काव्यशास्त्र

काव्यशास्त्र के सिद्धांत और विषय: रस, अलंकार, छंद, शब्दशक्ति, काव्य हेतु, काव्य गुण, रीति, वक्रोक्ति और ध्वनि। हिंदी आलोचना, पाश्चात्य काव्यशास्त्र और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।

अलंकार की परिभाषा – Alankar ki Paribhasha | हिंदी साहित्य

"हिंदी व्याकरण में अलंकार की परिभाषा और महत्व"

अलंकार की परिभाषा: अगर हम अलंकार का शाब्दिक अर्थ देखें तो सजावट या आभूषण होता है। अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है ‘आभूषण।’ जिस प्रकार एक स्त्री अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग करती हैं उसी प्रकार हम काव्य […]

अलंकार की परिभाषा – Alankar ki Paribhasha | हिंदी साहित्य Read More »

वक्रोक्ति अलंकार – Vakrokti Alankar

vakrokti alankar

आज के आर्टिकल में हम काव्यशास्त्र के अंतर्गत वक्रोक्ति अलंकार(Vakrokti Alankar) को विस्तार से पढेंगे ,इससे जुड़ें महत्त्वपूर्ण उदाहरणों को भी पढेंगे। इससे आप आने वाली परीक्षा में इस विषयवस्तु पर बनें प्रश्न को सही कर सकतें है। Vakrokti Alankar – वक्रोक्ति अलंकार वक्रोक्ति अलंकार परिभाषा – Vakrokti Alankar ki Paribhasha वक्रोक्ति शब्द ’वक्र+उक्ति’ के

वक्रोक्ति अलंकार – Vakrokti Alankar Read More »

साधारणीकरण का सिद्धांत (Sadharanikaran ka Siddhant) हिंदी नोट्स

साधारणीकरण का सिद्धांत - अर्थ और विभिन्न आचार्यों के मत

साधारणीकरण का सिद्धांत (Sadharanikaran ka Siddhant): अर्थ, स्वरूप और विभिन्न आचार्यों के मत हिंदी काव्यशास्त्र और रस निष्पत्ति के संदर्भ में साधारणीकरण का सिद्धांत (Sadharanikaran ka Siddhant) अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय विषय है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET/JRF, TGT, PGT और अन्य हिंदी परीक्षाओं) की दृष्टि से इस सिद्धांत और इसके विभिन्न आचार्यों के मतों

साधारणीकरण का सिद्धांत (Sadharanikaran ka Siddhant) हिंदी नोट्स Read More »

अरस्तु – Arstu || दार्शनिक

अरस्तु

⚡ संक्षिप्त उत्तरअरस्तु (Aristotle) यूनान के महान दार्शनिक थे। उनका जन्म 384 ई.पू. में स्टेगिरा में हुआ, वे प्लेटो के शिष्य थे और उनकी काव्यशास्त्रीय कृति पेरिपोएतिकेस (Poetics) पश्चिमी काव्यशास्त्र की आधारशिला मानी जाती है। इसके प्रमुख सिद्धांत हैं अनुकरण (Mimesis) और विरेचन (Catharsis)। हिंदी में भी इन्हीं के आधार पर पाश्चात्य काव्य-चिंतन पढ़ाया जाता

अरस्तु – Arstu || दार्शनिक Read More »

क्रोचे का अभिव्यंजनावाद – काव्यशास्त्र – Hindi Sahitya

क्रोचे का अभिव्यंजनावाद

आज के इस आर्टिकल में क्रोचे का अभिव्यंजनावाद (kroche ka abhivyanjnavad) और इसके संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपके साथ शेयर की जा रही है। आप इस टाॅपिक को अच्छे से पढ़े। क्रोचे का अभिव्यंजनावाद  अभिव्यंजनावाद का प्रारम्भ पाश्चात्य देशों में हुआ है। शैली को प्रभावित प्रदान करने वाले यूरोप में दो वाद प्रचलित हुए-एक तो अभिव्यंजनावाद

क्रोचे का अभिव्यंजनावाद – काव्यशास्त्र – Hindi Sahitya Read More »

रस के प्रकार – हिंदी काव्यशास्त्र

रस के प्रकार

आज के आर्टिकल में हम काव्यशास्त्र के अंतर्गत हम रस के प्रकार (Ras ke Parkar) विषय पर चर्चा करेंगे ,आप इस टॉपिक को अच्छे से तैयार करें । वीर रस दोस्तो वीर रस सभी रसों में प्रधान माना जाता है। इस रस का देवता महेन्द्र माना गया है और इसका वर्ण, सोने के समान गौर

रस के प्रकार – हिंदी काव्यशास्त्र Read More »

काव्यशास्त्र के वस्तुनिष्ठ प्रश्न PDF (MCQ): 279 प्रश्नोत्तरी उत्तर सहित

काव्यशास्त्र 200 प्रश्नोत्तर हिंदी साहित्य

संक्षिप्त उत्तर: यहाँ काव्यशास्त्र (भारतीय और पाश्चात्य) के 279 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर सहित एक ही पेज पर हैं, साथ में 115 वन-लाइनर भी। प्रश्न विषय के अनुसार भागों में बँटे हैं और हर प्रश्न का उत्तर बटन दबाने पर खुलता है। काव्यशास्त्र UGC NET, JRF, TGT, PGT, RPSC और कॉलेज व्याख्याता परीक्षाओं का सबसे

काव्यशास्त्र के वस्तुनिष्ठ प्रश्न PDF (MCQ): 279 प्रश्नोत्तरी उत्तर सहित Read More »

श्लेष अलंकार – परिभाषा, उदाहरण || Shlesh Alankar

श्लेष अलंकार परिभाषा व उदाहरण

आज की पोस्ट में हम अलंकार के अंतर्गत श्लेष अलंकार की परिभाषा व उदाहरण(shlesh alankar ke paribhasha udaharan) पढेंगे  ,आप इसे अच्छे से पढ़ें श्लेष अलंकार की परिभाषा – Shlesh Alankar ki pribhahsa ⇒ श्लेष अलंकार – जब किसी पद में प्रयुक्त एक ही शब्द के अलग-अलग सन्दर्भ के अनुसार अलग-अलग अर्थ प्रयुक्त हो जाते

श्लेष अलंकार – परिभाषा, उदाहरण || Shlesh Alankar Read More »

ध्वनि सिद्धान्त || Dhavni Siddhant || kaavyshastr || Hindi Sahitya

ध्वनि _सिद्धांत_काव्यशास्त्र

दोस्तों आज आप काव्यशास्त्र के अंतर्गत महत्वपूर्ण टॉपिक ध्वनि सिद्धान्त (Dhavni Siddhant)को पढेंगे ,इस विषयवस्तु को विस्तार से समझाया गया है           ध्वनि सिद्धांत: अवधारणा, भेद एवं प्रमुख तथ्य 1. ध्वनि की परिभाषा एवं स्वरूप ध्वनि संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य आनंदवर्धन ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘ध्वन्यालोक’ में ध्वनि को काव्य का सर्वोत्कृष्ट

ध्वनि सिद्धान्त || Dhavni Siddhant || kaavyshastr || Hindi Sahitya Read More »

बिम्ब विधान | कविता में बिम्ब का महत्त्व | Hindi Sahitya Me Bimb

बिम्ब विधान

दोस्तों आज की पोस्ट में हिंदी साहित्य में काव्यशास्त्र के महत्वपूर्ण विषय बिम्ब विधान (Bimb Vidhan) के बारे में  अच्छी तरह से समझाया गया है ,हमें आशा है कि आप इसे अच्छे से समझेंगे | बिम्ब विधान – Bimb Vidhan आज के आर्टिकल में हम क्या सीखेंगे? बिम्ब का अर्थ  बिम्ब क्या होते है ?

बिम्ब विधान | कविता में बिम्ब का महत्त्व | Hindi Sahitya Me Bimb Read More »

Scroll to Top