अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: जीवन परिचय, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान (Sarveshwar Dayal Saxena ka Jivan Parichay)
Table of Contents
हिंदी साहित्य के प्रगतिशील और प्रयोगवादी-नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर, बाल-साहित्य के मर्मज्ञ तथा सहज लोकभाषा के चितेरे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का आधुनिक हिंदी साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण और आदरणीय स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जीवन परिचय, उनके काव्य संग्रह, उपन्यास, नाटक और विशेष रूप से ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कृति) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
📌 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
| विवरण | तथ्य / विवरण |
| नाम | सर्वेश्वर दयाल सक्सेना |
| जीवनकाल | 15 सितंबर, 1927 ई. – 23 सितंबर, 1983 ई. |
| जन्म-स्थल | बस्ती, उत्तर प्रदेश |
| मृत्यु-स्थल | नई दिल्ली |
| पिता का नाम | विश्वेश्वर दयाल सक्सेना |
| प्रसिद्धि | कवि, नाटककार, उपन्यासकार एवं बाल-साहित्यकार (पत्रिका ‘पराग’ के संपादक) |
| प्रमुख सम्मान | साहित्य अकादमी पुरस्कार (1983 ई., काव्य संग्रह ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ के लिए) |
| विशेष पहचान | ‘दिनमान’ पत्रिका के बहुचर्चित स्तंभ ‘चरचे और चरखे’ के लेखक। |
| पत्र-पत्रिकाएँ संपादन | दिनमान (सह-संपादक, अज्ञेय के साथ), प्रतीक, पराग (बाल-साहित्य पत्रिका), नयी कविता। |
📖 पत्रकारिता एवं संपादन कार्य
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने साहित्य सृजन के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अप्रतिम योगदान दिया:
दिनमान पत्रिका: आपने अज्ञेय के साथ ‘दिनमान’ पत्रिका में सह-संपादक के रूप में कार्य किया।
पराग: बाल साहित्य की प्रसिद्ध पत्रिका ‘पराग’ का संपादन लंबे समय तक संभालते हुए बाल-साहित्य को एक नई दिशा दी।
चरचे और चरखे: ‘दिनमान’ पत्रिका में प्रकाशित उनका यह स्तंभ अपनी चुटीली, तीखी और व्यंग्यात्मक शैली के कारण पाठकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हुआ (यह 1969 में प्रकाशित हुआ था)।
📚 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का रचना-संसार (Sarveshwar Dayal Saxena Rachnaye)
1. काव्य संग्रह (Poetry Collections)
काठ की घंटियाँ (1959 ई.)
बाँस का पुल (1963 ई.)
एक सूनी नाव (1966 ई.)
गर्म हवाएँ (1966 ई.)
कुआँनो नदी (1973 ई.)
जंगल का दर्द (1976 ई.)
खूँटियों पर टंगे लोग (1982 ई.) — इसी काव्य संग्रह के लिए उन्हें वर्ष 1983 का प्रतिष्ठित ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ प्रदान किया गया था।
अन्य कविताएँ: क्या कह कर पुकारूँ, कोई मेरे साथ चले, मेघ आए, काला कोयल आदि।
2. उपन्यास (Novels)
सोया हुआ जल (1954 ई.) — यह एक प्रतीकात्मक उपन्यास है।
उड़ते हुए रंग (1974 ई.)
पागल कुत्तों का मसीहा (1977 ई.) — इस उपन्यास में कुत्तों के प्रतीक के माध्यम से आधुनिक समाज के रूढ़ जीवन-मूल्यों और विसंगतियों को चित्रित किया गया है।
कच्ची सड़क (1978 ई.)
अंधेरे पर अंधेरा (1980 ई.)
सूने चौखट (1981 ई.) — यह बालक के मनोविज्ञान और स्वभाव के सुंदर चित्रण पर आधारित है।
3. नाटक एवं एकांकी (Dramas)
बकरी (1974 ई.) — यह उनका एक अत्यंत प्रसिद्ध, चर्चित और राजनीतिक-व्यंग्य नाटक है।
लड़ाई (1979 ई.)
अब गरीबी हटाओ (1981 ई.)
हवालात (एकांकी)
कल भात आएगा (एकांकी)
4. अन्य विधाएँ (संपादित ग्रंथ, यात्रा-साहित्य एवं आलेख)
शमशेर (1971) — मलयज के साथ मिलकर संपादन।
रक्त बीज (1977)
रुपांबरा (1980) — अज्ञेय के साथ सह-संपादन।
अंधेरों का हिसाब (1981)
यात्रा-साहित्य: कुछ रंग कुछ गंध (1971 ई.)
🏆 प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1983): उनके चर्चित एवं क्रांतिकारी काव्य संग्रह ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ के लिए मरणोपरांत (मृत्यु वर्ष ही) यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ।
🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि
क्र.सं. लेखक / कवि का नाम मुख्य विशेषता / काल इंटरनल लिंक (URL) 1. भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युग लिंक देखें(उदाहरण यूआरएल) 2. महावीर प्रसाद द्विवेदी द्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकार लिंक देखें 3. जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककार लिंक देखें 4. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेता लिंक देखें 5. सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि / छायावाद लिंक देखें 6. महादेवी वर्मा आधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्री लिंक देखें 7. प्रेमचंद (धनपत राय) उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुष लिंक देखें 8. अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक लिंक देखें 9. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कवि लिंक देखें 10. कृष्णा सोबती आधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षर लिंक देखें



धन्यवाद सर