अंतिम संशोधित (Last Updated): August 21, 2026
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) का जीवन परिचय और साहित्यिक योगदान
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हिंदी साहित्य के भारतेंदु युग के प्रमुख स्तंभों में से एक बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) का हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में अतुलनीय योगदान रहा है। वे एक कुशल लेखक, निबंधकार, नाटककार और प्रतिष्ठित पत्रकार थे।
इस लेख में हम बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) के जीवनकाल, प्रमुख पत्रिकाओं, काव्यों, नाटकों और उनकी साहित्यिक विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) का जीवन परिचय और विवरण
हिंदी साहित्य के इस महान मनीषी का जीवन और परिचय इस प्रकार है:
जीवनकाल: 1855 – 1923
जन्म स्थल: मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)
उपनाम: ‘अब्र’ (वे उर्दू लेखन में इस उपनाम का प्रयोग करते थे।)
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) की प्रमुख पत्रिकाएँ
प्रेमघन जी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए। उनके द्वारा निकाली गई पत्रिकाएँ निम्नलिखित हैं:
आनंद कादंबिनी (1881): यह मिर्जापुर से प्रकाशित होने वाली एक प्रमुख मासिक पत्रिका थी। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसी पत्रिका से हिंदी में पुस्तकीय आलोचना का सूत्रपात माना है।
नागरी नीरद (1893): यह मिर्जापुर से प्रकाशित होने वाली एक साप्ताहिक पत्रिका थी।
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan) की प्रमुख रचनाएँ
प्रेमघन जी ने काव्य, नाटक और निबंध के क्षेत्र में कई अनमोल कृतियाँ छोड़ी हैं।
1. काव्य रचनाएँ (Poetic Works)
जीर्ण जनपद
आनंद अरुणोदय
हार्दिक हर्षादर्श
मयंक महिमा
अलौकिक लीला
वर्षाबिंदु
लालित्य लहरी
बृजचंद पंचक
युगल स्रोत
पितर प्रताप
होली की नकल
प्रेम पीयूष वर्षा
मन की मौज
मंगलाशा
हास्य बिंदु
भारत बधाई
स्वागत सभा
आर्याभिनंदन
सूर्यस्त्रोत
2. नाटक (Dramas)
भारत सौभाग्य (1888)
प्रयाग रामागमन
वीरांगना रहस्यमहानाटक (वेश्या विनोद महानाटक) – यह नाटक अपूर्ण है।
3. निबंध (Essays)
बनारस का बुढ़वा मंगल
दिल्ली दरबार में मित्र मंडली के यार
4. आलोचना (Criticism)
संयोगितास्वयंवर एवं बंगविजेता की आलोचना ‘आनंद कादंबिनी’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (Badri Narayan Chaudhary Premghan): विशेष प्रसंग और पंक्तियाँ
विशेष: जब दादाभाई नौरोजी को लंदन में ‘काला’ कहा गया, तब प्रेमघन जी ने उनके समर्थन में अपनी अनूठी शैली में यह कविता कही थी:
अचरज होत तुमहुँ राम गोरे बाजत कारे, तासों कारे ‘कारे’ शब्द हुँ पर हैं वारे। कारे कृष्ण, राम जलधर जल बरसनवारे, कारे लागत ताहीं सों कारन कौं प्यारे।
काव्य की प्रमुख पंक्तियाँ:
धन्य भूमि भारत सब रतननि की उपजावनि।
बगियान बसंत बसेरो कियो, बसिए तेहि त्यागि तपाइए ना।
निरथन दिन-दिन होत है, भारत भुव सब भाँति।
भयो भूमि भारत में, महा भयंकर भारत।
निष्कर्ष:
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ केवल एक साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम के सच्चे प्रहरी थे। उनकी पत्रिकाओं और कृतियों ने हिंदीभाषी समाज में वैचारिक क्रांति लाने का कार्य किया। आज भी उनका साहित्य हिंदी के अध्ययन-अध्यापन में विशेष महत्व रखता है।
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