अंतिम संशोधित (Last Updated): August 6, 2026
काव्यशास्त्र के अंतर्गत यमक अलंकार (Yamak Alankar) शब्दालंकार का एक मुख्य भेद है। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, UGC NET/JRF, TGT/PGT) और स्कूली परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
आज के इस लेख में हम यमक अलंकार की परिभाषा, इसके भेद (अभंग और सभंग यमक) और प्रमुख उदाहरणों को आसान भाषा में समझेंगे।
⚡ Quick Trick / पहचान की कुंजी:
काव्य की पंक्ति में जब एक ही शब्द 2 या उससे अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ बिल्कुल अलग हो, तो वहाँ आँख बंद करके यमक अलंकार टिक करें!
(यमक का शाब्दिक अर्थ होता है – युग्म या जोड़ा)
यमक अलंकार – Yamak Alankar
Table of Contents

यमक अलंकार की परिभाषा (Yamak Alankar ki Paribhasha)
जहाँ काव्य में किसी शब्द की आवृत्ति (एक ही शब्द का बार-बार प्रयोग) होती है और प्रत्येक बार उस शब्द का अर्थ भिन्न (अलग) होता है, वहाँ यमक अलंकार माना जाता है।
संस्कृत में लक्षण:
”सत्यर्थे पृथगर्थायाः स्वरव्यंजनसंहतेः। क्रमेण तेनैवृत्तिर्यमकं निगद्यते।”
यमक अलंकार के सबसे प्रसिद्ध उदाहरण (Yamak Alankar ke Udaharan)
1. कनक-कनक वाला उदाहरण (सबसे लोकप्रिय)
“कनक-कनक तें सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाए बौराय जग, वा पाए बौराय।।”
स्पष्टीकरण: यहाँ ‘कनक’ शब्द दो बार आया है।
पहले कनक का अर्थ = सोना (स्वर्ण)
दूसरे कनक का अर्थ = धतूरा (विषैला फल)
एक ही शब्द के दो अलग-अलग अर्थ होने के कारण यहाँ यमक अलंकार है।
2. काली घटा का घमंड घटा
“काली घटा का घमंड घटा, नभ मण्डल तारक वृंद खिले।”
स्पष्टीकरण:
प्रथम ‘घटा’ = काले बादल
द्वितीय ‘घटा’ = कम होना (घटना)
3. सजना है मुझे सजना के लिए
“सजना है मुझे सजना के लिए।”
स्पष्टीकरण:
प्रथम ‘सजना’ = अलंकृत होना / श्रृंगार करना
द्वितीय ‘सजना’ = प्रियतम / पति
📌 यह भी ज़रूर पढ़ें: अनुप्रास अलंकार: परिभाषा, पहचान और 50+ उदाहरण
यमक अलंकार के भेद (Yamak Alankar ke Bhed)
यमक अलंकार के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं:
अभंग यमक अलंकार
सभंग यमक अलंकार
┌───────────────────────────┐
│ यमक अलंकार │
└─────────────┬─────────────┘
│
┌────────────────┴────────────────┐
▼ ▼
1. अभंग यमक अलंकार 2. सभंग यमक अलंकार
(शब्द बिना तोड़े बार-बार आए) (शब्द तोड़कर अर्थ निकले)
(1) अभंग यमक अलंकार (Abhang Yamak Alankar)
परिभाषा: जब किसी पद में शब्द के टुकड़े किए बिना (बिना तोड़े) उसकी आवृत्ति दिखाई देती है और हर बार अर्थ अलग होता है, तो वहाँ अभंग यमक अलंकार होता है। (अ + भंग = जो टूटे नहीं)
अभंग यमक के प्रमुख उदाहरण:
भजन कह्यो तातै भज्यौ…
“भजन कह्यो तातै भज्यौ, भज्यौ न एको बार।
दूर भजन जातै कह्यो, सो तू भज्यौ गवार।।”
स्पष्टीकरण: यहाँ ‘भजन’ और ‘भज्यौ’ शब्द बिना टूटे बार-बार आए हैं। पहले ‘भज्यौ’ का अर्थ भाग जाना है और दूसरे का अर्थ भक्ति करना है।
माला फेरत जुग भया…
“माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर।।”
स्पष्टीकरण: यहाँ पहले ‘मनका’ का अर्थ माला का दाना है और ‘मन का’ का अर्थ हृदय का है।
तीन बेर खाती थी…
“ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहनवारी, ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर स्हाती हैं।
कन्द मूल भोग करैं कन्द मूल भोग करैं, तीन बेर खाती थी वो तीनि बेर खाती हैं।।”
अर्थ: पहले ‘बेर’ का अर्थ = बार (समय/Time) | दूसरे ‘बेर’ का अर्थ = झाड़ी का फल (बोर)
उरबसी का उदाहरण:
“तौ पर वारौं उरबसी, सुनु राधिके सुजान।
तू मोहन के उरबसी, ह्वै उरबसी समान।।”
अर्थ: 1st/3rd उरबसी = उर्वशी अप्सरा | 2nd उरबसी = उर (हृदय) में बसने वाली
सारंग ले सारंग उड्यो…
“सारंग ले सारंग उड्यो, सारंग पुग्यो आय।
जे सारंग सारंग कहे, मुख को सारंग जाय।।”
दीपक ले दीपक चली…
“दीपक ले दीपक चली, कर दीपक की ओट।
जे दीपक दीपक नहीं, दीपक करता चोट।।”
अर्थ: स्त्री, दीपक (दीया), और पर्दा।
अन्य उदाहरण:
“कबीरा सोइ पीर है, जे जानहिं पर पीर।” (पीर = साधु/ईश्वर, पीर = दर्द)
“मूरति मधुर मनोहर देखी। भयेउ विदेह विदेह विसेखी।।” (विदेह = राजा जनक, विदेह = देह-रहित/सुध-बुध खोना)
“लाल दुपट्टा मलमल का, कि दिल मेरा मलमल गया।” (मलमल = कपड़ा, मलमल = पछतावा/मलीन)
(2) सभंग यमक अलंकार (Sabhang Yamak Alankar)
परिभाषा: जब किसी पद में किसी शब्द के टुकड़े करने (तोड़कर) के बाद ही किसी अन्य शब्द के समान आवृत्ति दिखाई पड़े और अर्थ अलग निकले, तो वहाँ सभंग यमक अलंकार होता है। (स + भंग = जो तोड़कर बने)
सभंग यमक के प्रमुख उदाहरण:
मचलते चलते…
“मचलते चलते ये जीव हैं, दिवस में वस में रहते नहीं।
विमलता मल ताप हटा रही, विचरते चरते सुख से सभी।।”
स्पष्टीकरण: यहाँ ‘मचलते’ में से ‘चलते’, ‘दिवस’ में से ‘वस’, और ‘विचरते’ में से ‘चरते’ शब्दों को तोड़कर देखने पर आवृत्ति बनती है।
कुमोदिनी मानस मोदिनी कहीं।
स्पष्टीकरण: ‘कुमोदिनी’ को तोड़ने पर ‘मोदिनी’ शब्द की आवृत्ति बनती है।
जोबनवारी वाला उदाहरण:
“कहा भयो जौ तूँ भटू, गुनगनमय सब देह।
जोबनवारी तौ सफल, जो बनवारी नेह।।”
स्पष्टीकरण: ‘जोबनवारी’ शब्द का टुकड़ा करने पर ‘बनवारी’ (श्रीकृष्ण) शब्द निकलता है।
हरिनी के नैनन तें हरि नीकै ये नैन।
स्पष्टीकरण: ‘हरिनी’ को तोड़कर ‘हरि नीकै’ के साथ आवृत्ति बनाई गई है।
अन्य सभंग उदाहरण:
“फिर तुम तम में, मैं प्रियतम में, हो जाएँ द्रुत अन्तर्धान।”
“निबल के बल राम हैं।”
“यों परदे की इज्जत परदेसी के हाथ बिकानी थी।”
“रसिकता सिकता सम हो गई।”
❓ FAQ – यमक अलंकार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (Yoast/Rank Math Schema Ready)
प्रश्न 1. यमक अलंकार किसे कहते हैं?
उत्तर: जहाँ काव्य में कोई एक शब्द दो या दो से अधिक बार आता है और प्रत्येक स्थान पर उसका अर्थ अलग-अलग होता है, वहाँ यमक अलंकार होता है।
प्रश्न 2. यमक अलंकार के कितने भेद होते हैं?
उत्तर: यमक अलंकार के मुख्यतः 2 भेद होते हैं — 1. अभंग यमक (बिना शब्द तोड़े) और 2. सभंग यमक (शब्द को तोड़कर)।
प्रश्न 3. यमक अलंकार का सबसे सरल उदाहरण क्या है?
उत्तर: “काली घटा का घमंड घटा” या “सजना है मुझे सजना के लिए” यमक अलंकार के सबसे सरल और याद रहने वाले उदाहरण हैं।
प्रश्न 4. यमक और श्लेष अलंकार में क्या अंतर है?
उत्तर: यमक अलंकार में शब्द की आवृत्ति (शब्द बार-बार आता है) होती है और हर बार अर्थ अलग होता है, जबकि श्लेष अलंकार में शब्द एक ही बार आता है पर उसके अर्थ कई निकलते हैं।
🎯 निष्कर्ष (Conclusion)
आज के इस लेख में हमने यमक अलंकार (Yamak Alankar) की परिभाषा, इसके भेद (अभंग व सभंग) तथा इसके महत्वपूर्ण उदाहरणों को विस्तार से समझा। आशा है कि यह जानकारी आपकी परीक्षा की तैयारी में उपयोगी साबित होगी।
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