कृष्ण चंदर का जीवन परिचय, उपन्यास और रचनाएँ | Krishan Chander Jivan Parichay

अंतिम संशोधित (Last Updated): August 31, 2026

उर्दू और हिंदी के प्रख्यात कथाकार कृष्ण चंदर का जीवन परिचय और रचनाएँ (Krishan Chander ka Jivan Parichay)

हिंदी और उर्दू साहित्य के प्रगतिशील लेखक, अनूठे व्यंग्यकार और मानवीय संवेदनाओं के चितेरे कृष्ण चंदर (Krishan Chander) का आधुनिक कथा-साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, RPSC, TGT, PGT, कॉलेज लेक्चरर और हिंदी साहित्य से जुड़ी अन्य परीक्षाओं) की दृष्टि से कृष्ण चंदर का जीवन परिचय, उनके उपन्यास, कहानियाँ और साहित्यिक विशेषताएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस आलेख में हम उनके संपूर्ण जीवन और कृतित्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

📌 कृष्ण चंदर का संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)

  • जन्म: 23 नवंबर, 1914 ई. (वजीराबाद, पाकिस्तान)

  • देहांत: 8 मार्च, 1977 ई. (मुंबई)

  • पिता का नाम: बलदेव सिंह

  • पत्नी: सलमा सिद्दीकी

  • सम्मान: इन्हें वर्ष 1961 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

  • साहित्यिक रुझान: मंटो के समकालीन इनके लेखन की शुरुआत रोमानी प्रवृत्ति के साथ हुई थी, लेकिन जल्द ही यह प्रगतिशील विचारधारा और साम्यवादी लेखक बन गए। प्रेमचंद व रवींद्रनाथ टैगोर के बाद कृष्ण चंदर तीसरे ऐसे भारतीय लेखक हैं, जिनकी कहानियों का विदेशी भाषाओं में जमकर अनुवाद हुआ।

👨‍👩‍👦 जीवन और व्यक्तित्व से जुड़े रोचक तथ्य

  • साम्यवादी बनने की पृष्ठभूमि: बचपन में एक बार राजकुमारों से इनकी बहस हो गई थी, तब इनके पिता ने कहा था, “कि हमारी हर चीज़ पर इन्हीं का अधिकार है।” इसी घटना के कारण कृष्ण चंदर साम्यवादी लेखक बने।

  • बचपन का संस्मरण: स्कूल के दिनों में शिक्षक पर व्यंग्य लिखकर इन्होंने शिक्षक व पिता से बहुत मार खाई थी और कसम खाई थी कि आगे से वह कुछ नहीं लिखेंगे, किंतु वह खुद को रोक न सके।

  • नौकरी: पढ़ाई पूरी करने के बाद इनकी नौकरी आकाशवाणी में लगी, लेकिन जल्द ही इन्होंने वह नौकरी छोड़ दी।

  • लेखन की शुरुआत: इनका सफर “जेहलम पर नाँव” से शुरू होता है और 1930 मई में इनका प्रथम कहानी संग्रह “नजारे” प्रकाशित हुआ। ‘शिकस्त’ इनका अत्यंत प्रसिद्ध उपन्यास रहा।

  • कहानी लेखन पर विचार: जब कृष्ण चंदर से पूछा गया कि बच्चे दादी-नानी से रात में कहानियाँ क्यों सुनते हैं, तब उन्होंने कहा था, “रात के डर के कारण” पर उन्होंने यह नहीं लिखा कि लिखने वाले किस डर से लिखते हैं।

📚 कृष्ण चंदर की प्रमुख रचनाएँ (Krishan Chander Rachnaye)

1. उपन्यास (Novels)

कृष्ण चंदर ने कई चर्चित उपन्यासों की रचना की है, जिनमें उनके व्यंग्यात्मक और सामाजिक उपन्यास बहुत प्रसिद्ध हैं:

  1. एक गधे की आत्मकथा

  2. एक वायलिन समुंदर के किनारे

  3. एक गधा नेफा में

  4. तूफान की कलियाँ

  5. कार्निवाल

  6. एक गधे की वापसी

  7. गद्दार

  8. सपनों का कैदी

  9. सफेद फूल

  10. यादों के चिनार

  11. मिट्टी के सनम

  12. रेत का महल

  13. कागज की नांव

2. कहानियाँ (Stories)

कृष्ण चंदर की सभी कहानियाँ मुख्य रूप से शोषक और शोषित वर्ग को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं। उनकी प्रमुख कहानियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. जामुन का पेड़(यह इनकी एक अत्यंत प्रसिद्ध कहानी है, जो सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली और लालफीताशाही पर करारा व्यंग्य करती है।)

  2. जिंदगी के मोड़ पर

  3. अन्नदाता

  4. तीन गुंडे

  5. समुंदर दूर है

  6. हम वहशी है

  7. अजंता से आगे

  8. मैं इंतजार करूंगा

  9. किताब का कफन

  10. तिलिस्म ख्याल

  11. अजनबी आँखें

  12. 100 रुपए

  13. शहजादा

  14. ममता

 

  • 🔗 हिंदी साहित्य के 10 चर्चित लेखक और कवि

    क्र.सं.लेखक / कवि का नाममुख्य विशेषता / कालइंटरनल लिंक (URL)
    1.भारतेंदु हरिश्चंद्रआधुनिक हिंदी गद्य के जनक / भारतेंदु युगलिंक देखें
    2.महावीर प्रसाद द्विवेदीद्विवेदी युग के मार्गदर्शक और निबंधकारलिंक देखें
    3.जयशंकर प्रसादछायावाद के प्रमुख स्तंभ और नाटककारलिंक देखें
    4.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’छायावाद के मुक्तछंद के प्रणेतालिंक देखें
    5.सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि / छायावादलिंक देखें
    6.महादेवी वर्माआधुनिक मीरा / छायावाद की प्रमुख कवयित्रीलिंक देखें
    7.प्रेमचंद (धनपत राय)उपन्यास सम्राट / कथा साहित्य के शिखर पुरुषलिंक देखें
    8.अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तकलिंक देखें
    9.रामधारी सिंह ‘दिनकर’राष्ट्रकवि / ओज और विद्रोह के कविलिंक देखें
    10.कृष्णा सोबतीआधुनिक कथा साहित्य और स्त्री-विमर्श की सशक्त हस्ताक्षरलिंक देखें

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