आधुनिक काल साहित्य

उत्तर छायावाद युग – हिंदी साहित्य का इतिहास

उत्तर छायावाद युग

आज के आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के इतिहास में हम उत्तर छायावाद युग (Uttar Chayavad Yug) को विस्तार से पढेंगे। उत्तर छायावाद युग – Uttar Chayavad Yug उत्तर-छायावादयुगीन साहित्य को प्रगतिवाद, प्रयोगवाद एवं नई कविता, इन तीनों में बाँटा गया है- प्रगतिवादी काव्य का समय 1936 से 1943 ई. तक माना गया। प्रयोगवादी काव्य […]

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आधुनिक काल में भारतेन्दु मंडल के चर्चित लेखकगण

आधुनिक काल में भारतेन्दु मंडल के चर्चित लेखकगण

आधुनिक काल में भारतेन्दु मंडल के चर्चित लेखकगण   भारतेंदु हरिश्चंद्रः– कविवर हरिश्चंद्र (1850-1885) इतिहासप्रसिद्ध सेठ अमीचंद की वंश-पंरपरा में उत्पन्न हुए थे। उनके पिता बाबू गोपालचंद्र ’गिरिधरदास’ भी अपने समय के प्रसिद्ध कवि थे। हरिश्चंद्र ने बाल्यावस्था में ही काव्य-रचना आंरम्भ कर दी थी और अल्पायु में कवित्व प्रतिभा और सर्वतोमुखी रचना क्षमता का

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प्रगतिवाद महत्वपूर्ण सीरीज़ व ट्रिक | Pragativad

pragativadi

प्रगतिवाद महत्वपूर्ण सीरीज़ व ट्रिक(pragativadi) 1.‘ बाघ ‘ लंबी कविता किसकी है ⇒केदारनाथ सिंह 2.लम्बी कविता ‘नेवला’ किसकी है ⇒त्रिलोचन 3.’युगधारा’ रचना है ⇒नागार्जुन 4.’प्रलय सृजन’ रचना है ⇒शिवमंगल सिंह’ सुमन’ 5. पांचाली रचना है ⇒रांगेय राघव 6.मैं पूरी ताकत के साथ शब्दों को फेंकना चाहता हूँ आदमी की तरफ…..पंक्ति है ⇒केदारनाथ सिंह 7.’भस्मांकुर’ नामक

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द्विवेदी युगीन महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ | Dwivedi Yug Important Lines

द्विवेदी युगीन कवियों की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ हिंदी साहित्य नोट्स

द्विवेदी युगीन महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ: हिंदी साहित्य नोट्स आज की पोस्ट में हम हिंदी साहित्य के इतिहास के अंतर्गत द्विवेदी युग की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियों का अध्ययन करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से ये पंक्तियाँ अत्यंत उपयोगी हैं, जिन्हें आप आसानी से याद रख सकते हैं। 1. महावीर प्रसाद द्विवेदी की काव्य पंक्तियाँ सुरम्यरूपे, रसराशि-रंजिते, विचित्र

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भारतेंदु युग की काव्यगत विशेषताएँ | Bharatendu Yug ki Visheshta

भारतेंदु युग की काव्यगत विशेषताएँ और हिंदी साहित्य नोट्स

भारतेंदु युग की काव्यगत विशेषताएँ (Bharatendu Yug ki Kavyaagat Visheshatayen): हिंदी साहित्य का नवजागरण काल हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के अंतर्गत भारतेंदु युग (1869 से 1900) का यह आलेख प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT) और बोर्ड परीक्षाओं के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है। यदि आप भारतेंदु युग की काव्यगत विशेषताएँ, भारतेंदु

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आधुनिक काल प्रश्नोतरी क्विज 2

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आधुनिक काल प्रश्नोतरी क्विज 2 आधुनिक काल प्र.1-प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएसन नामक अंतरर्राष्ट्रीय समस्था का प्रथम अधिवेशन कहां हुआ था? अ-पेरिस⇒ ब-लखनऊ स-लंदन द-जर्मनी प्र.2-प्रगतिवाद किस दर्शन से संबंध रखता है ? अ-मनोविश्लेष्ण वाद ब-मार्क्सवाद⇒ स-समाजवाद द-आतंकवाद प्र.3-निम्न मे से किस कविता को नागार्जुन का ‘मेनिफेस्टो’ कहा जाता है? अ-युगधार ब-पुरानी जूतियों का कोरस स-प्रतिहिंसा ही

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Hindi sahitya ka itihas adhunik kal || हिंदी साहित्य || आधुनिक काल

Hindi sahitya ka itihas adhunik kal

दोस्तो आज की पोस्ट में हिंदी साहित्य के आधुनिक काल(Hindi sahitya ka itihas adhunik kal) को शोर्ट तरीके से बताया गया है ,आप इससे टॉपिक का रिवीजन कर सकते है हिन्दी साहित्य का आधुनिक काल हिन्दी गद्य का उद्भव और विकास भारतेन्दु पूर्व हिन्दी गद्य भारतेन्दु पूर्व हिन्दी गद्य प्रायः तीन रूपों में मिलता है

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प्रगतिवाद काव्यधारा की विशेषताएँ | Pragativadi Kavydhara Ki Visheshatayen

प्रगतिवाद की प्रमुख विशेषताएँ

प्रगतिवाद काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ (Pragativad Ki Visheshatayen in Hindi) हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में ‘प्रगतिवाद’ (Pragativad – 1936 से 1943 ई.) एक बेहद महत्वपूर्ण और जनवादी धारा रही है। आज के इस आर्टिकल में हम प्रगतिवाद काव्यधारा की संपूर्ण विशेषताओं (Pragativad Ki Kavydhara Ki Visheshatayen) को बहुत ही सरल, रोचक भाषा में समझेंगे,

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हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम – Hindi sahitya

हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम

हिंदी साहित्यकार और उनके उपनाम (Hindi Sahitya ke Itihas me Kaviyon ke Upnaam) हिंदी साहित्य के इतिहास में विभिन्न रचनाकारों को उनकी अनूठी शैली, विशिष्ट योगदान और रचनाओं के आधार पर कई महत्वपूर्ण उपनाम, उपाधियाँ और विशेषण प्रदान किए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC NET, TGT, PGT, RPSC) की दृष्टि से हिंदी साहित्यकारों और

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आधुनिक काल हिंदी साहित्य प्रश्नोतरी 1

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आधुनिक काल हिंदी साहित्य प्रश्नोतरी 1 ▶ *”आत्मा और परमात्मा का गुप्त वाग्विलास रहस्यवाद है और वही छायावाद है।”* किसका कथन है ? ➖रामकुमार वर्मा ✅ ▶ *”जिस प्रकार मैटर ऑफ़ फैक्ट(इतिवृत्तात्मक) के आगे की चीज छायावाद है उसी प्रकार छायावाद के आगे की चीज रहस्यवाद है।”* किसका कथन है ? ➖शांतिप्रिय द्विवेदी✅ ▶ *”कविता

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