अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026
हिंदी के प्रख्यात नाटककार एवं कथाकार मोहन राकेश का संपूर्ण जीवन परिचय और रचनाएँ (Mohan Rakesh ka Jivan Parichay)
Table of Contents
हिंदी गद्य साहित्य में ‘नयी कहानी’ आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तकों और आधुनिक रंगमंच को एक नई दिशा देने वाले महान नाटककार एवं उपन्यासकार मोहन राकेश का आधुनिक हिंदी साहित्य में अत्यंत गौरवशाली स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से मोहन राकेश का जीवन परिचय, उनके नाटक (‘आषाढ़ का एक दिन’, ‘आधे-अधूरे’), उपन्यास और कहानियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
📌 मोहन राकेश का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
| विवरण | तथ्य / विवरण |
| पूरा नाम | मोहन राकेश (मूल नाम: मदन मोहन गुगलानी) |
| जन्म | 8 जनवरी, 1925 ई. |
| जन्म स्थान | अमृतसर, पंजाब |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| मृत्यु | 3 दिसंबर, 1972 ई. |
| व्यवसाय | नाटककार, उपन्यासकार, कथाकार, संपादक |
| शिक्षा | पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी व अंग्रेजी में एम.ए. |
| प्रमुख नाटक | आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, पैरों तले की जमीन |
| प्रमुख उपन्यास | अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल |
| विशिष्ट पहचान | ‘नयी कहानी’ आंदोलन के प्रमुख जनक/स्तंभ |
📚 मोहन राकेश का रचना-संसार (Mohan Rakesh Rachnaye)
मोहन राकेश ने नाटक, उपन्यास, कहानी, निबंध, एकांकी और यात्रा-वृत्तांत जैसी विभिन्न गद्य विधाओं में उत्कृष्ट रचनाएँ दी हैं:
1. नाटक (Dramas)
हिंदी रंगमंच के इतिहास में मोहन राकेश के नाटकों ने मील का पत्थर स्थापित किया है:
आषाढ़ का एक दिन (1958 ई.): यह उनका अत्यंत प्रसिद्ध और प्रथम मौलिक नाटक है, जो कालिदास के जीवन पर आधारित है।
वर्ष 1959 में इसे ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नाटक’ चुना गया।
1968 में इस नाटक के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
लहरों के राजहंस (1963 ई.): यह नाटक अश्वघोष के संस्कृत महाकाव्य ‘सौंदरानंद’ पर आधारित है, जिसमें गौतम बुद्ध के सौतेले भाई ‘नंद’ और उनकी पत्नी ‘सुंदरी’ के मानसिक द्वंद्व को चित्रित किया गया है।
आधे-अधूरे (1969 ई.): यह आधुनिक मध्यमवर्गीय दांपत्य जीवन की ऊब, बिखराव और अधूरेपन का एक अत्यंत सशक्त मनोवैज्ञानिक नाटक है।
पैरों तले की जमीन: यह उनका एक अधूरा नाटक था, जिसे उनके निधन के बाद कमलेश्वर ने पूरा किया।
2. उपन्यास (Novels)
अंधेरे बंद कमरे
न आने वाला कल
अंतराल
बाकलमा खुदा
3. कहानी संग्रह एवं प्रमुख कहानियाँ
मोहन राकेश ‘नयी कहानी’ आंदोलन के प्रवर्तकों में गिने जाते हैं। उन्होंने मानव मन की जटिलताओं और मध्यमवर्गीय यथार्थ को अपनी कहानियों में उकेरा है:
प्रमुख कहानी संग्रह:
इंसान के खंडहर
नये बादल
जानवर और जानवर
एक और जिंदगी
आज के साये
फौलाद का आकाश
डॉक्टर
क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ
पहचान तथा अन्य कहानियाँ
वारिस तथा अन्य कहानियाँ
चर्चित कहानियाँ:
मलबे का मालिक (यह कहानी भारत-विभाजन की विभीषिका पर आधारित एक masterpiece है।)
एक और जिंदगी, जख्म, ठहरा हुआ चाकू, जानवर और जानवर, आर्द्रा, फौलाद का आकाश, अपरिचित, मिसपाल, परमात्मा का कुत्ता, वासना की छाया में।
4. निबंध संग्रह एवं यात्रा-वृत्तांत
निबंध संग्रह: परिवेश
यात्रा-वृत्तांत:
आखरी चट्टान तक (1953 ई.): यह उनका अत्यंत प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत है, जो यात्रा साहित्य में विशिष्ट स्थान रखता है।
5. एकांकी और अनुवाद कार्य
एकांकी: अंडे के छिलके (यह मध्यवर्गीय जीवन के पाखंड पर आधारित एक चर्चित एकांकी है।)
अनुवाद कार्य:
मृच्छकटिकम (संस्कृत नाटक का अनुवाद)
शांकुतलम (कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम का अनुवाद) — इस अनुवाद कार्य के लिए 1968 ई. में उन्हें ‘संगीत नाटक अकादमी’ से पुरस्कृत किया गया था।
🌟 साहित्यिक विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण तथ्य
मोहन राकेश ‘नयी कहानी’ आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं।
उन्होंने प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘सारिका’ का एक वर्ष तक संपादन भी किया था।
वर्ष 1968 में ‘आषाढ़ का एक दिन’ एवं ‘आधे-अधूरे’ नाटकों के लिए संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें पुरस्कृत किया।
🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि
| क्र.सं. | लेखक / कवि का नाम | मुख्य विशेषता / काल | इंटरनल लिंक (URL) |
| 1. | भारतेंदु हरिश्चंद्र | आधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युग | लिंक देखें(उदाहरण यूआरएल) |
| 2. | महावीर प्रसाद द्विवेदी | द्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकार | लिंक देखें |
| 3. | जयशंकर प्रसाद | छायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककार | लिंक देखें |
| 4. | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेता | लिंक देखें |
| 5. | सुमित्रानंदन पंत | प्रकृति के सुकुमार कवि / छायावाद | लिंक देखें |
| 6. | महादेवी वर्मा | आधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्री | लिंक देखें |
| 7. | प्रेमचंद (धनपत राय) | उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुष | लिंक देखें |
| 8. | अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) | प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक | लिंक देखें |
| 9. | रामधारी सिंह ‘दिनकर’ | राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कवि | लिंक देखें |
| 10. | कृष्णा सोबती | आधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षर | लिंक देखें |



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