अंतिम संशोधित (Last Updated): August 27, 2026
स्त्री विमर्श प्रमुख रचनाएँ और पुस्तकें: संपूर्ण सूची (Stree Vimarsh Rachnaye)
Table of Contents
हिंदी साहित्य में ‘स्त्री विमर्श’ (Stree Vimarsh) एक ऐसा वैचारिक और सृजनात्मक आंदोलन है, जो पितृसत्तात्मक व्यवस्था, लैंगिक असमानता, सामाजिक भेदभाव और महिलाओं के अधिकारों, अस्मिता और स्वतंत्रता की बात करता है। आधुनिक हिंदी साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) की दृष्टि से स्त्री विमर्श से जुड़ी प्रमुख पुस्तकें और रचनाकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम स्त्री विमर्श से संबंधित सभी महत्वपूर्ण और पठनीय पुस्तकों की सूची को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं।
📚 स्त्री विमर्श: प्रमुख पठनीय पुस्तकें और उनके लेखक
देह की राजनीति से देश की राजनीति तक — मृणाल पांडे
परिधि पर स्त्री — मृणाल पांडे
दुर्ग द्वार पर दस्तक — कात्यायनी
स्त्री का समय — क्षमा शर्मा
स्त्रीत्व का मानचित्र — अनामिका
हौवा की बेटी — दिव्या जैन
उपनिवेश में स्त्री — प्रभा खेतान
हम सभ्य औरतें — मनीषा
औरत के लिए औरत — नासिरा शर्मा
खुली खिड़कियाँ — मैत्रेयी पुष्पा
औरत के हक में — तसलीमा नसरीन
स्त्री संघर्ष का इतिहास — राधा कुमार
साम्प्रदायिक दंगे और नारी — नूतन सिन्हा
📖 अन्य महत्वपूर्ण स्त्री विमर्श पुस्तकें
संघर्ष के बीच संघर्ष के बीज — इलीना सेन
स्त्रीवादी साहित्य विमर्श — जगदीश्वर चतुर्वेदी
अधीन ज़मीन — उपेन्द्र नाथ अश्क
रेणु की नारी दृष्टि — डॉ. अल्पना तिवारी
चुकते नहीं सवाल — मृदुला गर्ग
नारी प्रश्न — सरला माहेश्वरी
स्वागत है बेटी — विभा देवसरे
जीवन की तनी डोर ये स्त्रियाँ — नीलम कुलश्रेष्ठ
स्त्री पुरुष कुछ पुनर्विचार — राजकिशोर
स्त्री के लिए जगह — सं. राजकिशोर
स्त्रीत्ववादी विमर्श समाज और साहित्य — क्षमा शर्मा
स्त्री : मुक्ति का सपना — सं. प्रो. कमला प्रसाद, राजेन्द्र शर्मा, अतिथि सं. अरविन्द जैन व लीलाधर मंडलोई
धर्म के नाम पर — गीतेश शर्मा
स्त्री उपेक्षिता — सीमोन द बुआ (सिमोन द बोउवार)
विद्रोही स्त्री (The Female Eunuch) — जर्मन ग्रीयर
स्त्री अधिकारों का औचित्य साधन — मेरी वोल्स्टनक्राफ्ट
औरत की कहानी — सं. सुधा अरोड़ा
गुड़िया भीतर गुड़िया — मैत्रेयी पुष्पा
एक गुमशुदा औरत की डायरी — सीमोन द बुआ
बधिया स्त्री — जर्मन ग्रीयर
अपना कमरा (A Room of One’s Own) — वर्जीनिया वुल्फ
एक स्त्री की ज़िंदगी के चौबीस घंटे — स्टीफन ज्विग
🔍 अरविन्द जैन और अन्य लेखकों की प्रमुख कृतियाँ
औरत होने की सजा — अरविन्द जैन
उत्तराधिकार बनाम पुत्राधिकार — अरविन्द जैन
यौन हिंसा और न्याय की भाषा — अरविन्द जैन
न्याय क्षेत्रे अन्याय क्षेत्रे — अरविन्द जैन
बचपन से बलात्कार — अरविन्द जैन
औरत अस्तित्व और अस्मिता — अरविन्द जैन
आदमी की निगाह में औरत — राजेन्द्र यादव
अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य — अर्चना वर्मा
औरत उत्तरकथा — राजेन्द्र यादव
भारत में विवाह संस्था का इतिहास — विश्वनाथ काशीनाथ राजवाड़े
समान नागरिक संहिता — सरला माहेश्वरी
नए आयामों को तलाशती नारी — दिनेश नंदिनी डालमिया
प्राचीन भारत में नारी — डॉ. उर्मिला प्रकाश मिश्र
जो मारे जायेंगे — जया मित्रा
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श की ये रचनाएँ और आलोचनात्मक ग्रंथ केवल महिलाओं के संघर्ष की कहानी नहीं कहते, बल्कि समाज में सदियों से चली आ रही रूढ़ियों, असमानताओं और वैचारिक बंदिशों को चुनौती देते हैं। प्रभा खेतान, मैत्रेयी पुष्पा, मृणाल पांडे और अनामिका जैसी लेखिकाओं ने इस विधा को समृद्ध करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए इन पुस्तकों और लेखकों के नाम याद रखना अत्यंत आवश्यक है।
