डॉ. नगेन्द्र का जीवन परिचय, रचनाएँ और आलोचना | Dr. Nagendra Jivan Parichay

अंतिम संशोधित (Last Updated): September 3, 2026

डॉ. नगेन्द्र का जीवन परिचय (Dr. Nagendra Jivan Parichay)

हिंदी आलोचना जगत के शिखर पुरुष, महान रसवादी आलोचक और इतिहासकार डॉ. नगेन्द्र का आधुनिक हिंदी साहित्य में अत्यंत गौरवशाली स्थान है। उन्होंने अपनी निष्पक्ष, वैज्ञानिक और शोधपरक दृष्टि से हिंदी आलोचना और इतिहास-लेखन को एक नई मजबूती प्रदान की। UGC NET/JRF, KVS, NVS, EMRS, UP/MP TGT-PGT, RPSC, BPSC, DSSSB तथा देश भर की विभिन्न हिंदी साहित्य प्रतियोगी परीक्षाओं और अकादमिक अध्ययन की दृष्टि से डॉ. नगेन्द्र का जीवन परिचय, उनकी आलोचनात्मक कृतियाँ और काल-विभाजन का दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. नगेन्द्र लेखक परिचय
डॉ. नगेन्द्र लेखक परिचय

📌 डॉ. नगेन्द्र का संक्षिप्त जीवन परिचय (Quick Facts)

  • पूरा नाम: डॉ. नगेन्द्र

  • जन्मतिथि: 9 मार्च, 1915 ई.

  • जन्म स्थान: अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

  • निधन: 27 अक्टूबर, 1999 ई.

  • प्रमुख पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार (‘रस-सिद्धांत’ के लिए 1965 ई. में)।

  • शोध उपाधि: इन्होंने 1948 ईस्वी में ‘आगरा विश्वविद्यालय’, आगरा से “रीतिकाल के संदर्भ में देव का अध्ययन” (महाकवि देव विषय) शीर्षक शोध प्रबंध पर शोध उपाधि (पीएच.डी.) प्राप्त की थी।

  • सेवानिवृत्ति: नगेन्द्र जी ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ से प्रोफेसर तथा हिंदी विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त होने के उपरांत स्वतंत्र रूप से साहित्य की साधना में संलग्न हो गए थे।

📚 डॉ. नगेन्द्र की प्रमुख रचनाएँ एवं कृतियाँ

डॉ. नगेन्द्र ने आलोचना, निबंध, संपादन और आत्मकथा के क्षेत्र में अभूतपूर्व ग्रंथ लिखे हैं:

1. निबंध / आलोचनात्मक ग्रंथ (कालक्रमानुसार)

  • 1938 ई.सुमित्रानंदन पंत (इनकी पहली आलोचनात्मक पुस्तक)

  • 1939 ई.साकेत: एक अध्ययन

  • 1944 ई.विचार और विवेचन (निबंध)

  • 1949 ई.आधुनिक हिंदी नाटक

  • 1949 ई.विचार और अनुभूति (निबंध)

  • 1949 ई.रीति काव्य की भूमिका / हिंदी साहित्य का इतिहास

  • 1951 ई.आधुनिक हिन्दी कविता की मुख्य प्रवृत्तियाँ

  • 1955 ई.विचार और विश्लेषण (निबंध)

  • 1957 ई.अरस्तू का काव्यशास्त्र

  • 1961 ई.अनुसंधान और आलोचना

  • 1962 ई.कामायनी के अध्ययन की समस्याएं

  • 1964 ई.रस-सिद्धांत (अत्यंत महत्वपूर्ण)

  • 1966 ई.आलोचक की आस्था (निबंध)

  • 1969 ई.आस्था के चरण (निबंध संग्रह)

  • 1970 ई.नयी समीक्षाः नये संदर्भ

  • 1971 ई.समस्या और समाधान

  • 1973 ई.हिन्दी साहित्य का बृहत इतिहास (दस भाग – संपादन)

  • 1979 ई.मिथक और साहित्य

  • 1982 ई.साहित्य का समाज शास्त्र

  • 1985 ई.भारतीय समीक्षा और आचार्य शुक्ल की काव्य दृष्टि

  • 1987 ई.मैथिलीशरण गुप्त : पुनर्मूल्यांकन

  • 1990 ई.प्रसाद और कामायिनी

  • 1993 ई.राम की शक्तिपूजा

2. अन्य प्रमुख कृतियाँ एवं विधाएँ

  • अभिनव भारती

  • नाट्य दर्पण

  • काव्य में उदात्त तत्व

  • काव्य कला

  • भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा

  • पाश्चात्य काव्यशास्त्र की परंपरा

  • चेतना के बिंब (निबंध)

  • वीणापाणि के कम्पाउण्ड में (निबंध)

  • हिंदी उपन्यास (निबंध)

  • अर्द्धकथा — 1988 ई. (आत्मकथा)

⏳ डॉ. नगेन्द्र द्वारा हिंदी साहित्य का काल-विभाजन

डॉ. नगेन्द्र ने संपूर्ण हिंदी साहित्योतिहास को चार प्रधान कालखंडों में बांटा है, तथा आधुनिक काल को भी चार उप-भागों में विभाजित किया है:

  1. आदिकाल: सातवीं शताब्दी के मध्य से 14वीं शताब्दी के मध्य तक

  2. भक्तिकाल: 14वीं शताब्दी के मध्य से 17वीं शताब्दी के मध्य तक

  3. रीतिकाल: 17वीं शताब्दी के मध्य से 19वीं शताब्दी के मध्य तक

  4. आधुनिक काल: 19वीं शताब्दी के मध्य से अब तक

    • (क) पुनर्जागरण काल (भारतेंदु काल): 1857 ई. से 1900 ई. तक

    • (ख) जागरणसुधारकाल (द्विवेदी काल): 1900 से 1918 ई. तक

    • (ग) छायावादकाल: 1918 से 1938 ई. तक

    • (घ) छायावादोत्तर काल:

      • प्रगति-प्रयोग काल: 1938 से 1953 ई. तक

      • नवलेखनकाल: 1953 ई. से अब तक

🔍 विशेष तथ्य एवं आलोचनात्मक दृष्टियाँ

  • रसवादी आलोचक: डॉ. नगेन्द्र मूलतः रसवादी आलोचक माने जाते हैं।

  • काव्य-लेखन से शुरुआत: इनका साहित्यिक जीवन कवि के रूप में आरंभ हुआ था। सन 1937 ई. में उनका पहला काव्य संग्रह ‘वनबाला’ प्रकाशित हुआ था।

  • मनोवैज्ञानिक आलोचना: इन्होंने फ्रायड के मनोविश्लेषण शास्त्र के आधार पर नाटक और नाटककारों की आलोचनाएँ लिखीं।

  • भाषा-शैली: डॉ. नगेन्द्र के निबंधों की भाषा शुद्ध, परिष्कृत, परिमार्जित, व्याकरण सम्मत तथा साहित्यिक खड़ी बोली है।

  • अध्यापन और आलोचना पर विचार:

    [!NOTE] डॉ. नगेन्द्र का यह मानना था कि “अध्यापक वृत्तितः व्याख्याता और विवेकशील होता है। ऊँची श्रेणी के विद्यार्थियों और अनुसन्धाताओं को काव्य का मर्म समझाना उसका व्यावसायिक कर्तव्य व कर्म है।” उन्होंने यह भी लिखा है कि “अध्यापन का, विशेषकर उच्च स्तर के अध्यापन का, साहित्य के अन्य अंगों के सृजन से सहज सम्बन्ध न हो, परन्तु आलोचना से उसका प्रत्यक्ष सम्बन्ध है।

FAQ (अकॉर्डियन प्रश्नोत्तर)

डॉ. नगेन्द्र को किस रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
डॉ. नगेन्द्र को उनकी प्रसिद्ध आलोचनात्मक कृति ‘रस-सिद्धांत’ के लिए वर्ष 1965 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
डॉ. नगेन्द्र की आत्मकथा का क्या नाम है?
डॉ. नगेन्द्र की आत्मकथा का नाम ‘अर्द्धकथा’ है, जो 1988 ईस्वी में प्रकाशित हुई थी।
डॉ. नगेन्द्र मूल रूप से किस प्रकार के आलोचक माने जाते हैं?
डॉ. नगेन्द्र हिंदी साहित्य में मूल रूप से एक ‘रसवादी आलोचक’ के रूप में जाने जाते हैं।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जा सकता है कि डॉ. नगेन्द्र का संपूर्ण साहित्यिक और आलोचनात्मक सफर हिंदी जगत के लिए एक अनमोल थाती है। उनके द्वारा रचित ‘रस-सिद्धांत’, ‘आधुनिक हिंदी नाटक’ और उनके द्वारा किया गया काल-विभाजन आज भी शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक स्तंभ का कार्य करता है।

🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि

क्र.सं.लेखक / कवि का नाममुख्य विशेषता / कालइंटरनल लिंक (URL)
1.भारतेंदु हरिश्चंद्रआधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युगलिंक देखें
2.महावीर प्रसाद द्विवेदीद्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकारलिंक देखें
3.जयशंकर प्रसादछायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककारलिंक देखें
4.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेतालिंक देखें
5.सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि / छायावादलिंक देखें
6.महादेवी वर्माआधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्रीलिंक देखें
7.प्रेमचंद (धनपत राय)उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुषलिंक देखें
8.अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तकलिंक देखें
9.रामधारी सिंह ‘दिनकर’राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कविलिंक देखें
10.कृष्णा सोबतीआधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षरलिंक देखें

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