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RAJASTHAN मेँ 1857 कि क्रांति=>
1. 1857 की क्रांति के समय राजस्थान मेँ 6 सैनिक छावनियां थी वे इस प्रकार
1. नसीराबाद, अजमेर 2. ब्यावर, अजमेर 3. नीमच वर्तमान मेँ MP 4. देवली, टोँक 5. एरिनपुरा, पाली 6. खैरवाड़ा, उदयपुर |
2. 1857 की क्रांति की माता सुगाली देवी को बोला गया |
3. राजस्थान मेँ क्रांति की शुरूआत 28 मई 1857 को नसीराबाद से हुई |
4. नसीराबाद छावनी मेँ 15वीँ N.I. सैन्य टुकड़ी के विद्रोह से हुआ |
5. सम्पूर्ण राजपूताने मेँ क्रांति का सुनियोजित आरम्भ जो वास्तव मेँ जनविद्रोह था, कोटा मेँ 15 अक्टूबर 1857 से आरम्भ हुआ |
6. क्रांति के समय राजस्थान का AGG (एजेँट टू गवर्नर जनरल) जार्ज पैट्रिक लोरेँस था, तथा PA (पॉलिटिकल एजेन्ट) मारवाड़ मैकमोसन , मेवाड़ मेजर शावर्स , जयपुर कर्नल ईडन , कोटा के बर्टन |
7. 1845 से AGG का मुख्यालय माउण्ट आबू था |
8. बीकानेर महाराजा सरदार सिँह एकमात्र राजपूत नरेश थे जो विद्रोह को दबाने राज्य की सीमा से बाहर हरियाणा तक गये |
9. राजपूताने का एक मात्र नरेश जिसने अंग्रेजोँ का साथ नहीँ दिया- बूँदी महाराजा रामसिँह हाड़ा थे |
10. कोटा मेँ क्रांति के नायक जयदयाल व मेहराब खाँ थे, उनके नेतृत्व मेँ “भवानी” व “नारायण” नामक सैन्य टुकड़ियो ने विद्रोह किया |
11. विद्रोह के समय कोटा नरेश महाराव रामसिँह द्वितीय थे जिन्हेँ विद्रोहियोँ ने 6 माह से अधिक समय तक बंदी बनाये रखा |
12. कोटा नरेश रामसिँह द्वितीय को करौली नरेश मदनपाल सिँह ने जनवरी 1858 मेँ मुक्त करवाया |
13. कोटा विद्रोह एच जी रॉबर्टस द्वारा 30 मार्च 1858 को दबाया गया |
14. कोटा P.A मेजर बर्टन की हत्या करके विद्रोहियोँ ने उसके कटे सिर को भाले पर रखकर पूरे शहर मेँ घुमाया था |
15. कोटा युद्ध को पाटनपोल का युद्ध कहते हैँ, पाटनपोल नामक स्थान पर मेजर बर्टन का सिर काटा गया |
16. चलो दिल्ली मारो फिरंगी नारा जोधपुर लीजियन टुकड़ी (एरिनपुरा मेँ नियुक्त) द्वारा बोला गया |
17. 18 सितम्बर 1857 ई को आहुआ (पाली) ठा॰ कुशालसिँह चंपावत Vs अंग्रेँजो के मध्य चैलावास का युद्ध लड़ा गया जिसे काला-गौरा युद्ध कहाँ जाता हैँ जिसमेँ जोधपुर PA मोकमेसन तथा AGG जार्ज पैट्रिक लारेँस ने भी भाग लिया |
18. काला-गोरा युद्ध मेँ मोकमेसन मारा गया, तथा विद्रोहियोँ ने उसके कटे सिर को आऊवा दुर्ग पर लटका दिया था |
19. कर्नल होम्स ने आऊवा दुर्ग को जीतकर वहाँ से सुगाली माता की मूर्ती, 6 पीतल व 7 लोहे की तोपे अजमेर लाया था |
20. प्रथम नरेश जिसने अंग्रेजो को सर्वप्रथम शरण दी वह उदयपुर महाराजा स्वरूप सिँह थे, जिसने उदयपुर PA कैप्टन शावर्स को पीछोला झील मेँ बने जगमंदिर महलोँ मेँ शरण दी |
21. जयपुर के रामसिँह द्वितीय द्वारा अंग्रेजोँ का साथ दिये जाने के फलस्वरूप “सितार-ए-हिन्द” की उपाधी दी |
22. ब्यावर छावनी मेरो की टुकड़ी तथा खैरवाड़ा भीलोँ की टुकड़ी थी, इन टुकड़ियो ने क्रांति मेँ प्रत्यक्ष भाग नहीँ लिया |
23. ऊपर लिखित N.I. का पूर्ण नाम नेटिव इंफेन्ट्री हैँ |
24. AGG का मुख्यालय अजमेर था |
25. नसीराबाद सबसे बड़ी व शक्तिशाली छावनी थी |
26. बिथौड़ा (पाली) का युद्ध 8 सितम्बर 1857 को हुआ तख्तसिँह जोधपुर शासक व आउवा के क्रांतिकारीयोँ के बीच इसमेँ तख्तसिँह का सेनापति ओनाई पंवार मारा गया |
27. तात्या टोपे ने प्रथम बार 8 अगस्त 1857 को भीलवाड़ा मेँ प्रवेश किया कुआड़ा नामक स्थान पर जनरल राबर्टस की सेना से परास्त |
28. तात्या टोपे दूसरी बार 11 दिसम्बर 1857 को बाँसवाड़ा मेँ प्रवेश किया बाँसवाड़ व टोँक को पराजित किया |
29. मानसिँह नरूका ने विश्वासघात किया तात्या टोपे नरवन के जंगलो से गिरफ्तार हुए 7 अप्रैल 1859 को फाँसी दे दी गई |
30. राज॰ मेँ विद्रोह की शुरूआत=>
28 मई नसीराबाद
31 मई भरतपुर
3 जून नीमच
7 जून देवली
जून टोँक
11 जुलाई अलवर
9 अगस्त अजमेर
21 अगस्त एरिनपुरा
23 अगस्त जोधपुर
8 सितम्बर आऊवा
15 अक्टूबर कोटा
अक्टूबर धौलपुर |
31. इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले डेली एक्सप्रेस अखबार मेँ टोँक की खबर “रिवोल्ट इन इन इंडियन स्टेट” शीर्षक से छपी अखबार मेँ नवाब एंव निम्न जीवन स्तर की दुर्दशा के विरोध मेँ क्रांति हुई |
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