अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026

🗓️ अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026 | ✍️ केवल कृष्ण घोड़ेला
जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय हिंदी साहित्य के हर विद्यार्थी के लिए ज़रूरी विषय है। वे आधुनिक काल के छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार, कहानीकार और उपन्यासकार थे। इस लेख में उनका जन्म, परिवार, शिक्षा, रचनाएँ, कामायनी, साहित्यिक विशेषताएँ और परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य एक ही जगह दिए गए हैं।
⚡ संक्षिप्त उत्तर
- जन्म: 30 जनवरी 1889 ई., वाराणसी (काशी)
- निधन: 15 नवंबर 1937 ई., वाराणसी
- माता-पिता: बाबू देवीप्रसाद और मुन्नी देवी
- उपनाम: कलाधर
- युग: आधुनिक काल, छायावाद
- सर्वश्रेष्ठ कृति: कामायनी (नायक: मनु, नायिका: श्रद्धा)
- छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला: झरना (1918)
📑 इस लेख में
जयशंकर प्रसाद: त्वरित जानकारी
Table of Contents
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | जयशंकर प्रसाद (उपनाम: कलाधर) |
| जन्म | 30 जनवरी 1889 ई. (माघ शुक्ल दशमी, संवत् 1946), वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश |
| निधन | 15 नवंबर 1937 ई., वाराणसी (क्षयरोग), आयु लगभग 48 वर्ष |
| पिता / माता | बाबू देवीप्रसाद (साहू) / मुन्नी देवी |
| परिवार की पहचान | ‘सुँघनी साहू’ नाम से प्रसिद्ध व्यापारी परिवार |
| शिक्षा | क्वींस कॉलेज, काशी में कुछ समय; घर पर संस्कृत, हिंदी, उर्दू और फ़ारसी |
| काव्यधारा | छायावाद (प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी वर्मा चार स्तंभ) |
| श्रेष्ठ कृति | कामायनी (महाकाव्य, 15 सर्ग) |
| पुरस्कार | कामायनी पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक |
| भाषा | खड़ी बोली (आरंभ की रचनाएँ ब्रजभाषा में) |

जन्म और परिवार
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 ई. को वाराणसी में हुआ। पारंपरिक पंचांग के अनुसार यह माघ शुक्ल दशमी, संवत् 1946 थी। उनके दादा बाबू शिवरतन साहू और पिता बाबू देवीप्रसाद काशी के जाने-माने व्यापारी थे। तंबाकू और सुँघनी के कारोबार की वजह से परिवार को सुँघनी साहू कहा जाता था। परिवार दानशीलता और कलाकारों के सम्मान के लिए भी प्रसिद्ध था।
माता का नाम मुन्नी देवी था। कम उम्र में ही पिता का साया सिर से उठ गया और कुछ समय बाद माता और बड़े भाई शंभूरत्न भी नहीं रहे। इसलिए छोटी उम्र में कारोबार और घर की ज़िम्मेदारी प्रसाद पर आ गई। इसी दौर में उन्होंने कविता को अपना सहारा बनाया।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
प्रसाद की औपचारिक शिक्षा अधिक नहीं चली। उन्होंने काशी के क्वींस कॉलेज में कुछ समय पढ़ाई की, फिर पढ़ाई घर पर ही हुई। घर पर उन्होंने संस्कृत, हिंदी, उर्दू और फ़ारसी सीखी, और वेद, पुराण, इतिहास, दर्शन और साहित्य का गहरा स्वाध्याय किया। यही अध्ययन आगे चलकर उनके ऐतिहासिक नाटकों और कामायनी की दार्शनिक गहराई में दिखाई देता है।
नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने कलाधर उपनाम से ब्रजभाषा में सवैया लिखा। आरंभिक कविताएँ ब्रजभाषा में थीं, बाद में उन्होंने खड़ी बोली अपनाई। सन् 1909 में काशी से मासिक पत्रिका इंदु शुरू हुई। इसका संपादन उनके भांजे अंबिका प्रसाद गुप्त करते थे और प्रसाद इसमें नियमित रूप से लिखते थे। उनकी कई आरंभिक रचनाएँ और कहानियाँ इसी पत्रिका में छपीं।
साहित्यिक जीवन और छायावाद में स्थान
प्रसाद ने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध, सभी विधाओं में लिखा। उनकी काव्य-यात्रा ब्रजभाषा की रचनाओं से शुरू होकर खड़ी बोली तक आई। झरना (1918) को छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला माना जाता है। इसी संग्रह से छायावाद का आरंभ भी माना जाता है। आँसू में वेदना और विरह की गहरी अनुभूति है, लहर में प्रकृति, प्रेम और राष्ट्रीय चेतना के गीत हैं, और कामायनी में उनकी दार्शनिक दृष्टि पूरी तरह निखरी।
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ हैं: जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा। इनमें प्रसाद को छायावाद का प्रवर्तक माना जाता है और इस युग को कई आलोचक प्रसाद युग भी कहते हैं। प्रसाद के नाटक हिंदी रंगमंच और नाट्य-साहित्य में एक नया मोड़ लाए, और उनकी कहानियाँ हिंदी की आधुनिक कहानी की शुरुआती और महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं।
उन्होंने तीन विवाह किए। उनके पुत्र रत्नशंकर प्रसाद थे। लंबे समय तक क्षयरोग से जूझने के बाद 15 नवंबर 1937 को उनका निधन हुआ।
जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ
काव्य-रचनाएँ
| रचना | वर्ष | विशेष |
|---|---|---|
| प्रेम पथिक | 1909 (ब्रजभाषा); खड़ी बोली रूप 1914 | कथात्मक काव्य |
| कानन कुसुम | 1913 | आरंभिक काव्य-संग्रह |
| करुणालय | 1913 | गीतिनाट्य |
| महाराणा का महत्त्व | 1914 | ऐतिहासिक-राष्ट्रीय भावना का काव्य |
| चित्राधार | 1918 | ब्रजभाषा और खड़ी बोली की कविताओं का संग्रह, इसमें ‘अयोध्या का उद्धार’ भी संकलित है |
| झरना | 1918 | छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला |
| आँसू | 1925 | वेदना और विरह का गीतिकाव्य |
| लहर | 1933-35 (स्रोतों में भिन्नता) | प्रकृति, प्रेम और राष्ट्रीय चेतना के गीत |
| कामायनी | 1936 (कुछ स्रोतों में 1935) | महाकाव्य, 15 सर्ग |
नाटक
| नाटक | विशेष |
|---|---|
| सज्जन, कल्याणी परिणय, प्रायश्चित | आरंभिक नाटक |
| राज्यश्री | सम्राट हर्षवर्धन की बहन राज्यश्री पर आधारित |
| विशाख (1921) | ऐतिहासिक नाटक |
| अजातशत्रु (1922) | मगध के शासक अजातशत्रु पर आधारित |
| कामना | प्रतीकात्मक (रूपक) नाटक |
| जनमेजय का नागयज्ञ (1926) | पौराणिक-ऐतिहासिक नाटक |
| स्कंदगुप्त (1928) | गुप्तकाल पर आधारित, प्रसाद के श्रेष्ठ नाटकों में से एक |
| एक घूँट (1930) | एकांकी |
| चंद्रगुप्त (1931) | चंद्रगुप्त मौर्य पर आधारित |
| ध्रुवस्वामिनी (1933) | उनका अंतिम पूर्ण नाटक, नारी-अधिकार का प्रश्न |
| अग्निमित्र | अपूर्ण |
उपन्यास, कहानी-संग्रह और निबंध
| विधा | रचनाएँ |
|---|---|
| उपन्यास | कंकाल (सामाजिक समस्याओं पर), तितली (ग्रामीण जीवन और सुधार पर), इरावती (अपूर्ण) |
| कहानी-संग्रह | छाया (1912), प्रतिध्वनि (1926), आकाशदीप (1929), आँधी (1931-32), इंद्रजाल (1936) |
| प्रसिद्ध कहानियाँ | ग्राम, ममता, आकाशदीप, पुरस्कार, गुंडा, इंद्रजाल |
| निबंध | काव्य और कला तथा अन्य निबंध |
कामायनी: सर्ग और पात्र
कामायनी जयशंकर प्रसाद की सर्वश्रेष्ठ रचना और आधुनिक हिंदी का प्रमुख महाकाव्य है। इसमें जल-प्रलय के बाद बचे मनु की कथा के सहारे मानव-जीवन, मन, हृदय और बुद्धि के संघर्ष और अंत में समरस आनंद की अवस्था को दिखाया गया है। नायक मनु हैं और नायिका श्रद्धा है। इस रचना पर प्रसाद को मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला।
कामायनी के 15 सर्ग
| क्रम | सर्ग | क्रम | सर्ग | क्रम | सर्ग |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | चिंता | 6 | लज्जा | 11 | संघर्ष |
| 2 | आशा | 7 | कर्म | 12 | निर्वेद |
| 3 | श्रद्धा | 8 | ईर्ष्या | 13 | दर्शन |
| 4 | काम | 9 | इड़ा | 14 | रहस्य |
| 5 | वासना | 10 | स्वप्न | 15 | आनंद |
प्रमुख पात्र और उनका प्रतीक
- मनु: नायक, मन का प्रतीक
- श्रद्धा: नायिका, हृदय और विश्वास का प्रतीक
- इड़ा: बुद्धि का प्रतीक
- कुमार: मनु और श्रद्धा का पुत्र
कामायनी पर सर्ग-वार छंद और आलोचकों के मत के लिए कामायनी: जयशंकर प्रसाद (विस्तृत नोट्स) पढ़ें। कामायनी के दार्शनिक आधार, प्रतीक-योजना और आनंदवाद को समझने के लिए जयशंकर प्रसाद का जीवन दर्शन, सांस्कृतिक दृष्टि और सौंदर्य चेतना (Notes) देखें।
जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक विशेषताएँ
- प्रेम और सौंदर्य: उनके काव्य में प्रेम और सौंदर्य की सूक्ष्म और कोमल अभिव्यक्ति मिलती है।
- वेदना और करुणा: ‘आँसू’ में विरह और पीड़ा का भावपूर्ण चित्रण है।
- राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चेतना: ऐतिहासिक नाटकों और काव्य में भारत के गौरवशाली अतीत की झलक मिलती है।
- प्रकृति चित्रण: प्रकृति उनके यहाँ मानवीय भावनाओं की साथी बनकर आती है।
- दार्शनिकता: कामायनी में समरसता और आनंदवाद की दृष्टि है।
- नारी का सम्मान: श्रद्धा और ध्रुवस्वामिनी जैसे पात्रों में नारी को गरिमा और अधिकार के साथ दिखाया गया है।
भाषा-शैली
प्रसाद की भाषा परिष्कृत, तत्सम-प्रधान खड़ी बोली है। उसमें संस्कृत शब्दों की प्रचुरता, लाक्षणिकता और प्रतीकात्मकता है। उन्होंने मानवीकरण, रूपक और उपमा जैसे अलंकारों का सहज प्रयोग किया। उनके गद्य में भी काव्यात्मकता है, जो उनके नाटकों के संवादों और कहानियों में साफ़ दिखती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- कामायनी के नायक मनु और नायिका श्रद्धा हैं।
- छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला: झरना (1918)।
- जयशंकर प्रसाद का उपनाम: कलाधर।
- जन्म: 30 जनवरी 1889; निधन: 15 नवंबर 1937।
- पिता: बाबू देवीप्रसाद; माता: मुन्नी देवी।
- कामायनी में 15 सर्ग हैं; पहला सर्ग चिंता और अंतिम सर्ग आनंद।
- कामायनी को मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला।
- आँसू वेदना और विरह का काव्य है।
- करुणालय गीतिनाट्य है; कामना प्रतीकात्मक नाटक है; एक घूँट एकांकी है।
- ध्रुवस्वामिनी उनका अंतिम पूर्ण नाटक है; अग्निमित्र और इरावती अपूर्ण रचनाएँ हैं।
- पहली कहानी: ग्राम; पहला कहानी-संग्रह: छाया।
- उपन्यास: कंकाल, तितली और इरावती (अपूर्ण)।
- छायावाद के चार स्तंभ: प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी वर्मा।
इन तथ्यों का अभ्यास करने के लिए छायावाद के महत्वपूर्ण प्रश्न और आधुनिक काल हिंदी साहित्य प्रश्नोत्तरी हल करें।
जयशंकर प्रसाद के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
❓ जयशंकर प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 ई. (माघ शुक्ल दशमी, संवत् 1946) को वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। कुछ स्रोतों में जन्म-वर्ष 1890 भी मिलता है, पर परीक्षाओं में 1889 को मान्य माना जाता है।
❓ जयशंकर प्रसाद का निधन कब हुआ?
उनका निधन 15 नवंबर 1937 ई. को वाराणसी में क्षयरोग (टीबी) से हुआ। उस समय उनकी आयु लगभग 48 वर्ष थी।
❓ जयशंकर प्रसाद के माता-पिता का नाम क्या था?
पिता का नाम बाबू देवीप्रसाद (साहू) और माता का नाम मुन्नी देवी था। परिवार तंबाकू और सुँघनी के व्यापार के कारण ‘सुँघनी साहू’ नाम से प्रसिद्ध था।
❓ जयशंकर प्रसाद का उपनाम क्या है?
जयशंकर प्रसाद का उपनाम ‘कलाधर’ है। आरंभ में उन्होंने ब्रजभाषा की रचनाएँ इसी नाम से लिखीं।
❓ जयशंकर प्रसाद किस युग के कवि हैं?
जयशंकर प्रसाद आधुनिक काल के छायावादी युग (छायावाद) के कवि हैं। वे छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों (प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी वर्मा) में गिने जाते हैं।
❓ जयशंकर प्रसाद की किस रचना के नायक मनु हैं?
मनु ‘कामायनी’ (1936) के नायक हैं। इसकी नायिका श्रद्धा है। इड़ा भी इसका प्रमुख पात्र है।
❓ छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला किस रचना को कहा जाता है?
जयशंकर प्रसाद के काव्य-संग्रह ‘झरना’ (1918) को छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला माना जाता है। छायावाद का आरंभ भी प्रायः 1918 ई. से माना जाता है।
❓ कामायनी में कितने सर्ग हैं और यह कब प्रकाशित हुई?
कामायनी में 15 सर्ग हैं: चिंता से लेकर आनंद तक। इसका प्रकाशन 1936 ई. में माना जाता है (रचना-काल 1935-36)। इस पर प्रसाद को मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला।
❓ जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
काव्य में कामायनी, आँसू, लहर, झरना और चित्राधार; नाटकों में स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी और अजातशत्रु; उपन्यासों में कंकाल और तितली; कहानी-संग्रहों में आकाशदीप, आँधी, इंद्रजाल, प्रतिध्वनि और छाया उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।
❓ जयशंकर प्रसाद की पहली कहानी कौन-सी मानी जाती है?
उनकी पहली कहानी ‘ग्राम’ मानी जाती है, जो ‘इंदु’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। उनका पहला कहानी-संग्रह ‘छाया’ (1912) है।
❓ जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक कौन-से हैं?
स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, राज्यश्री और विशाख उनके ऐतिहासिक नाटक हैं। ‘कामना’ प्रतीकात्मक नाटक है और ‘ध्रुवस्वामिनी’ उनका अंतिम पूर्ण नाटक माना जाता है।
❓ क्या जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय PDF में मिल सकता है?
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निष्कर्ष
जयशंकर प्रसाद ने हिंदी कविता को छायावाद की नई दिशा दी, नाटकों में भारतीय इतिहास को जीवंत किया और कहानी-उपन्यास में मानवीय संवेदना को जगह दी। कामायनी उनकी साहित्य-साधना का शिखर है। परीक्षा की तैयारी के लिए जन्म-निधन, उपनाम, रचनाओं के नाम और वर्ष, कामायनी के सर्ग और पात्र, और छायावाद में उनका स्थान ज़रूर याद रखें।
📚 यह भी पढ़ें
- जयशंकर प्रसाद का जीवन दर्शन, सांस्कृतिक दृष्टि और सौंदर्य चेतना (Notes)
- कामायनी: जयशंकर प्रसाद, सर्ग, छंद और आलोचकों के मत
- छायावाद महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ)
- आधुनिक काल महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी
- नाटक महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज (प्रसाद के नाटकों के प्रश्न सहित)
- सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय
- महादेवी वर्मा का जीवन परिचय
- मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय
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✍️ लेखक परिचय: केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)
हिंदी साहित्य चैनल के संचालक। हिंदी साहित्य, NET/JRF, TGT और PGT की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का लंबे समय से मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस लेख के तथ्य हिंदी साहित्य की मानक पुस्तकों और संदर्भ-कोशों से मिलाकर तैयार किए गए हैं।
संदर्भ: हिंदी विकिपीडिया, भारतकोश और हिंदी साहित्य के मानक इतिहास-ग्रंथ। रचनाओं के प्रकाशन-वर्ष अलग-अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न मिलते हैं, इसलिए परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक का वर्ष प्राथमिकता से लिखें।



More knowledgeable nots sir
Thanks sir
बेहतरीन सर जी
नेट के लिए बहुत अच्छा है जिसमे सारि जानकारी दे दी गयी है और सरल भाषा का प्रयोग बहुत ही सुंदर ढंग से किया गया है।
जी धन्यवाद
अति उत्तम ज्ञानवर्धक पोस्ट। एग्जाम के लिए कंपलीट इनफॉरमेशन।
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Dhanywad Sir…