मन्नू भंडारी का जीवन परिचय, उपन्यास और रचनाएँ | Mannu Bhandari

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026

मन्नू भंडारी का जीवन परिचय, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान (Mannu Bhandari ka Jivan Parichay)

हिंदी गद्य साहित्य में आधुनिक नई कहानी आंदोलन की सशक्त हस्ताक्षर, स्त्री-विमर्श की प्रणेता और अपनी ओजस्वी व संवेदनशील लेखनशैली के लिए ख्याति प्राप्त मन्नू भंडारी का आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से मन्नू भंडारी का जीवन परिचय, उनके उपन्यास (‘आपका बंटी’, ‘महाभोज’), कहानी संग्रह और आत्मकथा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

📌 मन्नू भंडारी का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)

विवरणतथ्य / विवरण
नाममन्नू भंडारी
बचपन का नाममहेंद्र कुमारी
जन्म3 अप्रैल, 1931 ई. (मंदसौर जिला, मध्य प्रदेश)
मृत्यु15 नवम्बर, 2021 ई., गुड़गांव (हरियाणा)
पिता का नामसुखसंपत राय
माता का नामअनूप कुमारी (अनूपकुंवरी)
पति का नामराजेंद्र यादव (प्रसिद्ध साहित्यकार)
प्रसिद्ध कहानियाँयही सच है, तीन निगाहों की एक तस्वीर, एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई
प्रसिद्ध उपन्यासआपका बंटी, महाभोज, एक इंच मुस्कान
विशेष तथ्यबचपन में प्यार से सभी इन्हें ‘मन्नू’ पुकारते थे, इसी कारण लेखन के लिए ‘मन्नू’ नाम का चुनाव किया और विवाह के बाद भी ‘मन्नू भंडारी’ ही रहीं।

👨‍👩‍👦 पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं व्यक्तित्व निर्माण

  • पिता (सुखसंपत राय): मन्नू जी के पिता हिंदी के ‘परिभाषिक कोष’ के निर्माता थे। वे क्रोधी, अहमवादी किंतु उच्च आदर्शवादी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल दिया और लड़कियों को रसोई तक सीमित न रखकर शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मन्नू के व्यक्तित्व निर्माण में उनके पिता का हाथ सर्वाधिक रहा। मन्नू जी ने अपना प्रथम कहानी संग्रह ‘मैं हार गई’ अपने पिताजी को ही समर्पित करते हुए लिखा था: “जिन्होंने मेरी किसी भी इच्छा पर, कभी अंकुश नहीं लगाया, पिताजी को…”—इससे पिता के प्रति उनकी नितांत श्रद्धा स्पष्ट होती है।

  • माता (अनूप कुमारी): वह एक उदार, स्नेहिल, सहनशील और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। मन्नू द्वारा पिता के किसी बात का विरोध करने पर वह स्नेह से कहतीं: “मुझे कोई शिकायत नहीं है बेटी, तुम क्यों परेशान होती हो, जाओ अपना काम करो।” मन्नू भंडारी स्वयं मानती थीं कि “आज हम जो कुछ भी हैं, वह हमारी माता का ही परिणाम है।”

  • भाई-बहन: मन्नू भंडारी के चार भाई-बहन थे—(1) प्रसन्न कुमार, (2) बसंत कुमार, (3) स्नेहलता, और (4) सुशीला।

🎓 शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और कार्यक्षेत्र

  • संस्कार और परिवेश: मन्नू भंडारी का मानना था कि “कोई भी व्यक्ति जन्म से बड़ा नहीं होता, बड़ा बनने के लिए सबसे बड़ा योगदान संस्कारों का होता है, उसके बाद परिवेश का।” मन्नू जी का लेखन-संस्कार उन्हें पैतृक दाय के रूप में मिला था। स्वतंत्रता पूर्व जब नारी-शिक्षा को अकल्पित माना जाता था, तब उनके समाज-सुधारक पिता ने मन्नू तथा उनकी बहनों को उच्च शिक्षा दिलाई।

  • शिक्षा: मन्नू ने अजमेर के “सावित्री गर्ल्स हाई स्कूल” से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और “अजमेर कॉलेज” से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने लड़कियों में देशप्रेम और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध चेतना जाग्रत की, जिसके प्रभाव से मन्नू भंडारी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने अपनी बहन सुशीला के पास कोलकाता रहकर बी.ए. की डिग्री हासिल की।

  • नौकरी:

    • सबसे पहले कोलकाता के विद्यालय ‘बालीगंज शिक्षा सदन’ स्कूल में 9 वर्ष तक अध्यापन कार्य किया।

    • 1961 में वे रानी बिरला कॉलेज, कोलकाता में प्राध्यापिका बनीं।

    • उसके बाद दिल्ली के मिरांडा हाउस (या अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों) में अध्यापिका के रूप में कार्यरत रहीं।

  • विवाह: 1959 में प्रसिद्ध कथाकार राजेंद्र यादव के साथ इनकी सिविल मैरिज हुई, जो एक अंतरजातीय विवाह था।

📚 रचना-संसार (Mannu Bhandari Rachnaye)

मन्नू भंडारी बहुमुखी प्रतिभा संपन्न रचनाकार थीं। उनके खाते में 5 कहानी संग्रह, 5 उपन्यास, 2 नाटक और 3 बाल रचनाएँ प्रमुख रूप से दर्ज हैं। उनके पति राजेंद्र यादव उनके लेखन के बारे में कहते थे: “व्यर्थ के भावोच्छवास में नारी के आँचल में दूध और आँखों में पानी दिखा कर उसने (मन्नू ने) पाठकों की दया नहीं वसूली, वह यथार्थ के धरातल पर नारी का नारी की दृष्टि से अंकन करती है।”

1. कहानी संग्रह

  • मैं हार गई (1957): यह उनका प्रथम कहानी संग्रह है जो ‘कहानी’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था (मन्नू जी की सर्वप्रथम प्रकाशित कहानी 1954 में ‘नया समाज’ पत्रिका में छपी थी, किंतु दूसरी कहानी ‘मैं हार गई’ से इन्हें सर्वाधिक प्रसिद्धि मिली)। इसमें नारी मन की अनुभूतियों को अभिव्यक्त करती कुल 12 कहानियाँ संकलित हैं, जैसे— इंसा के घर इंसान, गीता का चुंबन, जीती बाजी की हार, एक कमजोर लड़की की कहानी, सयानी बुआ, अभिनेता, श्मशान, दीवारें, बच्चे और बरसात, पंडित गजानन शास्त्री, कील और कसम, दो कलाकार, मैं हार गई आदि।

  • तीन निगाहों की एक तस्वीर (1959): इसमें 8 कहानियाँ संग्रहित हैं। इसकी शीर्षक कहानी ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’ एक अभिशप्त नारी की गाथा है जो दीर्घ अवधि तक बीमार पति की सेवा-शुश्रूषा करती है। इसके अन्य संग्रहों में अकेली, मजबूरी, अनचाही गहराइयाँ, खोटे सिक्के, घुटन आदि शामिल हैं।

  • यही सच है (1966): इसमें 8 कहानियाँ (जैसे क्षय, तीसरा आदमी, यही सच है, नकली हीरे, नशा, इनकम टैक्स और नींद, रानी माँ का चबूतरा, सजा) संग्रहित हैं। इसी संग्रह की कहानी ‘यही सच है’ पर आगे चलकर रजनीगंधा फिल्म भी बनी।

  • एक प्लेट सैलाब (1968): इसमें नारी जीवन की समस्याओं से संबंधित 9 कहानियाँ (जैसे नई नौकरी, बंद दरवाजों के साथ, एक प्लेट सैलाब, छत बनाने वाले, एक बार और, संख्या के पार, बाहों का घेरा, कमरे कमरा और कमरे, ऊँचाई) संकलित हैं।

  • त्रिशंकु (1978): इसमें कुल 10 कहानियाँ हैं, जिनमें आते-जाते यायावर, त्रिशंकु, अलगाव, रेत की दीवार, तीसरा हिस्सा प्रमुख हैं।

  • अन्य संकलन: मन्नू भंडारी की श्रेष्ठ कहानियाँ (1969, संपा. राजेंद्र यादव), मेरी प्रिय कहानियाँ (1979), प्रतिनिधि कहानियाँ (1980), 10 प्रतिनिधि कहानियाँ (2001), तथा नायक खलनायक विदूषक (50 कहानियों का संग्रह)।

  • कथा पटकथा: मन्नू भंडारी द्वारा लिखित लोकप्रिय धारावाहिक ‘रजनी’ की पटकथा इसमें संग्रहित है।

2. उपन्यास (Novels)

हिंदी उपन्यास साहित्य में मन्नू भंडारी का विशिष्ट स्थान है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास निम्नलिखित हैं:

  • एक इंच मुस्कान (1962): यह राजेंद्र यादव और मन्नू भंडारी द्वारा साथ लिखी गई एकमात्र सहयोगी कृति है। यह उपन्यास ‘ज्ञानोदय’ पत्रिका में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ था। इसके पुरुष पात्र ‘अमर’ (जिसे राजेंद्र यादव ने चित्रित किया) तथा महिला पात्र ‘रंजना’ और ‘अमला’ (जिसे मन्नू भंडारी ने चित्रित किया) हैं। यह त्रिगुणात्मक प्रेम कहानी पर आधारित है।

  • आपका बंटी (1971): यह मन्नू भंडारी का प्रथम स्वतंत्र उपन्यास एवं सामाजिक-प्रधान उपन्यास है। इसकी कथावस्तु उनकी कहानी ‘बंद दरवाजों के साथ’ के बीज-रूप में दिखाई देती है। इसमें मन्नू जी ने नारी जीवन से संबंधित दांपत्य विघटन, तलाक और मातृत्व-अकेलेपन से उत्पन्न उलझनों (बाल-मनोविज्ञान) का अत्यंत मर्मस्पर्शी चित्रण किया है।

  • महाभोज (1979): यह उपन्यास राजनीतिक और सामाजिक जीवन में आई हुई मूल्यहीनता, तिकड़मबाजी और शैतानियात का यथार्थ चित्रण करने वाला एक उत्कृष्ट उपन्यास है। यद्यपि यह मूलतः एक सामाजिक उपन्यास है, किंतु इसका परिवेश राजनीतिक होने के कारण इसे ‘राजनीतिक उपन्यास’ भी कहा जाता है। इसमें ‘सरोहा’गाँव की कथा है जहाँ ‘बिसेसर’ की रहस्यमय मृत्यु को केंद्र में रखकर सभी राजनेता अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं।

  • स्वामी (1982): यह मूल मौलिक उपन्यास न होकर एक रूपांतरित उपन्यास है। बांग्ला के महान कथाकार शरदचंद्र चट्टोपाध्याय की कहानी ‘स्वामी’ को मन्नू भंडारी ने हिंदी उपन्यास का रूप दिया है।

3. नाटक (Dramas)

मन्नू भंडारी ने दो प्रमुख नाटकों की रचना की है:

  • बिना दीवारों का घर (1966): यह दांपत्य जीवन में असफल हुए दो वैवाहिक जोड़ों की कहानी है, जिसके प्रमुख पात्र शोभा-अजय और जयंत-मीना हैं।

  • महाभोज (1983): अपने चर्चित उपन्यास ‘महाभोज’ की अपार सफलता के बाद उन्होंने इसे स्वयं नाटक के रूप में रूपांतरित किया।

4. बाल साहित्य / बाल कहानियाँ

  • आँखों देखा झूठ

  • आसमानता

  • कलवा

5. आत्मकथा

  • एक कहानी यह भी (2007): यह उनकी अत्यंत चर्चित और प्रामाणिक आत्मकथा है, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2008 में प्रतिष्ठित ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित किया गया था।

  • 🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि

    क्र.सं.लेखक / कवि का नाममुख्य विशेषता / कालइंटरनल लिंक (URL)
    1.भारतेंदु हरिश्चंद्रआधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युगलिंक देखें(उदाहरण यूआरएल)
    2.महावीर प्रसाद द्विवेदीद्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकारलिंक देखें
    3.जयशंकर प्रसादछायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककारलिंक देखें
    4.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेतालिंक देखें
    5.सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि / छायावादलिंक देखें
    6.महादेवी वर्माआधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्रीलिंक देखें
    7.प्रेमचंद (धनपत राय)उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुषलिंक देखें
    8.अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तकलिंक देखें
    9.रामधारी सिंह ‘दिनकर’राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कविलिंक देखें
    10.कृष्णा सोबतीआधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षरलिंक देखें

3 thoughts on “मन्नू भंडारी का जीवन परिचय, उपन्यास और रचनाएँ | Mannu Bhandari”

  1. A Grateful Person

    I can’t thank you enough!! Very Very useful info provided in a neat and straightforward manner..Great!!

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