अनुकरण शिक्षण विधि क्या है? अर्थ, प्रकार और विशेषताएँ | Anukaran Shikshan Vidhi

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 27, 2026

अनुकरण शिक्षण विधि: अर्थ, प्रकार, विशेषताएँ और उपयोगिता (Anukaran Shikshan Vidhi in Hindi)

हिंदी शिक्षण विधियों (Hindi Teaching Methods) में ‘अनुकरण शिक्षण विधि’ (Simulation / Imitation Method) का एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। प्राथमिक स्तर पर भाषा के प्रारंभिक ज्ञान, शुद्ध उच्चारण और लेखन कौशल को विकसित करने में यह विधि अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे CTET, REET, UPTET, TGT, PGT आदि) और शिक्षण अध्ययन की दृष्टि से अनुकरण विधि के संपूर्ण स्वरूप को इस आलेख में विस्तार से समझा गया है:

📌 अनुकरण शिक्षण विधि का अर्थ एवं परिचय

‘अनुकरण’ का सामान्य अर्थ होता है— किसी आदर्श या योग्य व्यक्ति की नकल करना या उसका अनुसरण करना

अनुकरण विधि में बालक अपने शिक्षक या आदर्श रूप का अनुकरण करके लिखना, पढ़ना और नवीन रचना करना सीखता है। इस विधि के अंतर्गत बालक शिक्षक के उच्चारण को सुनकर वाचन करना सीखते हैं। इसमें पहले शिक्षक बोलता है, और फिर बच्चे उसका अनुसरण करते हैं। यही कारण है कि इस विधि के आधार पर ‘शुद्ध उच्चारण’ को ही एक भाषा शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ गुण माना जाता है।

⚙️ अनुकरण के प्रकार (Types of Imitation)

अनुकरण विधि मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है:

1. लिखित अनुकरण (Written Imitation)

लेखन कौशल के विकास हेतु लिखित अनुकरण के दो रूप होते हैं:

  • (अ) रूपरेखा अनुकरण: इसमें ऐसी मुद्रित पुस्तिकाएँ होती हैं जिन पर अक्षर या वाक्य बिंदु (Dots) के रूप में लिखे होते हैं। बालक उन बिंदुओं पर पेंसिल या पेन फेरकर अभ्यास करता है और अक्षरों या शब्दों को लिखना सीख जाता है।

  • (ब) स्वतंत्र अनुकरण: इसमें अध्यापक श्यामपट्ट (Blackboard), स्लेट या अभ्यास पुस्तिका पर कोई अक्षर लिख देता है और बालक से कहता है कि वह नीचे स्वयं देखकर वैसा ही अक्षर लिखने का प्रयास करे (जैसे— ‘क’ को देखकर वैसा ही लिखना)।

2. उच्चारण अनुकरण (Pronunciation Imitation)

यह विधि प्राथमिक स्तर पर छात्रों को शुद्ध बोलना सिखाने के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस पद्धति में अध्यापक एक-एक शब्द बोलता जाता है और बालक उस शब्द की ध्वनि का अनुकरण करते चलते हैं। यह विधि उन भाषाओं के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध होती है जहाँ एक अक्षर की एक से अधिक ध्वनियाँ होती हैं अथवा जहाँ लिखा कुछ और जाता है और पढ़ा कुछ और जाता है।

3. रचना अनुकरण विधि (Composition Imitation)

  • यह विधि मुख्य रूप से माध्यमिक स्तर पर छात्रों को रचना कार्य (जैसे— प्रार्थना पत्र, निबंध आदि) सिखाने के लिए प्रयोग की जाती है।

  • इसमें छात्र दिए गए विषय के अनुरूप ही रचना करने का प्रयास करते हैं; जैसे— दीपावली पर लेख समझाकर छात्रों से होली पर लेख लिखवाना।

  • कमियाँ / विशेषता: यह विधि पूर्णतः अमनोवैज्ञानिक भी मानी जाती है क्योंकि इसमें छात्रों की भाषा तो अपनी होती है, किंतु शैली के लिए उन्हें किसी आदर्श रचना पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यह विधि मुख्य रूप से उच्च कक्षाओं के लिए ही अधिक उपयुक्त हो सकती है।

✨ अनुकरण विधि की प्रमुख विशेषताएँ

  • उच्चारण अभ्यास: इस विधि में अनुकरण वाचन के बाद तुरंत उच्चारण अभ्यास करवाया जाता है ताकि शुद्धता बनी रहे।

  • बुनियादी शिक्षा में सफलता: बुनियादी शिक्षा और प्रारंभिक कक्षाओं में अनुकरणात्मक विधि को एक सफलतम विधि माना गया है।

  • आदर्श प्रस्तुत करना: इस विधि की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अध्यापक कक्षा में कितने अच्छे और शुद्ध आदर्श प्रस्तुत करता है, क्योंकि छात्र उसी की नकल करते हैं।

  • कौशल विकास: अनुकरण विधि के माध्यम से बालक अपने शिक्षक का अनुकरण करके आसानी से लिखना, पढ़ना और नवीन रचना करना सीख जाता है।

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहा जा सकता है कि अनुकरण शिक्षण विधि (Anukaran Shikshan Vidhi) भाषा अधिगम की एक स्वाभाविक और प्रारंभिक प्रक्रिया है। छोटे बच्चों के लिए बोलना और लिखना सीखने का सबसे आसान जरिया अनुकरण ही है। यद्यपि उच्च स्तर पर यह रचना के क्षेत्र में थोड़ी सीमित हो जाती है, किंतु प्राथमिक स्तर पर भाषा के सुदृढ़ आधार निर्माण के लिए इसका कोई विकल्प नहीं है।

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क्र.सं.शिक्षण विधि का नाममुख्य विशेषता / क्षेत्रडायरेक्ट लिंक (URL)
1.अभिक्रमित अनुदेशन विधि (Programmed Instruction)छोटे-छोटे पदों में विभाजित करके स्व-अधिगम करानाक्लिक करके पढ़ें
2.अनुकरण शिक्षण विधि (Simulation / Imitation Method)शिक्षक या आदर्श व्यक्ति के व्यवहार का अनुकरण करके सीखनाक्लिक करके पढ़ें
3.पर्यवेक्षित अध्ययन विधि (Supervised Study Method)शिक्षक के मार्गदर्शन और देखरेख में छात्रों द्वारा अध्ययनक्लिक करके पढ़ें
4.सूक्ष्म शिक्षण विधि (Micro-Teaching)शिक्षण कौशलों के विकास की लघु एवं प्रायोगिक विधिक्लिक करके पढ़ें
5.इकाई शिक्षण विधि (Unit Approach Method)संपूर्ण पाठ्यक्रम को सार्थक इकाइयों में बाँटकर पढ़ानाक्लिक करके पढ़ें

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