अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026
रीतिकाल के श्रेष्ठ वीररस के कवि ‘भूषण’ का जीवन परिचय, रचनाएँ और काव्य-सौंदर्य (Bhushan Kavi Jivan Parichay)
Table of Contents
हिंदी साहित्य के रीतिकाल में जहाँ एक ओर शृंगारिकता, दरबारी विलासिता और नायिका-भेद का प्राधान्य था, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीयता, शौर्य, पराक्रम और ओज के स्वर को बुलंद करने वाले एकमात्र महाकवि भूषण का स्थान सर्वोपरि है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से कवि भूषण का जीवन परिचय, उनकी रचनाएँ (‘शिवराजभूषण’, ‘शिवाबावनी’, ‘छत्रसाल दशक’) और आलोचकीय कथन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
📌 कवि भूषण का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
जीवनकाल: संवत 1670 – 1772 (जन्म: 1613 ई. – मृत्यु: 1715 ई. के लगभग)
जन्म स्थान: तिकवापुर, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
पिता का नाम: रत्नाकर त्रिपाठी
सहोदर (भाई): मतिराम, चिंतामणि और जटाशंकर
मूल नाम: गणपतिचंद्र गुप्त के अनुसार ‘पतिराम’ या ‘मनीराम’; आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के अनुसार ‘घनश्याम’।
प्रमुख उपाधि: ‘भूषण’ (कहा जाता है कि चित्रकूट के राजा रुद्रशाह सोलंकी ने इन्हें ‘भूषण’ की उपाधि से सम्मानित किया था)।
अन्य प्रसिद्ध मान्यताएँ:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार— “हिन्दू जाति के प्रतिनिधि कवि”।
डॉ. नगेंद्र के अनुसार— “रीतिकाल के विलक्षण कवि”।
आश्रयदाता: छत्रपति शिवाजी, उनके पौत्र शाहूजी एवं छत्रसाल बुंदेला।
📚 कवि भूषण की प्रमुख रचनाएँ (Bhushan Rachnaye)
भूषण की प्रामाणिक रचनाओं में मुख्य रूप से उनके तीन ग्रंथ सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं:
शिवराजभूषण (1673 ई.): यह शिवाजी की प्रशस्ति में रचे गए अलंकारों का एक महान ग्रंथ है। इसमें अलंकारों के लक्षण जयदेव के चंद्रालोक एवं मतिराम के ललितललाम के आधार पर दिए गए हैं तथा उनके उदाहरण शिवाजी की वीरता की प्रशस्ति में रचे गए हैं। इसके लक्षण दोहा छंद में और उदाहरण सवैया छंद में हैं। इसमें कुल 385 पद तथा 105 अलंकार (99 अर्थालंकार, 4 शब्दालंकार, 1 चित्रालंकार और 1 संकर अलंकार) शामिल हैं।
शिवाबावनी: इसमें 52 कवित्तों (छंदों) के माध्यम से छत्रपति शिवाजी के शौर्य और पराक्रम की प्रशस्ति गाई गई है।
छत्रसाल दशक: इसमें बुंदेला राजा छत्रसाल की वीरता और यश का गान करने वाले 10 छंद संकलित हैं।
विशेष नोट: डॉ. नगेंद्र ने ‘अलंकार प्रकाश’ और ‘छंदोहृदयप्रकाश’ को मुरलीधर भूषण की रचना माना है, तथा ‘भूषण उल्लास’, ‘दूषण उल्लास’, और ‘भूषण हजारा’ वर्तमान में अप्राप्य हैं।
✍️ भूषण की प्रमुख काव्य पंक्तियाँ
“वेद राखे विदित पुरान परसिद्ध राखे,
राम नाम राख्यो अति रसना सुधर में।
हिन्दुन की चोटी रोटी राखी है सिपाहिन की,
कांधे में जनेऊ राख्यो माला राखी गर में।।”
“ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी, ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहती है।
कंद मूल भोग करे, कंद मूल भोग करे, तीन बैर खाती थी वे तीन बैर खाती हैं।।” (यमक अलंकार का श्रेष्ठ उदाहरण)
“सचि चतुरंग सेन अंग को उमंग भरि,
सरजा शिवाजी जंग जीतन चलत है।।”
“तेज तम अंश पर, कान्ह जिमि कंस पर,
त्यो म्लेच्छ वंश पर सेर शिवराज है।।” (मालोपमा अलंकार)
“आपस की फूट ही ते सारे हिन्दुआन टूटे,
कट गई नाक सिगरेई दिल्ली दल की।” (मुहावरे का सुंदर प्रयोग)
🗣️ भूषण के संदर्भ में प्रमुख आलोचकीय कथन
आचार्य रामचंद्र शुक्ल:
’’भूषण की भाषा में ओज की मात्रा तो पूरी है पर वह व्याकरण की दृष्टि से कहीं-कहीं अव्यवस्थित है। व्याकरण का उल्लंघन प्रायः है और वाक्य रचना भी कहीं-कहीं गड़बड़ है।’’
आचार्य रामचंद्र शुक्ल:
’’शिवाजी और छत्रशाल की वीरता के वर्णन को कोई कवि की झूठी खुशामद नहीं कह सकता। वे आश्रयदाताओं की प्रशंसा की प्रथा के अनुसरण मात्र नहीं हैं। इन दो वीरों का जिस उत्साह के साथ सारी हिन्दू जनता स्मरण करती है, उसी की व्यंजना भूषण ने की है। वे हिन्दू जाति के प्रतिनिधि कवि हैं।’’
आचार्य रामचंद्र शुक्ल:
’’भूषण के वीर रस के उद्गार सारी जनता के हृदय की संपत्ति हुए।’’
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी:
’’प्रेम-विलासिता के साहित्य का ही उन दिनों प्राधान्य था, उसमें वीर रस की रचना की, यही उनकी विशेषता है।’’
डॉ. नगेंद्र:
’’इनकी वाणी का ओज अपने आप में ऐसा है कि सहृदय आनंद-विभोर होकर वीर रस जनित स्फूर्ति का अनुभव करता है।’’
🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि
क्र.सं. लेखक / कवि का नाम मुख्य विशेषता / काल इंटरनल लिंक (URL) 1. भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युग लिंक देखें(उदाहरण यूआरएल) 2. महावीर प्रसाद द्विवेदी द्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकार लिंक देखें 3. जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककार लिंक देखें 4. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेता लिंक देखें 5. सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि / छायावाद लिंक देखें 6. महादेवी वर्मा आधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्री लिंक देखें 7. प्रेमचंद (धनपत राय) उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुष लिंक देखें 8. अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक लिंक देखें 9. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कवि लिंक देखें 10. कृष्णा सोबती आधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षर लिंक देखें


