आदिकाल साहित्य सम्पूर्ण इतिहास, नामकरण और प्रमुख रचनाएँ | Aadikaal Sahitya

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 27, 2026

आदिकाल साहित्य सम्पूर्ण: इतिहास, नामकरण, रासो, नाथ-सिद्ध साहित्य और प्रमुख रचनाएँ (Aadikaal Sahitya in Hindi)

हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘आदिकाल’ (Virgatha Kal / Aadikaal) को हिंदी भाषा और साहित्य के शैशवकाल के रूप में जाना जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC, KVS, NVS) की दृष्टि से आदिकाल का संपूर्ण इतिहास, नामकरण, विभिन्न संप्रदाय (सिद्ध, नाथ, जैन), रासो साहित्य और लौकिक साहित्य अत्यंत महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक है।

आज के इस विस्तृत आर्टिकल में हम आदिकाल से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों और रचनाओं को क्रमबद्ध रूप से पढ़ेंगे।

🏛️ 1. आदिकाल का नामकरण (Aadikaal ka Naamkaran)

विभिन्न इतिहासकारों ने आदिकाल को अपने-अपने दृष्टिकोण और अध्ययन के आधार पर अलग-अलग नाम दिए हैं:

इतिहासकार / विद्वानआदिकाल का दिया गया नाम
हजारी प्रसाद द्विवेदीआदिकाल
आचार्य रामचंद्र शुक्लवीरगाथा काल
महावीर प्रसाद द्विवेदीबीजवपन काल
रामकुमार वर्मासंधि काल और चारण काल
राहुल सांकृत्यायनसिद्ध-सामन्त काल
मिश्रबंधुआरंभिक काल
गणपति चंद्र गुप्तप्रारंभिक काल / शून्य काल
विश्वनाथ प्रसाद मिश्रवीर काल
धीरेंद्र वर्मा / चंद्रधर शर्मा गुलेरी / बच्चन सिंहअपभ्रंश काल
ग्रियर्सनचारण काल
पृथ्वीनाथ कमल ‘कुलश्रेष्ठ’अंधकार काल
मोहन अवस्थीआधार काल
वासुदेव सिंहउद्भव काल
रामप्रसाद मिश्रसंक्रांति काल
शैलेष जैदीआविर्भाव काल

✒️ 2. हिंदी का सर्वप्रथम कवि (First Poet of Hindi)

विभिन्न विद्वानों ने हिंदी के पहले कवि के रूप में अलग-अलग रचनाकारों को स्वीकार किया है:

  • राहुल सांकृत्यायन के अनुसार: सरहपा (769 ई.)

  • शिवसिंह सेंगर के अनुसार: पुष्प या पुण्ड (10वीं शताब्दी)

  • गणपति चंद्र गुप्त के अनुसार: शालिभद्र सूरि (1184 ई.)

  • रामकुमार वर्मा के अनुसार: स्वयंभू (693 ई.)

  • हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार: अब्दुल रहमान (13वीं शताब्दी)

  • बच्चन सिंह के अनुसार: विद्यापति (15वीं शताब्दी)

  • चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ व रामचंद्र शुक्ल के अनुसार: राजा मुंज (993 ई.)

(नोट: सर्वमान्य रूप से राहुल सांकृत्यायन द्वारा स्वीकृत सिद्ध कवि ‘सरहपा या सरहपाद’ को ही हिंदी का सर्वप्रथम कवि माना जाता है।)

🧘 3. सिद्ध (बौद्ध) साहित्य और प्रमुख कवि

बौद्ध धर्म के वज्रयान तत्व का प्रचार करने के लिए जनभाषा में जो साहित्य लिखा गया, उसे ‘सिद्ध साहित्य’ कहा जाता है। इनकी संख्या 84 मानी गई है।

  • प्रमुख कवि व रचनाएँ:

    • सरहपा: दोहाकोश (769 ई.)

    • लुइपा: लुइपादगीतिका

    • शबरपा: चर्यापद, महामुद्रावज्रगीति, वज्रयोगिनीसाधना

    • कण्हपा: चर्याचर्यविनिश्चय, कण्हपादगीतिका

    • डोंभिपा: डोंबिगीतिका, योगचर्या

  • विशेष तथ्य:

    • सिद्धों की भाषा को मुनि अद्वयवज्र और मुनि दत्त सूरी ने ‘संधा या संध्या भाषा’ कहा है (अर्थात कुछ स्पष्ट और कुछ अस्पष्ट)।

    • सिद्ध साहित्य में ‘उलटबासी’ शैली का पूर्व रूप देखने को मिलता है।

🚩 4. नाथ साहित्य और गोरखनाथ की रचनाएँ

भगवान शिव के उपासक नाथों द्वारा रचे गए साहित्य को नाथ साहित्य कहा जाता है। नाथ पंथ के प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ व गोरखनाथ थे।

  • नाथों की कुल संख्या: 9 (आदिनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ, गोरखनाथ, चर्पटनाथ, गाहणीनाथ, ज्वालाेंद्रनाथ, चौरंगीनाथ, भर्तृहरिनाथ, गोपीचंदनाथ)।

  • गोरखनाथ की प्रमुख रचनाएँ: सबदी (सबसे प्रामाणिक), पद, प्राण संकली, शिष्यादरसन, नरवैबोध, अभैमात्राजोग, आतम-बोध, पन्द्रह-तिथि, सप्तवार आदि।

  • विशेष: डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल ने 1942 ईस्वी में इनकी रचनाओं का संकलन ‘गोरखबानी’ नाम से प्रकाशित करवाया था।

📜 5. रासो साहित्य (Raso Sahitya) और प्रमुख रचनाएँ

वीरगाथात्मक और चारण शैली में रचे गए ग्रंथों को ‘रासो ग्रंथ’ कहा जाता है।

  • प्रमुख रासो रचनाएँ एवं रचनाकार:

    • पृथ्वीराज रासो — चंदबरदाई

    • बीसलदेव रासो — नरपति नाल्ह

    • परमाल रासो — जगनिक

    • हम्मीर रासो — शार्ङ्गधर

    • खुमान रासो — दलपति विजय

    • विजयपाल रासो — नल्लसिंह भाट

📚 6. जैन (रास) साहित्य की प्रमुख रचनाएँ

  • श्रावकाचार — देवसेन (933 ई.) — (इसे हिंदी की प्रथम साहित्यिक रचना भी माना जाता है)

  • भरतेश्वर बाहुबली रास — शालिभद्र सूरि (1184 ई.)

  • चंदनबाला रास — कवि आसगु (1200 ई.)

  • रेवंतगिरि रास — विजय सेन सूरि (1231 ई.)

  • उपदेश रसायन रास — जिन दत्त सूरि

🌐 7. लौकिक गद्य एवं पद्य साहित्य

  • राउलवेल — रोडा कवि (10वीं शताब्दी) — (यह हिंदी की प्राचीनतम गद्य-पद्य मिश्रित चंपू काव्य रचना है, जिसमें नख-शिख वर्णन मिलता है)

  • उक्ति व्यक्ति प्रकरण — पं. दामोदर शर्मा (12वीं शताब्दी)

  • वर्ण रत्नाकर — ज्योतिरीश्वर ठाकुर (इसे मैथिली का विश्वकोश भी कहा जाता है)

  • ढोला मारू रा दुहा — कल्लोल कवि / कुशललाभ

  • अमीर खुसरो: इन्हें ‘तोता-ए-हिन्द’ कहा जाता है। इनकी रचनाओं में खालिकबारी, पहेलियाँ, मुकरियाँ, नूहसिपहर आदि प्रमुख हैं।

📖 8. आदिकालीन अपभ्रंश साहित्य

  • स्वयंभू: पउमचरिउ (अपभ्रंश की रामायण), रिट्ठमेणिचरिउ। (इन्हें ‘अपभ्रंश का वाल्मीकि’ कहा जाता है।)

  • पुष्पदंत: महापुराण, णयकुमारचरिउ, जसहरचरिउ। (इन्हें ‘अपभ्रंश का वेदव्यास’ और ‘अभियानमेरु’ कहा जाता है।)

  • धनपाल: भविसयत्तकहा (इसे विंटरनित्ज ने ‘रोमांटिक महाकाव्य’ कहा है।)

  • अब्दुल रहमान: संदेशरासक (यह किसी भारतीय भाषा में किसी मुस्लिम द्वारा रचित प्रथम धर्मतर प्रेमकाव्य है।)

  • हेमचंद्र: शब्दानुशासन / सिद्ध-हेमचंद्र-शब्दानुशासन (यह एक प्रसिद्ध व्याकरण ग्रंथ है।)

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

हिंदी साहित्य का आदिकाल विविधता, संघर्ष, सांस्कृतिक संक्रमण और लोक-साहित्य के सृजन का काल रहा है। एक तरफ जहाँ रासो ग्रंथों में वीरता और युद्धों का सजीव चित्रण मिलता है, वहीं दूसरी तरफ सिद्ध, नाथ और जैन संतों ने समाज सुधार, योग और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया। प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC NET, TGT, PGT) की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए आदिकाल की ये रचनाएँ और उनके रचनाकार सबसे अधिक अंक दिलाने वाले महत्वपूर्ण बिंदु हैं।

6 thoughts on “आदिकाल साहित्य सम्पूर्ण इतिहास, नामकरण और प्रमुख रचनाएँ | Aadikaal Sahitya”

  1. सर जैसा आदिकाल का पैटन तैयार किया वैसा वाकी कालो का भी कर दो

    1. super sir sattika roopa me pura aadikala ka chitraspashta purvaka vekhatha kiya gaya he….its very helpful too all hindi students and teachers……

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