स्कूल व्याख्याता परीक्षा टेस्ट काव्यशास्त्र 1

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                                    स्कूल व्याख्याता परीक्षा 2019
                                   विषय: हिन्दी
                                 टेस्ट-1 काव्यशास्त्र पार्ट – 1

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1. अरस्तू के अनुकरण से सम्बन्धित धाराणाओं मे असत्य कथन है ?
(अ) कला प्रकृति की अनुकृति है
(ब) काव्य में वस्तु के तीन रूपों का अनुकरण होता है
(स) आनन्द की उपलब्धि आत्म प्रकाशन के बिना सम्भव नहीं होती है
(द) अनुकरण भावात्मक एवं कल्पनात्मक सृजन का पर्याय नहीं है, यथार्थ प्रत्यांकन है।

2. काव्य में अनुकृति की विधि के विषय में अरस्तू ने कितनी शैलियाँ बताई है ?
(अ) 1 (ब) 2
(स) 3 (द) 4

3. अरस्तू के संदर्भ में निम्न में से कथन असत्य है ?
(अ) अरस्तू प्लेटो के गुरु थे
(ब) अरस्तू सिकंदर के गुरु थे
(स) अरस्तू ने लगभग चार सौ ग्रंथों की रचना की
(द) अरस्तू के प्रमुख ग्रंथ काव्यशास्त्र व भाषणशास्त्र नामक ग्रंथ है।

4. अरस्तू के ग्रंथ ’पेरिपोइएतिकेस’ (काव्यशास्त्र) में अध्याय है ?
(अ) 26 (ब) 36
(स) 16 (द) 46

5. अरस्तू कृत ग्रंथ ’काव्यशास्त्र’ में कौनसे अध्यायों को प्रक्षिप्त माना गया है ?
(अ) 6 से 19 (ब) 23 और 24
(स) 21 और 22 (द) 12 और 20

6. प्लेटो के अनुसार कला जगत अनुकरण का अनुकरण होने से सत्य से कितनी दूर है ?
(अ) दौ गुना (ब) तीन गुना
(स) चार गुना (द) पाँच गुना

7. अरस्तू का समय काल माना जाता है ?
(अ) 382-322 ई. पू. (ब) 384-322 ई.पू.
(स) 384-332 ई.पू. (द) 394-322 ई.पू.

8. अरस्तू का कौनसा ग्रंथ भाषण कला से सम्बन्धित है?
(अ) पेरिपोइएतिकेस (ब) तेखनेस रितोरिकेस
(स) वसीयतनामा (द) काव्यशास्त्र

9. अरस्तू के काव्यशास्त्र ग्रंथ में यूनानी शब्द ’मिमेसिस’ का अर्थ है ?
(अ) अभिज्ञान (ब) विरेचन
(स) कार्य व्यापार (द) अनुकरण

10. अरस्तू की काव्य-समीक्षा का आधार था ?
(अ) दर्शन शास्त्र (ब) काव्य शास्त्र
(स) उपयोगितावाद (द) राजनीतिक आधार

11. ’अरस्तू ने काव्य को दार्शनिक, राजनीतिज्ञ तथा नीतिशास्त्र के अत्याचार से मुक्त किया।’ यह कथन है-
(अ) बूचर (ब) पाॅटस
(स) एटकिन्स (द) स्काॅट जेम्स

12. अनुकरण के किस रूप में कलाकार अपनी रुचि, इच्छा श्रेष्ठता के अनुरूप चित्र प्रस्तुत करता है ?
(अ) प्रतीयमान अनुकरण (ब) संभाव्य अनुकरण
(स) आदर्श अनुकरण (द) उपर्युक्त सभी
13. अरस्तू के अनुसार काव्यात्मक अनुकरण जीवन के किस रूप से सम्बद्ध है ?
(अ) अंतरंग रूप (ब) बहिरंग रूप
(स) मध्यरंग रूप (द) अंतर्बाह्य रूप

14. भट्टलोल्लट ने रससूत्र की व्याख्या में ’निष्पत्ति’ का अर्थ निर्धारित किया है –
(अ) उत्पत्ति (ब) अनुमिति
(स) भुक्ति (द) अभिव्यक्ति

15. ’चित्र तुरंग न्याय’ संज्ञा वाली रससूत्र-व्याख्या है –
(अ) साधारणीकरण (ब) आरोपवाद
(स) अनुमितिवाद (द) अभिव्यक्तिवाद

16. रस-सूत्र की कौनसी व्याख्या में साधारणीकरण की कल्पना की गई –
(अ) उत्पत्तिवाद (ब) अभिव्यक्तिवाद
(स) अनुमितिवाद (द) भुक्तिवाद

17. ’साधारणीकरण आलम्बनत्व धर्म का होता है।’ कथन के प्रवक्ता हैं –
(अ) श्यामसुन्दर दास (ब) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(स) नन्द दुलारे वाजपेयी (द) डाॅ. नगेन्द्र

18. सर्वप्रथम रससूत्र की व्याख्या करने वाले आचार्य थे-
(अ) भट्टनायक (ब) भट्टलोल्लट
(स) आचार्य शंकुक (द) अभिनवगुप्त

19. साधारणीकरण के संदर्भ में भट्टनायक का असत्य कथन है –
(अ) साधारणीकरण विभावादि का होता है
(ब) यह भावकत्व व्यापार का प्राण है।
(स) साधारणीकरण रस से पूर्व की प्रक्रिया है।
(द) साधारणीकरण विभावादि का नहीं होता है।

20. कवि की अनुभूति का साधारणीकरण होता है। यह मत है –
(अ) श्यामसुंदर दास (ब) रामचन्द्र शुक्ल
(स) नगेन्द्र (द) जगन्नाथ

21. किसके अनुसार नाटकीय प्रपंच, नाटककार, प्रेक्षक सभी का साधारणीकरण होता है ?
(अ) बाबू गुलाब राय (ब) नगेन्द्र
(स) अभिनवगुप्त (द) भट्टनायक

22. साधारणीकरण का सर्वप्रथम प्रयोग किया –
(अ) भट्टनायक (ब) अभिनवगुप्त
(स) शंकुक (द) विश्वनाथ

23. ’साधारणीकरण में कवि कल्पित समस्त क्रिया व्यापारों का साधारणीकरण होता है –
(अ) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी
(ब) नगेन्द्र
(स) रामचन्द्र शुक्ल
(द) विश्वनाथ

24. निम्न में से सही का चयन करें –
(अ) भट्टलोल्लट – न्याय
(ब) शंकुक – सांख्य
(स) भट्टनायक – मीमांसा
(द) अभिनवगुप्त – वेदांत

25. निम्न में से गलत का चयन करें –
(अ) उत्पत्तिवाद उत्पाद्य-उत्पादक संबंध
(ब) अनुमितिवाद अनुमाप्य-अनुमापक संबंध
(स) भोगवाद उत्पाद्य-उत्पादक संबंध
(द) अभिव्यक्ति व्यंग्य-व्यंजक संबंध

26. साधारणीकरण की व्याख्या करने में ’मधुमती की भूमिका’ की परिकल्पना प्रस्तुत की –
(अ) रामचन्द्र शुक्ल (ब) विश्वनाथ
(स) श्यामसुंदर दास (द) नगेन्द्र

27. भट्टनायक ने रस-प्रक्रिया की अवस्थाएँ मानी –
(अ) दो (ब) तीन
(स) चार (द) छः

28. अनुमित्तिवाद सिद्धान्त के प्रवर्तक है –
(अ) भट्टनायक (ब) शंकुक
(स) अभिनवगुप्त (द) भट्टलोल्लट

29. रस-निष्पत्ति सिद्धान्तों का सही क्रम है –
(अ) उत्पत्तिवाद-अनुमितिवाद-भोगवाद-अभिव्यक्तिवाद
(ब) अनुमितिवाद-भोगवाद-उत्पत्तिवाद-अभिव्यक्तिवाद
(स) भोगवाद-अनुमितिवाद-अभिव्यक्तिवाद-उत्पत्तिवाद
(द) अभिव्यक्तिवाद-उत्पत्तिवाद-भोगवाद-अनुमितिवाद

30. ’ध्वनि प्रस्थापक परमाचार्य’ माना जाता है –
(अ) अभिनवगुप्त (ब) आनन्दवर्द्धन
(स) मम्मट (द) विश्वनाथ

31. प्रतीयमानं पुरन्यदेवं वस्त्वस्ति वाणीषु महाकवीनाम्।
यत् तत् प्रसिद्धावयवातिरिक्तं विभातिलावण्यमिवांगनासु।।
यह परिभाषा दी है –
(अ) आनन्दवर्द्धन (ब) अभिनवगुप्त
(स) विश्वनाथ (द) मम्मट

32. ’’मोती का पानी था वो आनन्द भवन का वासी था
मुसलमान का काबा था, तो हिन्दू की वह काशी था।’’
इन पंक्तियों में ध्वनि का कौनसा भेद है –
(अ) अविक्षित वाच्य ध्वनि
(ब) अर्थन्तार संक्रमित वाच्य ध्वनि
(स) असंलक्ष्यक्रम ध्वनि
(द) संलक्ष्यक्रम ध्वनि

33. निम्नलिखित में से ध्वनि सिद्धान्त का विरोधी नहीं है-
(अ) भट्टनायक (ब) कुंतक
(स) मम्मट (द) धनजंय

34. हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष कृति निम्न में से किस लेखक की है ?
(अ) शिवदान सिंह चैहान (ब) नामवर सिंह
(स) रामविलास शर्मा (द) प्रकाशचन्द गुप्त

35. ’कला और सामाजिक जीवन’ पुस्तक के लेखक है-
(अ) गोर्की (ब) काॅडवेल
(स) जार्ज लुकाच (द) प्लेखानोव

36. माक्र्सवादी चिन्तकों, आलोचकों की कला और साहित्य सम्बंधी मान्यताओं का मूल केन्द्र है –
(अ) ऐतिहासिक भौतिकवाद
(ब) वर्ग-संघर्ष का सिद्धान्त
(स) द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद
(द) अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त

37. लोंजाइनस की रचना ’पेरिइप्सुस’ का अनुवाद इस नाम से हुआ –
(अ) on sublime  (ब) on the subline
(स) on the sublime  (द) on the line
38. लोंजाइनस के अनुसार उदात्त नहीं है –
(अ) उदात्त अभिव्यंजना का प्रकर्ष और वैशिष्ट्य है।
(ब) उदात्त में अभिव्यक्ति की उच्चता श्रोता के तर्क का समाधान नहीं करती बल्कि उसे पूर्णतः सम्मोहित कर लेती है।
(स) उदात्त का कार्य अनुनयन है, सम्मोहन नहीं है, जो यदा-कदा नहीं बल्कि सदा सबको संपूर्णता में सम्मोहित करता है।
(द) उदात्त सर्जनात्मक या रचनात्मक कौशल से भिन्न तत्त्व है, जिसका प्रभाव आकस्मिक बिजली की कौंध के समान होता है, जिसके अलौकिक आलोक से कथ्य चमत्कृत हो उठता है।

39. लोंजाइनस ने निम्न में से कौनसा उदात्त में बाधक तत्त्व नहीं माना है ?
(अ) बालेयता (ब) वागाडम्बर
(स) भावाडंबर (द) गरिमामय रचना-विधान

40. ’’मैं यह बात पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जो आवेग, उन्माद, उत्साह के साथ फूट पङता है और एक प्रकार से वक्ता के शब्दों को विक्षेप से परिपूर्ण कर देता है……….. वह अन्यत्र दुर्लभ है।’’ उद्धरण के लेखक हैं –
(अ) अरस्तू (ब) डाॅ. नगेन्द्र
(स) लोंजाइनस (द) मुंशी प्रेमचन्द

41. औदात्य का मूल आधार है –
(अ) अभ्यास (ब) प्रतिभा
(स) व्युत्पत्ति (द) शैली

42. ’ध्वन्यालोक’ में उद्योत है –
(अ) 1 (ब) 2
(स) 3 (द) 4

43. आनंदवर्द्धन ने निम्न में से कौनसा ध्वनि का प्रकार नहीं माना है ?
(अ) वस्तु ध्वनि (ब) अलंकार ध्वनि
(स) रस ध्वनि (द) रीति ध्वनि

44. ध्वन्यालोक की टीका ’ध्वन्यालोक लोचन’ किसने लिखी ?
(अ) विश्वनाथ (ब) अभिनवगुप्त
(स) आनंदवर्द्धन (द) मम्मट
45. ’चारुत्वोत्कर्ष निबंधना हि वाच्यव्यंग्योः प्राधान्य-विवक्षा कथन किसका है ?
(अ) आनंदवर्द्धन (ब) विश्वनाथ
(स) मम्मट (द) अभिनवगुप्त

46. किस आचार्य ने रस-सूत्र के व्याख्या के संदर्भ में काव्य की तीन शक्तियों की कल्पना की ?
(अ) शंकुक (ब) भट्टनायक
(स) मम्मट (द) अभिनवगुप्त

47. ’रस सिद्धान्त’ नामक ग्रंथ के लेखक है –
(अ) नगेन्द्र (ब) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(स) रामविलास शर्मा (द) नामवर सिंह

48. किस आचार्य के मतानुसार व्यंजना के विभावन व्यापार के द्वारा साधारणीकरण होता है ?
(अ) पंडितराज जगन्नाथ (ब) अभिनवगुप्त
(स) नगेन्द्र (द) आचार्य रामचंद्र शुक्ल

49. रस-विवेचन में ’चित्र तुरंगन्याय’ की कल्पना किसने की ?
(अ) अभिनवगुप्त (ब) भामह
(स) शंकुक (द) भट्टलोल्लट

50. रस-विवेचन के संदर्भ में किस विद्वान ने ’निष्पत्ति का अर्थ ’उपचिति’ किया ?
(अ) भट्टलोल्लट (ब) शंकुक
(स) अभिनवगुप्त (द) भामह

 

 

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उत्तरमाला

स्कूल व्याख्याता परीक्षा 2019
विषय: हिन्दी
टेस्ट-1 काव्यशास्त्र पार्ट – 1

1. (द) – अनुकरण भावात्मक एवं कल्पनात्मक पुनः सृजन का पर्याय है, यथार्थ प्रत्यांकन नहीं।
2. (स)
3. (अ) – अरस्तू दार्शनिक प्लेटो के शिष्य, विश्व विजेता सिकंदर के गुरु थे।
4. (अ)
5. (द)
6. (अ) विचार या प्रत्यय – वस्तु जगत – कला जगत
7. (ब)
8. (ब)
9. (द)
10. (ब)
11. (द)
12. (स)
13 (द)
14. (अ)
15. (स)
16. (द)
17. (ब)
18. (ब)
19. (द)
20. (स)
21. (अ)
22. (अ)
23. (अ)
24. (द)
25. (स)
26. (स)
27. (ब)
28. (ब)
29. (अ)
30. (स)
31. (अ)
32. (द)
33. (स)
34. (अ)
35. (द)
36. (स)
37. (स)
38. (स) – उदात्त का कार्य अनुनयन नहीं है, सम्मोहन है।
39. (द)
40. (स)
41. (ब)
42. (द)
43. (द)
44. (ब)
45. (अ)
46. (ब)
47. (अ)
48. (ब)
49. (स)
50. (अ)

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