बिम्ब विधान | कविता में बिम्ब का महत्त्व | Hindi Sahitya Me Bimb

बिम्ब विधान

दोस्तों आज की पोस्ट में हिंदी साहित्य में काव्यशास्त्र के महत्वपूर्ण विषय बिम्ब विधान (Bimb Vidhan) के बारे में  अच्छी तरह से समझाया गया है ,हमें आशा है कि आप इसे अच्छे से समझेंगे | बिम्ब विधान – Bimb Vidhan आज के आर्टिकल में हम क्या सीखेंगे? बिम्ब का अर्थ  बिम्ब क्या होते है ? […]

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मिथक का अर्थ हिंदी में | हिंदी साहित्य | काव्यशास्त्र | hindi sahitya

मिथक

आज हम काव्यशास्त्र का महत्वपूर्ण विषय मिथक(mithak) के बारें में अध्ययन करेंगे ,जो आपके लिए उपयोगी साबित होगा मिथक(Mithak) पश्चिम में विशेष रूप से अमेरिका में मिथक(mithak) आलोचना का प्रसार हो रहा है, इसे एक सार्वभौम तथा वैज्ञानिक पद्धति माना जाता है। साहित्य ही नहीं, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में भी मिथक(mithak) पर महत्त्वपूर्ण

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Premchand Stories || प्रेमचंद || कहानियाँ || हिंदी साहित्य

Premchand Stories

दोस्तों आज की पोस्ट में प्रेमचंद की कहानियां(premchand stories) की जानकारी आपको दी जा रही है , इनके कहानी संग्रहों के बारे में भी आपको विस्तृत जानकारी दी जा रही है , हमें आशा है कि आप इसे अच्छे से समझेंगे। Premchand stories प्रेमचंद ने लगभग 300 कहानियां लिखी है, जो मानसरोवर 8 भागों में

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काल – KAAL | काल व उसके भेद | HINDI VYAKARAN

काल व उसके भेद

काल के भेद और उदाहरण: हिंदी व्याकरण (Kaal ke Bhed aur Udaharan) हिंदी व्याकरण (Hindi Vyakaran) में ‘काल’ (Tense) एक बेहद महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक है। क्रिया के जिस रूप से उसके होने या करने के समय का बोध होता है, उसे काल कहते हैं। चाहे आप UGC NET, TGT, PGT, REET, UPSC या अन्य

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प्रतीक क्या होता है || हिंदी साहित्य || काव्यशास्त्र

प्रतीक क्या होते है

दोस्तों आज की पोस्ट में हम प्रतीक क्या होता है(Pratik kya hota hai) इसके बारे में पढेंगे |  प्रतीक ऐसा शब्द चिह्न है जो किसी वस्तु का बोध कराता है। प्रतीक  प्रतीक किसी सूक्ष्म भाव, विचार या अगोचर तत्त्व को साकार करने के लिए प्रयुक्त होता है। ⇒ प्रतीक अप्रस्तुत का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रस्तुत

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हिन्दी के प्रमुख लेखक जन्म कालक्रम || hindi sahitya

hindi writer

दोस्तो आज की पोस्ट में हिन्दी साहित्य(hindi sahitya) के प्रमुख लेखकों (हिन्दी के प्रमुख लेखक)का जन्मकाल(janmkaal) एक ही सारणी में समाहित किया गया है हिन्दी के प्रमुख लेखकों(writers) का जन्म के आधार पर कालक्रम विशेष : दोस्तो इस विषय वस्तु से संबन्धित हर एक्जाम में एक या दो प्रश्न अवश्य पूछे जाते है ,इसे आप

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अरस्तू का अनुकरण सिद्धान्त – Arstu ka Anukaran Sidhant | काव्य शास्त्र

अरस्तू का अनुकरण सिद्धान्त

दोस्तो आज की पोस्ट में हम काव्यशास्त्र विषय के अंतर्गत अरस्तू का अनुकरण सिद्धान्त (Arstu ka Anukaran Sidhant)अच्छे से समझेंगे । अरस्तू का अनुकरण सिद्धान्त(Arstu ka Anukaran Sidhant) अरस्तू महान् यूनानी दार्शनिक प्लेटो (427 ई.पू. से 347 ई.पू.) का शिष्य माना जाता है। इनका स्थितिकाल (384 ई.पू. से 322 ई.पू.) निर्धारित किया जाता है। सिकन्दर

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रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय, रचनाएँ और राष्ट्रीय काव्यधारा | Dinkar Jivan Parichay

Ramdhari Singh Dinkar ka Jivan Parichay

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय, रचनाएँ और राष्ट्रीय काव्यधारा (Ramdhari Singh Dinkar Jivan Parichay) हिंदी साहित्य जगत में ‘ओज के कवि’ और ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में प्रतिष्ठित रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) का आधुनिक हिंदी साहित्य में अत्यंत स्वर्णिम और सर्वोच्च स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर

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नवगीत परंपरा || हिन्दी साहित्य || आधुनिक काल

नवगीत परंपरा (navgeet parmpra) हिन्दी में नवगीत की विशुद्ध चर्चा पहली बार राजेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा संपादित गीतांगिनी (1950) में हुई। इन्हें ही ’नवगीत’ की संज्ञा दी जानी चाहिए। गीतांगिनी के संपादकीय को नवगीत का घोषणा-पत्र माना जाना चाहिए। केदारनाथ अग्रवाल तथा ठाकुर प्रसाद सिंह को नवगीत के आरंभकर्ता का श्रेय दिया जाता है। नवगीत

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hindi sahitya || हिन्दी साहित्य प्रमुख पत्र-पत्रिकाएँ || hindi literature

हिन्दी साहित्य प्रमुख पत्र-पत्रिकाएँ (hindi sahity pramukh patr-patrikaen)   इस पोस्ट में हिंदी साहित्य की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं को बताया गया है जो हर परीक्षा में पूछा जाता है   पत्र-पत्रिकाएँ विवरण 1. बंगाल गजट भारत का प्रथम समाचारपत्र (अंग्रेजी में) 2. उदंत मार्तण्ड साप्ताहिक, प्रथम हिंदी पत्र, कलकत्ते से प्रकाशित (30 मई, 1826, संपादक पं.

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