मलिक मुहम्मद जायसी जीवन परिचय 

मलिक मुहम्मद जायसी
जायसी  कृत ’पद्मावत’ में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार ’उत्प्रेक्षा ’ है।

मलिक मुहम्मद जायसी ने अपने पूर्व लिखे गये चार प्रेमाख्यानकों का उल्लेख किया है – 1 मधुमालती, 2 मृगावती 3 मुग्धावती और 4 प्रेमावती।
जायसी  अमेठी के निकट जायस में रहते थे।
जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथ  निम्न हैं –
रचना          विषय
पद्मावत       नागमती, पद्मावती और रत्नसेन की प्रेम कहानी है।
अखरावट     वर्णमाला के एक-एक अक्षर को लेकर सिद्धान्त सम्बन्धी तत्वों से भरी चोपाई  है।
आखिरी कलाम कयामत का वर्णन तथा मुगल बादषाह बाबर की प्रशंसा है
चित्ररेखा      लघु प्रेमाख्यानक
कहरानामा    आध्यात्मिक विवाह का वर्णन है। यह कहरवा शैली  में लिखी है।
मसलानामा    ईश्वर  भक्ति के प्रति प्रेम निवेदन है।
कन्हावत
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल   ने जायसी के द्वारा रचित तीन ग्रंथों – 1 पद्मावत, 2 अखरावट तथा 3 आखिरी कलाम का ही उल्लेख किया है।
आचार्य शुक्ल के अनुसार ’पद्मावत’ की कथा का पूर्वार्द्ध ’कल्पित’ और उत्तरार्द्ध का ’ऐतिहासिक’ है।
 आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा है, ’’कबीर ने केवल भिन्न प्रतीत होती हुई परोक्ष सत्ता  की एकता का आभास दिया था। प्रत्यक्ष जीवन की एकता का । प्रत्यक्ष जीवन की एकता का द्र्श्य  सामने रखने की आवश्यकता बनी थी। यह जायसी द्वारा पूरी हुई।’’
 पद्मावत में प्रयुक्त प्रतीकार्थ निम्न है –
पद्मावत   प्रतीकार्थ
रत्नसेन              मन (आत्मा)
सिंहल                हृदय 
पद्मावती               श्रद्धा या सात्विक बुद्धि (परमात्मा)
सुवा या हीरामन तोता     गुरु
नागमती               दुनिया धंधा या सांसारिक बुद्धि
राघव चेतन          शैतान
अलाउद्दीन           माया

‘पद्मावत’ को प्रतीकात्मक महाकाव्य कहा जाता है।
 जायसी कृत ‘पदमावत’ की भाषा  ठेठ अवधी है।


केवल कृष्ण घोड़ेला

आप सभी का हमारी हिंदी साहित्य की वैबसाइट पर स्वागत है

1 Comment

शालू सिंह · 19/08/2018 at 3:55 PM

Sir आप अभी किस पॉस्ट पर है और आपकी कॉचिंग कहाँ चलती है कृपया बताये हमे हिंदी व्याख्याता बनना है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: कॉपी करना मना है