Letter Writing in Hindi || हिंदी पत्र लेखन

आज की पोस्ट में हम हिंदी लेखन में हिंदी पत्र लेखन(Letter Writing in Hindi) के बारे में जानेंगे और पत्रों के प्रकारों के बारे में भी जानेंगे ।

Letter Writing in Hindi

पत्र लेखन(Patra Lekhan)

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पत्रों के प्रकार(Type of Letter)

सामान्यतः विषय के अनुसार पत्रों को अनेक श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, जैसे-प्रेम-पत्र, निमंत्रण-पत्र, विवाह-पत्र, संवेदना-पत्र, जन्म-दिन पत्र इत्यादि, परन्तु शैली व शिल्प की दृष्टि से पत्रों का मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया जाता है।

  • अनौपचारिक पत्र(Informal letter)
  • औपचारिक पत्र(Formal letter)

1. अनौपचारिक पत्र (Informal letter)

जिन लोगों के साथ हमारा व्यक्तिगत संबंध होता है, उनके साथ किया जाने वाला पत्राचार अनौपचारिक पत्रों की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे पत्रों में व्यक्तिगत सुख-दुःख का ब्योरा भी प्रस्तुत किया जाता है। ये पत्र अपने परिवार के लोगों मित्रों और निकट संबंधियों को लिखे जाते हैं।

2. औपचारिक पत्र (Formal letter)

जिन लोगों के साथ हमारा कोई निजी परिचय नहीं होता है, उनके साथ किया जाने वाला पत्राचार औपचारिक पत्रों की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे पत्रों में व्यक्तिगत लगाव या आत्मीयता गौण होती है। इनमें तथ्यों और सूचनाओं को ही अधिक महत्त्व दिया जाता है। इस वर्ग में निम्नलिखित पत्र शामिल किये जाते है:-

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(क) आवेदन – पत्र(Request Letter)
(ख) व्यावसायिक – पत्र(Business Letter)
(ग) अव्यावसायिक संस्थाओं के साथ पत्राचार
(घ) सरकारी या कार्यालयी – पत्र(Official Letter)

Hindi Patra lekhan

 

सरकारी या कार्यालयी लेखन-प्रक्रिया(Official or official writing process)

⇒ जहाँ से किसी सरकारी, अर्द्ध सरकारी, गैर-सरकारी या स्वायत्तशासी संस्थाओं के प्रशासन का संचालन होता है, उसे कार्यालय कहा जाता है तथा ऐसे स्थानों से निकलने वाले पत्र ’कार्यालयी-पत्र’, ’सरकारी-पत्र’ या ’ऑफिशियल लेटर’ कहलाते हैं।
⇒ संकुचित अर्थ में जो पत्र सरकार के किसी एक कार्यालय से अन्य कार्यालय को/कर्मचारी को/अधिकारी को भेजा जाता है, जिसमें सरकार की नीति/समस्या/निर्णय या किसी आशय का उल्लेख होता है, उसे कार्यालयी या सरकारी पत्र कहते हैं।

कार्यालयी पत्रों के विविध प्रकार

(1) औपचारिक पत्र (फाॅर्मल लेटर)
(2) टिप्पण (नोटिंग)
(3ं) अनुस्मारक या स्मरण-पत्र (रिमाइंडर)
(4) अर्ध-सरकारी पत्र (डेमी-ऑफिशियल लेटर)
(5) कार्यसूची (एजेंडा)
(6) कार्यवृत्त (मिनिट्स)
(7) प्रेस विज्ञप्ति (प्रेस रिलीज)
(8) परिपत्र (सर्कुलर)
(9) शासनादेश (गवर्नमेंट ऑर्डर)
(10) कार्यालय आदेश (ऑफिस ऑर्डर)
(11ं) अधिसूचना (नोटिफिकेशन)
(12) पृष्ठांकन (एण्डोर्समेंट)
(13) अशासकीय पत्र (अन-ऑफिशियल लेटर)
(14) संकल्प/प्रस्ताव (रिसाॅल्यूशन)
(15) विज्ञापन (एडवरटाईजमेंट)
(16) निविदा (टेंडर)
(17) स्वीकृति या मंजूरी पत्र (सेंक्शन लेटर)
(18) पावती (एक्नाॅलिजमेंट)

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1. अधिसूचना (NOTIFICATION)

किसी भी सरकारी राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति, पदोन्नति, अवकाश-प्राप्ति, त्याग-पत्र तथा सरकारी नियमों, आदेशों व आज्ञाओं की राज्य सरकार द्वारा की गई घोषणाओं को अधिसूचना कहते हैं।

अधिसूचाएँ किसी व्यक्ति विशेष से सम्बन्धित भी हो सकती है किन्तु इनका सम्बन्ध सामान्य जनता से होता है इसलिए इन्हें राजकीय राज पत्र में अनिवार्यतः प्रकाशित किया जाता है तथा आवश्यक होने पर समाचार पत्र में भी प्रकाशित कराया जाता है। अधिसूचना किसी अधिनियम के अन्तर्गत जारी की जाती है तथा अन्य पुरुष शैली में लिखी जाती है।
⇒ यह पत्र सरकार के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाता है।

⇔ सरकार के द्वारा बनाये गये नियमों/उपनियमों/आदेशों/नीतियों/शक्तियों के लागू होने के लिए अथवा उनमें संशोधन आदि करने के लिए जिस पत्र में सूचना प्रकाशित की जाती है वह ’अधिसूचना पत्र’ कहलाता है।
⇒ सरकार के राजपत्रित अधिकारियों को कोई कार्यभार देने के लिए अथवा उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए भी अधिसूचना पत्र जारी किया जाता है।
⇔ यह पत्र प्रायः सचिव स्तर के अधिकारी के द्वारा जारी किया जाता है।

⇒ इस पत्र में पत्र प्रेषिति अधिकारी का नाम, पदनाम व पता सबसे नीचे बांई और अंकित किया जाता है।

राजस्थान सरकार
ऊर्जा विभाग
क्रमांकः ऊवि/2018-19/101       जयपुर, दिनांक: 27 अप्रैल, 2018
अधिसूचना

राजस्थान सरकार केन्द्रीय अधिनियम 1948 की धारा 29 की उपधारा (2) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटातापीय विद्युतगृह, कोटा में छठी इकाई स्थापित करना चाहती है। अतः एतद् द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि कोई भी इस परियोजना के सम्बन्ध में कोई प्रतिवेदन करने का इच्छुक हो तो वह अपना प्रतिवेदन इस अधिसूचना के जारी होने से दो माह की अवधि के अन्दर सचिव, राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम, विद्युत भवन, विद्युत मार्ग ज्योतिनगर, जयपुर को प्रेषित कर सकता है।

राज्यपाल महोदय की आज्ञा से,
हस्ताक्षर
(हस्ताक्षरकर्ता का नाम)
उपशासन सचिव
ऊर्जा विभाग

प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ प्रेषित:
1. सचिव, राजस्थान राज्य विद्युत् वितरण निगम, जयपुर।
2. अधीक्षक, राजकीय मुद्रणालय, जयपुर।

ज्ञापन MEMORANDUM (स्मरण – पत्र)

कार्यालयी कर्मचारियों के पत्रों, आवेदन – पत्रों, याचिकाओं, व्यक्तिगत पत्रों या अनुस्मारक का उत्तर देना हो अर्थात् विषय सामग्री कम महत्त्वपूर्ण हो तब कार्यालय द्वारा प्रेषित पत्र ज्ञापन या स्मरण पत्र कहलाता है।
ज्ञापन में किसी को अभिवादन नहीं होता है, यह प्रायः अन्य पुरुष में लिखा जाता है। इसमें एक ही अनुच्छेद होता है तथा अन्तिम प्रशंसात्मक वाक्यांश भी नहीं होता। इस पर मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षर न होकर कार्यालय अधीक्षक या वरिष्ठ लिपिक के ही हस्ताक्षर होते हैं प्रेषिति का नाम व पता पत्र के नीचे बायीें ओर लिखा जाता है।

⇒ किसी कार्यालय में कोई प्रार्थना पत्र अथवा आवेदन पत्र प्राप्त होने पर उसके उत्तर के रूप में जो पत्र जारी किया जाता है, उसे ही ज्ञापन कहते हैं।
⇔ ज्ञापन में प्रार्थना पत्र/आवेदन पत्र प्राप्त होने की सूचना अथवा उस पर जारी कार्यवाही की सूचना अथवा उस पर लिये गये निर्णय की सूचना का उल्लेख किया जाता है।

ज्ञापन लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें:

⇒ ज्ञापन-पत्र सदैव अन्य पुरुषवाचक एवं कर्मवाच्य शैली में लिखा जाता है।
⇔ ज्ञापन में न तो कोई सम्बोधन होता है एवं न ही स्वनिर्देश होता है। (’भवदीय’ जैसे शब्द प्रयुक्त नहीं होते हैं)
⇒ इसमें विषयानुरूप संक्षिप्तता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
⇔ आवश्यकतानुरूप विषय का उल्लेख होता है।
⇒ नीचे केवल प्रेषक के हस्ताक्षर एवं पदनाम का उल्लेख होता है।
⇔ जिसके नाम का ज्ञापन होता है, उसका नाम और पद, हस्ताक्षर के नीचे, पृष्ठ के बायें कोने में लिख दिये जाते हैं।
⇒ ज्ञापन में यदि एक से अधिक अनुच्छेद हों तो प्रथम अनुच्छेद के बाद शेष अनुच्छेदों को क्रमांक अंकित कर दिया जाता है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर

स्मरण पत्र क्रमांकः रालोसेआ/अज/2018-19/1234
दिनांक: 10 जून, 2018

विषय: हिन्दी व्याख्याताओं की नियुक्ति।

श्री दुष्यन्त कुमार को सूचित किया जाता है कि वे दिनांक 25 जून, 2018 को प्रातः 10 बजे आयोग कार्यालय में साक्षात्कार के लिए उपस्थित हों। वे अपने साथ सभी प्रमाण-पत्रों तथा प्रशंसा-पत्रों की मूल प्रतियाँ भी लेकर आवें। उन्हें यह ज्ञात रहे कि आयोग की ओर से यात्रा किराया एवं भत्ता किसी प्रकार का देय नहीं होगा।

आज्ञा से
हस्ताक्षर
सचिव के लिए

प्रेषिति:

श्री दुष्यन्त कुमार गोयल
ओसियाँ (जाधपुर)

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निविदा

सरकारी एवं गैर सरकारी प्रतिष्ठानों द्वारा अपने किसी निर्माण कार्य को सम्पन्न कराने, सामान की आपूर्ति करने आदि के लिए उक्त कार्य कर सकने वाले व्यक्तियों की सूचनार्थ समाचार पत्रों आदि में जो आमन्त्रण प्रकाशित किया जाता है, उसे निविदा कहते है।

निविदा प्रपत्र का शुल्क, धरोहर राशि एवं प्रचार के मानदण्ड समय समय पर सरकार द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।

⇒ किसी भी सरकारी कार्यालय के द्वारा नया सामान खरीदने के लिए अथवा पुराने सामान को बेचने के लिए अथवा कोई निर्माण कार्य करवाने के लिए अन्य पक्षों से जब मूल्य सूचि एवं अन्य शर्तों के साथ प्रस्ताव आमन्त्रित किये जाते हैं एवं अन्य पक्षों के द्वारा वे प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाते हैं, तो उसे ही निविदा पत्र कहा जाता है।

⇔ निविदा एक प्रकार का प्रपत्र होता है, जिसमें सामान के आपूर्तिकर्ता के द्वारा निर्धारित समय में सामान की आपूर्ति करने हेतु क्रेता को न्यूनतम मूल्य बतलाये जाते हैं अर्थात् न्यूनतम दर पर सामान की आपूर्ति के आश्वासन को ही निविदा पत्र कहा जाता है।

निविदा पत्र लेखन के समय ध्यातव्य तथ्य – यह पत्र लिखते समय निम्नलिखित तथ्यों का लिखा जाना आवश्यक होता है –

1. कार्यालय का नाम व पता।
2. पत्र क्रमांक व दिनांक।
3. निविदा संख्या।
4. कार्य का सम्पूर्ण विवरण।
5. निविदा प्रस्तुत करने की दिनांक व समय।
6. निविदा खोलने की दिनांक व समय व स्थान।
7. अनुमानित लागत राशि।
8. कार्य पूर्ण करने की समय सीमा।
9. निविदा प्रपत्र का मूल्य।
10. धरोहर राशि व उसे जमा कराने की तरीका।
11. निविदा जारी करने वाले अधिकारी के नाम/पदनाम सहित हस्ताक्षर।

राजस्थान -सरकार
कार्यालयः जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), कोटा।

क्रमांकः जिशिअ/कोटा/2018-19/1511

                                            दिनांक: 20 जून, 2018

निविदा सूचना संख्या 05 वर्ष 2018-19

राजस्थान के राज्यपाल की ओर से निम्न हस्ताक्षरकर्ता के कार्यालय में निम्नलिखित सामान की आपूत्र्ति हेतु मोहरबन्द निविदाएँ आमन्त्रित की जाती हैं। इस हेतु प्रपत्र दिनांक 10 जुलाई 2018 को 3.00 बजे अपराह्न तक कार्यालय से प्राप्त किये जा सकते हैं और दिनांक 11 जुलाई 2018 को 3.30 बजे अपराह्न तक बंद लिफाफे में कार्यालय में जमा करवाये जा सकते हैं।

दिनांक 13 जुलाई 2018 को 4.00 बजे अपराह्न उपस्थित निविदादाताओं के समक्ष खोली जाएगी। सामान के बारे में पूर्ण वितरण किसी भी कार्य दिवस को कार्यालय समय में निविदा शुल्क जमा कराकर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।

क्रम संख्या  सामान का विवरण अनुमानित

राशि लाखों में

धरोहर

राशि रुपये

   निविदा- शुल्क        रुपये सामान आपूर्ति की अवधि
1. कम्प्यूटर  3.00  6000  100  2 माह
2.  स्टील आलमारी 2.00  4000 100   2 माह
3.  स्टेशनरी सामान  0.50  1000  50 1 माह

आवश्यक शर्तें:

1. सशर्त निविदाएँ मान्य नहीं होगी।
2. तार द्वारा प्राप्त निविदाएँ, विलम्ब से प्राप्त निविदाएँ मान्य नहीं होंगी।
3. बिना कारण बताए किसी निविदा अथवा समस्त निविदाओं को स्वीकृत/अस्वीकृत करने अधिकार निम्न हस्ताक्षरकर्ता का सुरक्षित है।

हस्ताक्षर
जिला शिक्षा अधिकारी (मा.)
कोटा

परिपत्र (गश्ती पत्र) (CIRCULAR)

जब एक ही सूचना आदेश, निर्देश या सन्देश कई व्यक्तियों अथवा कार्यालयों को भेजना हो, ऐसी परिस्थिति में लिखा जाने वाला पत्र परिपत्र या गश्तीपत्र कहलाता है।
परिपत्र में एक सरकारी पत्र के सभी लक्षण होते हैं किन्तु इसमें प्रेषिति के पद के नाम के पूर्व समस्त शब्द का प्रयोग किया जाता है।

परिपत्र को आवश्यकतानुसार टाइप, साइक्लोस्टाइल या छपवा लिया जाता है। परिपत्र की सभी प्रतियों पर अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होते हैं, केवल कार्यालय प्रति पर ही होते हैं।

⇒ जब कोई आदेश, निर्देश, अनुदेश, सूचना आदि से समस्त अधीनस्थ कार्यालयों/कार्मिकों को अवगत कराना होता है तो इस हेतु प्रयुक्त किये जाने वाला पत्र परिपत्र कहलाता है।
⇔ सामान्यतः कार्यालय पत्र का वह रूप जिसमें एक साथ किसी कार्यालय के एकाधिक कर्मचारियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों को किसी बात की सूचना/आदेश/निर्देश दिये जाते है तो वह परिपत्र कहलाता है।

⇒ परिपत्र केन्द्रीय कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को, एक कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ समस्त अनुभागों/शाखाओं को तथा उच्च अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को अथवा एक विभाग के अधिकारी के द्वारा अन्य विभागीय अधिकारियों को भेजा जाता है।
⇔ किसी बैठक में लिये गये महत्त्वपूर्ण निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए भी परिपत्र जारी किया जाता है। किसी मुद्दे पर होने वाला फैसला भी परिपत्र के रूप में जारी किया जाता है जिसमें निर्णय को कार्यान्वित किये जाने के निर्देश होते हैं।

राजस्थान सरकार
वित्त – विभाग
(आय-व्ययक अनुभाग)

क्रमांक: प 9(1) वित्त-(1) आ.व्य./2018 जयपुर,                                       दिनांक 13 जून 2018

परिपत्र

प्रेषित:
समस्त शासन सचिव, राजस्थान।
⇒समस्त सम्भागीय आयुक्त, राजस्थान।
समस्त विभागाध्यक्ष, राजस्थान।
⇒समस्त जिला कलेक्टर।

विषय: राजकीय व्यय में मितव्ययता।

महोदय,

राज्य में भयंकर अकाल की स्थिति को देखते हुए शासन द्वारा राजकीय व्यय में मितव्ययता करने तथा राजकीय कार्य में सादगी अपनाने के उद्देश्य से यह परिपत्र जारी किया जा रहा है। निम्ननिर्णय तुरन्त प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेंगे –

1. किसी भी विभाग में नई नियुक्ति से पूर्व वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग की सहमति की आवश्यकता होगी।
2. समस्त विभागों में नये पदों के सृजन/क्रमोन्नयन पर प्रतिबंध रहेगा।
3. हवाई जहाज से यात्रा पर प्रतिबंध रहेगा।
4. वाहन, एयर कन्डीशनर, सैल्यूलर फोन की खरीद पर प्रतिबंध रहेगा।
5. राजकीय भोज आयोजित करने पर प्रतिबंध रहेगा।

आज्ञा से
हस्ताक्षर
(हस्ताक्षरकर्ता का नाम)
वित्त सचिव,
वित्त विभाग।

विज्ञप्ति (A COMMUNIQUE)

विज्ञप्ति शब्द से तात्पर्य है सूचित करने की क्रिया। सरकारी या गैर सरकारी प्रतिष्ठान अपने किसी निर्णय, निश्चय, घोषणा, निर्देश, योजना आदि से सम्बन्धित सूचनाओं को सम्बन्धित व्यक्तियों एवं आम जनता तक पहुँचाना चाहते हैं, उसे विज्ञप्ति कहते हैं।

यदि विज्ञप्ति की सूचना कार्यालय के कर्मचारियों तक ही पहुँचाना हो तो उसे निश्चित प्रारूप में लिखकर कार्यालय के सूचना पट्ट पर लगवा दिया जाता है किन्तु यदि विज्ञप्ति के व्यापक प्रसार की आवश्यकता हो तो उसे समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया जाता है।

⇒ जब कोई सरकारी सूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है तब तो वह अधिसूचना कहलाती है एवं जब कोई सूचना सामान्य समाचार पत्रों में प्रकाशित होती है तो वह विज्ञप्ति कहलाती है।
⇔ सरकारी विभागों/कार्यालयों के द्वारा अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए अथवा आम जनता तक कोई सूचना पहुँचाने के लिए सामान्य समाचार पत्रों के माध्यम से कोई पत्र प्रकाशित किया जाता है तो वह विज्ञप्ति पत्र कहलाता है।
⇒ यह पत्र कार्यालय के मुख्य अधिकारी की ओर से जारी किया जाता है।
⇔ यह पत्र अन्य पुरुषवाचक शैली में लिखा जाता है।

⇒ इस पत्र में सबसे ऊपर दाहिनी और प्रकाशनार्थ/प्रसारणार्थ शब्द लिखा जाता है।
⇔ विज्ञप्ति पत्र के प्रकाशन के लिए समाचार पत्र कार्यालयों को शुक्ल भी चुकाना पङता है।
⇒ विज्ञप्ति पत्र के साथ एक आवरण पत्र भी लिखा जाता है, जिसमें उस विज्ञप्ति के प्रकाशन की दिनांक, अखबार की पृष्ठ संख्या तथा आकार का उल्लेख किया जाता है।
⇔ जब कोई सरकारी सूचना शुक्ल लिए बिना ही अन्य खबरों की तरह ही अखबार में प्रकाशित कर दी जाती है तो वह प्रेस विज्ञप्ति कहलाती है।

कार्यालयः आयुक्त, राजस्थान राज्य चुनाव आयोग, जयपुर।

क्रमांक: आराचुआ/जय/2018-19/102                                                   दिनांक: 1 जुलाई, 2018

विज्ञप्ति

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि केन्द्रीय चुनाव आयोग ने मतदाता परिचय-पत्र की अनिवार्यता, इलेक्ट्रानिक मशीनों का प्रयोग, सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर न लगाने, चुनाव प्रचार हेतु ध्वनि विस्तारक यन्त्रों का प्रयोग न करने, चुनाव व्यय का हिसाब रखने आदि से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किये हैं।

अतः समस्त प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों से अपेक्षित सहयोग की आशा की जाती है कि वे उक्त सुधारों की सफल क्रियान्विति में सहयोग प्रदान करेंगे, ताकि राज्य में निष्पक्ष एवं शान्तिपूर्ण चुनाव सम्पन्न हो सकें।

हस्ताक्षर
नाम हस्तारक्षरकर्ता
मुख्य चुनाव आयुक्त,
राजस्थान राज्य चुनाव आयोग,
जयपुर।

प्रेस-विज्ञप्ति/विज्ञप्ति

⇒ कोई संस्थान या व्यक्ति किसी विषय या किसी बैठक में जो निर्णय लेता है, उसे प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सर्वसामान्य तक पहुँचाया जाता है।
⇔ इसमें निर्णय में विलम्ब के कारण एवं उससे होने वाले लाभों के बारे में भी जानकारी प्रदान की जाती है।

⇒ सामान्यतः किसी सरकारी अथवा गैर-सरकारी संस्था द्वारा अपनी विविध गतिविधियों/आयोजनों/नीतिगत निर्णयों/निश्चयों/योजनाओं आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए सामाचार-पत्रों के लिए जो संक्षिप्त एवं सारगर्भित रिपोर्ट तैयार की जाती है, तो वह प्रेस-विज्ञप्ति कहलाती है।
⇔ प्रेस विज्ञप्ति समाचार के रूप में प्रकाशित की जाती है।
⇒ समाचार पत्रों के सम्पादक इन्हें अपनी इच्छानुसार शीर्षक और स्वरूप देकर प्रकाशित करते हैं।

उदाहरण

                                                                                                प्रकाशनार्थ

कार्यालयः जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा, श्रीगंगानगर

पत्रांक:- जिशिअ/प्राशि/सी/सा/2018/106 श्रीगंगानगर,                                               दिनांक – 7 जनवरी 2018

प्रेस – विज्ञप्ति
रविवार को भी खुले रहेंगे विद्यालय

दिनांक 19 जनवरी 2018, रविवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा पल्स पोलियो टीकाकरण का अभियान रखा गया है, जिसमें 0 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों को पोलियों वेकसीन की दो बूँदे पिलाई जायेगी। अतः समस्त संस्था प्रधान (प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय) उक्त दिवस को विद्यालय खुला रखेंगे एवं अभियान में सहयोग प्रदान करेंगे।

हस्ताक्षर
जिला शिक्षा अधिकारी
प्रारम्भिक शिक्षा, श्रीगंगानगर
पत्रांक जिशिअ/प्राशि/सी/सा/2018/107-109 श्रीगंगानगर,              17 जनवरी 2018

प्रतिलिपि: प्रकाशनार्थ प्रेषित है –

1. श्रीमान सम्पादन, राजस्थान पत्रिका, श्रीगंगानगर
2. श्रीमान सम्पादन, दैनिक भास्कर, श्रीगंगानगर
3. श्रीमान सम्पादन, आस-पास, श्रीगंगानगर
4. रक्षित पत्रावली

हस्ताक्षर
जिला शिक्षा अधिकारी
प्रारम्भिक शिक्षा, श्रीगंगानगर

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अर्द्ध शासकीय पत्र

जब कोई सरकारी अधिकारी सरकारी कार्य के लिए अन्य किसी सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत नाम से अपेक्षित सूचनाओं, स्पष्टीकरण एवं सम्मति प्राप्ति के क्रम में कोई पत्र भेजता है अथवा पूछता है या ध्यानाकर्षण करता है, तो वह पत्र व्यक्तिगत पत्र शैली में लिखा होने के कारण उसे अर्द्ध शासकीय या अर्द्ध सरकारी पत्र कहते हैं।
ऐसे पत्रों में बायीं ओर प्रेषक का नाम व पद का उल्लेख होता है तथा दायीं ओर कार्यालय का पता लिखा जाता है।

पत्र क्रमांक के पूर्व अर्द्ध शासकीय शब्दों का प्रयोग किया जाता है तथा दिनांक दायीं ओर लिखी जाती है। जिसे यह पत्र लिखा जाता है उसके नाम या उपनाम के पूर्व प्रिय या प्रिय श्री सम्बोधन का प्रयोग होता है।

पत्र के अन्त में हितैषी, शुभचिन्तक या विश्वास पात्र आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है तथा नीचे उसी अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं एवं हस्ताक्षर के नीचे कोष्ठक में नाम लिखा जाता है किन्तु नाम के नीचे पद का उल्लेख नहीं किया जाता है। प्रेषिति का नाम व पता सबसे नीचे बायीं ओर लिखा जाता है।

⇒ ये पत्र बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया एवं औपचारिकता बरते सरकारी अधिकारियों द्वारा लिखे जाते हैं।
⇔ इन पत्रों का विषय तो शासकीय (सरकारी) होता है, परन्तु भाषा व्यक्तिगत पत्रों जैसी होती है।
⇒ अर्ध-सरकारी पत्र तब लिखे जाते हैं जब लिखने वाला अधिकारी संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर जानता हो।
⇔ इन पत्रों के लेखन का प्रमुख अधिकारियों की व्यक्तिगत सम्मति (राय) जानना या किसी विषय की सूचना पाना या किसी विचार विमर्श का आदान प्रदान करना माना जाता है।

⇒ इस प्रकार का पत्र उस स्थिति में भी लिखा जाता है जब किसी खास मसले पर संबंधित अधिकारी का ध्यान व्यक्तिगत रूप से आकर्षित कराया जाता है या उसका व्यक्तिगत परामर्श लिया जाता है।
⇔ यह पत्र उत्तम पुरुष शैली में मित्रतापूर्ण भाषा में लिखा जाता है।
⇒ इस पत्र के प्रारूप में शीर्ष पर बाईं ओर प्रेषक का नाम एवं पदनाम लिखा जाता है।
⇔ यह पत्र प्रायः कार्यालय के ’लेटर हेड’ पर ही लिखा जाता है, परन्तु ’लेटर हेड’ उपलब्ध न होने की स्थिति में साधारण कागज का प्रयोग भी किया जा सकता है।

⇒ इन पत्रों के प्रारम्भ में संबोधन के रूप में ’महोदय’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करके ’प्रिय श्री’ या ’प्रियवर श्री’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
⇔ पत्र के अंत में ’अधोलेख’ के रूप में दाहिनी ओर ’भवदीय’ के स्थान पर ’आपका’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।

⇒ इन पत्रों के अन्त में बाईं ओर संबंधित प्राप्तकर्ता अधिकारी का नाम, पदनाम और पूरा पता दिया जाता है।
⇔ सरकारी पत्र सामान्यतः कार्यालय लिपिक द्वारा टंकित या कम्प्यूट्राईज्ड किये जाते हैं, परन्तु अर्ध सरकारी पत्रों में निम्न भाग पत्र प्रेषक अधिकारी द्वारा अपने हाथ से लिखे जाते है:-
(। ) सम्बोधन का उपनाम
(।।) पत्र के अन्त में ’सादर/साभिवादन/आदर सहित/शुभकामनाओं सहित
(।।।) पत्र प्रेषक के हस्ताक्षर

डाॅ. रामलाल वर्मा                                                                           राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय
अधीक्षक                                                                                                                                          अजमेर।
अर्द्धशासकीय पत्र क्रमांक/राजनेचि/अज/2018-19/1511

दिनांक: 1 जुलाई, 2018

प्रिय श्री गुप्ता साहब,

जैसा कि आपको विदित है कि यह चिकित्सालय प्रथम श्रेणी का चिकित्सालय है एवं यहाँ चिकित्सा की सभी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, लेकिन बच्चों के प्रवेश एवं निदान के लिए कोई अलग से वार्ड नहीं है।
अतः परिस्थितियों एवं क्षेत्रीय माँग को दृष्टि में रखते हुए इस चिकित्सालय में 50 बेडयुक्त बच्चों के लिए एक अतिरिक्त वार्ड निर्माण की अविलम्ब आवश्यकता है।
कृपया 50 शय्याओं के एक वार्ड निर्माण हेतु अतिरिक्त अनुदान राशि की व्यवस्था करा कर इस आवश्यकता को पूरा कराने का कष्ट करें।

श्री ओ पी गुप्ता साहब                                                   आपका शुभेच्छु
निदेशक                                                                        हस्ताक्षर
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य                                                    (डाॅ. रामलाल वर्मा)
राजस्थान सरकार, जयपुर।

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