकर प्रसाद का प्रथम काव्य-संग्रह ‘चित्राधार’ (1918) हिंदी साहित्य और विशेषकर छायावादी युग के विकास में एक मील का पत्थर साबित होता है। इस संग्रह में प्रसाद जी ने प्राचीन ब्रजभाषा और उभरती हुई खड़ी बोली—दोनों ही शैलियों में अपनी रचनाधर्मिता का परिचय दिया है। इसमें संकलित उनकी प्रारंभिक कविताएँ, कथात्मक रचनाएँ और नाटक उनकी बहुमुखी प्रतिभा और सृजनात्मकता के परिपक्व होने की यात्रा को दर्शाते हैं। यह संग्रह न केवल प्रसाद जी के काव्य-विकास को समझने की कुंजी है, बल्कि हिंदी काव्य जगत में नूतन भाव-बोध और कल्पना के सौंदर्य का एक अनूठा दस्तावेज भी है।

FAQ:

जयशंकर प्रसाद का प्रथम काव्य-संग्रह कौन सा है और यह कब प्रकाशित हुआ?
जयशंकर प्रसाद का प्रथम काव्य-संग्रह ‘चित्राधार’ है, जिसका प्रथम प्रकाशन सन् 1918 ई. में हुआ था।
'चित्राधार' के प्रथम और द्वितीय संस्करण में क्या अंतर है?
‘चित्राधार’ के प्रथम संस्करण (1918 ई.) में ब्रजभाषा और खड़ी-बोली दोनों की रचनाएँ संकलित थीं, जबकि इसके द्वितीय संस्करण (1928 ई.) में केवल ब्रजभाषा की रचनाओं को ही रखा गया।
'चित्राधार' संग्रह में संकलित कथामूलक भाव वाली प्रमुख कविताएँ कौन सी हैं?
‘चित्राधार’ में संकलित कथामूलक भाव वाली प्रमुख 3 कविताएँ ‘वन मिलन’, ‘अयोध्या का उद्धार’ और ‘प्रेम राज्य’ हैं।

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