पाठ योजना अर्थ परिभाषा

पाठ योजना अर्थ परिभाषा(Lesson plan meaning definition)

दोस्तों आज हम जानेगे कि पाठ योजना(paath yozna) क्या होती है 

कक्षा में भेजने से पूर्व उनको पढ़ाये जाने वाले पाठ की पूर्व तैयारी के रूप में पाठ योजना तैयार करना सिखाया जाता है। पाठ योजना विषय वस्तु छोटी इकाईयों के सम्बन्ध में शिक्षक द्वारा तैयार लिखित रूपरेखा है जिसे वह निश्चित कालांश में पूर्ण करता है।

पाठ योजना की परिभाषा (Definition of lesson plan)

 विनिंग और विनिंग – ’’दैनिक पाठ योजना के निर्माण में उद्देश्य को परिभाषित करना पाठ्यवस्तु का चयन करना, उसे क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित करना और प्रस्तुतीकरण की विधियों की तथा प्रक्रिया का निर्धारण करना है।’’

 डेविस – ’’कक्षा में जाने से पूर्व शिक्षक को पूरी तैयारी करनी चाहिए। क्योंकि प्रगति के लिए कोई बात इतनी बाधक नहीं है। जितनी की शिक्षक की अपूर्ण तैयारी।’’

आदर्श पाठ योजना की विशेषता (Characteristic of ideal lesson plan)

1. पाठ योजना में शिक्षण के उद्देश्यों का विवरण स्पष्ट व व्यावहारिक होता हैै।
2. पाठ योजना सरल व लिखित में होती है।
3. स्तरानुकूल पाठ्य में विषय वस्तु का संगठन निहित होता है।
4. छात्रों के क्रिया-कलापों व अधिगम क्रियाओं का अच्छा ज्ञान होता है।
5. नवीन ज्ञान एवं पूर्वज्ञान का सम्बन्ध होता है।
6. शिक्षक को यह आभास बना रहता है कि उसका शिक्षण कहाँ तक सार्थक रहा है।
7. उदाहरणों के यथास्थान से पाठ की रोचकता बनी रहती है।
8. पाठ योजना में पाठ की अवधि, कक्षा के स्तर, विषयवस्तु प्रकरण आदि सामान्य सूचना का उल्लेख रहता है।
9. पाठ योजना में व्यक्तिगत विभिन्नता का ध्यान रखकर शिक्षण की व्यवस्था होती है।

10. उपयुक्त शिक्षण विधि का प्रयोग होता है।
11. पाठ योजना में सम्मिलित प्रश्नों में उपयुक्तता, सम्बन्धता और शृंखलाबद्धता होती है।
12. छात्रों के लिए पाठ का सारांश भी सम्मिलित होता है। ताकि मुख्य शिक्षण के बिन्दु जाने जा सके।
13. छात्रों के मूल्यांकन के लिए प्रश्नों, पुनरावृत्ति प्रश्नों और अभ्यासों के प्रश्नों का विवरण रहता हैं।
14. पाठ योजना में  प्रयुक्त होने वाली शिक्षण सामग्री जैसे चार्ट, ग्राफ, रेखागणित, माॅडल, स्लाइड आदि का उल्लेख होता है।

वार्षिक योजना(annual plan)

 

’’शिक्षण कार्य की योजना जो शिक्षक द्वारा अपनी दैनन्दिनी (डायरी) में सत्र पर्यन्त शिक्षण कार्य एवं अन्य करणीय कार्यों की जो रूपरेखा तैयार की जाती है। वह वार्षिक योजना कहलाती है।’’

शिक्षण की सफलता उसके नियोजन पर आधारित होती है। क्योेंकि शिक्षण सोद्देश्य क्रिया है इसलिए क्रिया की सफलता के लिए उसका पहले से ही नियोजन कर लेना चाहिए।

सम्पूर्ण वस्तु के शिक्षण की कैसे योजना बने इसका अर्थ है। हमें सबसे पहले वार्षिक योजना इसके बाद इकाई योजना तथा अन्त में दैनिक पाठ योजना बनानी चाहिये।

वार्षिक योजना केवल शिक्षण कार्य की ही नहीं बनायी जाती, मूल्यांकन की योजना भी साथ-साथ बनानी होती है। वार्षिक योजना बनाते समय सम्पूर्ण सत्र में  जो उप विषय पढ़ाने है। जो इकाइयाँ अधिगम करवानी है। उन सभी का लेखा जोखा होता है।

’’सम्पूर्ण सत्र पर्यन्त शिक्षण कार्य एवं अन्य करणीय कार्यों की रूपरेखा को वार्षिक योजना कहते है।’’

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इकाई योजना(Unit plan)

’’ इकाई शब्द को शिक्षा के क्षेत्र में लाने का श्रेय प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री हरबर्ट’’ को हैं।

।. एन.एल. वाॅसिंग के अनुसार – ’’इकाई अर्थ पूर्ण परस्पर संबंधित क्रियाओं की वह व्यापक शृंखला हैं। जो विकसित होकर बालकों के उद्देश्यों की पूर्ति करती है। जिसे बालक महत्त्वपूर्ण शैक्षिक अनुभव प्राप्त कर सके और अपने व्यवहारों से वांछित परिवर्तन ला सके।’’

।।. माॅरिसन – माॅरिसन के मतानुसार, ’’इकाई वातावरण संगठित विज्ञान, कला या आचरण का वह महत्त्वपूर्ण अंग है जिसे सीखने के फलस्वरूप व्यक्तिगत में सामंजस्य आ जाता है।’’

इकाई योजना के कारण –

1. इकाई योजना के प्रारंभ में कक्षा, विभाग, विषय, इकाई का नाम, कालांशों की संख्या, दिनांक की पूर्ति करना है।
2. इकाई योजना से सम्बन्धित प्राप्त उद्देश्यों एवं आपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तनों को लिख देना चाहिए।
3. इकाई से सम्बन्धित शिक्षण बिन्दुओं का विश्लेषण कर देना चाहिए।
4. अब छात्र एवं अध्यापक की शिक्षण क्रियाओं का निर्धारण करना चाहिए।
5. इसके बाद इकाई के अध्यापन का समय आवश्यक शिक्षण सामग्री का उल्लेख करना चाहिए।
6. बालकों में स्वाध्याय प्रवृत्ति के विकास हेतु दिये गये गृह कार्य का विवरण करना चाहिए।
7. उद्देश्यों प्राप्ति से व्यवहारगत परिवर्तन की जाँच हेतु मूल्यांकन विधि व जाँच पत्र का भी उल्लेख करना चाहिए।

 

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इकाई योजना के प्रकार, महत्त्व व गुण (Types, importance and properties of the unit plan)

इकाई योजना दो प्रकार की होती है-

  • पाठ्य वस्तु पर आधारित
  • अनुभव पर आधारित

1. पाठ्य-वस्तु पर आधारित योजना-

ये तीन प्रकार की होती हैं –
(अ) प्रकरण पर आधारित – ये वे इकाई योजना है जो किसी प्रकरण या अध्याय पर आधारित होती है।

(ब) सिद्धान्त पर आधारित – ये किसी सूत्र-नियम या सिद्धान्त पर आधारित होती है।

(स) किसी मूल पहलू पर आधारित – बालकों को वातावरण तथा सांस्कृतिक व्यवहार व वास्तविक ज्ञान प्रदान करने हेतु वातावरण या संस्कृति के पहलू के आधार पर होता है।

2. अनुभव आधारित योजना –

ये तीन प्रकार की होती है –
(अ) रुचि पर आधारित – इस प्रकार की योजना बालकों की रुचि पर आधारित होती हैं।

(ब) उद्देश्य पर आधारित – इस प्रकार की योजना का उद्देश्य बालकों को जो प्राप्त करना होता है वह होता है।

(स) आवश्यकताओं पर आधारित – ऐसी इकाई योजना व्यक्तिगत शैक्षिक आवश्यकता पर बनायी जाती है।

इकाई योजना का महत्त्व (Importance of Unit Scheme)

1. प्रत्येक इकाई का निर्माण शिक्षण उद्देश्य, छात्रों की रुचियों, आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में रखकर किया जाता है। अतः प्रक्रिया बाल केन्द्रित एवं छात्रों को रुचिकर है।

2. इकाई योजना में छात्रोें को स्वयं सीखने को दिया जाता है जिससे स्वाध्याय की भावना पैदा होती है।

3. अधिगम भी सामाजिक परिप्रेक्ष्य में होता है। सामाजिक मूल्यों के साथ विचारों की अभिव्यक्ति को प्रोेत्साहन मिलता है।

4. इकाई योजना द्वारा पाठ-योजना ठीक व क्रमगत बनती है।
5. यह शिक्षण प्रक्रिया में विषयवस्तु की क्रमबद्धता सुव्यवस्थित करती हैं।
6. इसके द्वारा सही शिक्षण विधियों की खोज की जाती है। तथा पाठ को प्रस्तुत किया जाता है।
7. इकाई पाठ योजना पद्धति के द्वारा अध्यापक सक्रिय रहता है। इसको बालक के साथ अध्ययन परिस्थितियाँ प्रस्तुत करनी होती है।

8. सम्पूर्ण पाठ के सक्षिप्तीकरण में इकाई योजना सहायक होती है।
9. इससे शिक्षक पाठ्य वस्तु को आधार मानकर सम्बद्ध अपेक्षित योग्यताओं का मूल्यांकन कर सकता है।
10. इकाई पाठ योजना द्वारा शक्ति समय और सहायक सामग्री का अपव्यय नहीं होता।
11. इसके द्वारा उद्देश्यनिष्ठ शिक्षण होता है। तथा बालक के व्यवहारगत परिवर्तन पर बल दिया जाता है।

इकाई योजना के दोष (Defect of unit plan)

1. इकाई योजना बनाना प्रत्येक अध्यापक के लिए सुगम नहीं है।
2. इस योजना के अनुसार पढ़ाने से शिक्षण यंत्रवत् हो जाता हैं।
3. इस पद्धति से शिक्षण कार्य करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक की आवश्यकता होती है।
4. इकाई योजना में अधिगम सामग्री तथा अन्य उपकरणों के प्रयोग पर बल दिया जाता है। अतः महँगी योजना है। अधिक धन व्यय होता है।

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