motivational stories in hindi || motivational stories in hindi for success

इस पेज पर आपको शिक्षाप्रद कहानियाँ (motivational stories in hindi)मिलेगी ,जो आपके जीवन को बदल सकती है ,बहुत ही मर्मस्पर्शी व् मोटिवेशन की कहानियाँ जरुर पढ़ें 

motivational stories in hindi

  1. माँ का तोहफ़ा

एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, “ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।” कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी माँ पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, “सुमन , तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए?

सुमन बोली, “नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े……. इसमें पूछने वाली क्या बात है?

यह बात नहीं है सुमन …… माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो… औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी सुमन …और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

सुदेश माँ के पास जाकर बोला, “माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..

माँ बीच में ही बोल पड़ी, “मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।”

सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए…..

सुदेश के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, “ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।” कहकर सुदेश की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सुदेश को थमा दी।……

सुदेश ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, “देखा सुमन , माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।”

अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर सुमन कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद सुमन बोली, “अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।”

अरे सुमन , तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।

देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ….. पता नहीं क्या – क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो श्रवण कुमार, कहते हुए सुमन गुस्से से सुदेश की ओर देखने लगी।

पर ये क्या? सुदेश की आँखों में आँसू…….. और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था….. पूरा शरीर काँप रहा था।

सुमन बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सुदेश के हाथ से पर्ची झपट ली….

हैरान थी सुमन भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे…..

पर्ची में लिखा था….

“बेटा सुदेश मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो…… तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो फ़ुरसत के कुछ पल मेरे लिए लेते आना…. ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सुदेश , मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल – पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर…. जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है….. पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सुदेश ।…… तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।…. बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ…. कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर….और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ…..

पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते – पढ़ते सुमन फफक-फफक कर रो पड़ी…..

ऐसी ही होती हैं माँ…..

दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।…उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।

कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए और…..

  हिंगलिश में पढ़ें                  ⇓⇓             1. maan ka tohafa

ek dampatee deepaavalee kee khareedaaree karane ko hadabadee mein tha. pati ne patnee se kaha, “zaldee karo, mere paas taeem nahin hai.” kah kar kamare se baahar nikal gaya. tabhee baahar lon mein baithee maan par usakee nazar padee. kuchh sochate hue vaapas kamare mein aaya aur apanee patnee se bola, “suman , tumane maan se bhee poochha ki unako divaalee par kya chaahie? suman bolee, “nahin poochha. ab unako is umr mein kya chaahie hoga yaar, do vakt kee rotee aur do jodee kapade……. isamen poochhane vaalee kya baat hai? yah baat nahin hai suman …… maan pahalee baar divaalee par hamaare ghar mein rukee huee hai. varana to har baar gaanv mein hee rahatee hain. to… aupachaarikata ke lie hee poochh letee. are itana hee maan par pyaar umad raha hai to khud kyon nahin poochh lete? jhallaakar cheekhee thee suman …aur kandhe par haind baig latakaate hue tezee se baahar nikal gayee. sudesh maan ke paas jaakar bola, “maan, ham log divaalee kee khareedaaree ke lie baazaar ja rahe hain. aapako kuchh chaahie to.. maan beech mein hee bol padee, “mujhe kuchh nahin chaahie beta.” soch lo maan, agar kuchh chaahiye to bata deejie….. sudesh ke bahut zor dene par maan bolee, “theek hai, tum ruko, main likh kar detee hoon. tumhen aur bahoo ko bahut khareedaaree karanee hai, kaheen bhool na jao.” kahakar sudesh kee maan apane kamare mein chalee gaeen. kuchh der baad baahar aaeen aur list sudesh ko thama dee……. sudesh draiving seet par baithate hue bola, “dekha suman , maan ko bhee kuchh chaahie tha, par bol nahin rahee theen. mere zid karane par list bana kar dee hai. insaan jab tak zinda rahata hai, rotee aur kapade ke alaava bhee bahut kuchh chaahiye hota hai.” achchha baaba theek hai, par pahale main apanee zaroorat ka saara saamaan loongee. baad mein aap apanee maan kee list dekhate rahana. kahakar suman kaar se baahar nikal gayee. pooree khareedaaree karane ke baad suman bolee, “ab main bahut thak gayee hoon, main kaar mein a/ch chaaloo karake baithatee hoon, aap apanee maan ka saamaan dekh lo.” are suman , tum bhee ruko, phir saath chalate hain, mujhe bhee zaldee hai. dekhata hoon maan ne is divaalee par kya mangaaya hai? kahakar maan kee likhee parchee zeb se nikaalata hai. baap re! itanee lambee list, ….. pata nahin kya – kya mangaaya hoga? zaroor apane gaanv vaale chhote bete ke parivaar ke lie bahut saare saamaan mangaaye honge. aur bano shravan kumaar, kahate hue suman gusse se sudesh kee or dekhane lagee. par ye kya? sudesh kee aankhon mein aansoo…….. aur list pakade hue haath sookhe patte kee tarah hil raha tha….. poora shareer kaanp raha tha. suman bahut ghabara gayee. kya hua, aisa kya maang liya hai tumhaaree maan ne? kahakar sudesh ke haath se parchee jhapat lee…. hairaan thee suman bhee. itanee badee parchee mein bas chand shabd hee likhe the….. parchee mein likha tha…. “beta sudesh mujhe divaalee par to kya kisee bhee avasar par kuchh nahin chaahie. phir bhee tum zid kar rahe ho to…… tumhaare shahar kee kisee dukaan mein agar mil jae to furasat ke kuchh pal mere lie lete aana…. dhalatee huee saanjh hoon ab main. sudesh , mujhe gaharaate andhiyaare se dar lagane laga hai, bahut dar lagata hai. pal – pal meree taraf badh rahee maut ko dekhakar…. jaanatee hoon taala nahin ja sakata, shaashvat sat‍ya hai….. par akelepan se bahut ghabaraahat hotee hai sudesh ……. to jab tak tumhaare ghar par hoon, kuchh pal baitha kar mere paas, kuchh der ke lie hee sahee baant liya kar mere budhaape ka akelaapan….. bin deep jalae hee raushan ho jaegee meree jeevan kee saanjh…. kitane saal ho gae beta tujhe sparsh nahin kiya. ek baar phir se, aa meree god mein sar rakh aur main mamata bharee hathelee se sahalaoon tere sar ko. ek baar phir se itarae mera hrday mere apanon ko qareeb, bahut qareeb pa kar….aur muskura kar miloon maut ke gale. kya pata agalee divaalee tak rahoon na rahoon….. parchee kee aakhiree lain padhate – padhate suman phaphak-phaphak kar ro padee….. aisee hee hotee hain maan….. dosto, apane ghar ke un vishaal hrday vaale logon, jinako aap boodhe aur budhiya kee shrenee mein rakhate hain, ve aapake jeevan ke kalpataru hain. unaka yathochit aadar-sammaan, seva-sushrusha aur dekhabhaal karen. yaqeen maanie, aapake bhee boodhe hone ke din nazadeek hee hain….usakee taiyaaree aaj se hee kar len. isamen koee shaq nahin, aapake achchhe-bure krty der-saver aap hee ke paas laut kar aane hain.. kahaanee achchhee lagee ho to krpaya agrasaarit avashy keejie. shaayad kisee ka hrday parivartan ho jae aur…..

 2. आत्मविश्वास 

एक युवक को संघर्ष करते करते कई वर्ष हो गए लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
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वह काफी निराश हो गया, और नकारात्मक विचारो ने उसे घेर लिया। उसने इस कदर उम्मीद खो दी कि उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया।
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वह जंगल में गया और वह आत्महत्या करने ही जा रहा था कि अचानक एक सन्त ने उसे देख लिया।
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सन्त ने उससे कहा – बच्चे क्या बात है , तुम इस घनघोर जंगल में क्या कर रहे हो ?
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उस युवक ने जवाब दिया – मैं जीवन में संघर्ष करते -करते थक गया हूँ और मैं आत्महत्या करके अपने बेकार जीवन को नष्ट करने आया हूँ।
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सन्त ने पूछा तुम कितने दिनों से संघर्ष कर रहे हों ?
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युवक ने कहा मुझे दो वर्ष के लगभग हो गए, मुझे ना तो कहीं नौकरी मिली है, और ना ही किसी परीक्षा में सफल हो सकां हूँ।
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सन्त ने कहा– तुम्हे नौकरी भी मिल जाएगी और तुम सफल भी हो जायोगे। निराश न हो , कुछ दिन और प्रयास करो।
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युवक ने कहा– मैं किसी भी काम के योग्य नहीं हूँ, अब मुझसे कुछ नहीं होगा।
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जब सन्त ने देखा कि युवक बिलकुल हिम्मत हार चुका है तो उन्होंने उसे एक कहानी सुनाई।
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“एक बार ईश्वर ने दो पौधे लगाये , एक बांस का, और एक फर्न (पत्तियों वाला) का।
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फर्न वाले पौधे में तो कुछ ही दिनों में पत्तियाँ निकल आई। और फर्न का पौधा एक साल में काफी बढ़ गया पर बाँस के पौधे में साल भर में कुछ नहीं हुआ।
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लेकिन ईश्वर निराश नहीं हुआ। दूसरे वर्ष में भी बाँस के पौधे में कुछ नहीं हुआ। लेकिन फर्न का पौधा और बढ़ गया।
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ईश्वर ने फिर भी निराशा नहीं दिखाई। तीसरे वर्ष और चौथे वर्ष भी बाँस का पौधा वैसा ही रहा, लेकिन फर्न का पौधा और बड़ा हो गया। ईश्वर फिर भी निराश नहीं हुआ।
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फिर कुछ दिनों बाद बाँस के पौधे में अंकुर फूटे और देखते – देखते कुछ ही दिनों में बाँस का पेड़ काफी ऊँचा हो गया।
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बाँस के पेड़ को अपनी जड़ों को मजबूत करने में चार पाँच साल लग गए।
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सन्त ने युवक से कहा – कि यह आपका संघर्ष का समय, अपनी जड़ें मजबूत करने का समय है।
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आप इस समय को व्यर्थ नहीं समझे एवं निराश न हो। जैसे ही आपकी जड़ें मजबूत, परिपक्व हो जाएँगी, आपकी सारी समस्याओं का निदान हो जायेगा।
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आप खूब फलेंगे, फूलेंगे, सफल होंगें और आकाश की ऊँचाइयों को छूएंगें।
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आप स्वंय की तुलना अन्य लोगों से न करें। आत्मविश्वास नहीं खोएं। समय आने पर आप बाँस के पेड़ की तरह बहुत ऊँचे हो जाओगे। सफलता की बुलंदियों पर पहुंचोगे।
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बात युवक के समझ में आ गई और वह पुन : संघर्ष के पथ पर चल दिया।
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दोस्तों, फर्न के पौधे की जड़ें बहुत कमज़ोर होती हैं जो जरा सी तेज़ हवा से ही जड़ से उखड जाता है।
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और बाँस के पेड़ की जड़ें इतनी मजबूत होती हैं कि बड़ा सा बड़ा तूफ़ान भी उसे नहीं हिला सकता।
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इसलिए दोस्तों संघर्ष से घबराये नहीं। मेहनत करते रहें और अपनी जड़ों को इतनी मजबूत बना लें कि बड़े से बड़ी मुसीबत, मुश्किल से मुश्किल हालात आपके इरादो को कमजोर ना कर सके और आपको आगे बढ़ने से रोक ना सके।
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किसी से भी अपनी तुलना ना करे , सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की और बढ़ते रहे। आप जरूर सफल होंगे और आसमान की बुलंदियों को छुयेंगे…

हिंगलिश में पढ़ें                  ⇓⇓   2. atmavishvaas

ek yuvak ko sangharsh karate karate kaee varsh ho gae lekin use saphalata nahin milee. . vah kaaphee niraash ho gaya, aur nakaaraatmak vichaaro ne use gher liya. usane is kadar ummeed kho dee ki usane aatmahatya karane ka man bana liya. . vah jangal mein gaya aur vah aatmahatya karane hee ja raha tha ki achaanak ek sant ne use dekh liya. . sant ne usase kaha – bachche kya baat hai , tum is ghanaghor jangal mein kya kar rahe ho ? . us yuvak ne javaab diya – main jeevan mein sangharsh karate -karate thak gaya hoon aur main aatmahatya karake apane bekaar jeevan ko nasht karane aaya hoon. . sant ne poochha tum kitane dinon se sangharsh kar rahe hon ? . yuvak ne kaha mujhe do varsh ke lagabhag ho gae, mujhe na to kaheen naukaree milee hai, aur na hee kisee pareeksha mein saphal ho sakaan hoon. . sant ne kaha– tumhe naukaree bhee mil jaegee aur tum saphal bhee ho jaayoge. niraash na ho , kuchh din aur prayaas karo. . yuvak ne kaha– main kisee bhee kaam ke yogy nahin hoon, ab mujhase kuchh nahin hoga. . jab sant ne dekha ki yuvak bilakul himmat haar chuka hai to unhonne use ek kahaanee sunaee. . “ek baar eeshvar ne do paudhe lagaaye , ek baans ka, aur ek pharn (pattiyon vaala) ka. . pharn vaale paudhe mein to kuchh hee dinon mein pattiyaan nikal aaee. aur pharn ka paudha ek saal mein kaaphee badh gaya par baans ke paudhe mein saal bhar mein kuchh nahin hua. . lekin eeshvar niraash nahin hua. doosare varsh mein bhee baans ke paudhe mein kuchh nahin hua. lekin pharn ka paudha aur badh gaya. . eeshvar ne phir bhee niraasha nahin dikhaee. teesare varsh aur chauthe varsh bhee baans ka paudha vaisa hee raha, lekin pharn ka paudha aur bada ho gaya. eeshvar phir bhee niraash nahin hua. . phir kuchh dinon baad baans ke paudhe mein ankur phoote aur dekhate – dekhate kuchh hee dinon mein baans ka ped kaaphee ooncha ho gaya. . baans ke ped ko apanee jadon ko majaboot karane mein chaar paanch saal lag gae. . sant ne yuvak se kaha – ki yah aapaka sangharsh ka samay, apanee jaden majaboot karane ka samay hai. . aap is samay ko vyarth nahin samajhe evan niraash na ho. jaise hee aapakee jaden majaboot, paripakv ho jaengee, aapakee saaree samasyaon ka nidaan ho jaayega. . aap khoob phalenge, phoolenge, saphal hongen aur aakaash kee oonchaiyon ko chhooengen. . aap svany kee tulana any logon se na karen. aatmavishvaas nahin khoen. samay aane par aap baans ke ped kee tarah bahut oonche ho jaoge. saphalata kee bulandiyon par pahunchoge. . baat yuvak ke samajh mein aa gaee aur vah pun : sangharsh ke path par chal diya. ****** doston, pharn ke paudhe kee jaden bahut kamazor hotee hain jo jara see tez hava se hee jad se ukhad jaata hai. . aur baans ke ped kee jaden itanee majaboot hotee hain ki bada sa bada toofaan bhee use nahin hila sakata. . isalie doston sangharsh se ghabaraaye nahin. mehanat karate rahen aur apanee jadon ko itanee majaboot bana len ki bade se badee museebat, mushkil se mushkil haalaat aapake iraado ko kamajor na kar sake aur aapako aage badhane se rok na sake. . kisee se bhee apanee tulana na kare , sakaaraatmak soch aur aatmavishvaas ke saath apane lakshy kee aur badhate rahe. aap jaroor saphal honge aur aasamaan kee bulandiyon ko chhuyenge…

                                              3.सब का मालिक एक

शहर में एक अमीर सेठ रहता था। उसके पास बहुत पैसा था। वह बहुत फैक्ट्रियों का मालिक था ।
एक शाम अचानक उसे बहुत बैचेनी होने लगी । डॉक्टर को बुलाया गया सारे जाँच करवा लिये गये । पर कुछ भी नहीं निकला । लेकिन उसकी बैचेनी बढ़ती गयी । उसके समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है । रात हुई, नींद की गोलियां भी खा ली पर न नींद आने को तैयार और ना ही बैचेनी कम होने का नाम ले ।
वो रात को उठकर तीन बजे घर के बगीचे में घूमने लगा । घुमते -घुमते उसे लगा कि बाहर थोड़ा सा सुकून है तो वह बाहर सड़क पर पैदल निकल पड़ा ।
चलते- चलते हजारों विचार मन में चल रहे थे । अब वो घर से बहुत दूर निकल आया था । और थकान की वजह से वो एक चबूतरे पर बैठ गया ।उसे थोड़ी शान्ति मिली तो वह आराम से बैठ गया ।
इतने में एक कुत्ता वहाँ आया और उसकी चप्पल उठाकर ले गया । सेठ ने देखा तो वह दूसरी चप्पल उठाकर उस कुत्ते के पीछे भागा । कुत्ता पास ही बनी जुग्गी-झोपड़ीयों में घुस गया । सेठ भी उसके पीछे था ,सेठ को करीब आता देखकर कुत्ते ने चप्पल वहीं छोड़ दी और चला गया । सेठ ने राहत की सांस ली और अपनी चप्पल पहनने लगा । इतने में उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी ।
वह और करीब गया तो एक झोपड़ी में से आवाज आ रहीं थीं । उसने झोपड़ी के फटे हुए बोरे में झाँक कर देखा तो वहाँ एक औरत फटेहाल मैली सी चादर पर दीवार से सटकर रो रही हैं । और ये बोल रही है —हे भगवान मेरी मदद कर ओर रोती जा रहीं है ।
सेठ के मन में आया कि यहाँ से चले जाओ, कहीं कोई गलत ना सोच लें । वो थोड़ा आगे बढ़ा तो उसके दिल में ख़्याल आया कि आखिर वो औरत क्यों रो रहीं हैं, उसको तकलीफ क्या है ? और उसने अपने दिल की सुनी और वहाँ जाकर दरवाजा खटखटाया ।
उस औरत ने दरवाजा खोला और सेठ को देखकर घबरा गयी । तो सेठ ने हाथ जोड़कर कहा तुम घबराओं मत ,मुझे तो बस इतना जानना है कि तुम रो क्यों रही हो ।
वह औरत के आखों में से आँसू टपकने लगें । और उसने पास ही गोदड़ी में लिपटी हुई उसकी 7-8 साल की बच्ची की ओर इशारा किया । और रोते -रोते कहने लगी कि मेरी बच्ची बहुत बीमार है उसके इलाज में बहुत खर्चा आएगा । और में तो घरों में जाकर झाड़-ूपोछा करके जैसे-तैसे हमारा पेट पालती हूँ । में कैसे इलाज कराउ इसका ?
सेठ ने कहा— तो किसी से माँग लो । इसपर औरत बोली मैने सबसे माँग कर देख लिया खर्चा बहुत है कोई भी देने को तैयार नहीं । तो सेठ ने कहा तो ऐसे रात को रोने से मिल जायेगा क्या ?
तो औरत ने कहा कल एक संत यहाँ से गुजर रहे थे तो मैने उनको मेरी समस्या बताई तो उन्होंने कहा बेटा—तुम सुबह 4 बजे उठकर अपने ईश्वर से माँगो ।बोरी बिछाकर बैठ जाओ और रो -गिड़गिगिड़ाके उससे मदद माँगो वो सबकी सुनता है तो तुम्हारी भी सुनेगा ।
मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था । इसलिए में उससे माँग रही थीं और वो बहुत जोर से रोने लगी ।
ये सब सुनकर सेठ का दिल पिघल गया और उसने तुरन्त फोन लगाकर एम्बुलेंस बुलवायी और उस लड़की को एडमिट करवा दिया । डॉक्टर ने डेढ़ लाख का खर्चा बताया तो सेठ ने उसकी जवाबदारी अपने ऊपर ले ली ,और उसका इलाज कराया । और उस औरत को अपने यहाँ नौकरी देकर अपने बंगले के सर्वेन्ट क्वाटर में जगह दी । और उस लड़की की पढ़ाई का जिम्मा भी ले लिया ।
वो सेठ कर्म प्रधान तो था पर नास्तिक था । अब उसके मन में सैकड़ो सवाल चल रहे थे ।
क्योंकि उसकी बैचेनी तो उस वक्त ही खत्म हो गयी थी जब उसने एम्बुलेंस को बुलवाया था । वह यह सोच रहा था कि आखिर कौन सी ताकत है जो मुझे वहाँ तक खींच ले गयीं ?क्या यहीं ईश्वर हैं ? और यदि ये ईश्वर है तो सारा संसार आपस में धर्म ,जात -पात के लिये क्यों लड़ रहा है । क्योंकि ना मैने उस औरत की जात पूछी और ना ही ईश्वर ने जात -पात देखी । बस ईश्वर ने तो उसका दर्द देखा और मुझे इतना घुमाकर उस तक पहुंचा दिया । अब सेठ समझ चुका था कि कर्म के साथ सेवा भी कितनी जरूरी है क्योंकि इतना सुकून उसे जीवन में कभी भी नहीं मिला था ।
तो दोस्तों मानव और प्राणी सेवा का धर्म ही असली इबादत या भक्ति हैं । यदि ईश्वर की कृपा या रहमत पाना चाहते हो तो इंसानियत अपना लो और समय-समय पर उन सबकी मदद करो जो लाचार या बेबस है । क्योंकि ईश्वर इन्हीं के आस -पास रहता हैं ।।

हिंगलिश में पढ़ें                  ⇓⇓              3. sab ka maalik ek

shahar mein ek ameer seth rahata tha. usake paas bahut paisa tha. vah bahut phaiktriyon ka maalik tha . ek shaam achaanak use bahut baichenee hone lagee . doktar ko bulaaya gaya saare jaanch karava liye gaye . par kuchh bhee nahin nikala . lekin usakee baichenee badhatee gayee . usake samajh mein nahin aa raha tha ki ye kya ho raha hai . raat huee, neend kee goliyaan bhee kha lee par na neend aane ko taiyaar aur na hee baichenee kam hone ka naam le . vo raat ko uthakar teen baje ghar ke bageeche mein ghoomane laga . ghumate -ghumate use laga ki baahar thoda sa sukoon hai to vah baahar sadak par paidal nikal pada . chalate- chalate hajaaron vichaar man mein chal rahe the . ab vo ghar se bahut door nikal aaya tha . aur thakaan kee vajah se vo ek chabootare par baith gaya .use thodee shaanti milee to vah aaraam se baith gaya . itane mein ek kutta vahaan aaya aur usakee chappal uthaakar le gaya . seth ne dekha to vah doosaree chappal uthaakar us kutte ke peechhe bhaaga . kutta paas hee banee juggee-jhopadeeyon mein ghus gaya . seth bhee usake peechhe tha ,seth ko kareeb aata dekhakar kutte ne chappal vaheen chhod dee aur chala gaya . seth ne raahat kee saans lee aur apanee chappal pahanane laga . itane mein use kisee ke rone kee aavaaj sunaee dee . vah aur kareeb gaya to ek jhopadee mein se aavaaj aa raheen theen . usane jhopadee ke phate hue bore mein jhaank kar dekha to vahaan ek aurat phatehaal mailee see chaadar par deevaar se satakar ro rahee hain . aur ye bol rahee hai —he bhagavaan meree madad kar or rotee ja raheen hai . seth ke man mein aaya ki yahaan se chale jao, kaheen koee galat na soch len . vo thoda aage badha to usake dil mein khyaal aaya ki aakhir vo aurat kyon ro raheen hain, usako takaleeph kya hai ? aur usane apane dil kee sunee aur vahaan jaakar daravaaja khatakhataaya . us aurat ne daravaaja khola aur seth ko dekhakar ghabara gayee . to seth ne haath jodakar kaha tum ghabaraon mat ,mujhe to bas itana jaanana hai ki tum ro kyon rahee ho . vah aurat ke aakhon mein se aansoo tapakane lagen . aur usane paas hee godadee mein lipatee huee usakee 7-8 saal kee bachchee kee or ishaara kiya . aur rote -rote kahane lagee ki meree bachchee bahut beemaar hai usake ilaaj mein bahut kharcha aaega . aur mein to gharon mein jaakar jhaad-oopochha karake jaise-taise hamaara pet paalatee hoon . mein kaise ilaaj karau isaka ? seth ne kaha— to kisee se maang lo . isapar aurat bolee maine sabase maang kar dekh liya kharcha bahut hai koee bhee dene ko taiyaar nahin . to seth ne kaha to aise raat ko rone se mil jaayega kya ? to aurat ne kaha kal ek sant yahaan se gujar rahe the to maine unako meree samasya bataee to unhonne kaha beta—tum subah 4 baje uthakar apane eeshvar se maango .boree bichhaakar baith jao aur ro -gidagigidaake usase madad maango vo sabakee sunata hai to tumhaaree bhee sunega . mere paas isake alaava koee chaara nahin tha . isalie mein usase maang rahee theen aur vo bahut jor se rone lagee . ye sab sunakar seth ka dil pighal gaya aur usane turant phon lagaakar embulens bulavaayee aur us ladakee ko edamit karava diya . doktar ne dedh laakh ka kharcha bataaya to seth ne usakee javaabadaaree apane oopar le lee ,aur usaka ilaaj karaaya . aur us aurat ko apane yahaan naukaree dekar apane bangale ke sarvent kvaatar mein jagah dee . aur us ladakee kee padhaee ka jimma bhee le liya . vo seth karm pradhaan to tha par naastik tha . ab usake man mein saikado savaal chal rahe the . kyonki usakee baichenee to us vakt hee khatm ho gayee thee jab usane embulens ko bulavaaya tha . vah yah soch raha tha ki aakhir kaun see taakat hai jo mujhe vahaan tak kheench le gayeen ?kya yaheen eeshvar hain ? aur yadi ye eeshvar hai to saara sansaar aapas mein dharm ,jaat -paat ke liye kyon lad raha hai . kyonki na maine us aurat kee jaat poochhee aur na hee eeshvar ne jaat -paat dekhee . bas eeshvar ne to usaka dard dekha aur mujhe itana ghumaakar us tak pahuncha diya . ab seth samajh chuka tha ki karm ke saath seva bhee kitanee jarooree hai kyonki itana sukoon use jeevan mein kabhee bhee nahin mila tha . to doston maanav aur praanee seva ka dharm hee asalee ibaadat ya bhakti hain . yadi eeshvar kee krpa ya rahamat paana chaahate ho to insaaniyat apana lo aur samay-samay par un sabakee madad karo jo laachaar ya bebas hai . kyonki eeshvar inheen ke aas -paas rahata hain ..