सूफी काव्य या प्रेममार्गी काव्य ट्रिक्स

माधवानल कामकंदला 1527 गणपति
माधवानल कामकंदला 1556 कुशललाभ
माधवानल कामकंदला 1584 आलम
माधवानल कामकंदला 1752 बोधा
ट्रिक सन की
*स्थाई छप्पर चोर बावळे*
स्थाई-27
छप्पर-56
चोर-84
बावळे-52

*हिंदी साहित्य चैनल*

सूफी काव्य में मसनवी शैली का प्रयोग किया गया
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आइए जाने क्या है *मसनवी शैली*

जिस रचना के प्रारंभ में ईश वंदना, पैगंबर की स्तुति एवं शाहेवक्त की प्रशंसा की जाती है वह मसनवी शैली कहलाती है इसमें 5 या 7 चौपाई के बाद दोहे का प्रयोग किया जाता है इस में गुरु वंदना करके आत्मपरिचय भी प्रस्तुत किया जाता है
मसनवी शैली में जो क्रम होता है वो ध्यान रखें

ईश वंदना
पैगम्बर की स्तुति
शाहेवक्त की प्रशंसा
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ट्रिक
पहले पहले अक्षर को देखें
*ई-पेशा*

 

*हिंदी साहित्य चैनल*

*******मधुमालती *******
ट्रिक –मधुमालती ne अव 45 baar मंज़न (मंझन ) kiya

मधुमालती –मधुमालती
अव —अवधि भाषा
45—1545 (रचनाकाल )
मंज़न –मंझन ( कवि )

👇👇👇👇
****मृगावती ****
ट्रिक -अवध ke रामचंद्र 3 मृग बन me khoje
English words सिर्फ सपोर्ट के लिये हैं

अवध –अवधि भाषा
रामचंद्र –आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने प्रथम सूफी काव्य माना l
3—1503( रचनाकाल )
मृग —–मृगावती
बन –कुतुबन

👇👇👇
*****सत्यवती कथा *****
ट्रिक —अवध में 1 nahi हजार सत्य ईश्वर ke

अवध -अवधि में रचित
1— 1501 रचनाकाल
नहीं ………
हजार —हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इसे प्रथम सूफी काव्य माना l
सत्य –सत्यवती कथा
ईश्वर —ईश्वरदास द्वारा रचित
Ke ……………

….. by….डॉक्टर मीनाक्षी दुबे

 

 

*****(

🌞 हंस (हंसावली1370)और चांद(चंदायन 1379) दोनों सफेद होते है ।
🌞 ढोल (ढोला मारू दुआ 1473) बजाओं 1सतय(सतयवती 1501)मृगावती(1503) ने बोला
🌞 माधव (माधवानंद कामलनंदा 1527) ने पद (पद्मावत1540) मधुर (मधुमालती 1545) गाये
🌞 रूप (रूपमंजरी1568)पर छिटे (छिताई वाता 1590) पडी जो चित्र(चित्रावली1613)पर दिखी

🌞 रस (रस रतन 1618) दीप(ज्ञान दीप 1619)पर गिरा और दीप इंद(इंदावती 1744) पर गिरा जिसके कारण वह बांसुरी (अनुराग बांसुरी 1764) नहीं बजा सका

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सूफ़ी रचनाएँ
1) हंसवाली, 1370 ईस्वी में कवि असाइत द्वारा राजस्थानी भाषा मे लिखी गयी।
2) चंदायन 1379 ईस्वी में मुल्ला दाऊद द्वारा अवधी में लिखी गयी।
3) सत्यवती कथा 1501 में ईश्वरदास द्वारा अवधी में लिखी गयी।
3) मृगावती 1503 में कुतुबन द्वारा अवधी में लिखी गयी।
4) माधवानल कामकंदला 1527 में गणपति द्वारा राजस्थानी में लिखी गयी।
5) पदमावत 1540 जायसी द्वारा अवधी में लिखी गयी।
6) मधुमालती 1545 में मंझन द्वारा अवधी में लिखी गयी।
7) रूपमंजरी 1568 में नंददास ब्रजभाषा में लिखी गयी।
8) चित्रावली 1613 में उस्मान द्वारा अवधी में लिखी गयी।
9) ज्ञानदीप 1619 में शेख नबी द्वारा अवधी में लिखी गयी।
9) हंस जवाहिर 1731 में कासिम शाह द्वारा अवधी में लिखी गयी।
10) इंद्रावती 1744 में नूर मुहम्मद द्वारा अवधी में लिखी गयी।
11) अनुराग बांसुरी 1764 में नूर मुहम्मद द्वारा अवधी में लिखी गयी।

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