अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026
हिंदी के प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह: जीवन परिचय, रचनाएँ और कविताएँ (Kedarnath Singh Jivan Parichay)
Table of Contents
समकालीन हिंदी कविता के शीर्षस्थ हस्ताक्षर, मानवीय संवेदनाओं के चितेरे और अपनी सहज भाषा से लोकजीवन को नया स्वर देने वाले महान कवि एवं लेखक केदारनाथ सिंह का आधुनिक हिंदी साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय, उनके काव्य संग्रह (‘अकाल में सारस’, ‘बाघ’), आलोचकीय कृतियाँ और प्रसिद्ध कविताएँ (‘बनारस’, ‘स्त्रियां जब चली जाती हैं’) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
📌 केदारनाथ सिंह का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
| विवरण | तथ्य / विवरण |
| नाम | केदारनाथ सिंह |
| जन्म | 7 जुलाई, 1934 ई. |
| जन्म स्थान | ग्राम चकिया, बलिया (उत्तर प्रदेश) |
| मृत्यु | 19 मार्च, 2018 ई. |
| पेशा / कार्यक्षेत्र | कवि, लेखक, प्राध्यापक |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| माता-पिता | माता—लालझरी देवी, पिता—डोमन सिंह |
| प्रमुख पुरस्कार | साहित्य अकादमी पुरस्कार (1989), ज्ञानपीठ पुरस्कार (2013), व्यास सम्मान |
📖 प्रारंभिक जीवन, शिक्षा और कार्यक्षेत्र
श्री केदारनाथ सिंह का जन्म 7 जुलाई 1934 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गाँव में हुआ था।
उन्होंने वाराणसी के प्रसिद्ध ‘उदय प्रताप कॉलेज’ से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की।
इसके पश्चात उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से हिंदी में एम.ए. और तदंतर पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री हासिल की।
शुरुआती दिनों में वह गोरखपुर में हिंदी शिक्षक के तौर पर अध्यापन कार्य करते रहे और उसके बाद दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के हिंदी विभाग में बतौर प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। वे यहीं से सेवानिवृत्त हुए।
विशेष तथ्य: केदारनाथ सिंह हिंदी कविता के चर्चित और महत्वपूर्ण काव्य संकलन ‘तीसरा सप्तक’ (अज्ञेय द्वारा संपादित) के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी कविताओं के अनुवाद लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन और हंगेरियन जैसी विदेशी भाषाओं में भी हो चुके हैं।
📚 केदारनाथ सिंह का रचना-संसार (Kedarnath Singh Rachnaye)
1. कविता संग्रह
अभी बिल्कुल अभी
जमीन पक रही है
यहाँ से देखो
बाघ (यह उनका एक अत्यंत चर्चित प्रतीकात्मक और लंबा कविता संग्रह है)
अकाल में सारस (इस संग्रह के लिए उन्हें 1989 का प्रतिष्ठित ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ मिला। इसका अंग्रेजी संस्करण ‘क्रेन इन ड्राउट’ नाम से भी प्रकाशित हुआ है)
उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ
टॉल्स्टॉय और साइकिल
2. आलोचना (Criticism)
कल्पना और छायावाद
आधुनिक हिंदी कविता में बिंबविधान
मेरे समय के शब्द
मेरे साक्षात्कार
3. संपादन (Editing)
ताना-बाना (आधुनिक भारतीय कविता से एक चयन)
समकालीन रूसी कविताएँ
कविता दशक
साखी
शब्द
🏆 प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1989): ‘अकाल में सारस’ कविता संग्रह के लिए।
ज्ञानपीठ पुरस्कार (2013): भारतीय साहित्य में उनके समग्र और उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2013 का प्रतिष्ठित 49वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
व्यास सम्मान
अन्य प्रमुख पुरस्कार: मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, दिनकर पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान आदि।
📝 चर्चित कविताएँ एवं उनकी कुछ प्रसिद्ध पंक्तियाँ
1. ‘बाघ’ कविता संग्रह से:
कथाओं से भरे इस देश में
मैं भी एक कथा हूँ
एक कथा है बाघ भी…
वह धीरे से उठता है
और जाकर बैठ जाता है
किसी कथा की ओट में…
2. ‘अकाल में सारस’ से:
भर लो
दूध की धार की
धीमी-धीमी चोटें
दिये की लौ की पहली कँपकँपी
आत्मा में भर लो…
और कवि जी सुनो
इससे पहले कि भूख का हाँका पड़े
और अँधेरा तुम्हें चींथ डाले
भर लो इस पूरे ब्रह्माण्ड को
एक छोटी-सी साँस की डिबिया में भर लो।
3. ‘बनारस’ (अत्यंत चर्चित कविता):
केदारनाथ सिंह की कविता ‘बनारस’ प्राचीन सांस्कृतिक नगर बनारस की जीवंतता, उसकी लय, आस्था और उसके अंतर्विरोधों को अद्भुत रूप से चित्रित करती है:
इस शहर में बसंत
अचानक आता है।
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ से
उठता है धूल का एक बवंडर…
अद्भुत है इसकी बनावट
यह आधा जल में है
आ आधा मंत्र में
आधा फूल में है
आधा शव में…
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टांग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टांग से
बिल्कुल बेखबर!
4. ‘स्त्रियां जब चली जाती हैं’:
गृहस्थी और जीवन में स्त्री की अनिवार्यता को बयां करती उनकी यह एक बेहद मर्मस्पर्शी कविता है:
स्त्रियां
अक्सर कहीं नहीं जातीं
साथ रहती हैं
पास रहती हैं
जब भी जाती हैं कहीं
तो आधी ही जाती हैं…
स्त्रियां जब चली जाती हैं
ना लौटने के लिए
रसोई टुकुर टुकुर देखती है…
तब ही बोध होता है
कि स्त्री कौन होती है
कि जरूरी क्यों होता है
घर मे स्त्री का बने रहना।
🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि
क्र.सं. लेखक / कवि का नाम मुख्य विशेषता / काल इंटरनल लिंक (URL) 1. भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युग लिंक देखें(उदाहरण यूआरएल) 2. महावीर प्रसाद द्विवेदी द्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकार लिंक देखें 3. जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककार लिंक देखें 4. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेता लिंक देखें 5. सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि / छायावाद लिंक देखें 6. महादेवी वर्मा आधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्री लिंक देखें 7. प्रेमचंद (धनपत राय) उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुष लिंक देखें 8. अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक लिंक देखें 9. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कवि लिंक देखें 10. कृष्णा सोबती आधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षर लिंक देखें


