हिंदी साहित्य

हिंदी रिपोर्ताज – रिपोर्ताज के उदाहरण

दोस्तो आज की पोस्ट मे हम प्रमुख हिंदी रिपोर्ताज(Hindi Riportaj)  की जानकारी आपको शेयर करेंगे , आप अच्छे से इसे पढ़ें हिंदी रिपोर्ताज- Hindi Riportaj 1. रिपोर्ताज फ्रांसीसी शब्द हैं। 2. विश्व में रिपोर्ताज के जनक-रुसी साहित्यकार इलिया एहरेनवर्ग है 3. हिंदी में रिपोर्ताज के जनक शिवदान सिंह चौहान को माना जाता है रुपाभ(पन्त की) […]

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पत्रकारिता लेखन के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

. दोस्तों आज की इस पोस्ट में पत्रकारिता लेखन के महत्वपूर्ण प्रश्नों का संकलन दिया जा रहा है जो आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने वाला है समाचार किसे कहते हैं ?उत्तर- नवीन जानकारी प्राप्त करना ही समाचार है | समाचार-पत्र क्या होता है ?उत्तर- वह पत्र जिसमें प्रतिदिन ताज़े समाचार, विज्ञापन, टिप्पणियाँ, संपादक

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कबीर के काव्य में भावपक्ष – Hindi Sahitya

कबीर के काव्य में भावपक्ष

आज की पोस्ट में हम हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में कबीर के काव्य में भावपक्ष(Kabir ke kavy me bhavpaksh) की चर्चा करेंगे ,ताकि आप इसे अच्छे से समझ सकें | कबीर के काव्य में भावपक्ष कबीर निरक्षर थे वे शास्त्रज्ञ विद्वान् नहीं थे, तथापि कविता रचना के लिए बङी-बङी उपाधियों की आवश्यकता न पहले होती

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यात्रा वृतान्त || hindi sahitya || हिंदी साहित्य का इतिहास

आज की पोस्ट में हम हिंदी साहित्य की विधा के अंतर्गत परीक्षापयोगी  यात्रा वृतान्त पढेंगे ,इस विषयवस्तु को ध्यानपूर्वक पढ़ें  यात्रा-वृतान्त(yaatra-vrtaant)   यात्रा-वृतान्त, ’यात्रा-वृत्त’ हिन्दी गद्य की एक रोचक विधा है। जीवन दृष्टि और भाषा पर अधिकार-यात्रा वृतान्त लेखक के दो महत्त्वपूर्ण गुण है। राहुल सांकृत्यायन ने घुमक्कड़ी को धर्म का दर्जा दिया है। वे लिखते

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संस्मरण क्या है -हिंदी साहित्य का इतिहास

संस्मरण क्या है

संस्मरण- अर्थ और स्वरूप- व्युत्पत्ति की दृष्टि से संस्मरण शब्द ’स्मृ’ धातु में सम् उपसर्ग एवं ल्युट् प्रत्यय लगने से बना है। इस प्रकार संस्मरण का शाब्दिक अर्थ है सम्यक् स्मरण। सम्यक् का अर्थ है पूर्णरूपेण। इस प्रकार संस्मरण का शाब्दिक अर्थ है किसी व्यक्ति, घटना, दृश्य, वस्तु आदि का आत्मीयता और गम्भीरतापूर्वक रचे गये

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प्रयोजनमूलक हिंदी क्या है? अर्थ, उद्देश्य, राजभाषा और संपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Prayojanmulak Hindi)

Prayojanmulak hindi

प्रयोजनमूलक हिंदी: अर्थ, उद्देश्य, संवैधानिक प्रावधान और संपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Prayojanmulak Hindi) क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम किसी सरकारी दफ्तर में जाते हैं, बैंक का कोई फॉर्म भरते हैं, टीवी पर समाचार सुनते हैं या किसी कानूनी दस्तावेज को पढ़ते हैं, तो वहाँ की हिंदी हमारी आम बोलचाल की हिंदी से थोड़ी अलग

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हिंदी साहित्य का काल विभाजन एवं नामकरण – Hindi Sahitya ka Itihas

हिंदी साहित्य का काल विभाजन एवं नामकरण

आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य का काल विभाजन एवं नामकरण (Hindi Sahitya ka Kaal Vibhajan aur Naamkaran) की के इतिहास को पढेंगे ।आर्टिकल को पढ़कर नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरुर लिखें । हिंदी साहित्य का काल विभाजन एवं नामकरण   दोस्तो साहित्य इतिहासकारों ने इतिहास लेखन में कई पद्धतियों को काम

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राजेन्द्र यादव -जीवन परिचय || Rajendra Yadav || हिंदी साहित्य

Rajendra Yadav

आज की पोस्ट में हम हिंदी के चर्चित लेखक राजेन्द्र यादव(Rajendra Yadav) जीवन परिचय के बारे में विस्तृत जानकारी पढेंगे ,इनसे जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया गया है | राजेन्द्र यादव का जीवन परिचय – Rajendra Yadav प्रथम उपन्यास राजेन्द्र यादव कृत प्रथम उपन्यास ’प्रेत बोलते है’ है। जो सन् 1951 ई. में प्रकाशित

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कामायनी में महाकाव्यात्मक लक्षण – जयशंकर प्रसाद

कामायनी में महाकाव्यात्मक लक्षण

Read: कामायनी में महाकाव्यात्मक लक्षण, आज के आर्टिकल में हम जयशंकर प्रसाद की चर्चित रचना कामायनी पर चर्चा करेंगे ,हम यह जानेंगे कि इस रचना में महाकाव्य के कौन -कौन से लक्षण है। कामायनी में महाकाव्यात्मक लक्षण मुख्यत:  कामायनी छायावाद की मूल कृति है। उसमें छायावादी काव्य-कृति के समस्त गुण अत्यन्त परिष्कृत रूप में मिलते

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हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम – Hindi sahitya

हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम

हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम (Hindi Sahitya ke Itihas me Kaviyon ke Upnaam) हिंदी साहित्य के इतिहास में विभिन्न रचनाकारों को उनकी अनूठी शैली, विशिष्ट योगदान और रचनाओं के आधार पर कई महत्वपूर्ण उपनाम, उपाधियाँ और विशेषण प्रदान किए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) की दृष्टि से हिंदी साहित्यकारों और

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