केवल कृष्ण घोड़ेला

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फोर्ट विलियम कॉलेज: स्थापना, संस्थापक, भाषा मुंशी व महत्वपूर्ण तथ्य | Fort William College

फोर्ट विलियम कॉलेज(Fort William College)

फोर्ट विलियम कॉलेज (Fort William College): इसकी स्थापना कोलकाता में 10 जुलाई, 1800 ई. को हुई। इसकी स्थापना गवर्नर लॉर्ड वेलेजली ने करवाई। इस संस्था का पूर्व नाम ऑरिएंटल सेमिनरी था। इसके पहले हिंदी विभाग के प्रोफ़ेसर जॉन गिलक्राइस्ट थे। यहाँ भाषा मुंशी के पद पर लल्लूलाल जी व सदल मिश्र थे। फोर्ट विलियम कॉलेज […]

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चिंतामणि त्रिपाठी का जीवन परिचय और रचनाएँ | Chintamani Ka Jiwan Parichay

चिंतामणि त्रिपाठी का जीवन परिचय

रीतिबद्ध कवि चिंतामणि त्रिपाठी का जीवन परिचय, रचनाएँ और महत्वपूर्ण नोट्स (Chintamani Ka Jiwan Parichay) हिंदी रीतिकाल और गद्य साहित्य के इतिहास में आचार्य चिंतामणि त्रिपाठी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से रीतिकाल के प्रवर्तक कवि चिंतामणि त्रिपाठी का

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सरस्वती पत्रिका | सम्पूर्ण जानकारी | द्विवेदी युग | Saraswati Patrika

सरस्वती पत्रिका

इस आर्टिकल में द्विवेदी युग की चर्चित पत्रिका सरस्वती पत्रिका(Saraswati Patrika) के बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले है सरस्वती पत्रिका – Saraswati Patrika हिन्दी की पहली मासिक पत्रिका। जनवरी माह 1900 ई० में इंडियन प्रेस के संस्थापक बाबू चिंतामणी घोष द्वारा स्थापित और मई 1976 में अंतिम अंक प्रकाशित हुआ। सम्पादक: श्यामसुन्दर दास

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शब्द शक्ति – अभिधा, लक्षणा और व्यंजना | उदाहरणों सहित

शब्द शक्ति

हिंदी व्याकरण और काव्य शास्त्र में अर्थबोध की प्रक्रिया को भली-भांति समझने के लिए शब्द शक्ति((Shabd Shakti) का अध्ययन करना बेहद आवश्यक है। शब्दों के माध्यम से उनके आंतरिक मर्म, वाच्यार्थ, लक्ष्यार्थ और व्यंग्यार्थ को स्पष्ट करने में शब्द शक्तियों (अभिधा, लक्षणा और व्यंजना) की मुख्य भूमिका होती है। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC

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अ की मात्रा वाले शब्द – A ki Matra Wale Shabd

A ki Matra Wale Shabd

आज के आर्टिकल में हम अ की मात्रा वाले शब्द(A ki Matra Wale Shabd) की पूरी जानकारी आपको देंगे। आप आर्टिकल को अच्छे से पढ़ें। अ की मात्रा वाले शब्द – A ki Matra Wale Shabd दोस्तो अगर आप हिंदी सीखनें को उत्सुक हो , तो सही जगह हो आपको इस आर्टिकल में अ की

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#1 नाथ साहित्य – अर्थ , प्रमुख ग्रन्थ , विशेषताएँ | हिंदी साहित्य | Best Notes(2024)

नाथ साहित्य

नाथ साहित्य :  महायान से सहजयान और सहजयान से नाथ सम्प्रदाय का विकास हुआ। सिद्धों की वाममार्गी भोगप्रधान योगसाधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथ पन्थियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई। राहुल सांकृत्यायन नाथपंथ को सिद्धों की परम्परा का ही विकसित रूप मानते हैं। इस पंथ को चलाने वाले मत्स्येन्द्रनाथ तथा गोरखनाथ माने

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पाठ प्रस्तावना कौशल – अर्थ, परिभाषा, प्रस्तावना, लक्षण, मूल्यांकन

पाठ प्रस्तावना कौशल

इस आर्टिकल में हम पाठ प्रस्तावना कौशल(Path Prastavana Kaushal)  के बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले है ,उम्मीद है आपको इस टॉपिक पर सब क्लियर हो जाएगा। प्रस्तावना कौशल – Path Prastavana Kaushal पाठ प्रस्तावना कौशल अर्थ (Skill of Introducing a Lesson) प्रस्तावना कौशल शिक्षण प्रक्रिया की नींव हैं, क्योंकि किसी भी प्रकरण की

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यमक अलंकार: परिभाषा, भेद और 20+ आसान उदाहरण (Tricks के साथ) | Yamak Alankar

यमक अलंकार

काव्यशास्त्र के अंतर्गत यमक अलंकार (Yamak Alankar) शब्दालंकार का एक मुख्य भेद है। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, UGC NET/JRF, TGT/PGT) और स्कूली परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। आज के इस लेख में हम यमक अलंकार की परिभाषा, इसके भेद (अभंग और सभंग यमक) और प्रमुख उदाहरणों को आसान भाषा में समझेंगे। ⚡

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विभावना अलंकार – Vibhavana Alankar | परिभाषा, उदाहरण, पहचान

Vibhavana Alankar

आज के आर्टिकल में हम काव्यशास्त्र के अंतर्गत विभावना अलंकार (Vibhavana Alankar) को विस्तार से पढेंगे ,इससे जुड़ें महत्त्वपूर्ण उदाहरणों को भी पढेंगे। विभावना अलंकार – Vibhavana Alankar लक्षणः- ’’विभावना विनापि स्यात् कारणं कार्य जन्म चेत्।’’ विभावना अलंकार की परिभाषा – Vibhavana Alankar ki Paribhasha हमारे द्वारा जो कोई भी कार्य किया जाता है, उनके पीछे

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मानवीकरण अलंकार: परिभाषा, पहचान और 15+ सरल उदाहरण (Manvikaran Alankar in Hindi)

Manvikaran Alankar

आज के आर्टिकल में हम काव्यशास्त्र के अंतर्गत मानवीकरण अलंकार (Manvikaran Alankar) को विस्तार से पढेंगे ,इससे जुड़ें महत्त्वपूर्ण उदाहरणों को भी पढेंगे। मानवीकरण अलंकार – Manvikaran Alankar परिभाषा – मानवीकरण अलंकार जब प्राकृतिक चीजों में मानवीय क्रियाओं के होने का वर्णन हो भाव हो , तब वहाँ  मानवीकरण अलंकार होता है जब किसी पद में

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