राहुल सांकृत्यायन का जीवन परिचय – Rahul Sankrityayan ka Jeevan Parichay

अंतिम संशोधित (Last Updated): December 7, 2023

आज के आर्टिकल में हम राहुल सांकृत्यायन (Rahul Sankrityayan ka Jeevan Parichay) के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे ,इनसे जुड़ें महत्त्वपूर्ण तथ्य पढेंगे।

राहुल सांकृत्यायन – Rahul Sankrityayan ka Jeevan Parichay

Rahul Sankrityayan

राहुल सांकृत्यायन – Rahul Sankrityayan

” सैर कर जिंदगी की ग़ाफ़िल, जिंदगानी फिर कहाँ?
जिंदगी गर कुछ रहीं तो, नौजवानी फिर कहां? “

चंद पंक्तियों से ही हमें राहुल सांकृत्यायन (Rahul Sankrityayan) की पूरी जीवनी का वर्णन नजर आ जाता है, हिंदी साहित्य जगत के यायावरी, इतिहासविद और तत्वान्वेषी के रूप में जाने जाते हैं।

  • जन्म :-9 अप्रैल 1893 आजमगढ़ मे हुआ।
  • मृत्यु:- 13 अप्रैल 1963 को दार्जिलिंग में।
  • मूल नाम:- केदारनाथ पांडे
  •  पिता:- गोवर्धन पांडे
  • माता:- कुलवंती
  • पालन-पोषण:- इनके नाना श्री राम शरण पांडे ने किया।
  •  बाल विवाह होने के कारण उन्होंने बचपन में ही गृह त्याग कर दिया, और एक साधु के रूप में रहे।
  • अपनी जिज्ञासु और घुमक्कड़ प्रवृत्ति के कारण बार-बार गृह त्याग कर साधु वेषधारी, सन्यासी से लेकर वेदांती, आर्य समाजी, किसान नेता, बौद्ध भिक्षु से लेकर साम्यवादी चिंतक तक का लंबा सफर तय किया।

 

  • 20 वर्ष की आयु तक इन्हें 36 भाषाओं का ज्ञान हो चुका था।
  • लखनऊ में यह भदत आनंद कौशल्यानंद से मिले, इन्हीं से यह बौद्ध भिक्षु में यह रूचि लेने लगे।
  • 1930 में श्रीलंका में इन्होंने बुद्ध भिक्षु के रूप में शिक्षा प्राप्त की और “राहुल सांकृत्यायन” कहलाए।
  •  हिमालय की यात्रा इन्होंने 17 बार की और तिब्बत की 4बार।
    संस्कृत के सर्वज्ञाता होने के कारण काशी के पंडितों ने इन्हें “महापंडित” की उपाधि से सम्मानित किया।
  • 1938 रूस के लेनिनग्राद मैं एलेना नामक स्त्री से विवाह किया पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
  • 1940 द्वितीय विश्व युद्ध के समय यह नैनीताल आकर बस गए और कमला से इन्होंने शादी की जिससे इन्हें दो बच्चे हुए।
  • 1948 में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने रहे।
  • 13 अप्रैल 1963 को दार्जिलिंग में इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ – Rahul Sankrityayan ka Jeevan Parichay

कहानियां:-

  • सतमी के बच्चे
  • वोल्गा से गंगा:- इसमें 20 कहानियां संग्रहित है जो कि मातृसत्तात्मक परिवार व स्त्री वर्चस्व की बेजोड़ रचना है
  • बहुरंगी मधुपुरी
  • कनैला की कथा

उपन्यास:-

  • 22 वी सदी
  • जीने के लिए
  • जय योद्धेय
  • भागो नहीं दुनिया को बदलो
  • मधुर स्वपन
  • राजस्थान के निवास
  • विस्मृत यात्री
  • दिवो दात्त

आत्मकथा :-

  • मेरी जीवन यात्रा

यात्रा साहित्य:-

  • रूस में 25 मार्च
  • मेरी तिब्बत यात्रा
  • तिब्बत में सवा वर्ष
  • मेरी लद्दाख यात्रा
  • चीन में क्या देखा
  • किन्नर देश की ओर
  • विश्व की रूपरेखा
  • एशिया के दुर्गम भूखंड
  • चीन में कम्यून
  • यात्रा के पन्ने

जीवनियां :-

  • बचपन की स्मृतियां
  • अतीत से वर्तमान
  • मेरे असहयोग के साथी
  • जिनका मैं कृतज्ञ
  • कार्ल मार्क्स
  • लेनिन
  • स्तालिन
  • माओ चे तुंग

 साहित्य अकादमी

  • पुरस्कार :-1957 को मध्य एशिया का इतिहास के लिए मिला
  • इन्होंने जेल में “दर्शन दिग्दर्शन” पुस्तक की रचना की।
  • अपने सभी यात्राओं का वर्णन इन्होंने अपनी पुस्तक “घुमक्कड़ शास्त्र, ” में किया है इसमें इन्होंने लिखा है “कमर बांध लो भावी घुमक्कड़ों संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।”

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