अंतिम संशोधित (Last Updated): September 6, 2026
हिंदी उपन्यासों के प्रमुख पात्र एवं जीवनीपरक उपन्यास: संपूर्ण अध्ययन
Table of Contents
हिन्दी साहित्य की उपन्यास विधा के अंतर्गत विभिन्न उपन्यासों के नायक-नायिका (पात्र) तथा जीवनीपरक उपन्यासों का यह संकलन प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे वर्डप्रेस पर पब्लिश करने के लिए एक व्यवस्थित और एसईओ-ऑप्टिमाइज़्ड फॉर्मेट में तैयार किया गया है।
1. हिन्दी उपन्यासों के प्रमुख पात्र (नायक एवं नायिका)
| उपन्यास का नाम | प्रमुख पात्र |
| तत्सम | वसुधा |
| रतिनाथ की चाची | गौरी |
| दादा कामरेड | चंद्रशेखर आजाद |
| इदं न मम | मंदा, मकरंद |
| सात नदिया एक समुंदर | शहनाज, अख्तर, मलीहा, तैयबा |
| निष्कवच | मीरा, इमरतिया, मस्तराम |
| मुझे चाँद चाहिए | हर्ष और दिव्या कात्याल |
| गोबर गणेश | कुंदन |
| बीच में विनय | विनय |
| लेकिन दरवाजा | नीलांबर और देंबू |
| दिलो दानिश | वकील परम नारायण और महक बानो |
| शेषयात्रा | अनु |
| गली आगे मुड़ती है | किरण, जयंती, लाजो |
| अलग-अलग वैतरणी | विपिन |
| दिल्ली दूर है | रजिया और वाशेक |
| पचपन खंभे लाल दीवारें | सुषमा और नील |
| मुर्दाघर | नैना और मंगला |
| वे दिन | रायना और मीता |
| लाल टीन की छत | काया |
| अंतराल | लता और देवकी, कुमार और श्यामा |
| अंधेरे बंद कमरे | मनोज सक्सेना, नीलिमा, हरिवंश |
| देशद्रोही | बद्री बाबू |
| उखड़े हुए लोग | देशबंधु, माया, पद्मा, जया, शरद, सूरज, चंदा |
| पाणिपुत्र | सोमा और असित |
| पुनर्नवा | सुमेर काका, नर्तकी मंजुला, गोपाल आर्यक और चंदा |
| जय सोमनाथ | भीमदेव, नर्तकी चैला, सोमनाथ, देव स्वामी |
| वैशाली की नगरवधू | बिंदुसार और आम्रपाली |
| मृगनयनी | सुमन मोहिनी, माधव जी सिंधिया, गन्ना बेगम, सिकंदर लोदी |
| झांसी की रानी | गुलाम गौस खान, खुदा बक्श, मोती बाई |
| विराटा की पद्मिनी | अली मरदान |
| बीमार शहर (राजेन्द्र अवस्थी) | शेखर |
| जंगल के फूल | सुलक और महुआ |
| छोटे-छोटे पंछी | दीक्षा और सतीश |
| जलतरंग | मिसेज खोसला |
| चिट्ठी रसेन | पीतांबर और रमोती |
| समर शेष है | संतोषी पंडित और कालिंदी |
| सोना माटी | राम रूप |
| अपने लोग | जनार्दन, सूर्यकुमार, भूपत सिंह, प्रमोद |
| बीच का समय | प्रोफेसर शील और रीता |
| दिल एक सादा कागज | रफ्फन |
| टोपी शुक्ला | बलभद्र नारायण शुक्ला |
| परती परिकथा | जीतन और इरावती |
| जुलूस | पवित्रा |
| दीर्घतपा | बेला गुप्ता |
2. हिंदी के प्रमुख जीवनीपरक उपन्यास
हिंदी साहित्य में किसी ऐतिहासिक या प्रसिद्ध व्यक्तित्व के जीवन पर आधारित उपन्यासों को जीवनीपरक उपन्यास कहा जाता है। प्रमुख जीवनीपरक उपन्यास निम्नलिखित हैं:
“भारती का सपूत” (1954 ई.) – रांगेय राघव (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के जीवन पर) — यह हिंदी में प्रथम जीवनीपरक उपन्यास है।
“रत्ना की बात” (1957 ई.) – रांगेय राघव (तुलसीदास के जीवन पर)
“लोई का ताना” (1974 ई.) – रांगेय राघव (कबीर दास के जीवन पर)
“मानस का हंस” (1974 ई.) – अमृतलाल नागर (तुलसीदास के जीवन पर)
“मेरी भव बाधा हरौ” (1976 ई.) – रांगेय राघव (बिहारी के जीवन पर)
“धूनी का धुआँ” (1978 ई.) – रांगेय राघव (गोरखनाथ के जीवन पर)
“यशोधरा जीत गई” – रांगेय राघव (भगवान बुद्ध के जीवन पर)
“देवकी का बेटा” – रांगेय राघव (भगवान कृष्ण के जीवन पर)
“खंजन नयन” (1981 ई.) – अमृतलाल नागर (सूरदास के जीवन पर)
“पहला गिरमिटिया” (1999 ई.) – गिरिराज किशोर (महात्मा गांधी के जीवन पर)
“सूत्रधार” (2003 ई.) – संजीव (भिखारी ठाकुर के जीवन पर)
“तोड़ो कारा तोड़ो” (2004 ई.) – नरेन्द्र कोहली (स्वामी विवेकानंद के जीवन पर)
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