अंतिम संशोधित (Last Updated): September 10, 2026
मोहन राकेश का यात्रा-संस्मरण: ‘आखिरी चट्टान’ (Aakhri Chattan) – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं नोट्स
हिंदी साहित्य और यात्रा-वृत्तान्त विधा के अंतर्गत मोहन राकेश की रचना ‘आखिरी चट्टान’ (Aakhri Chattan) का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) और कॉलेज कक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम कन्याकुमारी के प्राकृतिक सौंदर्य, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिन्द महासागर के संगम से जुड़े सभी महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (MCQs) का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
मोहन राकेश का यात्रा-संस्मरण: ‘आखिरी चट्टान’ – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
घाट पर लोग क्यों एकत्रित थे?
⇒ घाट पर लोग उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्रित थे।
कन्याकुमारी की आबादी कितनी थी?
⇒ आठ हजार।
समुद्र तट पर किस रंग की रेत थी?
⇒ समुद्र तट पर अनेक रंगों की रेत थी, जिन्हें कोई नाम देना सम्भव नहीं था।
‘‘पानी पर दूर तक सोना ही सोना ढूल आया’’ कहने से लेखक का क्या तात्पर्य है?
⇒ लेखक का कहना चाहता है कि सूर्य के गोले के समुद्र की सतह को छूते ही पानी सुनहरा हो गया था।
पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित पीले रेत के टीले का क्या नाम था?
⇒ टीले का नाम ‘सैंड हिल’ था।
कन्याकुमारी में लेखक क्या देखता रहा?
⇒ लेखक समुद्र में उभरी एक चट्टान पर खड़े होकर भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देर तक देख रहा था।
‘आखिरी चट्टान’ किस गद्य विधा की रचना है?
⇒ ‘आखिरी चट्टान’ हिन्दी गद्य की यात्रा वृत्तान्त विधा की रचना है।
कन्याकुमारी भारत के किस राज्य में है?
⇒ भारत के तमिलनाडु राज्य में।
कनानोर के होटल में लेखक क्या भूल आया था?
⇒ कनानोर के होटल में लेखक मोहन राकेश अपने लिखे हुए अस्सी-नब्बे पन्ने भूल आए थे।
लेखक को किन पेड़ों के झुरमुट दिखाई दिए?
⇒ नारियल के पेड़ों के।
विवेकानन्द ने कहाँ समाधि लगाई थी?
⇒ विवेकानन्द ने कन्याकुमारी में सागरों के संगम में स्थित चट्टान पर समाधि लगाई थी।
कन्याकुमारी में किन तीन सागरों का संगम होता है?
⇒ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी तथा हिन्द महासागर का संगम होता है।
सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि किसे कहा जाता है?
⇒ कन्याकुमारी को।
मोहन राकेश ने किस कहानी पत्रिका का सम्पादन किया?
⇒ सारिका।
हिन्दी नाटकों को नई दिशा दिये जाने का श्रेय किस साहित्यकार को जाता है?
⇒ मोहन राकेश को।
सूर्यास्त देखने लोग किस टीले की ओर जा रहे थे?
⇒ सैंडहिल की ओर।
लेखक के आगे कौन युवतियाँ चल रही थीं?
⇒ मिशनरी युवतियाँ।
उस पूरे कैनवास पर छिटके बिन्दुओं की तरह कौन था?
⇒ मिशनरी युवतियाँ।
किस सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था?
⇒ हिंद महासागर की तरफ।
लेखक का मन क्यों बेचैन था?
⇒ कनानोर के होटल में अपने लिखे पन्ने भूल आने के कारण।
लेखक अपने लिखे पन्ने कहाँ भूल आया था?
⇒ कनानोर में।
गीत का स्वर किसका था?
⇒ कान्वेंट की लड़कियों का।
लेखक कनानोर में कितने दिन रहा था?
⇒ सत्रह दिन।
ग्रेजुएट नवयुवक के अनुसार कन्याकुमारी में कितने शिक्षित नवयुवक बेरोजगार थे?
⇒ चार-पाँच सौ।
ग्रेजुएट नवयुवक क्या बेचता था?
⇒ फोटो-एलबम।
‘‘हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धान्तों पर बहस करते हैं।’’ नवयुवक के इस कथन में किन भावों की अभिव्यंजना है?
⇒ लाचारी व बेबसी के भाव।
‘आखिरी चट्टान’ संस्मरण में निहित केन्द्रीय तत्व क्या है?
⇒ प्राकृतिक सौन्दर्य।
किसने लेखक के कागजों को मोड़कर कापियाँ बना ली थीं?
⇒ चौकीदार ने।
आखिरी चट्टान की तरफ जा रही युवतियाँ किस समस्या पर विचार कर रही थीं?
⇒ मोक्ष की समस्या पर।
कन्याकुमारी के नौजवान क्या खाते थे?
⇒ सीपियों का गूदा।
निष्कर्ष (Conclusion):
मोहन राकेश द्वारा रचित यात्रा-वृत्तान्त ‘आखिरी चट्टान’ केवल कन्याकुमारी के प्राकृतिक सौंदर्य और भूगोल का वर्णन भर नहीं है, बल्कि यह लेखक के आंतरिक चिंतन, यात्रा के दौरान हुए अनुभवों और वहाँ के जनजीवन की वास्तविक तस्वीर को भी सहजता से प्रस्तुत करता है। बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिन्द महासागर के संगम स्थल की सुंदरता के साथ-साथ, वहाँ के स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी, लाचारी और जीवन संघर्ष के यथार्थ को इस रचना में बहुत ही सजीव रूप से उकेरा गया है। हिंदी साहित्य में यात्रा-साहित्य की परंपरा और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT) की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत मूल्यवान और प्रासंगिक है।
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धन्यवाद सर