अंतिम संशोधित (Last Updated): October 11, 2026
भक्तिकाल MCQ in Hindi का यह दूसरा भाग सगुण भक्ति धारा पर है: रामभक्ति शाखा और कृष्णभक्ति शाखा। तुलसीदास, रामचरितमानस, अग्रदास, नाभादास, केशवदास, सूरदास, अष्टछाप, नंददास, मीराबाई, रसखान और रहीम से जुड़े भक्ति काल के वस्तुनिष्ठ प्रश्न यहाँ उत्तर सहित दिए गए हैं। साथ में वैष्णव आचार्यों (रामानुज, मध्व, निम्बार्क, वल्लभ, रामानंद) और उनके दर्शनों के प्रश्न भी हैं, जो UGC NET, RPSC, TGT और PGT में बार-बार पूछे जाते हैं।
इस पेज पर सगुण धारा के 234 चुने हुए MCQ हैं, जो पाँच खंडों में बँटे हैं: वैष्णव आचार्य और सम्प्रदाय, तुलसीदास, अन्य रामभक्त कवि, सूरदास और अष्टछाप, तथा अन्य कृष्णभक्त कवि। हर प्रश्न का उत्तर सोचें, फिर “✅ उत्तर देखें” दबाकर मिलान करें। निर्गुण धारा (संत और सूफी) के प्रश्न भक्तिकाल MCQ भाग 1 में हैं।
सीधे खंड पर जाएँ:
भक्तिकाल सगुण धारा प्रश्नोत्तरी: एक नज़र में
Table of Contents
| खंड | विषय | प्रश्न |
| खंड 1 | भक्ति आंदोलन, वैष्णव आचार्य और सम्प्रदाय | 16 |
| खंड 2 | गोस्वामी तुलसीदास और रामचरितमानस | 79 |
| खंड 3 | रामभक्ति शाखा के अन्य कवि | 24 |
| खंड 4 | सूरदास और अष्टछाप | 87 |
| खंड 5 | कृष्णभक्ति के अन्य सम्प्रदाय और कवि (मीरा, रसखान, रहीम) | 28 |
वैष्णव आचार्य, दर्शन और सम्प्रदाय: एक नज़र में
| आचार्य | दर्शन | सम्प्रदाय |
| रामानुजाचार्य | विशिष्टाद्वैतवाद | श्री सम्प्रदाय |
| मध्वाचार्य | द्वैतवाद | ब्रह्म सम्प्रदाय |
| निम्बार्काचार्य | द्वैताद्वैतवाद | सनकादि (हंस) सम्प्रदाय |
| विष्णुस्वामी / वल्लभाचार्य | शुद्धाद्वैतवाद | रुद्र सम्प्रदाय / पुष्टिमार्ग |
| चैतन्य महाप्रभु | अचिंत्य भेदाभेदवाद | गौड़ीय सम्प्रदाय |
| रामानंद | विशिष्टाद्वैतवाद | रामावत सम्प्रदाय |
अपना स्कोर कैसे जाँचें: हर खंड हल करते समय सही उत्तरों की गिनती रखें। 80% से ज़्यादा सही हों, तो वह खंड परीक्षा के लिए तैयार है; उससे कम हों, तो उस खंड के नोट्स दोबारा पढ़ें।
खंड 1: भक्ति आंदोलन, वैष्णव आचार्य और सम्प्रदाय
(अ) ईसाई धर्म का प्रभाव
(ब) हिन्दुओं की पराजित मनोवृत्ति
(स) गीता की भक्तियोग
(द) इनमें से कोई नहीं
(अ) जीव और ब्रह्म एक है
(ब) जीव और ब्रह्म अलग-अलग हैं
(स) संसार सत्य है
(द) जीव ब्रह्म का प्रतिबिम्ब है
(क) अद्वैत वेदान्त | 1. मध्वाचार्य
(ख) विशिष्टाद्वैत | 2. रामानुज
(ग) द्वैतवाद | 3. शंकराचार्य
(घ) शुद्धाद्वैतवाद | 4. विष्णुस्वामी
5. निम्बार्काचार्य
कूटः
(अ) 3 2 1 4
(ब) 4 2 5 1
(स) 1 4 2 5
(द) 3 1 2 4
क. इस काल में सर्वाधिक साहित्य रचा गया
ख. इस काल में साहित्य की सभी विधाओं में साहित्य सृजन हुआ
ग. इस काल की रचनाएँ अत्यन्त लोकप्रिय एवं उत्कृष्ट हैं
घ. इस काल में हिन्दी को राजभाषा पद मिला
कूटः
(अ) क, ख और ग
(ब) केवल ग
(स) ख, ग और घ
(द) क और ग
(क) शंकराचार्य | 1. विशिष्टाद्वैतवाद
(ख) वल्लभाचार्य | 2. द्वैताद्वैतवाद
(ग) रामानुजाचार्य | 3. अद्वैतवाद
(घ) निम्बार्क | 4. शुद्धाद्वैतवाद
कूट
(अ) 3 4 1 2
(ब) 2 3 1 4
(स) 2 4 1 3
(द) 3 4 2 1
(क) श्रीसंप्रदाय | 1. निम्बार्क
(ख) ब्रह्म संप्रदाय | 2. विष्णु स्वामी
(ग) रुद्र संप्रदाय | 3. मध्वाचार्य
(घ) सनक संप्रदाय | 4. रामानुज
5. हितहरिवंश
कूट
(अ) 4 3 2 1
(ब) 1 2 3 5
(स) 5 4 1 2
(द) 2 1 5 3
(अ) हरिदास निरंजनी
(ब) लालदास
(स) हितहरिवंश
(द) चैतन्य महाप्रभु
(अ) दक्षिण भारत पूर्णतः निरापद था
(ब) दक्षिण भारत में ईसाइयों का प्रभाव था
(स) उत्तर भारत के लोग शैक्षणिक रूप से पिछड़े थे
(द) दक्षिण भारत पर मुस्लिम शासकों के अनगिनत अत्याचार हुए थे
(क) समय — 1. साकेत
(ख) काण्ड — 2. पद्मावत
(ग) खंड — 3. रामचरित मानस
(घ) सर्ग — 4. पृथ्वीराज रासो
5. कबीर ग्रंथावली
कूटः
(अ) 4 3 2 1
(ब) 2 3 4 5
(स) 1 2 3 4
(द) 3 2 1 4
(क) वल्लभाचार्य — 1. विशिष्टाद्वैतवाद
(ख) निम्बार्काचार्य — 2. अद्वैतवाद
(ग) रामानुजाचार्य — 3. द्वैतवाद
(घ) मध्वाचार्य — 4. द्वैताद्वैतवाद
5. शुद्धाद्वैतवाद
कूटः
(अ) 5 4 1 3
(ब) 1 2 4 3
(स) 3 4 1 2
(द) 2 1 4 5
📖 इस खंड के नोट्स पढ़ें: भक्तिकाल के प्रमुख आलोचनात्मक कथन अगला खंड ⬇️
खंड 2: गोस्वामी तुलसीदास और रामचरितमानस
(अ) अरण्यकाण्ड – उत्तरकाण्ड
(ब) किष्किन्धाकाण्ड- लंकाकाण्ड
(स) अयोध्याकाण्ड – अरण्यकाण्ड
(द) लंकाकाण्ड – उत्तरकाण्ड
(अ) गीतावली
(ब) कृष्णगीतावली
(स) कवितावली
(द) विनयपत्रिका
(अ) विनयपत्रिका
(ब) कवितावली
(स) रामचरितमानस
(द) अ तथा ब दोनों
(अ) मदनाष्टक
(ब) दोहावली
(स) बरवैनायिका भेद
(द) खेटकौतुक जातकम्
(अ) गोरखनाथ
(ब) तुलसीदास
(स) सरहपा
(द) कबीरदास
(अ) रैदास
(ब) तुलसीदास
(स) कबीर
(द) नानक
(अ) नामवर सिंह
(ब) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(स) रामविलास शर्मा
(द) रामचन्द्र शुक्ल
(अ) रहीम
(ब) नाभादास
(स) तुलसीदास
(द) अग्रदास
(अ) दीनदयाल गुप्त
(ब) डॉ. नगेन्द्र
(स) आचार्य शुक्ल
(द) गणपतिचन्द्र गुप्त
(अ) नाभादास
(ब) रामविलास शर्मा
(स) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(द) रामचन्द्र शुक्ल
📖 इस खंड के नोट्स पढ़ें: तुलसीदास का जीवन परिचय • तुलसीदास की रचनाओं की ट्रिक अगला खंड ⬇️
खंड 3: रामभक्ति शाखा के अन्य कवि
(अ) प्रियादास
(ब) अग्रअली
(स) रामानन्द
(द) ईश्वरदास
(अ) बंगला
(ब) तमिल
(स) गुजराती
(द) तेलगु
(अ) अनंतानद
(ब) द्वारकादास
(स) कृष्णदास
(द) सुरसुरानंद
(अ) 52
(ब) 57
(स) 7
(द) 39
(अ) अग्रदास
(ब) नाभादास
(स) नंददास
(द) नरोत्तमदास
(अ) रामचरितमानस
(ब) वाल्मीकि रामायण
(स) जानकीमंगल
(द) पार्वतीमंगल
(अ) लालचदास
(ब) लालदास
(स) रामदास
(द) हरिदास
(अ) जीवाराम
(ब) दयाबाई
(स) अग्रदास
(द) नाभादास
(अ) तत्त्सुखी शाखा के भक्तो के लिये
(ब) सखी भाव के भक्तो के लिये
(स) निर्गुण संतों के लिये
(द) कृष्ण भक्तों लिये
(अ) रामानंद जी, अनंतानंद जी, कृष्णदास, नाभादास, अग्रदास
(ब) रामानंद जी, अनंतानंद जी, कृष्णदास, अग्रदास, नाभादास
(स) रामानंद जी, कृष्णदास, अग्रदास, अनंतानंद, नाभादास
(द) कृष्णदास, रामानंद, अग्रदास, अनंतानंद, नाभादास
📖 इस खंड के नोट्स पढ़ें: रामभक्ति शाखा • केशवदास का जीवन परिचय अगला खंड ⬇️
खंड 4: सूरदास और अष्टछाप
(अ) सूर, कुम्भन, परमानन्द, कृष्णदास
(ब) नन्ददास, सूर, छीतस्वामी, कुम्भन
(स) सूर, चतुर्भुजदास, परमानन्द, नन्ददास
(द) कृष्णदास, सूर, नन्ददास, छीतस्वामी
(अ) गीता
(ब) महाभारत
(स) गाथा सप्तशती
(द) भागवत पुराण
(अ) गोपियों का विरह वर्णन
(ब) सगुण भक्ति की प्रतिष्ठा
(स) कृष्ण के प्रति गोपियों की प्रेम व्यंजना
(द) उक्ति-वैचित्र्य का प्रदर्शन
(अ) गोपियों का वाक्चातुर्य
(ब) एकनिष्ठ प्रेम की व्यंजना
(स) यशोदा का वात्सल्य
(द) विरह की मार्मिकता
(अ) चैतन्य सम्प्रदाय
(ब) गौड़ीय सम्प्रदाय
(स) हरिदासी सम्प्रदाय
(द) वल्लभ सम्प्रदाय
(अ) विट्ठलनाथ
(ब) सूरदास
(स) कुम्भनदास
(द) नन्ददास
(अ) कांची पूर्ण
(ब) वल्लभाचार्य
(स) विट्ठलनाथ
(द) शंकराचार्य
(अ) चतुर्भुजदास ने
(ब) विट्ठलनाथ ने
(स) गोकुलनाथ ने
(द) परमानंददास ने
(अ) पुष्टिमार्ग भक्ति
(ब) सूरसागर
(स) साहित्य लहरी
(द) सूरसारावली
(अ) चौपाई-दोहा
(ब) सवैया
(स) कवित्त
(द) रोला
📖 इस खंड के नोट्स पढ़ें: सूरदास का जीवन परिचय • सूरदास की काव्यगत विशेषताएँ • भ्रमरगीत परंपरा • नंददास अगला खंड ⬇️
खंड 5: कृष्णभक्ति के अन्य सम्प्रदाय और कवि (मीरा, रसखान, रहीम)
(अ) रसखान
(ब) कबीर
(स) नामदेव
(द) मीरा
(अ) राजा आसकरण
(ब) पद्मनाथ
(स) पृथ्वीराज
(द) राजसमुद्र
(अ) नीति है
(ब) भक्ति है
(स) उपदेश है
(द) उपरोक्त सभी हैं
(अ) कबीर
(ब) रहीम
(स) रसखान
(द) दादू दयाल
(अ) सैयद इब्राहिम
(ब) अमीर बिस्मिलाह
(स) बलिद्दय
(द) महेश दत्त
(अ) राजस्थानी भाषा का प्रयोग हुआ है
(ब) अवधी का प्रयोग हुआ है
(स) खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है
(द) उपरोक्त सभी
(अ) खड़ी बोली में
(ब) अवधी में
(स) ब्रजभाषा में
(द) भोजपुरी में
(अ) खड़ी बोली में है
(ब) ब्रजभाषा में है
(स) अवधी में है
(द) खिचड़ी भाषा में है
(अ) सन् 1556-1627
(ब) सन् 1500-1575
(स) सन् 1495-1570
(द) सन् 1580-1640
(अ) हित हरिवंश गोस्वामी
(ब) हरिराम व्यास
(स) दामोदर व्यास
(द) हरिदास निरंजनी
📖 इस खंड के नोट्स पढ़ें: कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियाँ • मीराबाई का जीवन परिचय • रसखान का जीवन परिचय • रसखान के सवैये
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